
"मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है " हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा ज...
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"मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है "
हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा जी ने अपनी प्रतिभा और लगन से उसे युग में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था
मिश्रा जी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही इनके ज्योतिषी पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र कानपुर आकर सह परिवार रहने लगे यहीं पर उनकी शिक्षा दीक्षा हुई पिता इन्हें ज्योतिष पढ़कर अपने प्रत्येक व्यवसाय में ही लगाना चाहते थे परंतु इनका मनमौजी स्वभाव उसमें नहीं राम इन्होंने कुछ समय तक अंग्रेजी स्कूल में भी शिक्षा प्राप्त की किंतु कोई भी अनुशासन और निष्ठा का कार्य जिसमें विषय की निराशता के साथ प्रति घंटा भी आवश्यक होती उनके मोची और फक्कड़ स्वभाव के विपरीत था बताइए यहां भी पढ़ ना सके घर में स्वाध्याय से ही इन्होंने संस्कृत उर्दू फारसी अंग्रेजी और बांग्ला पर अच्छा अधिकार प्राप्त कर लिया
मिश्रा जी के साहित्यिक जीवन का प्रारंभ बाद ही दिलचस्प रहा कानपुर उन दिनों लावनी बाजू का केंद्र था और मिश्र जी को लावणी अत्यंत प्रिय थी लावणी बड़ो के संपर्क में आकर इन्होने लावण्या और ख्याल लिखना आरंभ किया यही से उनके कवि और लेखक जीवन का प्रारंभ हुआ
मिश्रा जी साहित्यकार होने के साथ हिसार सामाजिक जीवन से भी जुड़े थे सामाजिक राजनीतिक धार्मिक संस्थाओं से इनका निकट का संपर्क था और देश में जो नव जागरण की लहर आ रही थी इसके प्रति यह संचित है वास्तव में नवजागरण का संदेश ही जनजीवन तक पहुंचने के लिए इन्होंने साहित्य सेवा का व्रत लिया और ब्राह्मण प्रतीक का आजीवन संपादन करते रहे
मिश्रा जी विपुल प्रतिभा और विविध रुचियां के धनी थे कानपुर में इन्होंने नाटक सभा नमक की एक संस्था बनाई थी उनके माध्यम से यह पारसी थिएटर के सामान्य अंतर हिंदी का अपना रंग मैच खड़ा करना चाहते थे यह स्वयं भी भारतेंदु की भांति कुशल अभिनय करते थे
मिश्रा जी भारतेंदु के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थे तथा उन्हें अपना गुरु और आदर्श मानते थे यह वाक्य दुग्ध के धनी थे और अपनी हाजिर जवाब भी है विनती स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे बहुमुखी प्रतिभा के धनी मिश्रा जी का 38 वर्ष की अल्प आयु में सन 1894 में कानपुर में निधन हो गया
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प्रस्तावना "गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके" प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृ...
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प्रस्तावना
"गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके"
प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृह कार्य में परिवार के प्रत्येक सदस्य का सुविधा कर सहयोग भी ले जिन घरों में सभी छोटे-बड़े कार्य ग्रैनी ही करती है वहां गृहणी का शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और परिणाम स्वरुप घर का वातावरण भी कल युक्त बन जाता है अतः ग्रहणी को अपनी शांति है वह बुद्धिमानी से कार्य को व्यवस्थित ढंग से करना चाहिए
गृह कार्य व्यवस्था का अर्थ -
किसी भी कार्य को योजना प्रबंधन से करने की क्रिया को व्यवस्था कहते हैं ऐसा करने से प्रत्येक कार्य सरलता से हो जाता है तथा संवेदन और श्रम की बचत भी होती है गृह कार्य व्यवस्था से तात्पर्य है कि घर के सभी कार्यों को इस ढंग से व्यवस्थित करके एवं क्रमानुसार करना कि जिस घर के सभी कार्य ठीक समय पर संबंध हो जाए साथ ही ग्रहणी के समय और शक्ति को बचत हो घर व्यवस्थित और परिवार सुखी रहे वह घर का वातावरण शांत रहे
गृह कार्य व्यवस्था की परिभाषा-
"गृह कार्य व्यवस्था के अर्थ से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व श्रम की बचत हो सके "
गृह कार्य व्यवस्था करते समय निम्नलिखित तत्वों पर ध्यान दिया जाता है-
1. सर्वप्रथम घर के सांसद कार्यों की एक योजना बनाई चाहिए
2.योजना के अनुसार कार्य को किया जाना चाहिए
3. कार्य प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए
4. कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार करना चाहिए
5.परिवार के संसद सदस्यों को उसकी आयु योग्यता एवं क्षमता के अनुसार कार्य सपना चाहिए
उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि घर के विभिन्न कार्यों को करने की ऐसी व्यवस्था करना कि सभी ग्रह कार्य नियमित रूप से तथा सहजता से हो जाए कार्य व्यवस्था करना कहलाता है
कार्य व्यवस्था की सफलता ग्रहणी की बुद्धिमानी और कुशलता पर निर्भर करती है
गृह कार्यों का वर्गीकरण-
दैनिक कार्य- दैनिक कार्यों में वे सभी कार्य आते हैं जो ग्रहणी द्वारा प्रतिदिन किए जाते हैं उदाहरण के लिए प्रतिदिन नाश्ता बनाना भोजन बनाना घर की सफाई कपड़े धोना बर्तन साफ करना बच्चों को तैयार करना खरीदी तारी करना विश्राम तथा मनोरंजन के लिए समय निकालना आदि कार्य सम्मिलित है एक कुशल ग्रहणी अपने घर के इन सभी कार्यों को योजना बंद करके बड़ी से निपटा सकती है
साप्ताहिक कार्य- कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें प्रतिदिन नहीं किया जा सकता अतः सप्ताह में एक दिन इन कार्यों के लिए निर्धारित किया जाता है अधिकतर घरों में यह कार्य रविवार के दिन किए जाते हैं इसका मुख्य कारण यह होता है कि उसे दिन परिवार के सभी सदस्यों की छुट्टी होती है तो सभी से सहायता ली जा सकती है साप्ताहिक कार्यों के अंतर्गत पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना चादर बदलना ढूंढने के लिए कपड़े देना रसोई की अच्छी तरह सफाई करना बच्चों के साथ कुछ समय व्यतीत करना बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाना अधिकारी आते हैं
मानसिक कार्य - कुछ कार्य महीने भर में एक बार किए जाते हैं जैसे बाजार से महीने भर की खाक सामग्री लाना उन्हें टीपू में भरकर सो व्यवस्थित करना बच्चों की फीस जमा करना महेरी धोबी दूध अखबार का बिल टेलीफोन का बिल बिजली का बिल गैस सिलेंडर भरवाना घर के व्यर्थ सामान को निकलवाना वह भेजना आदि आवश्यक कार्य मानसिक कार्य के अंतर्गत आते हैं
वार्षिक कार्य- यह कार्य वर्ष में एक बार किए जाते हैं यह कार्य अधिकतर वर्षा ऋतु की समाप्ति के पश्चात किए जाते हैं इन कार्यों के अंतर्गत घर की टूट-फूट की मरम्मत घर की पुताई तथा रंग रोगन अनु उपयोगी वस्तुओं को घर से बाहर करना फर्नीचर और दरवाजों पर पेंट करवाना वार्षिक टैक्स जमा करना सालभर का अनाज व तेल खरीदना पापड़ चिप्स अचार मुरब्बा चटनी आदि तैयार करना आता है
सामयीक कार्य- कुछ कार्य समय-समय पर करने पड़ते हैं जैसे स्वेटर बनाना अचार डालना उन्हें वेस्टन को साफ करके रखना भारी साड़ियां का रख रखा करना विभिन्न त्योहार वह जन्मदिन की तैयारी करना आदि इन कार्यों के करने में परिवार के सदस्यों का सहयोग लिया जा सकता है
आकस्मिक कार्य - यह कार्य में होते हैं कि जो अक्षय कुमार सामने आ जाते हैं जैसे परिवार में होने वाली शादी विवाह जन्म मृत्यु अतिथि आगमन स्नान तोरण मित्र या सगे संबंधियों के यहां जाना आदि ग्रहणी को इन कार्यों को संपन्न करने में अपने परिवार के सदस्यों का यथायोग्य सहयोग लेना चाहिए इससे परिवार के सभी सहयोगी बनते हैं तथा सारे कार्य बड़ी सरलता से निपट जाते हैं
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गृह व्यवस्था का महत्व :- गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार...
