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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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औद्योगिकरण का अर्थ

औद्योगिकरण  का अर्थ
 औद्योगिकरण का अर्थ  सामान्य शब्दों में लोगो को की स्थापना को  औद्योगिकरण  कहते हैं जब नए-नए उद्योग की स्थापना होती है जब लोगो को की श्रृंखला की है व्यापक प्रक्रिया औद्योगिकरण कहलाता है उद्योग एक प्रकार की आर्थिक क्रिया है इसका तात्पर्य विज्ञान एवं तकनीकी की सहायता से वस्तु में नवीन उपयोगिताओं का निर्माण करना है अतः विनिर्माण उद्योग को की स्थापना को औद्योगिकरण कहा जाता है परंतु यह है संकुचित अर्थ... Read More
 औद्योगिकरण का अर्थ  सामान्य शब्दों में लोगो को की स्थापना को  औद्योगिकरण  कहते हैं जब नए-नए उद्योग की स्थापना होती है जब लोगो को की श्रृंखला की है व्यापक प्रक्रिया औद्योगिकरण कहलाता है उद्योग एक प्रकार की आर्थिक क्रिया है इसका तात्पर्य विज्ञान एवं तकनीकी की सहायता से वस्तु में नवीन उपयोगिताओं का निर्माण करना है अतः विनिर्माण उद्योग को की स्थापना को औद्योगिकरण कहा जाता है परंतु यह है संकुचित अर्थ है औद्योगीकरण वह समूची प्रक्रिया है जिसके द्वारा देश की संपूर्ण आर्थिक संरचना में परिवर्तन किया जा सकते हैं किसी भी देश का आर्थिक विकास तभी संभव है जब उसका औद्योगिक विकास किया जाता है यह सत्य है कि औद्योगिक विकास के बिना आर्थिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती   धन्यवाद✍️
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[email protected] 28 Jun 2026 33 Views

ओजोन परत की क्षीणता

ओजोन परत की क्षीणता
 ओजोन व्रत की क्षेण ता   ओजोन परत को पृथ्वी का  छाता या रक्षा कवच कहते हैं ओजोन परत समताप मंडल में पृथ्वी से लगभग 12 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपस्थिति रहती है आदर्श रूप में ओजोन परत की मोटाई निश्चित तप वायदा पर निश्चित होती है तथा मौसम में परिवर्तन के कारण बदलती रहती है बसंत रितु फरवरी- अप्रैल मैं सबसे ज्यादा एवं वर्षा ऋतु जुलाई से अक्टूबर में सबसे कम रहती है ओजोन पर सूर्य विकिरण की पराबैंगनी कि... Read More
 ओजोन व्रत की क्षेण ता   ओजोन परत को पृथ्वी का  छाता या रक्षा कवच कहते हैं ओजोन परत समताप मंडल में पृथ्वी से लगभग 12 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपस्थिति रहती है आदर्श रूप में ओजोन परत की मोटाई निश्चित तप वायदा पर निश्चित होती है तथा मौसम में परिवर्तन के कारण बदलती रहती है बसंत रितु फरवरी- अप्रैल मैं सबसे ज्यादा एवं वर्षा ऋतु जुलाई से अक्टूबर में सबसे कम रहती है ओजोन पर सूर्य विकिरण की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है पराबैंगनी करने जीवन के लिए अनेकों तरह से हानिकारक होती है पराबैंगनी किरणों से त्वचा का कैंसर मोतियाबिंद जैसे विभिन्न लोगों में बढ़ोतरी होती है तथा उत्परिवर्तन प्रतिरोधक क्षमता में कमी होती है धन्यवाद✍️
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[email protected] 26 Jun 2026 40 Views

