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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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औद्योगिकरण का अर्थ

औद्योगिकरण  का अर्थ
 औद्योगिकरण का अर्थ  सामान्य शब्दों में लोगो को की स्थापना को  औद्योगिकरण  कहते हैं जब नए-नए उद्योग की स्थापना होती है जब लोगो को की श्रृंखला की है व्यापक प्रक्रिया औद्योगिकरण कहलाता है उद्योग एक प्रकार की आर्थिक क्रिया है इसका तात्पर्य विज्ञान एवं तकनीकी की सहायता से वस्तु में नवीन उपयोगिताओं का निर्माण करना है अतः विनिर्माण उद्योग को की स्थापना को औद्योगिकरण कहा जाता है परंतु यह है संकुचित अर्थ... Read More
 औद्योगिकरण का अर्थ  सामान्य शब्दों में लोगो को की स्थापना को  औद्योगिकरण  कहते हैं जब नए-नए उद्योग की स्थापना होती है जब लोगो को की श्रृंखला की है व्यापक प्रक्रिया औद्योगिकरण कहलाता है उद्योग एक प्रकार की आर्थिक क्रिया है इसका तात्पर्य विज्ञान एवं तकनीकी की सहायता से वस्तु में नवीन उपयोगिताओं का निर्माण करना है अतः विनिर्माण उद्योग को की स्थापना को औद्योगिकरण कहा जाता है परंतु यह है संकुचित अर्थ है औद्योगीकरण वह समूची प्रक्रिया है जिसके द्वारा देश की संपूर्ण आर्थिक संरचना में परिवर्तन किया जा सकते हैं किसी भी देश का आर्थिक विकास तभी संभव है जब उसका औद्योगिक विकास किया जाता है यह सत्य है कि औद्योगिक विकास के बिना आर्थिक विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती   धन्यवाद✍️
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[email protected] 28 Jun 2026 33 Views

लोकसभा का कार्यकाल

 लोकसभा का कार्यकाल   भारतीय संविधान के अनुच्छेद 882 के अनुसार लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है किंतु इस अवधि के पूर्व केंद्रीय मंत्री परिषद प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा भांग की जा सकती है आपातकाल की घोषणा होने पर संसद विधि द्वारा लोकसभा का कार्यकाल बढ़ा सकती है किंतु यह अवधि एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी 1976 में लोकसभा का कार्यकाल दोबारा एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाय... Read More
 लोकसभा का कार्यकाल   भारतीय संविधान के अनुच्छेद 882 के अनुसार लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है किंतु इस अवधि के पूर्व केंद्रीय मंत्री परिषद प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा भांग की जा सकती है आपातकाल की घोषणा होने पर संसद विधि द्वारा लोकसभा का कार्यकाल बढ़ा सकती है किंतु यह अवधि एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी 1976 में लोकसभा का कार्यकाल दोबारा एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया था हमारे देश में कई बार प्रधानमंत्री की सलाह पर लोकसभा को समय से पूर्व भंग भी किया जा चुका है धन्यवाद✍️
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[email protected] 27 Jun 2026 37 Views

मानसून का अर्थ

 मानसून का अर्थ  मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मोहसिन शब्द से हुई है जिसका तात्पर्य मौसम या रितु है मौसम का वर्तन मानसूनी जलवायु की प्रमुख विशेषता है भारत में इस प्रकार की हवाएं वर्ष में दो बार उच्च वायु भर से निम्न वायु भर की ओर चलती है ग्रीष्म ऋतु में यह हवाएं समुद्र से स्थल की ओर चलती है जबकि शीत ऋतु में यह हवाएं स्थल से समुद्र की ओर बहती है ग्रीष्म ऋतु तथा शीत ऋतु के मौसम में मध्य पवनों... Read More
 मानसून का अर्थ  मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के मोहसिन शब्द से हुई है जिसका तात्पर्य मौसम या रितु है मौसम का वर्तन मानसूनी जलवायु की प्रमुख विशेषता है भारत में इस प्रकार की हवाएं वर्ष में दो बार उच्च वायु भर से निम्न वायु भर की ओर चलती है ग्रीष्म ऋतु में यह हवाएं समुद्र से स्थल की ओर चलती है जबकि शीत ऋतु में यह हवाएं स्थल से समुद्र की ओर बहती है ग्रीष्म ऋतु तथा शीत ऋतु के मौसम में मध्य पवनों की दिशा में 120 डिग्री का अंतर पाया जाता है इन दोनों की न्यूनतम गति 3 मीटर प्रति सेकंड होती है इसलिए इन्हें मानसूनी पवन कहते हैं  धन्यवाद✍️
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[email protected] 27 Jun 2026 40 Views

