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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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हिमपात क्यों होता है

हिमपात क्यों होता है
 हिमपात क्यों होता है  क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है  हम जानते हैं... Read More
 हिमपात क्यों होता है  क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है  हम जानते हैं कि पृथ्वी के धरातल से लगातार वापसी कारण होता रहता है जिससे बादल बन जाते हैं यह बदल ही वर्ष के रूप में बरसते हैं बादल बनने के समय जलवाष्प का संगठन जब हिमांक से भी कम ताप पर होता है तो वह तरल अवस्था बूंद में आए बिना सीधे ही ठोस अवस्था में बदल जाता है इसे इन कहते हैं शुरुआत में यह हम महीन कणों के रूप में होती है लेकिन बाद में इनका आकार बड़ा होने लगता है जब कानों का आकार बड़ा हो जाता है तो यह कान बोतल पर धोनी हुई हुई की भांति गिरने लगती है जिस कारण बर्फ की एक चादर सी बीच जाती है   कई बार हिमपात के साथ वर्षों की बूंदे भी गिरती है इसे सहीम दृष्टि कहते हैं यह वर्ष की बूंद के हमने या हम कानों के पिघलने जल के पूर्ण है हमने से होता है वास्तव में यह जलवृष्टि और हम वृष्टि का मिश्रण होता है सहीम वृष्टि ऐसी ही दृष्टि को भी कहा जाता है जिसमें हम के कुछ रवि पिंगला होते हैं जब बोतल के पास वाली वायु का तापमान ही मांग से ऊंचा होता है तो सही दृष्टि होती है जब बर्फ की कड़ी बड़ी गलियों की बौछार होती है तो इसे ओलावृष्टि कहते हैं आमतौर पर बरसात के दौरान ही  ही ओले पड़ते हैं धन्यवाद
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[email protected] 21 Jun 2026 37 Views

कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं

कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं
 कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-  क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है   आस और कुहरा... Read More
 कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-  क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है   आस और कुहरा क्यों बनते हैं यह समझने के लिए पहले हमें संगठन की प्रक्रिया समझनी होगी जल की गैसीय अवस्था के तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की क्रिया को संगठन कहते हैं आधार वायु के ठंडा होने पर संगठन होता है   दिन के समय पृथ्वी गर्म हो जाती है और रात्रि के समय यह ठंडी हो जाती है कभी-कभी पृथ्वी का ताल इतना अधिक ठंडा हो जाता है कि उसे छूने वाली वायु का तापमान पोशाक से नीचे गिर जाता है इससे वायु में उपस्थित जलवाष्प का संगठन हो जाता है और वह छोटी-छोटी बूंद के रूप में पौधे की पत्तियां और अन्य वस्तुओं पर जम जाता है इसी को उसे कहते हैं   अब बात कोहरा की वायुमंडल की निचली परत में स्त्री धुलकंद हुए के कारण तथा संगीत सुषमा जल पिंडों को कुहरा कहते हैं वायु का तापमान पोषण से भी नीचे होने पर कोहरे का निर्माण होता है विकिरण सब वहां तथा कर्म व ठंडी वायु के मिलने से वायु उसे सीमा तक ठंडी हो जाती है कि कोहरे का निर्माण हो सके इसमें केवल एक किलोमीटर की दूरी तक ही हम देख सकते हैं कोहरे का हल्का रूप ढूंढ कहलाता है ढूंढ के समय दक्षता एक कमी से दो किमी तक हो सकती है ढूंढ सहयोगरिया एवं सूर्यास्त के समय नदियों तालाबों जिलों और सागर के किनारे बनती है  धन्यवाद
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[email protected] 20 Jun 2026 38 Views

