धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं

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धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं

 धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं

 हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार का होगा यह कोशिका के प्रमोशन पर उपस्थित जींस ही तय करते हैं इसके अलावा हमारी त्वचा की गहराई में उपस्थित मेलानिन नमक पिगमेंट वर्णन के कारण भी हमारा रंग काला पड़ जाता है सूर्य की तेज धूप से हमारी त्वचा को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है इसलिए तेज धूप से बचाने को त्वचा में मेलेनिन नामक एक पिगमेंट पाया जाता है यह पिगमेंट काले रंग का होता है जब हम लंबे समय तक धूप में काम करते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन शुरू हो जाता है मेलानिन के असर से हमारी त्वचा का रंग काला पड़ जाता है इसके विपरीत जब हम काफी समय तक धूप में नहीं निकलते हैं अधिकतर घर के भीतर ही रहते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन नहीं होता और हमारी त्वचा गोरी दिखाई देती है

 यही कारण है कि कल होने से बचने के लिए हम धूप में छाते का प्रयोग करते हैं पृथ्वी पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पूरे दिन तेज धूप बनी रहती है ऐसे क्षेत्रों में लोग काले रंग के होते हैं इसके विपरीत कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहां दिन की अवधि बहुत कम होती है और तेज धूप के स्थान पर हमेशा सुहावना मौसम बना रहता है ऐसे क्षेत्र के निवासी गोरे रंग के होते हैं यही कारण है कि अफ्रीका के लोग बिल्कुल काले रंग के होते हैं जबकि इंग्लैंड के लोग गोरे होते हैं अब तो आप समझ गए होंगे कि मेलानिन नमक पिगमेंट के कारण हम कल या गोरे होते हैं

 धन्यवाद

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