ओजोन परत की क्षीणता

ओजोन परत की क्षीणता
 ओजोन व्रत की क्षेण ता   ओजोन परत को पृथ्वी का  छाता या रक्षा कवच कहते हैं ओजोन परत समताप मंडल में पृथ्वी से लगभग 12 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपस्थिति रहती है आदर्श रूप में ओजोन परत की मोटाई निश्चित तप वायदा पर निश्चित होती है तथा मौसम में परिवर्तन के कारण बदलती रहती है बसंत रितु फरवरी- अप्रैल मैं सबसे ज्यादा एवं वर्षा ऋतु जुलाई से अक्टूबर में सबसे कम रहती है ओजोन पर सूर्य विकिरण की पराबैंगनी कि... Read More
 ओजोन व्रत की क्षेण ता   ओजोन परत को पृथ्वी का  छाता या रक्षा कवच कहते हैं ओजोन परत समताप मंडल में पृथ्वी से लगभग 12 से 25 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपस्थिति रहती है आदर्श रूप में ओजोन परत की मोटाई निश्चित तप वायदा पर निश्चित होती है तथा मौसम में परिवर्तन के कारण बदलती रहती है बसंत रितु फरवरी- अप्रैल मैं सबसे ज्यादा एवं वर्षा ऋतु जुलाई से अक्टूबर में सबसे कम रहती है ओजोन पर सूर्य विकिरण की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है पराबैंगनी करने जीवन के लिए अनेकों तरह से हानिकारक होती है पराबैंगनी किरणों से त्वचा का कैंसर मोतियाबिंद जैसे विभिन्न लोगों में बढ़ोतरी होती है तथा उत्परिवर्तन प्रतिरोधक क्षमता में कमी होती है धन्यवाद✍️
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[email protected] 26 Jun 2026 40 Views

ग्रीन हाउस प्रभाव

ग्रीन हाउस प्रभाव
 ग्रीन हाउस प्रभाव   पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित कुछ गैसें पृथ्वी के चारों ओर एक आवरण तैयार करती है जो सूर्य से आने वाली करने के लिए तो पार्क में है लेकिन पृथ्वी से होने वाले तप विकिरण के लिए अप्रगाम में है इन गैसों का प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है इन गैसों में मुख्यतः मीथेन गैस वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 प्रमुख है जो वायुमंडल का 1% से भी काम हिस्सा है वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस की उपस्थि... Read More
 ग्रीन हाउस प्रभाव   पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित कुछ गैसें पृथ्वी के चारों ओर एक आवरण तैयार करती है जो सूर्य से आने वाली करने के लिए तो पार्क में है लेकिन पृथ्वी से होने वाले तप विकिरण के लिए अप्रगाम में है इन गैसों का प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है इन गैसों में मुख्यतः मीथेन गैस वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 प्रमुख है जो वायुमंडल का 1% से भी काम हिस्सा है वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस की उपस्थिति पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाती है पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिक अनुसंधान से यह सिद्ध हुआ है कि जहां इन गैसों की वायुमंडल में उपस्थित नगरनिय है वहीं उनकी बढ़ती मात्रा के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि भी हुई है ऐसा अनुमान है कि वर्ष 1807 से पृथ्वी का तापमान 4 डिग्री सैलरी बढ़ा है तथा अनुमान है कि अगले 25 वर्षों तक यह बढ़ोतरी 5 डिग्री तक हो सकती है  पृथ्वी के बढ़ते तापमान का प्रभाव पर्यावरण पर स्पष्ट दृष्टिगोचक होने लगा है अध्ययन बताते हैं कि गंगोत्री ग्लेशियर प्रतिवर्ष लगभग 1 मीटर पीछे जा रहा है इसी प्रकार समुद्रीय टेट लाखों के जल मग्न होने का संकट बढ़ता जा रहा है  भारत विश्व के उन प्रमुख 10 देश में शामिल है जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं इन गैसों का उत्सर्जन प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों कर्म से होता है खनिज ईंधन का अधिक प्रयोग वनों की कटाई खेती बाड़ी के बढ़ते प्रतिमान कुछ प्रमुख कारण है जिसमें ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रोटोकालोन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं हालांकि बढ़ते औद्योगीकरण के कारण यह उपाय कितने कराकर सिद्ध होंगे इसका उत्तर अभी कल के गर्भ में है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 25 Jun 2026 59 Views

