क्यों बहते हैं आंसू

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 क्यों कहते हैं आंसू 

 शायद ही कोई व्यक्ति हो जो कभी-कभी रोता नहीं हूं बच्चे तो लगभग हर समय ही रोते रहते हैं हालांकि हर व्यक्ति के रोने के कारण अलग-अलग होते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि हम सभी किसी न किसी अवस्था पर रोटी जरूर है रोने के साथ जो चीज सबसे ज्यादा जुड़ी है वह है आंसू रोते ही हमारी आंखों से आंसू टपकने लगते हैं क्या कभी आपने सोचा है कि आंसू होते क्या है और यह क्यों निकालते हैं

 रो यह मत हम आपको बता देते हैं कि आंसू क्यों निकालते हैं हमारी आंखों के किनारे पर लिखरीमल नामक एक ग्रंथि होती है जब किसी कारणवश हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है तो लिख क्रिमिनल ग्रंथि से एक तरल पदार्थ का श्रवण होने लगता है यह तरल पदार्थ ही आंसू होता है जब भी हम रोते हैं तो हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है जिस कारण आंखों से आंसू टपकने लगते हैं यह आंसू एक विशेष प्रकार की प्रोटीन के बने होते हैं इस प्रोटीन को प्रोलेक्टिन कहा जाता है

 वैसे-वैसे अलग कर्म से निकले आंसू का रासायनिक संगठन भी अलग-अलग होता है जब दुख आदि किसी भावनात्मक कारण से हम रोते हैं तो निकालने वाले आंसुओं का रासायनिक संगठन अलग होते हैं जबकि धुएं आदि के कारण निकले वाले आंसू अलग प्रकार के होते हैं भावनात्मक कर्म से निकलने वाले एसुस में प्रोलेक्टिन प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है क्योंकि महिलाओं में प्रोलेक्टिन प्रोटीन का स्तर पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है इसलिए भावनात्मक कर्म से महिलाओ की आंखों से आंसू जल्दी टपकने लगते हैं 

 एक मजेदार बात और बहुत अधिक खुशी की अवस्था में भी हमारे आंखों से आंसू टपकने लगते हैं इसका कारण यह है कि अत्यधिक खुशी के कारण आंखों में उत्तर जाना पैदा होती है जिससे लकरीमल ग्रंथि पर दबाव पड़ता जाता है और आंसू टपकने लगते हैं अब आप बताइए कि आप दुख के कारण रोना चाहते हैं या खुशी के मारे

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