पवन क्यों चलती है

पवन क्यों चलती है
 पवन क्यों चलती है  ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाली वायु को... Read More
 पवन क्यों चलती है  ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाली वायु को पवन कहते हैं  पवन धरातल पर वायुदाब में 33 विषमताओं के कारण चलती है जिस प्रकार से जल उच्च स्थान से निम्न स्थान की ओर बहता है ठीक उसी प्रकार से पवन भी उच्च वायु भर वाले क्षेत्र से निम्न वायु भर वाले क्षेत्र की ओर चलती है कहा जा सकता है कि पवन वायुदाब की विषमताओं को संतुलित करने में प्रकृति के प्रयास को दर्शाती है यदि पृथ्वी स्थिर होती है और उसका धरातल समतल होता है तो पवन उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से सीधे निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की और संताप रेखाओं पर समकोण बनाती हुई चलती है   क्योंकि पृथ्वी का धरातल समतल नहीं होता है और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती रहती है इसलिए पवन कहीं शक्तियों के प्रभाव से चलती है पवन की गति और दिशा को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं  दाब प्रवणता बाल   करी और लिस्ट प्रभाव  अभिकेंद्रीय त्वरण  भू घर्षण   कुछ पढ़ने धीमी गति से चलती है तो कुछ पढ़ने इतनी तेजी गति से चलती है कि अपने रास्ते में आने वाली प्रत्येक चीज को तहस-नहस कर देती है कुछ पढ़ने पश्चिम दिशा से चलती है तो कुछ पूर्व की दिशा से  धन्यवाद
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[email protected] 19 Jun 2026 41 Views

धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं

धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं
 धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं  हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार... Read More
 धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं  हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार का होगा यह कोशिका के प्रमोशन पर उपस्थित जींस ही तय करते हैं इसके अलावा हमारी त्वचा की गहराई में उपस्थित मेलानिन नमक पिगमेंट वर्णन के कारण भी हमारा रंग काला पड़ जाता है सूर्य की तेज धूप से हमारी त्वचा को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है इसलिए तेज धूप से बचाने को त्वचा में मेलेनिन नामक एक पिगमेंट पाया जाता है यह पिगमेंट काले रंग का होता है जब हम लंबे समय तक धूप में काम करते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन शुरू हो जाता है मेलानिन के असर से हमारी त्वचा का रंग काला पड़ जाता है इसके विपरीत जब हम काफी समय तक धूप में नहीं निकलते हैं अधिकतर घर के भीतर ही रहते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन नहीं होता और हमारी त्वचा गोरी दिखाई देती है  यही कारण है कि कल होने से बचने के लिए हम धूप में छाते का प्रयोग करते हैं पृथ्वी पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पूरे दिन तेज धूप बनी रहती है ऐसे क्षेत्रों में लोग काले रंग के होते हैं इसके विपरीत कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहां दिन की अवधि बहुत कम होती है और तेज धूप के स्थान पर हमेशा सुहावना मौसम बना रहता है ऐसे क्षेत्र के निवासी गोरे रंग के होते हैं यही कारण है कि अफ्रीका के लोग बिल्कुल काले रंग के होते हैं जबकि इंग्लैंड के लोग गोरे होते हैं अब तो आप समझ गए होंगे कि मेलानिन नमक पिगमेंट के कारण हम कल या गोरे होते हैं  धन्यवाद
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[email protected] 18 Jun 2026 65 Views