बचत का बजट

बचत का बजट
 बचत का बजट   बजट का बजट काफी उत्तम कृष्ण का बजट होता है ऐसे बजट मेंआय वव्य से कम होता है अतः व्यक्ति परिवार की आय में से बचत कर सकते में सफल होता है बचत का बजट परिवार के आर्थिक स्थिति को सूडान डाटा प्रदान करता है बचत करके परिवार अपने भविष्य की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकता है इस प्रकार बचत का बजट सर्वोत्तम बजट माना जाता है  धन्यवाद✍️ Read More
 बचत का बजट   बजट का बजट काफी उत्तम कृष्ण का बजट होता है ऐसे बजट मेंआय वव्य से कम होता है अतः व्यक्ति परिवार की आय में से बचत कर सकते में सफल होता है बचत का बजट परिवार के आर्थिक स्थिति को सूडान डाटा प्रदान करता है बचत करके परिवार अपने भविष्य की आवश्यकताओं को भी पूरा कर सकता है इस प्रकार बचत का बजट सर्वोत्तम बजट माना जाता है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 24 Jun 2026 50 Views

घाटे का बजट

घाटे का बजट
 घाटे का बजट  घाटे का बजट वह बजट होता है जिसमें व्यक्ति की आमदनी तो कम होती है परंतु उसका वव्य अधिक हो जाता है इससे अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए वह कर्ज लेता है या अपनी बचत के धान का उपयोग करता है इस प्रकार का बजट घाटे का बजट कहलाता है इस प्रकार के बजट का परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पूरा असर पड़ता है क्योंकि व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस जाता है   धन्यवाद✍️ Read More
 घाटे का बजट  घाटे का बजट वह बजट होता है जिसमें व्यक्ति की आमदनी तो कम होती है परंतु उसका वव्य अधिक हो जाता है इससे अतिरिक्त खर्चों को पूरा करने के लिए वह कर्ज लेता है या अपनी बचत के धान का उपयोग करता है इस प्रकार का बजट घाटे का बजट कहलाता है इस प्रकार के बजट का परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पूरा असर पड़ता है क्योंकि व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस जाता है   धन्यवाद✍️
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[email protected] 24 Jun 2026 54 Views

संतुलित बजट किसे कहते हैं आईए जानते हैं

संतुलित बजट किसे कहते हैं आईए जानते हैं
 संतुलित बजट किसे कहते है   संतुलित बजट उसे बजट को कहा जाता है जिसमें वव्य आय के बराबर ही होता है अर्थात पारिवारिक खर्चों को पूरा करने के लिए व्यक्ति को ना तो कर्ज लेना पड़ता है और ना ही वह कुछ भविष्य के लिए बचा पाता है उसकी जितनी आमदनी होती है व्वय भी उसका लगभग उतना ही हो जाता है दूसरे शब्दों में है भी कहा जा सकता है कि संतुलित बजट उसे बजट को कहते हैं जिसमें विभिन्न स्रोतों से वह जितनी आय अर्जित... Read More
 संतुलित बजट किसे कहते है   संतुलित बजट उसे बजट को कहा जाता है जिसमें वव्य आय के बराबर ही होता है अर्थात पारिवारिक खर्चों को पूरा करने के लिए व्यक्ति को ना तो कर्ज लेना पड़ता है और ना ही वह कुछ भविष्य के लिए बचा पाता है उसकी जितनी आमदनी होती है व्वय भी उसका लगभग उतना ही हो जाता है दूसरे शब्दों में है भी कहा जा सकता है कि संतुलित बजट उसे बजट को कहते हैं जिसमें विभिन्न स्रोतों से वह जितनी आय अर्जित करता है दूसरी तरफ पारिवारिक दायित्व की पूर्ति करते हैं समय उनकी शमशाद अर्जित आए हुए हो जाती है इस प्रकार के बजट का परिवार की आर्थिक स्थिति पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है  धन्यवाद
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[email protected] 24 Jun 2026 58 Views