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गृह व्यवस्था का महत्व :-
गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को अधिकतम संतुष्टि मिल सकती है इसके साथ ही साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह गृह व्यवस्था के कुशलता पूर्वक संचालन में गृहणी का पूरा सहयोग करें
गृह व्यवस्था के महत्व का वर्णन निम्नलिखित प्रकार से-
1.रहन-सहन के स्तर को ऊंचा बनने में सहायक- परिवार के रहन-सहन का स्तर ऊंचा बनने में गृह व्यवस्था से पारिवारिक साधनों का उपयोग हो जाता है तथा समय शक्ति व शर्म की बचत होती है परिणाम स्वरुप परिवार के रहन-सहन का स्तर भी ऊंचा उठता है
2. पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति में सहायक - परिवार वह केंद्र है जहां परिवार के सभी सदस्यों की अनेक आवश्यकता है होती है तथा उनकी पूर्ति के लिए नियंत्रित रूप से प्रयास किए जाते हैं परिवार की आवश्यकता है सीमित होती है तथा पूर्ति के साधन सीमित होते हैं ऐसी स्थिति में पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति गृह व्यवस्था के द्वारा ही संभव होती है गृह व्यवस्था के अंतर्गत सर्वप्रथम तीव्रता के आधार पर आवश्यकताओं की वरीयता का निर्धारण किया जाता है उत्तम ग्रह व्यवस्था में परिवार के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखा जाता है इसी प्रकार गृह व्यवस्था सभी पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होती है
3. पारिवारिक आय व्यय के नियोजन में सहायक- पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियंत्रण धन की आवश्यकता होती है प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किए व्यय करना पड़ता है परिवार की आय सीमित होती है तथा पारिवारिक आय को ध्यान में रखकर बजट को तैयार करना चाहिए बजट सदैव बचत का होना चाहिए ऐसा करने से परिवार के सदस्य अपने आप को सुरक्षित अनुभव करते हैं
4. बच्चों वह पति की सफलता में सहायक- घर में उचित व्यवस्था होने से घर का वातावरण शांतिपूर्ण होता है जिसमें रहते हुए बच्चों का पढ़ने में बहुत मन लगता है अर्थात उनकी शिक्षक उन्नति होती है साथ ही उनका शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है
इसी प्रकार व्यवस्थित परिवार में पति को सुख शांति मिलती है तो उन्हें और अधिक परिश्रम करके धन अर्जित करने के लिए उत्साह मिलता है
5. पारिवारिक वातावरण सुखी बनाने में सहायक- जब परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की अधिकतम संतुष्टि हो जाती है तो परिवार का वातावरण सोहर में वह संतोषजनक हो जाता है परिणाम स्वरुप घर में नैतिक सामाजिक आध्यात्मिक तथा धार्मिक मूल्यों का विकास संभव होता है
गृह व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाए:-
यह सत्य है कि एक कुशल वह बुद्धिमान ग्रहणी अपने घर को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से चलती है परंतु कभी-कभी ऐसी कठिन परिस्थितियों पैदा हो जाती है कि ग्रहणी गृह व्यवस्था के सफल संचालन में असफल हो जाती है अतः व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाओ की गृहणी को जानकारी होनी चाहिए जिसमें वह इसे यथा संभव निपट सके गृह व्यवस्था के कुशल संचालन में आने वाली बढ़ाएं निम्नलिखित प्रकार की होती है
1. लक्ष का ज्ञान न होना- गृह व्यवस्था में मुख्य बाधा लक्षण की जानकारी ना होना होती है ग्रहणी सही समय पर सही कार्य नहीं कर पाती और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था में समस्या उत्पन्न होती है उदाहरण के लिए धन संचय करके उस मकान बनवाने की अपेक्षा यदि कपड़े अत्यधिक खरीद लिए जाए तो बनाए गए लक्षण की पूर्ति नहीं हो पाएगी
2. नई जानकारी का अभाव - आज विज्ञान का योग है तथा प्रतिदिन नए-नए उपकरण आते रहते हैं जिसे समय वह श्रम की बचत होती है यदि ग्रहणी को नहीं उपकरणों के बारे में जानकारी नहीं होगी तो गृह व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है
3. समस्याएं व उनके समाधान के ज्ञान का अभाव - यह सत्य है कि गृह व्यवस्था में बहुत सी समस्याएं आती है प्रत्येक परिवार की अपनी समस्या होती है तथा उसका समाधान भी इस परिवार में ही संभव होता है कुछ परिवारों में वही समस्याएं बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाती है और कहीं-कहीं वही समस्या एक विशालकाय समस्या के रूप में प्रस्तुत हो जाती है यदि परिवार में कभी कोई समस्या आ जाए तो उसका किसी तरह शांतिपूर्वक समाधान करना है इसका जी गृहणी या परिवार को ज्ञान नहीं होता उसी परिवार में कोई भी समस्या आने का तूफान आ जाता है
4. कार्य कुशलता में कमी आना- कभी-कभी परिवार में पर्याप्त साधन होते हुए भी उसे परिवार की गृह व्यवस्था अच्छी नहीं होती इसका कारण कार्य कुशलता में कमी का होना होता है साधनों की उपयोग विधि का ज्ञान नहीं होता और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था सफल नहीं हो पाती
5. परिवार के सदस्यों का असहयोग- गृह व्यवस्था कितनी भी ठीक हो यदि परिवार के सभी सदस्य उसमें सहयोग नहीं करते हैं तो गृह व्यवस्था कुशलता पूर्वक संचालित नहीं हो सकती
एक कुशल ग्रहणी को इन सभी समस्याओं के प्रति संचित रहना चाहिए और कोई भी समस्या आने पर वह बड़ी सूझबूझ के साथ दूर करने गृह व्यवस्था का सफलतापूर्वक संचालन कर सकती है
गृह व्यवस्था के साधन -
गृह संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बहुत से साधनों की आवश्यकता पड़ती है अध्ययन की दृष्टि से करे व्यवस्था के साधनों को तीन भागों में बनता है
भौतिक साधन- परिवार को भली प्रकार सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए भौतिक साधनों की आवश्यकता पड़ती है भौतिक साधनों में धान का विशेष महत्व भौतिक साधनों के अंतर्गत परिवार की आए घर की स्थिति तथा बनावट रहन-सहन का स्टार परिवार के कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्र तथा उपकरण आते हैं परिवार की आय होने से आवश्यकता अनुसार व्यय किया जाना संभव हो जाता है परिवार के निवास के लिए एक ऐसा मकान होना चाहिए जिसमें परिवार के सभी सदस्य पूर्ण सुविधा के साथ अपना जीवन यापन कर सके परिवार में कार्यों को करने के लिए आधुनिक यंत्र होने के कार्य सरलता से तथा कम समय में पूर्ण हो जाता है अर्थात श्रम शक्ति वह समय की बचत होती है
भौतिक साधनों में उन सभी वस्तुओं तथा संपत्ति का महत्वपूर्ण स्थान होता है जिन्हें हम प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में उपयोग में लाते हैं जैसे मकान फर्नीचर आधुनिक उपकरण भोज्य पदार्थ आदि में सभी भौतिक साधन उत्तम प्रकार के होने चाहिए जिससे कार्य कुशलता में वृद्धि हो सके
मानवीय साधन- भौतिक साधनों के अतिरिक्त मानवीय साधनों की भी आवश्यकता होती है मानवीय साधनों के अंतर्गत परिवार के सदस्यों की संख्या नौकर परिवार के सदस्यों का व्यवहार वह मनोवृति ज्ञान व प्रवीणता तथा रुचि आदि आते हैं
गृह व्यवस्था के लिए परिवार के सदस्य तथा नौकरों की सहायता भी लेनी पड़ती है मानवीय साधनों का उपयोग करते समय ग्रहण की विशेष भूमिका होती है तब रानी को चाहिए कि वह परिवार के सदस्यों को उनकी रुचि वह क्षमता किया था पर कार्य का विभाजन करें सदस्य तथा नौकरों से इसने युक्त व मृदुलतापूर्ण व्यवहार करें और आवश्यकता पढ़ने पर उनकी सहायता भी करती रहे ऐसा करने से कार्य शीघ्र वह उत्तम होगा
सार्वजनिक साधन- गृह व्यवस्था के कुशल संचालन हेतु सरकार द्वारा प्रदत सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना आवश्यक हो जाता है सार्वजनिक साधनों के अंतर्गत विद्यालय पुस्तकालय अस्पताल बैंक डाकघर धार्मिक स्थल विद्युत एवं दूरसंचार विभाग कानून व सुरक्षा यातायात संबंधित साधन तथा व्यापार आदि आते हैं
हमारे दैनिक जीवन में इन सभी सुविधाओं का विशेष महत्व है यह संस्थाएं यदि अपनी सेवाएं बंद कर दे तो हमारा जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा दूरसंचार बिजली पानी आता इसके उत्तम उदाहरण है सार्वजनिक साधनों का उपयोग ग्रहण की योग्यता पर निर्भर करता है साथ ही साथ सार्वजनिक केदो की पूर्ण जानकारी भी आवश्यक होती है
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प्रस्तावना:- गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर दे...
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प्रस्तावना:-
गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है
परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर देखकर ग्रैनी के योग्य होने का परिचय मिलता है परिवार को अच्छा वह सुखी बनाने के लिए ग्रहणी को अनेक कार्य करने पड़ते हैं एक परिवार के सदस्यों के रहन-सहन के स्तर को उच्च बनाने में धन अथवा संपत्ति की इतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी करनी की सूचना वह कुशलता की किसी भी परिवार के स्तर को देखने से परिवार की संचालिका के गुना की झलक मिलती है
गृह व्यवस्था का अर्थ:-
गृह व्यवस्था का शाब्दिक अर्थ है- 'घर की व्यवस्था या घर का प्रबंध ग्रह कार्यों को योजना बंद है संयोजित ढंग से संपन्न करना ही गृह व्यवस्था कहलाता है'
वास्तव में व्यवस्था शब्द मनुष्य के संपूर्ण जीवन से जुड़ा हुआ है यह सारी प्रकृति एवं व्यवस्थित ढंग से ही कार्य कर रही है इसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन को आदर्श जीवन के रूप में बनाना चाहता है तो उसे व्यवस्था के बंधन में बांधना ही पड़ेगा इसी प्रकार ग्रह को यदि एक आदर्श ग्रह के रूप में दर्शन है तो प्रत्येक कार्य व्यवस्थित ढंग से ही करना पड़ेगा
व्यवस्था या प्रबंध एक मानसिक प्रक्रिया है जो योजना के रूप में प्रकट होती है तथा योजना के अनुरूप ही संपादित एवं नियंत्रित होती है व्यवस्था के रूप में योजना कहां कार्यांव लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन बन जाता है
डेविस के अनुसार, " व्यवसाय कार्यकारी नृत्य तब का कार्य यह मुख्यत एक मानसिक प्रक्रिया है यह कार्य नियोजन संगठन तथा सामूहिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों के कार्य के नियंत्रण से संबंधित है"
