ग्रीन हाउस प्रभाव
पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित कुछ गैसें पृथ्वी के चारों ओर एक आवरण तैयार करती है जो सूर्य से आने वाली करने के लिए तो पार्क में है लेकिन पृथ्वी से होने वाले तप विकिरण के लिए अप्रगाम में है इन गैसों का प्रभाव ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है इन गैसों में मुख्यतः मीथेन गैस वह कार्बन डाइऑक्साइड गैस CO2 प्रमुख है जो वायुमंडल का 1% से भी काम हिस्सा है वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैस की उपस्थिति पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाती है पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिक अनुसंधान से यह सिद्ध हुआ है कि जहां इन गैसों की वायुमंडल में उपस्थित नगरनिय है वहीं उनकी बढ़ती मात्रा के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि भी हुई है ऐसा अनुमान है कि वर्ष 1807 से पृथ्वी का तापमान 4 डिग्री सैलरी बढ़ा है तथा अनुमान है कि अगले 25 वर्षों तक यह बढ़ोतरी 5 डिग्री तक हो सकती है
पृथ्वी के बढ़ते तापमान का प्रभाव पर्यावरण पर स्पष्ट दृष्टिगोचक होने लगा है अध्ययन बताते हैं कि गंगोत्री ग्लेशियर प्रतिवर्ष लगभग 1 मीटर पीछे जा रहा है इसी प्रकार समुद्रीय टेट लाखों के जल मग्न होने का संकट बढ़ता जा रहा है
भारत विश्व के उन प्रमुख 10 देश में शामिल है जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं इन गैसों का उत्सर्जन प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों कर्म से होता है खनिज ईंधन का अधिक प्रयोग वनों की कटाई खेती बाड़ी के बढ़ते प्रतिमान कुछ प्रमुख कारण है जिसमें ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रोटोकालोन के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों के नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं हालांकि बढ़ते औद्योगीकरण के कारण यह उपाय कितने कराकर सिद्ध होंगे इसका उत्तर अभी कल के गर्भ में है
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Vanshika
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