क्यों आते हैं मानसून

क्यों आते हैं मानसून
 क्यों आता है मानसून   बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है  ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चल... Read More
 क्यों आता है मानसून   बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है  ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है दर्शन मानसून एक प्रकार की पढ़ते हैं जो हिंद महासागर से चलकर भारत के तटीय क्षेत्रों में पहुंचती है क्योंकि यह पढ़ने कम होती है इसलिए जब यह समुद्र के ऊपर से चलती है तो भारी मात्रा में जलवाष्प को रोक लेती है इसकी एक धारा अरब सागर होती हुई पश्चिमी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जबकि दूसरी धारा बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करके पूर्वी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जब यह मानसून पकाने रास्ते में किसी पहाड़ से टकराती है तो यह वर्ष के रूप में बरस जाती है भारत के टट्टी इलाकों में मानसून जून के पहले सप्ताह हुए आ जाता है जबकि अन्य क्षेत्रों में है जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई तक ही आ  पाता है  भारत में दो प्रकार की मानसून पढ़ने प्रभावित है अरब सागर के मानसून पढ़ने और बंगाल की खाड़ी की मानसून पढ़ने पहले धारा के कारण समूचे महाराष्ट्र गुजरात केवल व तमिलनाडु में वर्षा होती है तो दूसरी शाखा के कारण से समूचे भारत में खूब बारिश होती है दिल्ली में दोनों की शाखाएं बारिश के लिए जिम्मेदार है भारत में सबसे अधिक वर्षा मेघालय के मोहसिन राम में होती है यहां पर 12 21 सेमी वार्षिक वर्षा रिकार्ड की गई है इससे पहले चेरापूंजी में 1102 सेमी वर्षा को सर्वाधिक माना जाता था मानसिंह राम चेरापूंजी के पश्चिम में लगभग 16 किमी दूर है   मानसून के कारण कोलकाता में 119 सेमी पटना में 105 सेमी इलाहाबाद में क्षेत्र सेमी और दिल्ली में 56 सेमी वर्षा होती है भारत का पूर्वी तट विशेष रूप से तमिलनाडु तक दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण वर्ष प्राप्त नहीं करता है सितंबर के दूसरे सप्ताह तक दक्षिण पश्चिम मानसून उत्तरी भारत से लोग ने लगता है मानसून के लौट के साथ ही निम्नलिखित परिवर्तित होते हैं  बादल खत्म हो जाते हैं  आकाश स्वच्छ हो जाता है  दिन का तापमान कुछ बढ़ जाता है  राकेश सुखद वह सुहावनी हो जाती है  दैनिक तापांतर अधिक हो जाता है  भारत में सबसे अधिक बारिश पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग उत्तर पूर्व में अप हिमालय क्षेत्र और मेघालय की पहाड़ियों पर होती है परिधि पर भारत में केवल 60 सेमी वर्षा ही होती है भारत में सबसे कम वर्षा पश्चिमी राजस्थान के किनारे और पश्चिमी घाट के पूर्वी किनारे पर होती है भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए हमारे लिए मानसून वेद महत्वपूर्ण होता है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 23 Jun 2026 37 Views

ज्वार भाटे क्यों आते हैं

 ज्वार भाटे क्यों आते हैं  आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीचे उतरने को... Read More
 ज्वार भाटे क्यों आते हैं  आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीचे उतरने को भाटा कहते हैं  ज्वार भाटी की उत्पत्ति का कारण चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति है गुरुत्वाकर्षण द्वारा संपूर्ण पृथ्वी सूर्य तथा पृथ्वी की ओर खींचती है इसका प्रभाव स्थल की अपेक्षा जल पर अधिक होता है ज्वार भाटे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं  उच्च ज्वार भाटा  निम्न ज्वार भाटा  ब्रहत ज्वार भाटा   लघु ज्वार भाटा  ज्वार भाटे हमारे लिए बेहद कम की चीज है जिन बंदरगाहों पर जल काम होता है वहां ज्वार के कारण ही जहाज बंदरगाह तक पहुंच पाते हैं यहां से जहाज भाटे के साथ वापस गहरे समुद्र में आ जाता है मछली पकड़ने वाले नाविक ज्वार के साथ खुले समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं और बातें के साथ सुरक्षित तट पर लौट आते हैं ज्वार भाटे की वापसी लहरें समुद्री तट पर बसे नगरों की सारी गंदगी को बहाकर ले जाती है ज्वार भाटी के कारण समुद्री जल गतिशील रहता है जिससे वह हमेशा साफ बना रहता है  आजकल तो ज्वार भाटे से बिजली भी पैदा की जाती है उसे ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं फ्रांस तथा जापान में जो आर्य ऊर्जा का काफी प्रयोग किया जाता है आजकल भारत में भी ज्वारीय ऊर्जा पैदा करने के प्रयास किया जा रहे हैं गंगा डेल्टा के सुंदरवन से जो ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त की जाने लगी है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 22 Jun 2026 36 Views