ग्रीन हाउस प्रभाव

ग्रीन हाउस प्रभाव
 ग्रीन हाउस प्रभाव   पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित कुछ गैसें पृथ्वी के चारों ओर एक आवरण तैयार करती है जो सूर्य से आने वाली करने के लिए तो पार्क में है लेकिन पृथ्वी से होने वाले तप विकिरण के लिए अप्रगाम में है इन गैसों का प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है इन गैसों में मुख्यतः मीथेन गैस वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 प्रमुख है जो वायुमंडल का 1% से भी काम हिस्सा है वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस की उपस्थि... Read More
 ग्रीन हाउस प्रभाव   पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित कुछ गैसें पृथ्वी के चारों ओर एक आवरण तैयार करती है जो सूर्य से आने वाली करने के लिए तो पार्क में है लेकिन पृथ्वी से होने वाले तप विकिरण के लिए अप्रगाम में है इन गैसों का प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है इन गैसों में मुख्यतः मीथेन गैस वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 प्रमुख है जो वायुमंडल का 1% से भी काम हिस्सा है वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस की उपस्थिति पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाती है पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिक अनुसंधान से यह सिद्ध हुआ है कि जहां इन गैसों की वायुमंडल में उपस्थित नगरनिय है वहीं उनकी बढ़ती मात्रा के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि भी हुई है ऐसा अनुमान है कि वर्ष 1807 से पृथ्वी का तापमान 4 डिग्री सैलरी बढ़ा है तथा अनुमान है कि अगले 25 वर्षों तक यह बढ़ोतरी 5 डिग्री तक हो सकती है  पृथ्वी के बढ़ते तापमान का प्रभाव पर्यावरण पर स्पष्ट दृष्टिगोचक होने लगा है अध्ययन बताते हैं कि गंगोत्री ग्लेशियर प्रतिवर्ष लगभग 1 मीटर पीछे जा रहा है इसी प्रकार समुद्रीय टेट लाखों के जल मग्न होने का संकट बढ़ता जा रहा है  भारत विश्व के उन प्रमुख 10 देश में शामिल है जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं इन गैसों का उत्सर्जन प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों कर्म से होता है खनिज ईंधन का अधिक प्रयोग वनों की कटाई खेती बाड़ी के बढ़ते प्रतिमान कुछ प्रमुख कारण है जिसमें ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रोटोकालोन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं हालांकि बढ़ते औद्योगीकरण के कारण यह उपाय कितने कराकर सिद्ध होंगे इसका उत्तर अभी कल के गर्भ में है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 25 Jun 2026 59 Views

क्यों आते हैं मानसून

क्यों आते हैं मानसून
 क्यों आता है मानसून   बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है  ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चल... Read More
 क्यों आता है मानसून   बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है  ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है दर्शन मानसून एक प्रकार की पढ़ते हैं जो हिंद महासागर से चलकर भारत के तटीय क्षेत्रों में पहुंचती है क्योंकि यह पढ़ने कम होती है इसलिए जब यह समुद्र के ऊपर से चलती है तो भारी मात्रा में जलवाष्प को रोक लेती है इसकी एक धारा अरब सागर होती हुई पश्चिमी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जबकि दूसरी धारा बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करके पूर्वी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जब यह मानसून पकाने रास्ते में किसी पहाड़ से टकराती है तो यह वर्ष के रूप में बरस जाती है भारत के टट्टी इलाकों में मानसून जून के पहले सप्ताह हुए आ जाता है जबकि अन्य क्षेत्रों में है जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई तक ही आ  पाता है  भारत में दो प्रकार की मानसून पढ़ने प्रभावित है अरब सागर के मानसून पढ़ने और बंगाल की खाड़ी की मानसून पढ़ने पहले धारा के कारण समूचे महाराष्ट्र गुजरात केवल व तमिलनाडु में वर्षा होती है तो दूसरी शाखा के कारण से समूचे भारत में खूब बारिश होती है दिल्ली में दोनों की शाखाएं बारिश के लिए जिम्मेदार है भारत में सबसे अधिक वर्षा मेघालय के मोहसिन राम में होती है यहां पर 12 21 सेमी वार्षिक वर्षा रिकार्ड की गई है इससे पहले चेरापूंजी में 1102 सेमी वर्षा को सर्वाधिक माना जाता था मानसिंह राम चेरापूंजी के पश्चिम में लगभग 16 किमी दूर है   मानसून के कारण कोलकाता में 119 सेमी पटना में 105 सेमी इलाहाबाद में क्षेत्र सेमी और दिल्ली में 56 सेमी वर्षा होती है भारत का पूर्वी तट विशेष रूप से तमिलनाडु तक दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण वर्ष प्राप्त नहीं करता है सितंबर के दूसरे सप्ताह तक दक्षिण पश्चिम मानसून उत्तरी भारत से लोग ने लगता है मानसून के लौट के साथ ही निम्नलिखित परिवर्तित होते हैं  बादल खत्म हो जाते हैं  आकाश स्वच्छ हो जाता है  दिन का तापमान कुछ बढ़ जाता है  राकेश सुखद वह सुहावनी हो जाती है  दैनिक तापांतर अधिक हो जाता है  भारत में सबसे अधिक बारिश पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग उत्तर पूर्व में अप हिमालय क्षेत्र और मेघालय की पहाड़ियों पर होती है परिधि पर भारत में केवल 60 सेमी वर्षा ही होती है भारत में सबसे कम वर्षा पश्चिमी राजस्थान के किनारे और पश्चिमी घाट के पूर्वी किनारे पर होती है भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए हमारे लिए मानसून वेद महत्वपूर्ण होता है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 23 Jun 2026 37 Views