क्रो एवं क्रो के अनुसार गृह व्यवस्था घर के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया है
प्राचीन समय में मनुष्य की आवश्यकता बहुत सीमित थी व्यक्ति का रहन-सहन सामान्य वह साधारण हुआ करता था अतः घर को चलाने में कठिनाइयों का सामना काम करना पड़ता था परंतु वर्तमान में वैज्ञानिक आधुनिक फैशन परिषद युग में कदम कदम पर समस्या है वर्तमान मनुष्य की आवश्यकता में वृद्धि हुई है साथ ही साथ एसएमएस साधन भी उपलब्ध हो गए हैं जिससे ग्रहणी के लिए गृह व्यवस्था करने का कार्य जटिल हो गया है अतः एक कुशल ग्रैनी ही परिवार के उपलब्ध साधन का उचित उपयोग करके परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करके उन्हें अधिकतम संतुष्ट प्रधान कर सकती है
गृह व्यवस्था की परिभाषा :-
गृह व्यवस्था के संदर्भ में निखिल तथा डारसी मैं अपने विचार इस प्रकार प्रस्तुत किए हैं -" गृह व्यवस्था परिवार के लक्षण की पूर्ति के उद्देश्य से परिवार के साधनों के प्रयोग का नियोजन नियंत्रण व मूल्यांकन है अर्थात पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए गृह प्रबंध योजना बंद ढंग से करना चाहिए तथा समय-समय पर मूल्यांकन भी आवश्यक है करो या करो के अनुसार गृह व्यवस्था ग्रह के उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया मात्र है गुड जॉनसन मैं गृह व्यवस्था को इन शब्दों में परिभाषित किया है गृह व्यवस्था निर्णय की ऐसी श्रृंखला है जो पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए पारिवारिक साधनों को प्रयुक्त करने की प्रक्रिया प्रस्तुत करती है
गृह व्यवस्था के चरण:-
उपयुक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि ग्राम व्यवस्था के तीन चरण होते हैं इन्हें गृह व्यवस्था के तत्व या अंग भी कहा जाता है
गृह व्यवस्था के चरण- नियोजन -नियंत्रण -मूल्यांकन -( सापेक्ष,निरपेक्ष)
नियोजन- किसी कार्य की सफलता के मूल में नियोजन का बहुत महत्व होता है उदाहरण के लिए घर में चार बच्चे हैं परिवार की आय के अनुसार उनकी शिक्षा की एक योजना बनाने होगी अर्थात नियोजन का अर्थ है कि भविष्य में हमें क्या और कैसे करना है इसका पूर्ण निश्चय कर लिया जाना इससे भविष्य में होने वाला कार्य सहज हो जाता है और उसकी सफलता में संदेह भी काम रह जाता है निखिल और दर्शी ने नियोजन को इस प्रकार परिभाषित किया है- एक वांछित लक्ष्य एक पहुंचने के विभिन्न संभावित मार्गों के विषय में सूचना कल्पना करना तथा उनकी योजना की संपत्ति तक अनुसरण करना और व्यापक योजना का चयन करना है
योजना लक्ष्य निर्दिष्ट प्रक्रिया होती है इससे इन बातों का उपयोग किया जाता है
1चिंतन 2 कल्पना 3 तक शक्ति तथा 4 सिमरन शक्ति
नियोजन के अनेक लाभ भी होते हैं
नियंत्रण:- नियोजित कार्य को करने में नियंत्रण की आवश्यकता होती है यदि कार्य करने में नियंत्रण नहीं रह पाएगा तो नियोजित कार्य भी पूर्ण नहीं हो सकता नियंत्रण में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है
मूल्यांकन - कार्य को संपन्न करने के पश्चात उसका मूल्यांकन आवश्यक है पूर्व नियोजन के अनुसार कार्य करने में कितनी सफलता और कितनी असफलता मिली तथा क्या उचित हुआ वह क्या अनुचित हुआ इसका निर्धारण करने को मूल्यांकन कहते हैं मूल्यांकन से कार्य में पाए जाने वाली त्रुटियां का ज्ञान होता है तथा भविष्य में उन त्रुटियों से बचा जा सकता है साथ ही यह भी ज्ञात हो जाता है कि मूल्यांकन करने के आगे इस कार्य को करने में कौन-कौन से परिवर्तन आवश्यक है
गृह व्यवस्था के उद्देश्य
गृह करने वाली संस्था है मनुष्य के जीवन में घर का विशेष महत्व है परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं को पूर्ण करना ग्रैनी का उत्तरदायित्व होता है अतः ग्रहों को इस बात का पूर्ण ज्ञान होता है चाहिए कि गृह व्यवस्था को क्या उद्देश्य होते हैं
गृह व्यवस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं
अनिवार्य आवश्यकताओं की संतुष्टि- गृह व्यवस्था का प्रथम उद्देश्य परिवार की सभी अनिवार्य आवश्यकता की संतुष्टि करना है परिवार के सभी सदस्यों को उत्तम व पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए भोजन परोसते समय परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता में रुचि का भी ध्यान रखना आवश्यक है परिवार के सभी सदस्यों के लिए वस्त्रो का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा एक मकान की व्यवस्था हो जिसमें परिवार के सभी सदस्य सुख पूर्वक रह सके
समय का शुद्ध प्रयोग - घर के सभी कार्यों को इतनी कुशलता से करना चाहिए जिससे बच्चे हुए समय का अधिकतम शुद्ध प्रयोग हो सके इसके लिए ग्रहणी अपनी सामर्थ्य के अनुसार आधुनिक यंत्रों का प्रयोग भी कर सकती है
आय वय का संतुलन- घर के संचालन में आए तथा वे में समाज से होना अत्यंत आवश्यक है परिवार की आई सीमित होती है तथा आवश्यकता है स सीमित होती है अतः उसे सीमित आय में ही वह करना चाहिए तथा साथ ही साथ इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों को अधिकतम संतुष्टि भी मिल सके
समाज सेवा - ग्रह के विभिन्न कार्य इस प्रकार व्यवस्थित होने चाहिए कि परिवार के सदस्य अपने समय में से कुछ समय बचाकर समाज की सेवा अधिकारियों में भाग ले सके जिससे मैं सच्चा आत्मिक संतोष कर सके
विश्राम एवं मनोरंजन- घर के सभी कार्यों में प्रत्येक सदस्य को थकान होती है अतः इसके लिए विश्राम करना आवश्यक होता है विश्राम के साथ-साथ मनोरंजन के लिए समय निकलने से परिवार के सदस्यों में सामाजिक बना रहता है
सर्वांगीण विकास - एक कुशल गृह व्यवस्था परिवार के लिए सुख शांति का वातावरण उत्पन्न करके परिवार के संसद सदस्यों का शारीरिक मानसिक आर्थिक है वह अत्यधिक विकास करती है
गृह व्यवस्था के तत्व या कारक-
गृह एवं परिवार दो भिन्न शब्द है- गृह वह स्थान है जहां कोई परिवार रहकर जीवन व्यतीत करता है इस प्रकार ग्रह का आशय मकान से है परिवार व्यक्ति का वह समूह है जो आपस में रक्त संबंधों से संबंध होते हैं व्यवस्था के तत्वों के संदर्भ में गृह तथा परिवार संबंधित तत्वों का अलग-अलग विवेचन करना चाहिए ग्रह के संदर्भ में व्यवस्था के तत्वों या कारक ऑन का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
घर का सुविधाजनक होना- घर का निर्माण करते समय अथवा किराए पर लेते समय ध्यान रखना चाहिए की विभिन्न कक्षाओं का नियोजन सुविधाजनक हो धारण के लिए डाइनिंग रूम और रसोईघर निकट होने से शक्तियां समय की बचत होती है स्टोर रूम और रसोई घर भी निकट होना चाहिए अध्ययन कक्ष और स्वयं कक्षा का डाइनिंग रूम से अंतर होना चाहिए जिससे विश्राम में अध्ययन में बाधा ना पड़े शौचालय और गुसलखाने निकट होने चाहिए इसी प्रकार डाइनिंग रूम की व्यवस्था इस प्रकार की होनी चाहिए की मेहमान घर में आंतरिक हिस्सों में काम से कम प्रवेश करते हुए डाइनिंग रूम तक पहुंच जाएं गृह संबंधित इस विशेषता या तत्व को पर्सपानुकूलता कहा जाता है अवश्य भवन में इस विशेषता के होने पर गृह व्यवस्था में लागू की जा सकती है
सफाई- परिवार का लक्ष्य परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखना है और यह तब तक संभव नहीं है जब तक घर में सफाई की उचित व्यवस्था न हो व्यवस्थित और आकर्षक घर के लिए भी सफाई का होना आवश्यक है यदि घर मैं सफाई नहीं है तो मक्खी मच्छर मकड़िया आदि जन्म लेंगे और रोग फैलेंगे रसोई घर की सफाई स्वच्छता के लिए अनिवार्य डाइनिंग रूम की सफाई से ग्रैनी की सुरुचि पूर्णता का आभास होता है बच्चों का पर्याप्त समय अध्ययन कक्ष में बिकता है यदि अध्ययन पक्ष साफ सुथरा है किताबें करने से सजी है मेज कुर्सियां पर धूल नहीं है तो बच्चे के पढ़ने में अधिक रुचि लगे इस प्रकार स्पष्ट है कि गृह व्यवस्था के लिए घर की सफाई एक महत्वपूर्ण तथा अति आवश्यक कारक है
जलवायु और प्रकाश की उचित व्यवस्था- शुद्ध वायु शुद्ध जल और प्रकाश की घर में उचित व्यवस्था होनी चाहिए सभी कमरों में पर्याप्त खिड़की दरवाजे और रोशनदान होने चाहिए जिससे स्वच्छ वायु और प्रकाश का प्रवेश हो सके घर में धूप का आना भी आवश्यक होता है जिन घरों में सूर्य का प्रकाश नहीं आता आता है वहां शिलान और अनेक कीटाणुओं का सामाजिक हो जाता है जो परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अध्ययन कक्षा में प्रकाश की तथा शौचालय स्नानागार और रसोई में जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए यदि घर में यह सांसद कारक ठीक है तो निश्चित रूप से उत्तम गृह व्यवस्था के अनुपालन में सरलता होगी
भोज्य सामग्री की व्यवस्था - परिवार के सदस्यों को समय पर उचित और संतुलित भोजन उपलब्ध होना चाहिए भोजन अल्पाहार में अतिथि सरकार के लिए सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए अतिथियों के आने पर चाय या कॉफी से उनका सत्कार होना चाहिए यदि घर में दूध या चाय की पट्टी समय पर उपलब्ध नहीं है तो उसे ग्रहण की या कुशलता और व्यवस्था का पता चलता है भोजन सामग्री की व्यवस्था के अंतर्गत घर में शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में खाद सामग्री रहनी चाहिए तथा समय-समय पर उनकी सफाई की जानी चाहिए खाद्य पदार्थों का संरक्षण भी इसी में सम्मिलित है काग पदार्थ का अपव्यव नहीं होना चाहिए
घर की सामग्री की व्यवस्था- घर की सामग्री से तात्पर्य है दैनिक प्रयोग की वस्तुएं जैसे बर्तन वस्त्र पुस्तक के बिस्तर फर्नीचर आदि आधुनिक परिवारों में रेडियो टेप रिकॉर्डर टेलीविजन फीस पंखे कूलर सिलाई मशीन कपड़े धोने की मशीन प्रेशर कुकर टोस्टर ओवन चाहिए जिससे इन उपकरणों की टूट-फूट कम से कम हो आवश्यकता अनुसार सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए यदि कोई उपकरण या वस्तु टूट जाती है या खराब तो उसको ठीक करने का प्रबंध होना चाहिए
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प्रस्तावना:- " स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है" "स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है " स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है...
