कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं

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कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं

 कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-

 क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है 

 आस और कुहरा क्यों बनते हैं यह समझने के लिए पहले हमें संगठन की प्रक्रिया समझनी होगी जल की गैसीय अवस्था के तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की क्रिया को संगठन कहते हैं आधार वायु के ठंडा होने पर संगठन होता है 

 दिन के समय पृथ्वी गर्म हो जाती है और रात्रि के समय यह ठंडी हो जाती है कभी-कभी पृथ्वी का ताल इतना अधिक ठंडा हो जाता है कि उसे छूने वाली वायु का तापमान पोशाक से नीचे गिर जाता है इससे वायु में उपस्थित जलवाष्प का संगठन हो जाता है और वह छोटी-छोटी बूंद के रूप में पौधे की पत्तियां और अन्य वस्तुओं पर जम जाता है इसी को उसे कहते हैं 

 अब बात कोहरा की वायुमंडल की निचली परत में स्त्री धुलकंद हुए के कारण तथा संगीत सुषमा जल पिंडों को कुहरा कहते हैं वायु का तापमान पोषण से भी नीचे होने पर कोहरे का निर्माण होता है विकिरण सब वहां तथा कर्म व ठंडी वायु के मिलने से वायु उसे सीमा तक ठंडी हो जाती है कि कोहरे का निर्माण हो सके इसमें केवल एक किलोमीटर की दूरी तक ही हम देख सकते हैं कोहरे का हल्का रूप ढूंढ कहलाता है ढूंढ के समय दक्षता एक कमी से दो किमी तक हो सकती है ढूंढ सहयोगरिया एवं सूर्यास्त के समय नदियों तालाबों जिलों और सागर के किनारे बनती है

 धन्यवाद

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