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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन


 यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन  व्यापारिक मार्ग:-  प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्... Read More

 यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन

 व्यापारिक मार्ग:-

 प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्ग से इराक तुर्की वेनिस और जिनेवा से व्यापार होता था दूसरा मार्ग लाल सागर से अलेक्जेंड्रिया का था जहां से समुद्र द्वारा वेनिस और जिनेवा को जाया जाता था तीसरा मार्ग मध्य एशिया से मिर्च और फिर यूरोप के लिए था

 इस प्रकार से यूरोप के सभी क्षेत्रों में भारत की वस्तुओं के वितरण के लिए वेनिस और जिनेवा प्रमुख व्यापारिक केंद्र थे इटली ने भारत की प्रमुख वस्तुओं के व्यापार पर अपना एकाधिकार जमाए रखने के लिए यूरोप की शक्तियों की व्यापार में हिस्सेदारी को रोक दिया

धन्यवाद


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आएइ जानते हैं कि प्लीहा क्या है


 प्लीहा   इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है  धन्यवाद Read More

 प्लीहा 

 इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है 

धन्यवाद


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कोल्लम ग्रंथि क्या है हम इसके बारे में जानेंगे


 कोल्लम ग्रंथि   कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं  धन्यवाद Read More

 कोल्लम ग्रंथि 

 कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं 

धन्यवाद


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अग्नाशय के बारे में जाने


 अग्नाशय के बारे में जाने  यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद Read More

 अग्नाशय के बारे में जाने

 यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं

धन्यवाद


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आएइ जाने की पिताशय से क्या है


 पिताशय क्या है  यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है  धन्यवाद Read More

 पिताशय क्या है

 यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है

 धन्यवाद


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Whst is Duodenum


Duodenum:-  amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain&n... Read More

Duodenum:-

 amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain 

 thank you 


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हम आज जानेंगे की छोटी आंत क्या है


 छोटी आत   आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत   छोटी आंत   ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतल... Read More

 छोटी आत 

 आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत 

 छोटी आंत 

 ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार वही होता है जो ग्रास मिली तथा आमाशय की दीवार में होते हैं लेकिन अंतर केवल पैसे सूत्रों के फैलाव की दिशा में ही होता है छोटी आंत की बाहरी परत को सिस आवरण कहते हैं यह अत्यंत सूक्ष्म होता है और भीतरी पर तो से बिल्कुल सत रहता है इसके बाद वाली परत पेशी सूत्रों की होती है इस प्रकार मांस सूत्र आंतरिक को गोलाकार घिरे हुए होते हैं

धन्यवाद


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आए इ जानते हैं कि यकृत के बारे में


 यकृत ( liver)  यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त क... Read More

 यकृत ( liver)

 यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त को लाने का कार्य करती है यह रक्त नलिका या ग्रंथ धमनी कहलाती है यह महाधमनी की एक शाखा है यह महाधमनी से शुद्ध रक्त लाकर यकृत का पोषण करती है दूसरी नाली अशुद्ध रक्त वाहिका शिरा है जो पोर्टल शिरा कहलाती है यह शिरा उन सिरप से मिलकर बनती है जो अमाशा ए पलीहा तथा अग्नाशय से अशुद्ध रक्त लेकर लौटती है 

 धन्यवाद


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आए इ जाने की पाचन तंत्र का अर्थ


 पाचन तंत्र का अर्थ  सभी प्राणी नियमित रूप से आहार ग्रहण करते हैं परंतु उत्तम पोषण के लिए केवल आहार ग्रहण करना ही पर्याप्त नहीं होता इसके लिए ग्रहण किए गए आहार का पूर्ण रूप से पाचन तथा पचे हुए आहार के पोषक तत्वों का आवश्यकता अनुसार अवशोषण भी आवश्यक होता है इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए सभी प्राणियों के शरीर में आहार के पाचन एवं शोषण के लिए अलग से एक तंत्र या संस्थान होता है जिसे शरीर रचना... Read More

 पाचन तंत्र का अर्थ

 सभी प्राणी नियमित रूप से आहार ग्रहण करते हैं परंतु उत्तम पोषण के लिए केवल आहार ग्रहण करना ही पर्याप्त नहीं होता इसके लिए ग्रहण किए गए आहार का पूर्ण रूप से पाचन तथा पचे हुए आहार के पोषक तत्वों का आवश्यकता अनुसार अवशोषण भी आवश्यक होता है इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए सभी प्राणियों के शरीर में आहार के पाचन एवं शोषण के लिए अलग से एक तंत्र या संस्थान होता है जिसे शरीर रचना शास्त्र की भाषा में पाचन तंत्र या पाचन संस्थान कहते हैं पाचन तंत्र के कुछ भाग आहार के पाचन का कार्य करते हैं तथा कुछ भाग पोषक तत्वों के अवशोषण का कार्य करते हैं इस प्रकार कुछ आहार की पाचन संबंधी यांत्रिक क्रियो को पूरा करते हैं जैसे की डांट तथा आमाशय इसी प्रकार पाचन तंत्र में कुछ ऐसे अंग भी है जो आहार की पाचन संबंधी रासायनिक क्रियो को संपन्न करने में सहायक होते हैं इन अंगों के अतिरिक्त कुछ ऐसे अंग भी है जो बचे हुए आहार में से पोषक तत्वों के अवशोषण का कार्य करते हैं शरीर में विद्वान यह सभी अंग सम्मिलित रूप से कार्य करते हैं तथा इन सांसद अंगों को ही सम्मिलित रूप में पाचन तंत्र या पाचन संस्थान कहते हैं इस प्रकार निष्कर्ष स्वरूप हम कह सकते हैं कि शरीर द्वारा ग्रहण किए गए आहार पाचन तथा पोषक तत्वों के अवशोषण के विभिन्न कार्यों को पूरा करने वाले सांसद अंगों की समग्रता को पाचन तंत्र कहा जाता है