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प्रस्तावना:-
" स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"
"स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "
स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है स्वस्थ व्यक्ति जीवन में अनेक सफलता प्राप्त कर सकता है
" Health is wealth" अर्थात स्वास्थ्य ही धन है स्वस्थ व्यक्ति अपने लिए परिवार के लिए और समाज के लिए एक धन के समान है इसके विपरीत एक स्वस्थ व्यक्ति सबके लिए बोझ होता है रोग से दुखी व्यक्ति के जीवन में उत्साह नहीं रहता आर्थिक सामाजिक आत्मिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है किसी ने कहा है किसी देश की उन्नति उसके नागरिकों की प्रबलता है जो की खानों नदिया वह वनों की संपत्ति से कहीं ज्यादा मूल्यवान है किसी भी समाज व राष्ट्रीय की उन्नति उसके व्यक्तियों की कमतता तथा साहस पर निर्भर करती है कमर्टता तथा साहस के लिए स्वास्थ्य उत्तम होना आवश्यक है
व्यक्तिगत स्वास्थ्य का अर्थ:-
शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत स्वास्थ्य कहते हैं यदि व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा हो तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और परिणाम स्वरुप घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी स्वास्थ्य का अर्थ मंत्र रोग मुक्त होना ही नहीं है बल्कि कार्य क्षमता व क्रियाशीलता से भी है अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सदैव उत्तम बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सीधा संबंध व्यक्तिगत स्वास्थ्य से होता है वह स्वच्छता जो हमारे शरीर की देखभाल से संबंध रहती है व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाती है व्यक्तिगत स्वच्छता के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह इनका सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिससे वह इनका पालन करते हुए पूर्ण स्वच्छ रह सके और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सके
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के नियम:-
अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कुछ नियम इस प्रकार है
आदत:- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति में अच्छी आदतों का विकास होना चाहिए प्राकृतिक नियमों का पालन न करना है भोज्य भोजन का प्रयोग करना नाशाहत्री रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठाना आदि बुरी आदतें हैं यदि ऐसी आदतों को नहीं छोड़ा जाए तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है आदतों का जीवन में विशेष महत्व है आदतें एक दिन में नहीं बन जाती आदतों का विकास तो बाल्यावस्था से शुरू हो जाता है अतः माता को चाहिए कि प्रारंभ से ही बच्चों मे अच्छी आदतों का विकास करें जैसे प्राप्त सूर्योदय से पहले उठना सच में दांत साफ करने के पश्चात ही कुछ आहार ग्रहण करना समय से स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना दूसरे का तोलिया गंगा वह कपड़ों का उपयोग न करना आदि
स्वच्छता:- स्वच्छ रहने के लिए स्वच्छता का भी होना आवश्यक है शारीरिक स्वच्छता होने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है शारीरिक रूप से स्वच्छ होने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के नियमों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखता है स्वच्छ रहने के लिए अच्छा वातावरण बनाया जाए शुद्ध भोजन किया जाए तथा शुद्ध व ताजी हवा का सेवन किया जाए इस प्रकार का वातावरण बनाने पर व्यक्ति रोग मुक्त रह सकेगा
पौष्टिक भोजन:- स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध तथा पौष्टिक भोजन बहुत आवश्यक है पौष्टिक भोजन का अभिप्राय है व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन वह खनिज लवण युक्त भोजन ही भोजन शुद्ध होना चाहिए भोजन को स्वच्छता से बनाना चाहिए भोजन करने का समय निर्धारित होना चाहिए तथा अधिक तला भुनाव घनिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए सभी बातों को ध्यान में रखने से व्यक्ति पूर्णता स्वस्थ रहता है
मानसिक शांति:- शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति के मस्तिष्क में शांति होनी चाहिए घर का वातावरण कल है युक्त नहीं बनना चाहिए तथा किसी भी समस्या का हाल आपस में विचार विमर्श तथा विचारों का आदान-प्रदान करके किया जाना चाहिए
जीवन में नियम बांधता :- अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि दैनिक कार्यों को नियम अनुसार किया जाए उदाहरण के लिए समय पर सो आदि में निवृत होना नाश्ता भोजन आदि समय से करना व्यायाम नियम अनुसार एवं नृत्य प्रतिदिन करना समय पर सोने तथा समय से उठाना आदि अनेक कार्य प्रतिदिन श्याम अनुसार करने चाहिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही अपने दैनिक जीवन के नियमों को शुद्ध भुज पूर्वक निर्धारित करना चाहिए तथा निर्धारित नियमों को यथासंभव सदैव पालन करना चाहिए
नियमित रूप से व्यायाम :- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है व्यायाम का आशय शरीर के अंगों की व्यवस्थित गति से है व्यायाम के अनेक प्रकार है टहलने दौड़ना धड़ बैठक लगाना योगाभ्यास एवं प्रनियम मलखंब आदि सभी व्यायाम के उदाहरण है अब व्यायाम के लिए विभिन्न मशीनों एवं कर्म को भी तैयार कर लिया गया है व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को क्रियाशील बनता है जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है इसके अतिरिक्त शरीर स्वस्थ प्रतिनियुक्त तथा सुंदर रहता है
पर्याप्त निद्रा तथा विश्राम :- उत्तम स्वास्थ्य के लिए निंद्रा एवं विश्राम अत्यंत आवश्यक होता है हम जो भी शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हैं उसे हमारे शरीर में थकान आ जाती है वास्तव में शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक हानिकारक पदार्थ एक तरफ हो जाते हैं यह पदार्थ ही हमारी मांसपेशियों को ताकते हैं इससे अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर में ऊतक टूटे फट्टे रहते हैं कार्य करते समय इसकी मरम्मत नहीं हो पाती है अतः शरीर के स्वस्थ रहने के लिए इन उत्तकों की मरम्मत तथा हानिकारक पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है इसके लिए निद्रा अविश्रम ही सर्वोत्तम उपाय हैं
शारीरिक स्वच्छता:-
शारीरिक स्वच्छता के अंतर्गत संपूर्ण शरीर के प्रत्येक अंगों की स्वच्छता आती है अतः हमें अपने शरीर के विभिन्न अंगों की संस्थान प्रकार करनी चाहिए
त्वचा की स्वच्छता:- तू अच्छा शरीर का बाहरी आवरण होता है जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है त्वचा के विभिन्न रंग होते हैं किसी त्वचा का रंग काला होता है किसी का रंग सांवला या किसी त्वचा का रंग गेहुआ तथा किसी त्वचा का रंग गोरा होता है
त्वचा में करोड़ों छिद्र होते हैं इसमें कुछ छिद्रतलीय ग्रंथि में खुलते हैं और कुछ श्वेत ग्रंथियां में श्वेत ग्रंथियां हमारे शरीर से पसीना निकलने का कार्य करती है इससे हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है साथ ही पसीने के द्वारा हमारे शरीर की गंदगी एवं उत्सर्जी पदार्थ का विसर्जन हो जाता है ग्रंथि तेल उत्पन्न करती है जिससे हमारी त्वचा चिकनी व चमकदार बनती है
हमारे शरीर से पसीना निकलना अनेक प्रकार के कार्य करना बाहर जाने आदि से हमारी त्वचा गंदी हो जाती है त्वचा के रोमचंद्र बंद हो जाते हैं जिससे सफेद वह तो लिए ग्रंथियां बंद हो जाती है गांधी त्वचा पर विभिन्न प्रकार के रोगाणु बैठते हैं और त्वचा संबंधित रोग उत्पन्न करते हैं जैसे फुंसी फोड़े आदि साथ ही शरीर से पसीने की दुर्गंध आने लगती है अतः त्वचा की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए स्नान करने से हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा में रक्त संचार होता है और शरीर में चमक आती है
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साइबर समिति का मतलब:- 'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या 'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिट...
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साइबर समिति का मतलब:-
'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या 'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिटल दुनिया या आभासी दुनिया भी कहा जाता है
मुख्य शब्द और अर्थ:
साइबर समाज (cyber society):- कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा निर्मित इलेक्ट्रॉनिक समाज जैसे इंटरनेट पर होने वाले सामाजिक मेलजोल
डिजिटल समास (digital society):- प्रौद्योगिकी और डिजिटल माध्यमों पर आधारित समाज
साइबर स्पेस (cyberspace ):- कंप्यूटर नेटवर्क काव्य आवासी स्थान जहां जानकारी और संचार होता है जिसे आभासी दुनिया भी कहते हैं
उदाहरण और संदर्भ:
- साइबर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया जैसी संस्थाएं साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलती है
- यह शब्द उन सामाजिक अतः क्रियो को दर्शाता है जो कंप्यूटर मध्य स्थिरता से होती है जैसे ऑनलाइन चैट और ईमेल
साइबर सोसाइटी है क्या:-
साइबर सोसाइटी (cyber society)का मतलब एक ऐसी दुनिया या समुदाय से है जो कंप्यूटर इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर आधारित है जहां लोग ऑनलाइन जुड़ते हैं जानकारी शेयर करते हैं और डिजिटल सेवा का उपयोग करते हैं लेकिन साथ ही हैकिंग फिशिंग मलेरिया जैसे साइबर खतरों से बचने के लिए साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है जो हमारे डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखती है
यह एक ऐसा समाज है जहां संचार व्यापार शिक्षा मनोरंजन और लगभग हर गतिविधि डिजिटल माध्यम इंटरनेट कंप्यूटर मोबाइल से होता है
इसमें सोशल मीडिया ऑनलाइन शॉपिंग बैंकिंग सरकारी सेवाएं और वर्चुअल दुनिया जैसे मेंटावर शामिल है
साइबर समिति से जुड़े मुख्य पहलू:-
1. साइबर स्पेस: कंप्यूटर और नेटवर्क से बनी आभासी दुनिया
2. साइबर सुरक्षा (cyber society): कंप्यूटर सिस्टम नेटवर्क और डाटा को साइबर हम लोग से बचने के तरीके और तकनीकी (जैसे एंटीवायरस फायरवॉल )
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AI के बारे में कुछ जानकारी:- IA का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन&n...
