आपने अक्सर देखा होगा कि काले रंग की एक छाया आपके साथ-साथ चलती है आप जहां भी जाते हैं यह पीछे-पीछे चली आती है आईए जानते हैं कि क्या रहस्य छिपा है इस परछाई के पीछे वास्तव में परछाई भौतिक विज्ञान या प्रकाश की के एक सिद्धांत के कारण बनती है और हमारे साथ चलती है
आईए जानते हैं परछाई के इस रहस्य को हम जानते हैं कि कुछ वस्तुओं के तो प्रकाश आर पार चला जाता है जबकि कुछ वस्तुओं के आर पर प्रकाश जा नहीं पता जिन वस्तुओं के आर पर प्रकाश आराम से चला जाता है उन्हें पारदर्शी वस्तु कहते हैं जैसे शिक्षा ठीक इसी प्रकार जिन वास्तु के आर पर प्रकाश नहीं जा सकता है उन्हें अपारदर्शी कहते हैं जैसे गेट का टुकड़ा किताबें धातु की सीट आदि
जब किसी अपारदर्शी वस्तु पर किसी एक तरफ से प्रकाश पड़ता है तो आया परदेसी वस्तु प्रकाश के आरपार नहीं जाने देती है जिस कारण प्रकाश के आने की दिशा के विपरीत वास्तु के पीछे अंधेरा साक्षर जाता है यह अंधेरा उसी आकार में होता है जी आकार की अपारदर्शी वस्तु होती है इसी अंधेरे को परछाई या छाए रहते हैं परछाई की स्थिति प्रकाश की दिशा पर निर्भर करती है
परछाई तभी बनती है जब प्रकाश किसी किनारे में आता है यदि प्रकाश वास्तु के ऊपर से आए तो परछाई नहीं बनती इसका कारण यह है कि ऊपर से प्रकाश आने पर वास्तु के चारों ओर प्रकाश पहुंच जाता है यही कारण है कि सुबह के समय जब सूर्य पूर्व से उगता है तो पूर्व से हमारी तरफ प्रकाश आता है जिस कारण हमारी परछाई काफी लंबी होती है जैसे-जैसे सूरज ऊपर की ओर चढ़ता जाता है हमारी परछाई की लंबाई कम होती जाती है जब दोपहर के समय सूर्य ठीक हमारे सर के ठीक ऊपर होता है तो परछाई बिल्कुल समाप्त हो जाती है यही प्रक्रिया दोपहर बाद दोहराई जाती है दोपहर बाद सूरज धीरे-धीरे पश्चिम की और नीचे जाने लगता है जैसे-जैसे सूरज पश्चिम की ओर जाता है वैसे-वैसे हमारी परछाई की लंबाई भी बढ़ती जाती है शाम के समय जब सूरज पूरी तरह से डूब जाता है तो प्रकाश आना पूरी तरह से बंद हो जाता है यही कारण है कि शाम के समय परछाई नहीं बनती
धन्यवाद
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