ऐसे बना वायुमण्डल

ऐसे बना वायुमण्डल
 ऐसे बना वायुमंडल  पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे?  पृथ्वी का वर्तमान वायुमंडल पा... Read More
 ऐसे बना वायुमंडल  पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे?  पृथ्वी का वर्तमान वायुमंडल पांच अरब साल पहले ठंडे करो मुख्य रूप से लोहे एवं मैग्नीशियम सिलिकेट लोगे एवं ग्रेफाइट की अभिवृत्ति द्वारा शुरू हुए बहुत धीमी परिवर्तनों का परिणाम है उसे समय पृथ्वी इतनी छोटी थी कि यह वायुमंडल को अपने आप से जोड़कर नहीं रख सकती गुरुत्वाकर्षण विखंडन तथा रेडियम प्रीति के कारण पृथ्वी गर्म हुई और इससे पृथ्वी के पदार्थ में भिन्नता है परिणाम स्वरुप एक नए वायुमंडल और जलमंडल की रचना हुई इस प्रकार बना वायुमंडल ऑक्सीजन से वंचित था परंतु इसमें निम्नलिखित पदार्थ मौजूद थे  मीथेन   अमोनिया  कार्बन डाइऑक्साइड  जल वाष्प  वायुमंडल कई गैसों का मिश्रण होता है गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प और धूल के कारण भी उपस्थित होते हैं अधिक मात्रा में उपस्थित ठोस एवं धर्म कानों को सामूहिक रूप से असोसॉल कहते हैं धरातल से लगभग 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक इसमें नाइट्रोजन ऑक्सीजन वह अंग एक समान होती है इनके अतिरिक्त इसमें नियम क्रिप्टन अप जुनून जैसी दुर्बल कैसे भी होती है वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है   वायुमंडल में कुछ मात्रा जल वाष्प की भी होती है जो हमारी जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करती है वायुमंडल में जलवाष्प की औसत मात्रा लगभग दो प्रतिशत होती है और चाय के साथ जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है जलवायु सूर्य से आने वाली उसका के कुछ भाग को अवशोषित कर लेता है तथा पृथ्वी द्वारा विकृत उसका को सजा रखती है इस प्रकार यह एक कंबल का काम करती है इससे धरातल ना ज्यादा गर्म हो पता है और ना ज्यादा ठंडा पृथ्वी की धरातल से लेकर ऊपर तक वायुमंडल एक समान नहीं होता है घनत्व तापमान और गैसों के संगठन के आधार पर वायुमंडल  की सबसे निचली परत सौरमंडल कहलाती है यह लगभग 16 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला रहता है वायुमंडल के इसी भाग में बादल बनते हैं वर्षा होती है और मौसम संबंधित घटनाएं होती है इस प्रकार हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यही सौरमंडल होता है समताप मंडल के ओजोन गैस की मात्रा पाई जाती है हम जानते हैं कि सूर्य करने के अत्यंत खतरनाक पराबैंगनी करने भी होती है समताप मंडल में उपस्थित ओजोन गैस इस खतरनाक पराबैंगनी किरणों को शक लेती है जिस कारण हम पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से बच्चे रहते हैं रेडियो तरंगे परावर्तित होकर आयन मंडल से ही वापस लौटी है वायुमंडल की सबसे बाहरी परत को एक जो स्फीयर कहा जाता है वायुमंडल हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है वायुमंडल हमारी पृथ्वी पर जीवन का आधार है वायुमंडल के बिना हम पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते पूरे सौरमंडल में केवल पृथ्वी पर ही जीवन पाया जाता है और यह सब संभव है सिर्फ वायुमंडल के करण  मौसम तथा जलवायु संबंधित सभी घटनाएं भी वायुमंडल में ही घटती है कहा जा सकता है कि दुनिया के विभिन्न भागों में मिलने वाले अलग-अलग तरह की जलवायु वायुमंडल की ही देन है वायुमंडल हमारे लिए एक आवरण का भी काम करता है जो हमें सूर्य की घातक पराबैंगनी किरणों और तेज तप से भी बचाता है वास्तव में यह वायुमंडल हमारे लिए बहुत काम की चीज है धन्यवाद
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[email protected] 17 Jun 2026 63 Views

हीम नदी किसे कहते हैं

हीम नदी किसे कहते हैं
 हीम नदी किसे कहते हैं  द्रव्य तथा प्रवृत्तियां क्षेत्र में तापमान आमतौर पर बहुत कम होता है जिन क्षेत्रों में तापमान ही मांग से कम होता है वहां वर्ष के स्थान पर हिमपात होता है धोनी हुई दूरी की भांति पत बेहद कोमल होता है लेकिन जब हिमपात की मात्रा अधिक होती है तो नीचे ही हम दबाव के कारण ठोस संगम तथा रविदास बर्फ बन जाती है यह बर्फ अपने भर तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण ढलान के साथ-साथ धीमी गति स... Read More
 हीम नदी किसे कहते हैं  द्रव्य तथा प्रवृत्तियां क्षेत्र में तापमान आमतौर पर बहुत कम होता है जिन क्षेत्रों में तापमान ही मांग से कम होता है वहां वर्ष के स्थान पर हिमपात होता है धोनी हुई दूरी की भांति पत बेहद कोमल होता है लेकिन जब हिमपात की मात्रा अधिक होती है तो नीचे ही हम दबाव के कारण ठोस संगम तथा रविदास बर्फ बन जाती है यह बर्फ अपने भर तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण ढलान के साथ-साथ धीमी गति से नीचे की ओर बहने लगती है इस गतिशील बर्फ को ही हिमानी या हिमनदी कहते हैं  सामान्य नदियों की भांति हिमनदी भी अपरदन परिवहन तथा निक्षेप का कार्य करती है हिमानी अपने अपरदन तथा निष्पक्ष प्रक्रियाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की स्थलाकृति का निर्माण करती है  धन्यवाद
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[email protected] 16 Jun 2026 44 Views

