अपने सड़क के किनारे स्कूल में और खेत आदि में हरे भरे वृक्ष जरुर देखे होंगे क्या वह वृक्ष हमेशा साल भर ऐसे ही हरे भरे रहते हैं? नहीं ना! जी हां प्रत्येक रख साल में एक बार जरूर अपने पत्ते गिरा देते हैं कुछ वृक्ष एक साथ अपनी हत्या गिरते हैं तो कुछ वृक्ष गलती तीन कुछ पत्तियां गिरा देते हैं क्या कभी आपने सोचा है की वृक्ष रखने पड़ते क्यों गिरते हैं
दर्शन वृक्ष दो प्रकार के होते हैं सदाबहार और डिसाइड्यूअस जो वृक्ष तीन-चार साल में एक बार अपनी हत्या गिरते हैं उन्हें सदाबहार वृक्ष कहते हैं कुछ वृक्ष ऐसे भी होते हैं जो प्रत्येक साल शरद ऋतु में अपनी प्रत्यय गिरा देते हैं इन्हें डिसाइड्यूअस वर्क कहते हैं बात सुनने में अजीब लग सकती है लेकिन सत्य यही है कि वृक्ष अपनी रक्षा करने के लिए अपनी पत्ती गिरा देते हैं
हम जानते हैं की पत्तियों की सतह के बस पोस्ट सर्जन नमक क्रिया लगातार होती रहती है इस क्रिया में वृक्ष काजल वापस बनकर हवा में उड़ाता रहता है कभी-कभी वृक्ष में पानी की कमी हो जाती है ऐसे में भी यदि लगातार वृक्ष पोस्ट सजन की क्रिया होती रहे तो वृक्ष जल की कमी से शॉप जाएंगे वृक्ष से जल की हानि रोकने के लिए जरूरी है कि वृक्ष पर काम से कम पत्तियां हो ताकि कम से कम वाष्पोत्सर्जन हो
जब वृक्ष को पाने की बचत करने की आवश्यकता पड़ती है तो वह अपनी प्रत्येक गिरा देते हैं पेड़ों से पत्तियों का गिरना भी एक जटिल प्रक्रिया है जब पत्तियों को गिराना होता है तो वृक्ष की शाखा और पट्टी के बीच एक परत बन जाती है इसे विलियन व्रत कहा जाता है यह प्रति धीरे-धीरे तने और पट्टी के बीच के सभी संपर्क खत्म कर देती है जी जीवाणु कुछ ही समय में बत्ती इतनी कमजोर हो जाती है की हवा के जोर या झटका आदि से भी पट्टी गिर जाती है
कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो साथ से पट्टी के अलग होने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं अब सैनिक एसिड ऐसा ही एक रासायनिक पदार्थ है वाहनों से निकलने वाले धुएं में इस रसायन की काफी मात्रा होती है यही कारण है कि सड़कों के किनारो के वर्षों से प्रत्यक्ष झड़ जाती है क्योंकि पत्तियां ही वृक्ष के लिए भोजन का निर्माण करती है इसलिए पत्तियों की अनुपस्थिति में वृक्ष सुख जाते हैं कितनी आश्चर्य की बात है कि पानी की बचत करने के लिए पौधे अपने पत्ते गिरा देते हैं
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