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AI के बारे में कुछ जानकारी:-
IA का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन (Information Assurance ) भी हो सकता है या कुछ नाम जैसे (आयोवा ) के लिए एक संक्षिप्त रूप
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI)
A) क्या है: यह कंप्यूटर साइंस का एक क्षेत्र है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने,समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने की क्षमता देता है
B) कैसे काम करता है: यह एल्गोरिदम और डाटा का उपयोग करता है ताकि मशीन पेटरन पहचान सके,और काम कर सके, जैसे चेहरे पहचाने, भाषा समझने,और डाटा का विश्लेषण करना
उदाहरण : चैट बोर्ड,सिफारिश प्रणाली
( recommendation system ) और सेल्फ ड्राइविंग करें
2. इंटेलिजेंस ओंगमेंटेशन (AI)
A) क्या है: यह AI का एक प्रकार है जो मशीनों को इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी क्षमताओं (जैसे निर्णय लेने और रचनात्मकता) को बढ़ाने में मदद करता है
B) कैसे काम करता है: यह इंसानों और टेक्नोलॉजी के बीच सहयोग पर जोर देता है जिससे वह मिलकर बेहतर काम कर सके
उदाहरण : डॉक्टर को मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने में मदद करने वाले तोलिया श्री जैसे व्यक्तिगत सहायक जो जानकारी ढूंढने में मदद करते हैं
3. अन्य अर्थ
A) सूचना आश्वासन (Information Assurance)-AI : साइबर सुरक्षा से संबंधित है जो डाटा और सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करती है
B) संक्षिप्त रूप (Acronym) जैसे आयोवा (lowa) राज्य के लिए AI
संक्षेप में जब आप IA देखते हैं तो यह अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता AI या मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाली बुद्धिमत्ता के (AI) बारे में होता है लेकिन इसका मतलब सूचना सुरक्षा या किसी स्थान का संक्षिप्त नाम भी हो सकता है
AI - का मतलब
IA का मतलब मुख्य रूप से दो संदर्भ में होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता )या इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (बुद्धि वृद्धि) जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने सीखने और समस्याओं का हल करने की क्षमता देता है और कभी-कभी किसी भाषा में प्रयुक्त के रूप में या फिर किसी स्थान के संक्षिप्त नाम जैसेआयोवा के रूप में भी होता है
AI- Artificial Intelligence- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
AI कितने प्रकार के होते हैं
हाल ही में विभिन्न औद्योगिक में कृत्रिम बुद्धिमता ए के अनुप्रयोगों में भारी वृद्धि हुई है और उनकी क्षमता और प्रभाव का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है हम मोटे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीन प्रकारों को पहचान सकते हैं संकीर्ण या कमजोर एआई (एएन आई) सामान्य एआई ( AGI ) और कृत्रिम आती बुद्धिमत्ता (ASI)
AI( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को मुख्य रूप से क्षमता (ability) और कार्य क्षमता ( functionality) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिसमें संता के आधार पर संकीर्ण AI( Narrow all) सामान्य AI ( AGI ) और सुपर AI ( ASI ) प्रमुख है जबकि कार्य क्षमता के आधार पर प्रतिक्रियाशील मशीन (Reactive Machines) सीमित मेमोरी (Limited Memory) मां का सिद्धांत theory of mind और आत्मा जागरूक AI (salf aware) जैसे प्रकार होते हैं जिनमें से अधिकांश वर्तमान में मौजूद है और कुछ भविष्य की अवधारणाएं है
समता आधारित प्रकार-: (types of ability)
1. संकीर्ण AI -: यह AI किसी एक विशिष्ट कार्य के लिए बनाया जाता है जैसे सिरी गूगल स्टेटस या चेहरे की पहचान
2. सामान्यAI-: यह इंसानों की तरह किसी भी भौतिक कार्य को करने की क्षमता रखता है लेकिन यह अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है
3. सुपरAI:- यह मानव से कहीं ज्यादा बुद्धिमान होगा और अपनी सोच को खुद सुधर सकेगा जो अभी केवल एक काल्पनिक अवधारणा है
कार्य क्षमता आधारित प्रकार( types of functionality)
1. प्रतिक्रियाशील मशीन:- यह सिर्फ वर्तमान इनपुट पर प्रतिक्रिया करती है कोई पिछली या दस्त नहीं होती जैसे डीप ब्लू शतरंज कंप्यूटर
2. सीमित मेमोरी:- यह थोड़े समय के लिए पिछली जानकारी को याद रख सकती है और उनका उपयोग करती है जैसे सेल्फ ड्राइविंग करो
3. मां का सिद्धांत:- यह AI भावनाओं विश्वासों और इरादों को समझने और उनसे बातचीत करने में सक्षम होगा (अभी विकास के अधीन है)
4. आत्म जागरूक :- यह सबसे अनंत स्टार है जिससे(AI) में चेतना और स्वयं की समझ होगी पूरी तरह सिद्धांत ट्रिक
AI मैं कितने प्रकार के अभिज्ञान है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षमता आधारित प्रकार
मैं किस प्रकार सीखते हैं और अपने ज्ञान को किस हद तक लागू कर सकते हैं इसके आधार पर सभी AI को तीन समता प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है संकीर्ण कृत्रिम AI सामान्य बुद्धिमत्ता और कृत्रिम सुपर इंटेलिजेंस
AI मॉडल कितने प्रकार के होते हैं?
विभिन्न प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( AI )अलग-अलग समस्याओं का समाधान करती है जेनरेटिव AI सर्जन करती है प्रिडिकेटिव AI परमाणु लगती है ईस्ट आई कार्य में सहायता करती है और एग्जॉटिक आई स्वत रूप से कार्य करती है बड़े भाषा मॉडल आईआईएम और मल्टी मॉडल सिस्टम अब आधुनिक कार्य स्थल विशेष रूप से ज्ञान आधारित कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं
AI के पिता:-
AI के जनक john macarthy है जिन्होंने 1956 में दांत माउस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द गदा और इसे एक अकादमिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया साथ ही इन्होंने LIPS प्रोग्रामिंग भाषा का भी विकास किया जो AI रिसर्च में महत्वपूर्ण रही है
मुख्य बिंदु :
जनक : john macarthy अमेरिका कंप्यूटर वैज्ञानिक और संज्ञानात्मक वैज्ञानिक
शब्द गणना:- उन्होंने 1956 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AIशब्द का आविष्कार किया
डॉट माउस सम्मेलन :- उन्होंने 1956 में डार्क माउस सम्मेलन आयोजित किया जिसे AI का जन्म स्थान माना जाता है
योगदान :-इन्होंने AI के शुरुआती विकास और जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया
जबकि एलेन टरिक को AI के शुरुआती विचारों और तुरी कि टेस्ट के लिए जाना जाता है जॉन में करती को AI के क्षेत्र के संस्थापक और जनक के रूप में मान्यता प्राप्त है
AI के फायदे व नुकसान-
AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई फायदे हैं जैसे उत्पादकता बढ़ाना दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित करना स्वास्थ्य सेवा में सुधार 24/7और उपलब्धता लेकिन इसके नुकसान भी है जिसमें नौकरियों का विस्थापन उच्च लागत को पंत संबंधी चिंताएं एल्गोरिदम में पक्षपात और मानवीय भावनाओं व रचनात्मक की कमी शामिल है इसलिए इसका उपयोग संतुलन और जिम्मेदारी के साथ करना महत्वपूर्ण है
फायदे( benefits )
उत्पादकता और दक्षता:-AI कार्यों को तेजी से और अधिक सटीक रूप से करता है जिस समय बचता है और काम की गुणवत्ता बढ़ती है
स्वचालन: यह दोहराए जाने वाले और निराशा कार्यों को स्वचालित करता है जिससे मानव कर्मचारी अधिक जटिल कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं
24/7 उपलब्धता: AI सिस्टम बिना थके जब से घंटे काम कर सकते हैं
बेहतर निर्णय :- यह बड़े बेटे सेट का विश्लेषण करके पैटर्न और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जिसे बेहतर और तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है जैसे स्वास्थ्य सेवा में
नवाचार : यह नहीं खोजो और समाधानों को बढ़ावा देता है
नुकसान (Disadvantages)
नौकरी का विस्थापन:- स्वचालन के कारण कुछ नौकरियां खत्म हो सकती है जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है
उच्च लागत: AI सिस्टम को विकसित करना और लागू करना बहुत महंगा हो सकता है
गोपनीयता और सुरक्षा:- AI बड़ी मात्रा में डाटा का प्रयोग करता है जिससे गोपनीयता के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिम का खतरा होता है
पक्षपात : यदि प्रशिक्षण उत्तर पक्ष पाती है तो AI सिस्टम भी पक्षपाती निर्णय ले सकते हैं
मानवीय स्पर्श की कमी:-AI मैं भावना रचनात्मक और सुहानुभूति की कमी होती है जो कुछ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है
AI का इतिहास( history of AI)
AI का इतिहास 1905 के दशक में शुरू हुआ जब जॉन में मैं मेकाथरी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट शब्द गदा और दांत माउस कार्यशाला में इसे एक वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया हालांकि एलन टयूरिंग जैसे अग्रद्ध हो तो ने पहले ही मशीनों बुद्धिमता की नींव रखी थी और तब यह यह कई चरणों जैसे संकीर्ण AI सामान्य AI में गुजरते हुए आदमी मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के जरिए तेजी से विकसित हो रहे हैं
शुरुआती विचार ने नीव (1940- 1950)
1950: एलेन टरिक ने मशीनस सोच सकती है लेख में टयूरिंग टेस्ट का प्रस्ताव रखा जो मशीन की बुद्धिमत्ता मापने का एक तरीका था और मशीनों के सोने की संभावना पर विचार किया
1952: ऑथर सैमुअल ने पहले सीखने वाला चेकर प्रोग्राम बनाया
1956: जॉन मैंकाथ्री ने डांट माउस कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का प्रयोग किया और इस क्षेत्र को एक नाम दिया जिससे ए आई का औपचारिक जन्म हुआ
प्रारंभिक उत्साह और शीतकाल (1960-1960)
AI शुरुआती प्रोग्राम जैसे लॉजिक थियोसिटी बने लेकिन जल्द ही कंप्यूटर की सीमित शक्ति और जटिल समस्याओं के कारण उत्साह कम हुआ AI विंटर
विशेषज्ञ सिस्टम और AI पुनरुत्थान 1980
विशेषज्ञ सिस्टम लोकप्रिय हुए जो विशिष्ट क्षेत्रों में मानव ज्ञान का अनुकरण करते थे जिससे आई में नये जान आई
मशीन लर्निंग और दीप लर्निंग का युग (1990 वर्तमान)
1917: IBS का डीप ब्लू शतरंज में विश्व चैंपियन गिरी कस्प रोग को हराया
2010: मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग की प्रगति ने AI को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचा बड़े डाटा सेट और शक्तिशाली कंप्यूटर्स ने इमेज रिकॉर्डिंग नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाती
मुख्य मिल के पत्थर
NLP:- सीरी (siri) अलकासा( alexa) जैसे वर्चुअल अीस्टेट
कंप्यूटर विजन:- सेल्फ ड्राइविंग कर फेस रिकॉग्निशन
वर्तमान: जेनरेटिव AI जैसी तकनीकी जो मानव जैसी सामग्री बन सकती है
संक्षेप में का इतिहास काल्पनिक से शुरू होकर सिद्धांत्रिक आधार उत्साह और निराशा के दौर से गुजरते हुए आवाज के दाता संचालित तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य तक पहुंचा है जिसका उद्देश्य मशीनों को बुद्धिमान बनाना है
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जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में बताया है कि मानव जीवन पर पर्यावरण तथा प्रदूषण का प्रभाव कैसे पड़ता है तो उसमें मैं आपको कुछ बातें बता चुकी हूं जैसे- प्रस्तावना,पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषा, प्राकृतिक पर्यावरण, पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग, पर्यावरण से लाभ तथा जीवन पर होने वाले प्रभाव, पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव और मैं आपको प्रदूषण का अर्थ भी बता चुकीहूँ तो इस ब्लॉक&nbs...