मिट्टी कैसे बनती है

मिट्टी कैसे बनती है
 मिट्टी कैसे बनती है   मिट्टी में लाखों जीवन पालते हैं हम भी मिट्टी में खेल कर ही बड़े हुए हैं क्या कभी आपने सोचा है कि यह मिट्टी आखिर बनती कैसे हैं मिट्टी भीतर पर एक पतली परत के रूप में पाई जाती है जिसका निर्माण चट्टानों के टूटने से प्राप्त हुए खनिज कानून पेड़ पौधों के सड़े गले अंशु आदि से होता है मिट्टी में करोड़ों की संख्या में कीटाणु तथा उनके जैविक पदार्थों पर पढ़ने वाले अगणित जीवाणु भी होते ह... Read More
 मिट्टी कैसे बनती है   मिट्टी में लाखों जीवन पालते हैं हम भी मिट्टी में खेल कर ही बड़े हुए हैं क्या कभी आपने सोचा है कि यह मिट्टी आखिर बनती कैसे हैं मिट्टी भीतर पर एक पतली परत के रूप में पाई जाती है जिसका निर्माण चट्टानों के टूटने से प्राप्त हुए खनिज कानून पेड़ पौधों के सड़े गले अंशु आदि से होता है मिट्टी में करोड़ों की संख्या में कीटाणु तथा उनके जैविक पदार्थों पर पढ़ने वाले अगणित जीवाणु भी होते हैं मिट्टी में जल भी होता है जो पेड़ पौधों को जीवन प्रदान करता है मिट्टी निर्माण के पांच प्रमुख कारण है जो निम्नलिखित है :  आधारित चट्टान अथवा जनक पदार्थ   जलवायु   जैविक पदार्थ  स्थलाकृति   विकास की अवधि   मिट्टी और चट्टान में भी अंतर होता है मिट्टी की उत्पत्ति चट्टानों से होती है जबकि चट्टानों का निर्माण खनिजों से होता है मिट्टी एक जैव पदार्थ है जबकि चट्टानें जब और अजब दोनों प्रकार की हो सकती है मिट्टी केवल धरातलीय पदार्थ है जबकि चट्टान तरह के लिए के अलावा भूगर्भ में भी पाई जाती है मिट्टी के कारण बारीक होते हैं जबकि चट्टानों में बारीक और मोटे दोनों प्रकार के कान होते हैं  मिट्टी को उसके गठन संरचना रूप रंग एवं उर्वरक करता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है संयुक्त राज्य का वर्गीकरण सभी मिशन को 11 मुख्य विभाग और 54 भागों 238 समूह 1922 उप समूह आदि में बांटा जाता है भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर ने भारत की मिट्टियों को वर्गीकरण उत्पत्ति रंग संगठन आदि के आधार पर निम्नलिखित आर्ट वर्गों में विभाजित किया है  जलोढ़ मिट्टी   काली मिट्टी  लाल पीली मिट्टी   लेटराइट मिट्टी  शुष्क मिट्टी  खारि मिट्टी  जैविक मिट्टी  वन मिट्टी   नदी आदि द्वारा बहा कर लाई गई मिट्टी को जलोढ़ मिट्टी कहते हैं यह बेहद उपजाऊ मिट्टी होती है भारत के गंगा जमुना के दो आप क्षेत्र में यही जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है दक्कन के पत्थर में काली मिट्टी की अधिकता है  धन्यवाद
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[email protected] 15 Jun 2026 43 Views

खनिज कठोर क्यों होते हैं

खनिज कठोर क्यों होते हैं
 खनिज कठोर क्यों होते हैं  खनिजों की पहचान उनके कठोरता रंग प्रकाश को परिवर्तित करने की विधि और घनत्व आदि के आधार पर की जाती है खनिज कुलचे प्रकार की क्रिस्टल आकृति वाले होते हैं जो निम्नलिखित है:  त्रीसमलंबाक्ष   दीरसमलंबाक्ष   सेट कोनिया   विषम लंबाश   एकनाताक्ष   त्रिनताक्ष   एक खनिज अटैक किसी अंश तक खुर्जा जाने का प्रतिरोध कर सकती है उसे खनिज की कठोरता कहते हैं खनिज की कठोरता वैज्ञ... Read More
 खनिज कठोर क्यों होते हैं  खनिजों की पहचान उनके कठोरता रंग प्रकाश को परिवर्तित करने की विधि और घनत्व आदि के आधार पर की जाती है खनिज कुलचे प्रकार की क्रिस्टल आकृति वाले होते हैं जो निम्नलिखित है:  त्रीसमलंबाक्ष   दीरसमलंबाक्ष   सेट कोनिया   विषम लंबाश   एकनाताक्ष   त्रिनताक्ष   एक खनिज अटैक किसी अंश तक खुर्जा जाने का प्रतिरोध कर सकती है उसे खनिज की कठोरता कहते हैं खनिज की कठोरता वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होती है खनिज के कठोरता को मुंह के कठोरता मापन से मापा जाता है इसके लिए सबसे मुलायम से सबसे कठोर के क्रम में मापने के लिए कुल 10 मापकों की रचना की गई है 10th सबसे मुलायम खनिज है और उनकी कठोरता एक है इसके विपरीत हीरा सबसे कठोर खनिज है और इसकी कठोरता 10 मापी जाती है  कुछ खनिजों के रंग भी विशेष होते हैं और इन्हीं से इन्हीं पहचाना जाता है भौतिक विशेषताओं के अतिरिक्त खनिजों की पहचान उनके प्रकाश के गुना के आधार पर की जाती है खनिज संसाधनों को कुल चार वर्गों में विभाजित किया जाता है आवश्यक संसाधन ऊर्जा संसाधन धातु संसाधन एवं औद्योगिक संसाधन   
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[email protected] 13 Jun 2026 36 Views