 धन्यवाद


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साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लग रहा है इसके बारे में हम आपको बताएंगे


 साल का पहला चंद्र ग्रहण :-  3 मार्च को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जो भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा क्योंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य मन होगा इसलिए इसका धार्मिक सूतक काल भी प्रभावित रहेगी जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी  चंद्र ग्रहण खत्म स्थान से लेकर दान तक जरूर करें यह जरूरी काम ​​​​​ चंद्र ग्रहण 2026 आज साल 2026 का पहला चं... Read More

 साल का पहला चंद्र ग्रहण :-

 3 मार्च को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जो भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा क्योंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य मन होगा इसलिए इसका धार्मिक सूतक काल भी प्रभावित रहेगी जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी

 चंद्र ग्रहण खत्म स्थान से लेकर दान तक जरूर करें यह जरूरी काम

​​​​​ चंद्र ग्रहण 2026 आज साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है आईए जानते हैं सूतक काल कब से शुरू होगा ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या ना करें और ग्रहण के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

 चंद्र ग्रहण 2026:-

 आज साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को सिर्फ खगोलीय घटना नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है तब चंद्र ग्रहण होता है इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है इसलिए इस ब्लड मून भी कहा जाता है

 पंजाब के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है भारतीय समय के अनुसार ग्रहण दोपहर 3:20 से शुरू होगा लेकिन उसे समय भारत में चंद्रमा दिखाई नहीं देगा भारत में चंद्रमा का उदय शाम लगभग 6: 26 से 6:32 बजे के बीच होगा और इस समय ग्रहण का अंतिम चरण चल रहा होगा ग्रहण करीब6:46 से 6:47 बजे के बीच समाप्त हो जाएगा यानी भारत में यह चंद्र ग्रहण केवल 15 से 20 मिनट के लिए ही दिखाई देगा

 धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों और व्यक्तियों पर पड़ता है ग्रहण के समय मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है जबकि खाना बनाना भोजन करना और शुभ कार्य शुरू करना वर्जित बताया गया है ग्रहण से पहले सूतक काल भी लगता है जिसे अशोक समय माना जाता है सूतक काल में विशेष सावधानी बरतने और भगवान का नाम लेने की सलाह दी जाती है

 आईए जानते हैं कि सूतक काल कब से शुरू होगा ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या ना करें और ग्रहण के बाद किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

 ग्रहण के बाद स्नान और शुद्धिकरण क्यों है महत्वपूर्ण

 धर्म शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान और शुद्धिकरण केवल परंपरा नहीं बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति का तरीका है इससे तन मन और घर सभी स्थानों पर सकारात्मक वातावरण बना रहता है चंद्र ग्रहण 2026 का सही पालन करने से ग्रहण का नारा आत्मक प्रभाव दूर होता है और घर और आत्मा दोनों शुद्ध रहते हैं छोटे-छोटे कदम अपना कर आप दिन को सुरक्षित और शुभ बना सकते हैं

  आराध्य देवता को गंगाजल से स्नान करने के बाद पूजा करें

 हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण और उसका सूतक काल समाप्त होते व्यक्ति को तन और मन से पवित्र होने के बाद अपने पूजा घर की सफाई करना चाहिए और अपने आराध्य देवता को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान करने के बाद उसकी विधि विधान से पूजा करनी चाहिए अपने पूजा घर की शुद्धि के लिए वहां पर गंगाजल अवश्य छिड़क दे 

 चंद्रमा से जुड़ी चीज करें दान 

 हिंदू धर्म में किसी भी दोस्त को दूर करने के लिए दान को अत्यंत ही फलदाई माना गया है ऐसे में चंद्र ग्रहण के बाद व्यक्ति को चंद्रमा से जुड़ी चीज जैसे चावल चीनी सफेद रंग के कपड़े चांदी आदि का विशेष रूप से दान अपने समाधि के अनुसार करना चाहिए 

 पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें

 यदि संभव हो तो चंद्र ग्रहण के बाद किसी पवित्र नदी सरोवर या समुद्र में जाकर स्नान करना चाहिए आपके लिए ऐसा करना मुश्किल हो तो आप घर में नहाने वाले पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें

 ग्रैंड वाले कपड़े बदले 

 किसी भी ग्रहण के बाद यदि संभव हो तो ग्रहण वाले कपड़े को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर देना चाहिए अगर ऐसा ना कर सके तो उसे कपड़े को धुलने के बाद ही पहनना भूल कर भी उसे दोबारा पहनने की गलती ना करें

 चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें

 हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद व्यक्ति को सबसे पहले स्नान करना चाहिए स्नान करके ग्रहण वाले कपड़ों को उतार देना चाहिए क्योंकि उसमें ग्रहण की नारात्मक ऊर्जा समाहित होती है

 धन्यवाद

 

 

 


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