ज्वार भाटे क्यों आते हैं

 ज्वार भाटे क्यों आते हैं  आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीचे उतरने को... Read More
 ज्वार भाटे क्यों आते हैं  आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीचे उतरने को भाटा कहते हैं  ज्वार भाटी की उत्पत्ति का कारण चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति है गुरुत्वाकर्षण द्वारा संपूर्ण पृथ्वी सूर्य तथा पृथ्वी की ओर खींचती है इसका प्रभाव स्थल की अपेक्षा जल पर अधिक होता है ज्वार भाटे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं  उच्च ज्वार भाटा  निम्न ज्वार भाटा  ब्रहत ज्वार भाटा   लघु ज्वार भाटा  ज्वार भाटे हमारे लिए बेहद कम की चीज है जिन बंदरगाहों पर जल काम होता है वहां ज्वार के कारण ही जहाज बंदरगाह तक पहुंच पाते हैं यहां से जहाज भाटे के साथ वापस गहरे समुद्र में आ जाता है मछली पकड़ने वाले नाविक ज्वार के साथ खुले समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं और बातें के साथ सुरक्षित तट पर लौट आते हैं ज्वार भाटे की वापसी लहरें समुद्री तट पर बसे नगरों की सारी गंदगी को बहाकर ले जाती है ज्वार भाटी के कारण समुद्री जल गतिशील रहता है जिससे वह हमेशा साफ बना रहता है  आजकल तो ज्वार भाटे से बिजली भी पैदा की जाती है उसे ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं फ्रांस तथा जापान में जो आर्य ऊर्जा का काफी प्रयोग किया जाता है आजकल भारत में भी ज्वारीय ऊर्जा पैदा करने के प्रयास किया जा रहे हैं गंगा डेल्टा के सुंदरवन से जो ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त की जाने लगी है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 22 Jun 2026 36 Views

हिमपात क्यों होता है

हिमपात क्यों होता है
 हिमपात क्यों होता है  क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है  हम जानते हैं... Read More
 हिमपात क्यों होता है  क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है  हम जानते हैं कि पृथ्वी के धरातल से लगातार वापसी कारण होता रहता है जिससे बादल बन जाते हैं यह बदल ही वर्ष के रूप में बरसते हैं बादल बनने के समय जलवाष्प का संगठन जब हिमांक से भी कम ताप पर होता है तो वह तरल अवस्था बूंद में आए बिना सीधे ही ठोस अवस्था में बदल जाता है इसे इन कहते हैं शुरुआत में यह हम महीन कणों के रूप में होती है लेकिन बाद में इनका आकार बड़ा होने लगता है जब कानों का आकार बड़ा हो जाता है तो यह कान बोतल पर धोनी हुई हुई की भांति गिरने लगती है जिस कारण बर्फ की एक चादर सी बीच जाती है   कई बार हिमपात के साथ वर्षों की बूंदे भी गिरती है इसे सहीम दृष्टि कहते हैं यह वर्ष की बूंद के हमने या हम कानों के पिघलने जल के पूर्ण है हमने से होता है वास्तव में यह जलवृष्टि और हम वृष्टि का मिश्रण होता है सहीम वृष्टि ऐसी ही दृष्टि को भी कहा जाता है जिसमें हम के कुछ रवि पिंगला होते हैं जब बोतल के पास वाली वायु का तापमान ही मांग से ऊंचा होता है तो सही दृष्टि होती है जब बर्फ की कड़ी बड़ी गलियों की बौछार होती है तो इसे ओलावृष्टि कहते हैं आमतौर पर बरसात के दौरान ही  ही ओले पड़ते हैं धन्यवाद
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[email protected] 21 Jun 2026 37 Views

कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं

कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं
 कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-  क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है   आस और कुहरा... Read More
 कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-  क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है   आस और कुहरा क्यों बनते हैं यह समझने के लिए पहले हमें संगठन की प्रक्रिया समझनी होगी जल की गैसीय अवस्था के तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की क्रिया को संगठन कहते हैं आधार वायु के ठंडा होने पर संगठन होता है   दिन के समय पृथ्वी गर्म हो जाती है और रात्रि के समय यह ठंडी हो जाती है कभी-कभी पृथ्वी का ताल इतना अधिक ठंडा हो जाता है कि उसे छूने वाली वायु का तापमान पोशाक से नीचे गिर जाता है इससे वायु में उपस्थित जलवाष्प का संगठन हो जाता है और वह छोटी-छोटी बूंद के रूप में पौधे की पत्तियां और अन्य वस्तुओं पर जम जाता है इसी को उसे कहते हैं   अब बात कोहरा की वायुमंडल की निचली परत में स्त्री धुलकंद हुए के कारण तथा संगीत सुषमा जल पिंडों को कुहरा कहते हैं वायु का तापमान पोषण से भी नीचे होने पर कोहरे का निर्माण होता है विकिरण सब वहां तथा कर्म व ठंडी वायु के मिलने से वायु उसे सीमा तक ठंडी हो जाती है कि कोहरे का निर्माण हो सके इसमें केवल एक किलोमीटर की दूरी तक ही हम देख सकते हैं कोहरे का हल्का रूप ढूंढ कहलाता है ढूंढ के समय दक्षता एक कमी से दो किमी तक हो सकती है ढूंढ सहयोगरिया एवं सूर्यास्त के समय नदियों तालाबों जिलों और सागर के किनारे बनती है  धन्यवाद
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[email protected] 20 Jun 2026 38 Views

पवन क्यों चलती है

पवन क्यों चलती है
 पवन क्यों चलती है  ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाली वायु को... Read More
 पवन क्यों चलती है  ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाली वायु को पवन कहते हैं  पवन धरातल पर वायुदाब में 33 विषमताओं के कारण चलती है जिस प्रकार से जल उच्च स्थान से निम्न स्थान की ओर बहता है ठीक उसी प्रकार से पवन भी उच्च वायु भर वाले क्षेत्र से निम्न वायु भर वाले क्षेत्र की ओर चलती है कहा जा सकता है कि पवन वायुदाब की विषमताओं को संतुलित करने में प्रकृति के प्रयास को दर्शाती है यदि पृथ्वी स्थिर होती है और उसका धरातल समतल होता है तो पवन उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से सीधे निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की और संताप रेखाओं पर समकोण बनाती हुई चलती है   क्योंकि पृथ्वी का धरातल समतल नहीं होता है और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती रहती है इसलिए पवन कहीं शक्तियों के प्रभाव से चलती है पवन की गति और दिशा को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं  दाब प्रवणता बाल   करी और लिस्ट प्रभाव  अभिकेंद्रीय त्वरण  भू घर्षण   कुछ पढ़ने धीमी गति से चलती है तो कुछ पढ़ने इतनी तेजी गति से चलती है कि अपने रास्ते में आने वाली प्रत्येक चीज को तहस-नहस कर देती है कुछ पढ़ने पश्चिम दिशा से चलती है तो कुछ पूर्व की दिशा से  धन्यवाद
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[email protected] 19 Jun 2026 41 Views

धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं

धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं
 धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं  हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार... Read More
 धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं  हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार का होगा यह कोशिका के प्रमोशन पर उपस्थित जींस ही तय करते हैं इसके अलावा हमारी त्वचा की गहराई में उपस्थित मेलानिन नमक पिगमेंट वर्णन के कारण भी हमारा रंग काला पड़ जाता है सूर्य की तेज धूप से हमारी त्वचा को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है इसलिए तेज धूप से बचाने को त्वचा में मेलेनिन नामक एक पिगमेंट पाया जाता है यह पिगमेंट काले रंग का होता है जब हम लंबे समय तक धूप में काम करते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन शुरू हो जाता है मेलानिन के असर से हमारी त्वचा का रंग काला पड़ जाता है इसके विपरीत जब हम काफी समय तक धूप में नहीं निकलते हैं अधिकतर घर के भीतर ही रहते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन नहीं होता और हमारी त्वचा गोरी दिखाई देती है  यही कारण है कि कल होने से बचने के लिए हम धूप में छाते का प्रयोग करते हैं पृथ्वी पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पूरे दिन तेज धूप बनी रहती है ऐसे क्षेत्रों में लोग काले रंग के होते हैं इसके विपरीत कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहां दिन की अवधि बहुत कम होती है और तेज धूप के स्थान पर हमेशा सुहावना मौसम बना रहता है ऐसे क्षेत्र के निवासी गोरे रंग के होते हैं यही कारण है कि अफ्रीका के लोग बिल्कुल काले रंग के होते हैं जबकि इंग्लैंड के लोग गोरे होते हैं अब तो आप समझ गए होंगे कि मेलानिन नमक पिगमेंट के कारण हम कल या गोरे होते हैं  धन्यवाद
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[email protected] 18 Jun 2026 65 Views