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जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में बताया है कि मानव जीवन पर पर्यावरण तथा प्रदूषण का प्रभाव कैसे पड़ता है तो उसमें मैं आपको कुछ बातें बता चुकी हूं जैसे- प्रस्तावना,पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषा, प्राकृतिक पर्यावरण, पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग, पर्यावरण से लाभ तथा जीवन पर होने वाले प्रभाव, पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव और मैं आपको प्रदूषण का अर्थ भी बता चुकीहूँ
तो इस ब्लॉक मैं और जानकारी बताऊंगी जैसे- प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं और मानव जीवन पर इनका प्रभाव
प्रदूषण के प्रकार तथा मानव जीवन पर इनका प्रभाव:-
प्रदूषण निम्न प्रकार के होते हैं-1. वायु प्रदूषण 2.जल प्रदूषण 3.ध्वनि प्रदूषण 4.मृदा प्रदूषण तथा 5.रेडियो धर्मी प्रदूषण
1. वायु प्रदूषण:-
वायु प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है - वायु का दूषित हो जाना ऑक्सीजन के अतिरिक्त वायु में किसी भी गैस की मात्रा संतुलित अनुपात से अधिक होने पर वायु श्वसन योग्य नहीं रहती अतः वायु में किसी गैस की वृद्धि या अन्य पदार्थ का समावेश होना वायु प्रदूषण कहलाता है सैमसंग में सभी जीव कार्बन डाइऑक्साइड विसर्जित करते हैं तथा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं किंतु हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति के कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा वायुमंडल में ऑक्सीजन छोड़ते हैं इस प्रकार इन दोनों गैसों का अनुपात संतुलित बना रहता है वायु मे गैसीय और ठोस दो प्रकार की अशुद्धियां मिलती है
a) गैसीय अशुद्धियां :-
वायु विभिन्न प्रकार की गैसीय का मिश्रण है अशुद्ध गैस जैसे -कार्बन डाइ-ऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड, क्लोरीन,अमोनिया,आदि वायुमंडल में मिल जाती है जिससे वायु अशुद्ध हो जाती है तथा वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ती है
b) ठोस अशुद्धियां :-
विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, जीवाणु,बाल,मिट्टी, धूल के हल्के कण,धागे,लकड़ी के कण, कोयले के महीन कण,वायुमंडल में मिल जाते हैं और वातावरण को धूल युक्त तथा प्रदूषण युक्त बनाते हैं
प्रदूषण वायु से फैलने वाले रोग
हम जानते हैं कि प्रदूषण वायु में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है इससे वायु में रोग के कीटाणु बढ़ाने लगते हैं यह कीटाणु ही अनेक रोगों को फैलाने का कार्य करते हैं प्रदूषण वायु के सेवन से फैलने वाले रोगों का संक्षिप्त परिचय निम्न वक्त है
1. सांस द्वारा फैलने वाले रोग:-
सभी जीव स्वसन क्रिया के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड गैस को वायुमंडल में छोड़ते रहते हैं इस अशुद्ध वायु का सेवन करने से व्यक्ति को घुटन का अनुभव होने लगता है तथा सिर दर्द, चक्कर आना,भारीपन,आदि की शिकायत हो जाती है
2. वास्तु के सड़ने से हुई अशुद्ध वायु से रोग :-
विभिन्न वस्तुओं के सड़ने तथा जलने से भी वायु अशुद्ध होती रहती है इस क्रिया में वायु में दोनों प्रकार की अशुद्धियां अर्थात ठोस अथवा कैसी है व्यापक हो जाती है इस प्रकार असुद्ध वायु में सांस लेने से भी विभिन्न रोग लगा सकते हैं जिसमें मुख्य है- भूख न लगना,अतिसार, अतिसार, सर दर्द,भारीपन, तथा चक्कर आना
3. धूल कानों से युक्त वायु से रोग:-
धूल कणों की अधिकता से भी दूषित हो जाते हैं इस प्रकार की अशुद्ध वायु में सांस लेने में मुख्य रूप से सांस के रोग अर्थात दमा के अतिरिक्त आंखों गले तथा कानों के रोग भी हो सकते है
4. औद्योगिक अशुद्ध वायु से रोग:-
वर्तमान समय में वायु को अशुद्ध बनाने में औद्योगिक संस्थानों का मुख्य हाथ है इनके द्वारा अनेक प्रकार की विषैली कैसे विषैली पदार्थ के अभिषेक निरंतर वायुमंडल में व्यापक होते रहते हैं इस प्रकार की अशुद्धियां अनेक प्रकार के रोगों का कारण बनती है सांस के रोग, फेफड़ों के रोग तपेदिक,खांसी,कुकर खांसी,बुखार तथा अनेक गंभीर रोग इस प्रकार की अशुद्ध वायु से ही फैलते हैं
उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि अशुद्ध वायु से अनेक प्रकार के रोग फैल सकते हैं जो हमारे जीवन के लिए घातक भी सिद्ध हो सकते हैं वास्तव में शुद्ध वायु ही हमारे जीवन का आधार है हमें चाहिए कि हम अधिक से अधिक शुद्ध वायु का सेवन करें तथा वायु को दूषित होने से बचाए विश्व की अनेक संस्थाएं इस और भरकस प्रकाश कर रही है
वायु प्रदूषण का भरसक जीवन पर प्रभाव:-
वायु प्रदूषण का जनजीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
वायु प्रदूषण का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव:-
1. सल्फर डाइऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है फेफड़ों के ऊतकों पर कुप्रभाव, पुराने खांसी का रोग हमारे जन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है
2. नाइट्रोजन के ऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है फेफड़ों का कैंसर इन्फ्लूएंजा के प्रति प्रतिरोधक शक्ति का ह्रास हमारे जन स्वास्थ्य पर पड़ता है
3. कार्बन मोनोऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है मस्तिष्क पर कुप्रभाव सोचने विचारने की शक्ति का ह्रास हमारे जन स्वास्थ्य पर पड़ता है
4. सूक्ष्म कण (क )कैडमियम व शिक्षा (ख) रख कालिक वेद हुआ एक वायु प्रदूषक है रक्तचाप वह वृद्धि रुधिर व अधिक मात्रा के कारण मृत्यु वह कम मात्रा के कारण तंत्रिका तंत्र तथा गुर्दों पर को प्रभाव नेत्रों में जलन व अन्य रोग फेफड़ों के कैंसर की संभावना का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है
5. क्लोरोफ्लोरोकार्बन एक वायु प्रदूषक है वायुमंडल की ओजोन की परत में छिद्र कर रहा है जिससे पराबैंगनी करने सूर्य का प्रकाश अधिक के में पृथ्वी पर पहुंचकर कैंसर जैसे असाध्य रोगों की उत्पत्ति का कारण बन रही है
2. जल प्रदूषण:-
जल प्रदूषण का अर्थ है:- जल प्राप्ति के प्रमुख स्रोतों का दूषित हो जाना जल में अशुद्धियों एवं हानिकारक पदार्थों के घुल मिल जाने से जल प्रदूषित हो जाता है इस प्रकार के हानिकारक पदार्थ कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ भी हो सकते हैं तथा कुछ कैसे भी हो सकते हैं प्रदूषण जल जीवन में विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न कर सकता है जल प्रदूषण के अंतर्गत विभिन्न रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु, विषाणु, कीटाणु नाशक पदार्थ, अप्रत्नाशक पदार्थ, रासायनिक खाद्य, कार्बनिक पदार्थ, औद्योगिक संस्थानों से निकले अपशिष्ट तथा व्हाइट माल आदि अनेक पदार्थ हो सकते हैं इन पदार्थों का स्वास्थ्य तथा अर्थ व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता है जल प्रदूषण वर्तमान में एक गंभीर समस्या है घरों के वायित मां कारखाने के अपशिष्ट पदार्थ आदि नदियों और अंत में समुद्र में मिलाए जाते हैं मनुष्य के लिए दिए जल सामान्य रूप से इन्हीं जल स्रोतों से सामान्य उपचार के बाद प्राप्त किया जाता है प्रदूषण जल के सेवन से प्रतिवर्ष लाखों व्यक्ति विभिन्न लोगों को के शिकार हो जाते हैं ऐसा अनुमान है कि पेट के रोग क्यों में काम से कम 50% रोगी दूषित जल के सेवन से ही रोग ग्रस्त होते हैं
जल प्रदूषण का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव:-
जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमें मुख्य है हैजा पेचिस पीलिया टाइफाइड परतीफाइड आदि यह सभी रोग सकारात्मक रूप से फैलते हैं तथा घातक सिद्ध होते हैं प्रदूषण जल एक अन्य प्रकार से भी मनुष्य को प्रभावित करता है हम जानते हैं कि यह संख्या लोग मांसाहारी है तथा मांस प्रताप का एक मनुष्य स्रोत मछलियां एवं अन्य जल जीव है जब जल प्रदूषित हो जाता है तब इन मछलियों के शरीर में भी अनेक विषैले तत्वों का समावेश हो जाता है तथा ऐसे जीवों का मांस खाने में व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न रसायनों से प्रदूषण समुद्री जल में रहने वाली मछलियों को खाने से अंधेपन एवं मस्तिष्क समृद्धि रोगों की आशंका रहती है जल प्रदूषण से हमारे फैसले की प्रभावित होती है प्रदूषण जल द्वारा संचित फसलों को खाने से मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
3.ध्वनि प्रदूषण:-
ध्वनि प्रदूषण का आशय है पर्यावरण में अनावश्यक शोर का व्यापक हो जाना शोर एक वचन ध्वनि है यह सिद्ध हो चुका है किसी और मनुष्य तथा अन्य सभी जीव जंतु पर विपरीत प्रभाव डालता है अतः इसको भी पर्यावरण का प्रदूषण माना जाता है शोर की तीव्रता सरवन शक्ति शारीरिक संतुलन आदि को स्थाई या अस्थाई रूप से हानि पहुंचती है इस प्रकार वायुमंडल में उत्पन्न की गई व्यस्चित ध्वनि जिसका मानव तथा अन्य प्राणियों के श्रवण तंत्र एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ध्वनि शोर प्रदूषण कहलाता है
सोना केवल बातचीत आराम आदि में बाधा उत्पन्न करता है बल्कि यह मानव के स्वास्थ्य तथा व्यवहार को भी प्रभावित करता है अचानक उत्पन्न होने वाली ऊंची ध्वनि कान के पर्दे तथा भीतरी कान में स्थित संवेदी कोशिकाओं को हानि पहुंचती है यदि अधिक लंबे समय तक सो रहे तो सरवन तंत्र को स्थाई अथवा स्थाई रूप में क्षीत हो सकती है सामान्य ऐसा माना जाता है कि अधिक तीव्रता से अचानक उत्पन्न होने वाले शोर नियंत्रण शोर की अपेक्षा अधिक हानिकारक सिद्ध होते हैं शरीर के कारण स्वास्थ्य संबंधित अनेक समस्या उत्पन्न हो जाती है
ध्वनि प्रदूषण का जन्म स्वास्थ्य पर कुप्रभाव :-
ध्वनि प्रदूषण के जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यवस्थित ग्रिफिथ कामत है कि, "शोर व्यक्ति को समय से पहले बुढा कर देता है " हमारे शरीर पर शोर का प्रभाव अनेक प्रभाव से पड़ता है सूर्य ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर होता है तथा उनके कार्य क्षमता घटती है यह विभिन्न दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति बड़ा हो सकता है अर्थात उसकी सुनने की शक्ति समाप्त हो सकती है इस विषय में कहा गया है कि कानों को शोर के कारण कष्ट उठाना पड़ता है क्योंकि शोर के कारण हमारे आराम नहीं कर पाते बताइए अतिरिक्त थकान के शिकार बने रहते हैं कानों के अतिरिक्त ध्वनि प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव व्यक्तियों के हृदय स्नायु मंडल तथा पाचन तंत्र पर भी पड़ता है अत्यधिक शोर के कारण उच्च रक्तचाप श्वसन गति नदी गति में उतार चढ़ाव यात्रा की गतिशीलता में कमी रक्त संचरण में परिवर्तन तथा हृदय पेशी के गुना में परिवर्तन हो जाता है शोर से शरीर एवं मानसिक तनाव बढ़ता है तथा तांत्रिक संबंधित व्यक्तियों की आशंका बनी रहती है अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के कारण निश्चय ग्रंथ हो सकता है तथा व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं शोर के कारण ही व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा तथा झूला पूर्ण हो सकता है
पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव :-
पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पर अपने लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इसे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है
4. मृदा प्रदूषण:-
मृदा प्रदूषण का अर्थ है भूमि या मिट्टी का दूषित हो जाना मृदा प्रदूषण के अंतर्गत मुख्य रूप से उसे भूमि के दूषित होने का अध्ययन किया जाता है जैसे कृषि कार्यों के लिए अर्थात फैसले उगाने के लिए प्रयोग किया जाता है वास्तव में प्रदूषण जल तथा वायु के कारण मर्दा भी प्रदूषित हो जाती है वर्षा अत्यधिक के जल के साथ यह प्रदूषण मर्दा में आ जाते हैं जनसंख्या की वृद्धि के साथ-साथ अधिक फसल पैदा करने के लिए भूमि की आवश्यकता बढ़ाने या बनाए रखने के लिए रासायनिक अवरोह को का उपयोग किया जाता है इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के कीटाणु नाशक है अब ताराणसी आदि पदार्थ भी फसलों पर छिड़क जाते हैं यह सब पदार्थ मर्दा के साथ मिलकर हानिकारक प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं
इस प्रकार मृदा को दूषित करने में घरेलू अपमर्जकों वही कमल वाहित जल उद्योगों के अभीष्ट पदार्थ तेल कीटाणु नाशक अप प्रदन्नासी रेडियोधर्म में पदार्थ तथा गर्म पदार्थ के निकशासन आदि की प्रमुख भूमिका रहती है
मुंद्रा प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव :-
मृदा प्रदूषण का मनुष्य के जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है
मृदा प्रदूषण के कारण भूमि की उत्पादन शक्ति कम हो जाती है
खाद पदार्थ में पूर्ण शुद्धता नहीं रहती
D. D. T के अधिक प्रयोग से खाद पदार्थ में विश् उत्पन्न हो जाता है
मृदा प्रदूषण फसलों की वृद्धि को रोक देता है
मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय:-
वृक्षारोपण का अभियान चलाना चाहिए
वनों के विनाश पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए
खेतों में मेड बंदी करनी चाहिए
भूमि की चकबंदी करनी चाहिए
5. रेडियोधर्मी प्रदूषण:-
परमाणु शक्ति से भी प्रदूषण बढ़ता है परमाणु परीक्षणों के दौरान होने वाले रेडियोधर्मी विकिरण सीजन स्वास्थ्य प्रभावित होता है इससे वायु जल व पृथ्वी प्रदूषित होती है इस प्रकार का प्रदूषण अधिक भैया वह होता है द्वितीय विश्व युद्ध में नागासाकी और हिरोशिमा शहर पर हुए परमाणु बम के विस्फोट से लाखों व्यक्तियों को कल के मुंह में जाना पड़ा तथा बहुत से अपंग हो गए और बहुत से रोग उनकी संतानों में भी उत्पन्न हुए
रेडियो धर्मी प्रदूषण के रोकने के उपाय- इस प्रदूषण से बचने के लिए न्यू क्लियर परीक्षण जान शून्य स्थान पर किए जाने चाहिए तथा कानून का उल्लंघन करने वाले को दंड दिया जाना चाहिए
पर्यावरण तथा प्रदूषण में अंतर
पर्यावरण तथा प्रदूषण को भली भंते समझ लेने के पश्चात प्रसन्न यह उड़ता है कि इसमें क्यों अंतर है यदि हम दोनों ही विषयों का गहराई से अध्ययन करें तो पता चलता है कि दोनों एक दूसरे से विपरीत है जहां पर्यावरण संरक्षण मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है वहीं प्रदूषण चाहे जल का हो ध्वनि अथवा जनसंख्या का होनारात्मक प्रभाव डालता है दूसरे शब्दों में पर्यावरण मानव जीव जंतु जंगली जानवर पेड़ पौधे एवं दुर्लभ देवी की को जीवित रखते हुए उनकी संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि करता है वहीं दूसरी ओर प्रदूषण मानव जीव जंतु पेड़ पौधे तथा दुर्लभ जातियों को नष्ट करता है जिससे पारिस्थितिक तंत्र है संतुलित बन जाता है संक्षेप में यही मुख्य अंतर है
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प्रस्तावना:- पर्यावरण प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत अवकरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है पृथ्वी पर प्रकृति ने मानव के रहने योग्य व्यवस्था की है प्रकृति के द्वारा प...
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प्रस्तावना:-
पर्यावरण प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत अवकरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है
पृथ्वी पर प्रकृति ने मानव के रहने योग्य व्यवस्था की है प्रकृति के द्वारा पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक संसाधन प्राप्त हुए हैं परंतु मनुष्य स्वयं पृथ्वी का पर्यावरण बिगड़ने के लिए उत्तरदाई है तेजी में बढ़ते हुए जनसंख्या के कारण जंगलों को खेती तथा आवास के लिए काटा जा रहा है और पर्यावरण का संतुलन खराब होता जा रहा है अधिक वन काटने से वर्षा कम होने लगी है जिससे पीने के पानी का स्तर घटता जा रहा है साथ ही शुद्ध वायु ना मिल जाने के लिए कारण अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही है यही कारण है कि प्रतिदिन पर्यावरण का संतुलन बढ़ता ही जा रहा है
पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषाएं :-
पर्यावरण दो शब्दों 'परि' तथा 'आवरण' से मिलकर बना है 'परि' का अर्थ है 'चारों' ओर तथा 'आवरण' का अर्थ है 'ढका हुआ' अर्थात वह सभी दिशाएं जो हमारे वायुमंडल को चारों ओर से ढके होती है, पर्यावरण कहलाती है
मेकाइवर अप पेज के अनुसार :-
पर्यावरण प्रकृति द्वारा उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत एवं विकिरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है
जिस्बार्ट के अनुसार :-
पर्यावरण वह है जो एक वस्तु को चारों ओर से घिरे हुए हैं तथा उसे पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है
प्राकृतिक पर्यावरण:-
प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत जलवायु भूमि की उत्पादक क्षमता जंगल मैदान पहाड़ झड़ने समुद्र आकाश सूर्य चंद्रमा तारे पशु पक्षी कीट पतंगे आदि सभी सम्मिलित किए जाते हैं प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान किया जाता है
सोरोकिन के अनुसार:-
भौगोलिक पर्यावरण का संबंध ऐसी प्राकृतिक दशाओं से है जो मनुष्य से प्रभावित हुए बिना अपना कार्य करती है तथा जो मनुष्य के अस्तित्व में कार्यों से स्वतंत्र रहते हुए स्वयं परिवर्तित रहती है
पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग
पर्यावरण के व्यवस्थित अध्ययन के लिए उसका समुचित वर्गीकरण नितांत आवश्यक है सुविधा के लिए संपूर्ण पर्यावरण को तीन वर्गों या भागों में विभाजित किया गया है, यह है, (i) प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण, (ii) सामाजिक पर्यावरण तथा (iii) सांस्कृतिक पर्यावरण पर्यावरण के इन तीनों भागों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
1.प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण
मनुष्य के जीवन में विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों एवं कारक ही प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण का निर्माण करते हैं इस प्रकार पृथ्वी आकाश वायु जल वनस्पति मौसम तथा सांसद जीव जंतु आदि सम्मिलित रूप से प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण के निर्माण में मनुष्य की कोई भूमिका नहीं है, परंतु मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषण में बहुत अधिक योगदान दिया है मानव जन जीवन पर सार्वजनिक प्रभाव प्राकृतिक पर्यावरण का ही पड़ता है
2. सामाजिक पर्यावरण :-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक से प्रभावित होता है समाज संबंधी सभी कारक सम्मिलित रूप में व्यक्ति के लिए सामाजिक पर्यावरण का निर्माण करते हैं इस प्रकार संपूर्ण सामाजिक ढांचा ही सामाजिक पर्यावरण है व्यावहारिक दृष्टिकोण से परिवार पास पड़ोस समुदाय खेल तथा विद्यालय आदि सभी सामाजिक पर्यावरण है व्यक्ति के जीवन पर सामाजिक पर्यावरण का भी विशेष प्रभाव पड़ता है
3. सांस्कृतिक पर्यावरण:-
मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं का समग्र रूप तथा परिवेश की सांस्कृतिक पर्यावरण है सांस्कृतिक पर्यावरण के दो रूप स्वीकार किए गए हैं जिन्हें क्रमश भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण और भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है भौतिक पक्ष के अंतर्गत आवास औद्योगिक संस्थान उपयोग के उपकरण एवं वस्तुएं तथा मशीन आदि सम्मिलित की जाती है अब भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण के अंतर्गत धर्म संस्कृतियों भाषण लिपि और कानून तथा प्रथम को सम्मिलित किया जाता है मनुष्य के अतिरिक्त अन्य प्राणियों के पास सांस्कृतिक पर्यावरण नहीं है
पर्यावरण से लाभ तथा जनजीवन पर होने वाले प्रभाव:-
पर्यावरण संसार में रहने वाले प्रत्येक प्राणी के पूरे क्रियाकलाप को प्रभावित करता है अतः पर्यावरण से निम्नलिखित लाभ होते हैं
प्रत्येक प्राणी के जीवन का आधार स्वच्छ वायु है यह हमें स्वच्छ पर्यावरण से ही प्राप्त होती है
अच्छे पर्यावरण से भूमि की उभरा शक्ति बढ़ती है
शुद्ध जल की प्राप्ति शुद्ध पर्यावरण से होती है शुद्ध जल प्राणी का अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आवश्यक है
वातावरण में पेड़ पौधे उचित तथा आवश्यक नमी प्रदान करते हैं
वनों जंगलों को ना काटने पर प्राकृतिक संतुलन नहीं होता
वनों से विभिन्न प्रकार की औषधीय जड़ी बूटियां आदि प्राप्त होती है प्राप्त होती है
पर्यावरण का जन जीवन पर प्रभाव
आज हमारे चारों ओर का वातावरण दूषित हो गया है विभिन्न प्रकार की जानलेवा बीमारियां उत्पन्न हो रही है पेड़ पौधे को प्रतिदिन काटा जा रहा है और परिणाम स्वरूप आज पर्यावरण प्रदूषण के प्रति विश्व स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है परंतु इस प्रकार के कार्यों का पूर्ण उत्तरदायित्व मनुष्य पर ही है मनुष्य ने अपने वर्तमान स्वार्थ हेतु भविष्य को नष्ट कर दिया तथा जीव जंतु को भी हानि पहुंचाई है
बढ़ती हुई जनसंख्या धूल एवं दुआ उड़ते वहां वायुमंडल में फैलती हुई हानिकारक रक गैस पर्यावरण को दूषित कर रही है ऐसा लगता है कि यदि इन पर रोक ना लगाई गई तो यह संपूर्ण धरती जीवन वहीं हो जाएगी अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने प्राकृतिक संस्थाओं का उपयोग एक सीमा में करें तथा पर्यावरण संतुलन को बनाए रखें ऐसा करने से प्राणी मात्र को लाभ मिलेगा तथा प्रत्येक प्राणी का अस्तित्व भी बना रहेगा
प्रदूषण का अर्थ:-
मनुष्य ही नहीं अपितु सभी सजीवों का जलवायु और मंत्र से बहुत ही गहरा संबंध है जब कभी कोई ऐसा बाहरी पदार्थ इसमें आ जाता है जिसके कारण इसके भौतिक और रासायनिक गुना में परिवर्तन हो जाता है एवं इसके गुना में हुए परिवर्तनों से मानव तथा उसके उपयोगी जीवो को हानि पहुंचती है तो उसे प्रदूषण कहते हैं
इन प्रकार जलवायु और मंत्र के भौतिक एवं जैविक गुना में होने वाले ऐसे परिवर्तनों को जो मनुष्यों के जीवन उसके रहन-सहन है उसके महत्व के अन्य जीवों को हानि पहुंचाते हैं प्रदूषण कहते हैं
जब पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न होता है तो प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ सूखा भूकंप जल प्रदूषण वायु प्रदूषण मुद्रा प्रदूषण भूमि में कटाव आना और विभिन्न ऋतु में अंतर आ जाता है इसके परिणाम स्वरुप जनसंख्या वृद्धि गरीबी गंदगी अपराध भयंकर रोग उत्पन्न होते हैं
प्रदूषण एक ऐसी आवाज सुनने स्थित है जिसमें भौतिक रासायनिक एवं जैविक परिवर्तनों के द्वारा हवा जल और भूमि अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता को हो बैठे हैं और इस कारण जीवन प्रक्रिया बाधित होती है और प्रगति रुक जाती है आज प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर है कि इसे रोकने के तत्काल प्रयास किया जाए अतः बच्चों को कक्षाओं में पर्यावरण की शिक्षा दी जानी चाहिए और साथ ही उनकी आदत और रुचियां एवं अभी वृत्तियों को पर्यावरण सुधार में लगाना भी आवश्यक है
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कुछ घरेलू सामान्य दुर्घटना एवं उनका उपचार :- जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में सामान्य दुर्घटना के बारे में बताया है तो इस ब्लॉक में भी हम कुछ ऐसी ही जानकारी प्राप्त करेंगे पानी में डूबना :- यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए उसके पश्...