ऐसे बना वायुमण्डल

ऐसे बना वायुमण्डल
 ऐसे बना वायुमंडल  पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे?  पृथ्वी का वर्तमान वायुमंडल पा... Read More
 ऐसे बना वायुमंडल  पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे?  पृथ्वी का वर्तमान वायुमंडल पांच अरब साल पहले ठंडे करो मुख्य रूप से लोहे एवं मैग्नीशियम सिलिकेट लोगे एवं ग्रेफाइट की अभिवृत्ति द्वारा शुरू हुए बहुत धीमी परिवर्तनों का परिणाम है उसे समय पृथ्वी इतनी छोटी थी कि यह वायुमंडल को अपने आप से जोड़कर नहीं रख सकती गुरुत्वाकर्षण विखंडन तथा रेडियम प्रीति के कारण पृथ्वी गर्म हुई और इससे पृथ्वी के पदार्थ में भिन्नता है परिणाम स्वरुप एक नए वायुमंडल और जलमंडल की रचना हुई इस प्रकार बना वायुमंडल ऑक्सीजन से वंचित था परंतु इसमें निम्नलिखित पदार्थ मौजूद थे  मीथेन   अमोनिया  कार्बन डाइऑक्साइड  जल वाष्प  वायुमंडल कई गैसों का मिश्रण होता है गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प और धूल के कारण भी उपस्थित होते हैं अधिक मात्रा में उपस्थित ठोस एवं धर्म कानों को सामूहिक रूप से असोसॉल कहते हैं धरातल से लगभग 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक इसमें नाइट्रोजन ऑक्सीजन वह अंग एक समान होती है इनके अतिरिक्त इसमें नियम क्रिप्टन अप जुनून जैसी दुर्बल कैसे भी होती है वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है   वायुमंडल में कुछ मात्रा जल वाष्प की भी होती है जो हमारी जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करती है वायुमंडल में जलवाष्प की औसत मात्रा लगभग दो प्रतिशत होती है और चाय के साथ जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है जलवायु सूर्य से आने वाली उसका के कुछ भाग को अवशोषित कर लेता है तथा पृथ्वी द्वारा विकृत उसका को सजा रखती है इस प्रकार यह एक कंबल का काम करती है इससे धरातल ना ज्यादा गर्म हो पता है और ना ज्यादा ठंडा पृथ्वी की धरातल से लेकर ऊपर तक वायुमंडल एक समान नहीं होता है घनत्व तापमान और गैसों के संगठन के आधार पर वायुमंडल  की सबसे निचली परत सौरमंडल कहलाती है यह लगभग 16 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला रहता है वायुमंडल के इसी भाग में बादल बनते हैं वर्षा होती है और मौसम संबंधित घटनाएं होती है इस प्रकार हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यही सौरमंडल होता है समताप मंडल के ओजोन गैस की मात्रा पाई जाती है हम जानते हैं कि सूर्य करने के अत्यंत खतरनाक पराबैंगनी करने भी होती है समताप मंडल में उपस्थित ओजोन गैस इस खतरनाक पराबैंगनी किरणों को शक लेती है जिस कारण हम पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से बच्चे रहते हैं रेडियो तरंगे परावर्तित होकर आयन मंडल से ही वापस लौटी है वायुमंडल की सबसे बाहरी परत को एक जो स्फीयर कहा जाता है वायुमंडल हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है वायुमंडल हमारी पृथ्वी पर जीवन का आधार है वायुमंडल के बिना हम पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते पूरे सौरमंडल में केवल पृथ्वी पर ही जीवन पाया जाता है और यह सब संभव है सिर्फ वायुमंडल के करण  मौसम तथा जलवायु संबंधित सभी घटनाएं भी वायुमंडल में ही घटती है कहा जा सकता है कि दुनिया के विभिन्न भागों में मिलने वाले अलग-अलग तरह की जलवायु वायुमंडल की ही देन है वायुमंडल हमारे लिए एक आवरण का भी काम करता है जो हमें सूर्य की घातक पराबैंगनी किरणों और तेज तप से भी बचाता है वास्तव में यह वायुमंडल हमारे लिए बहुत काम की चीज है धन्यवाद
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[email protected] 17 Jun 2026 63 Views