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कुछ घरेलू सामान्य दुर्घटना एवं उनका उपचार :-
जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में सामान्य दुर्घटना के बारे में बताया है तो इस ब्लॉक में भी हम कुछ ऐसी ही जानकारी प्राप्त करेंगे
पानी में डूबना :-
यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए उसके पश्चात उसका उपचार करना चाहिए
उपचार:-
रोगी के गले वस्त्र को उतार देना चाहिए रोगी को पेट के बाल लाकर उसकी कमर को दबाकर पानी निकालना चाहिए यदि विश्वास की आवश्यकता हो तो कृत्रिम विधि से स्वास्थ्य देनी चाहिए होश में आने पर रोगी को गर्म दूध या गर्म चाय देनी चाहिए
बिजली का झटका
कभी-कभी अकस्मात बिजली के तारों अथवा पलंग या स्विच को छूने से करंट लग जाता है यह एक खतरनाक दुर्घटना है इसमें मृत्यु तक हो सकती है
उपचार:-
सबसे पहले मैं स्विच बंद कर देना चाहिए रोगी के हाथ पैर को रगड़ना चाहिए कृत्रिम स्वास्थ्य की आवश्यकता होने पर स्वास्थ्य देनी चाहिए रोगी को डॉक्टर को दिखाना चाहिए रोगी को गर्म दूध या चाय देनी चाहिए
सांप का काटना:-
कभी-कभी सांप के काट लेने से रोगी के शरीर में विश करने लगता है अधिकतर यह दुर्घटना गांव या पेड़ पौधों युक्त स्थान अथवा सड़क पर होती है सांप की अनेक जातियां होती है कुछ विषैली होती है तथा कुछ विशेष होते हैं कहा जाता है कि सांप का कांटा व्यक्ति मरता नहीं है उपयुक्त बेहोशी की दशा में उसकी सभी इंदिरा राय निश्चित करिए हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है
लक्षण :-
काटने पर व्यक्ति को चुभन होती है कटे हुए स्थान पर तेज दर्द में सूजन आ जाती है सांस तथा नदी की गति धीमी हो जाती है कटे हुए स्थान का रंग का लाया नील पड़ने लगता है सांप के दांतों का निशान कटे हुए स्थान पर दिखाई देता है हाथ पैरों में ऐंठन होती है रोगी बेहोश होने लगता है तथा उसे नींद आती है नीम की पत्तियां खिलाने पर वह मीठी लगने लगती है
उपचार:-
सबसे पहले कटे हुए स्थान पर1/4 इंच गहरा प्लस जरा लगा देना चाहिए विषैली रक्त को दबा दबा कर निकाल देना चाहिए कटे हुए व्यक्ति को सोने नहीं देना चाहिए कृति में स्वास्थ्य देने की आवश्यकता पड़ने पर रोगी को कृत्रिम स्वास्थ्य देनी चाहिए सांप द्वारा कटे हुए व्यक्ति को गर्म दूध अथवा गर्म चाय देनी चाहिए
बिच्छू का काटना:-
बिच्छू एक जहरीला जीव है बिच्छू की पूछ में डंक होता है बिच्छू का विश्व नदी तंत्र को प्रभावित करता है
लक्षण:-
कटे हुए स्थान पर भयंकर दर्द होता है कटे हुए स्थान पर जलन होती है शरीर में अदन होती है तथा कटा हुआ स्थान आज की तरह जलता है
उपचार:-
कटे हुए स्थान से 2 इंच ऊपर पट्टी कसकर बांधनी चाहिए कटे हुए स्थान पर बर्फ लगाने चाहिए लोगों के इंजेक्शन लगवाना चाहिए
पागल कुत्ते का काटना:-
पागल कुत्ते के काटने से हाइड्रोफोबिया नामक रोग हो जाता है पागल कुत्ते की जीव सदैव वहां निकली रहती है तथा तेजी से हफ्ता है पागल कुत्ता किसी व्यक्ति को काटने के 10 15 दिन बाद मर जाता है पागल कुत्ते के काटने से मानसिक शक्ति से हो जाती है
लक्षण :-
गार्डन में तीर दर्द होता है रोगी की मानसिक शक्ति नष्ट हो जाती है रोगी को पानी से डर लगता है रोगी कुत्ते की तरह आवाज निकलने लगता है
उपचार:-
कुत्ते के काटने के तुरंत एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए घाव को पोटेशियम परमैंगनेट से धोना चाहिए घाव को कार्बनिक एसिड से जला देना चाहिए
ट्यूनिकेट :-
यह एक प्रकार का यंत्र है जो हाथ पैर के दबाव बिंदु पर दबाव डालकर रखते स्राव रोकने के उपयोग में आता है डुप्लीकेट बढ़ने के लिए मोटा कपड़ा अच्छा होता है कपड़े को पद बनाकर दबाव बिंदु के ऊपर रखकर बांध देना चाहिए तथा टानिकेट को दबाव बिंदु पर दो बार लपेटकर गांठ बांध देनी चाहिए तथा लगी हुई कार्ड पर एक लकड़ी का टुकड़ा रखकर दोबारा गांठ लगा देते हैं
ट्यूनिकेट का उपयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
तेजी से बहते हुए रक्त को रोकने के लिए ट्यूनिकेट का प्रयोग करते हैं
टानिकेट को ज्यादा देर तक कम नहीं रहने देना चाहिए
यह क्रिया हानिकारक भी हो सकती है तो इसका प्रयोग सावधानी के साथ करना चाहिए
नकसीर
गर्मी चोट रक्त नलिका के फटने या रक्त की न्यूनता के कारण नाक से रक्त बहने को नकशील फोड़ना कहते हैं ऐसी अवस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सियां चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उससे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तक पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करनी चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देना चाहिए रोगी को बिना हिले दुले उसके नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए नासिर के बंधन होने पर कुछ देर तक नाक दबाए या नाक के अंदर हुई भरते रोगी को धैर्य है संतान देते रहना चाहिए और नाक साफ नहीं करनी चाहिए सब प्रयासों के सफल होने पर तुरंत चिकित्सा की सलाह लेनी चाहिए
शहर की मक्खियों का काटना:-
शहर की मक्खी अथवा पर के काटने पर उसे स्थान पर बहुत पीड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर बंक रह जाता है शहर की मक्खी अथवा पर के काटने से उसके ढंग को पी या चाबी की सहायता से बाहर निकाल देना चाहिए कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्प्लिट सोना अथवा कुरेशी तक सोडा मिलना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गाव के ऊपर तुरंत एक पट्टी कसकर बांध देने से विश्व को फैलने से रोका जा सकता है
दम घुटने :-
धुएं कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य विशाली गैसों से युक्त हवा में सांस लेने डूबने फांसी लगाने आदि कर्म से दम घुटने लगता है
विषैली हवा में सांस लेने से दम घुटने पर व्यक्ति को तुरंत खुली वह ताजी हवा में लेटा देना चाहिए उसकी पंखे से हवा करें और उसके आसपास भेद इकट्ठा न होने दे
डूबने से दम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर के लिए वस्त्र उतार कर उसे कंबल में लपेट देना चाहिए तब कृत्रिम विधि से उसे स्वाद देनी चाहिए उसे पीने के लिए गर्म चाय कॉफी या दूध देना चाहिए
फांसी लगाने से दम घुटने पर व्यक्ति को थोड़ा ऊपर उठकर उसकी गर्दन से रस्सी का फंदा निकालना चाहिए फिर उसे लाकर क्रिसमस विधि से सांस देनी चाहिए
उपरोक्त प्राथमिक चिकित्सा के प्रसाद डॉक्टर से सिर्फ ही परामर्श आवश्यक कर लेना चाहिए
धन्यवाद:-?
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