सेल चट्टानें कैसे बनते हैं

सेल चट्टानें कैसे बनते हैं
 सेल चट्टानें कैसे बनते हैं   समानता चट्टान से ऐसे पदार्थ का बोध होता है जो पत्थर की भांति हो लेकिन वैज्ञानिक रूप से में सभी पदार्थ चट्टानें कहलाते हैं जिनसे धरातल की ऊपरी सतह का निर्माण होता है सेल निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है:  आग्नेय चट्टाने   अवसादी चट्टानें   रूपानंदनतरित चट्टाने   अग्नि का अर्थ आज होता है इस प्रकार आग में चट्टान में है जिनका निर्माण पृथ्वी की विधि भाग में उपस्थित... Read More
 सेल चट्टानें कैसे बनते हैं   समानता चट्टान से ऐसे पदार्थ का बोध होता है जो पत्थर की भांति हो लेकिन वैज्ञानिक रूप से में सभी पदार्थ चट्टानें कहलाते हैं जिनसे धरातल की ऊपरी सतह का निर्माण होता है सेल निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है:  आग्नेय चट्टाने   अवसादी चट्टानें   रूपानंदनतरित चट्टाने   अग्नि का अर्थ आज होता है इस प्रकार आग में चट्टान में है जिनका निर्माण पृथ्वी की विधि भाग में उपस्थित गम दर्द के ठंडा होने से हुआ है सभी सालों का मूल पदार्थ गर्म तरल तथा चिपचिपा मैग्मा होता है जब यह मैग्मा दरारों के सहारे ऊपर धरातल पर आता है तो यह ठंडा होकर जम जाता है और आग न चट्टान बन जाती है  पृथ्वी के अधिकतर हिस्से पर अवसादी चट्टानें फैली हुई है नदी वायु जल आदि के कारण पत्थर घिसते रहते हैं जिस कारण तलछट बन जाती है इस ताल छत से ही अवसादी चट्टानें बनती है बलूह पत्थर और चिड़िया और शादी चट्टानें के दो प्रमुख उदाहरण है उदाहरण है बलुआ पत्थर बालू के कानों से बनता है जबकि खड़िया करोड़ सुषमा जीवन के छोटे-छोटे कैल्शियम कार्बोनेट की अवशेषी से बनती है  कुछ चट्टान ऐसी होती है जो किसी अन्य चट्टानों के रूप बदलने से बनती है इन्हें रूपानंदानी चट्टानें कहते हैं पृथ्वी में पाए जाने वाले ताप या दबाव या दोनों के कारण अक्सर अग्नि या अवसादी चट्टानों के रूप रंग कठोरता व गुना आदि में परिवर्तन आ जाता है इस प्रकार परिवर्तित पदार्थ को रूपांतरित चट्टान कहा जाता है कुछ प्रमुख रूपांतरित चट्टानें निम्नलिखित है   संगमरमर  हीरा   फाईलाइट
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[email protected] 12 Jun 2026 47 Views

जावा के लकड़हारा

जावा के लकड़हारा
 जावा के लकड़हारा  जावा में कलंक समुदाय के लोग कुशल लकड़हारा और घुमंतू किसान थे उनका महत्व इस बात से आकर जा सकता है कि 1755 में जब जवा की मातरम रियासत बैठी तो यहां के 6000 कलंक परिवार को भी दोनों राज्यों में बराबर बांट दिया गया उनके कौशल के बगैर सागौन की कटाई कर राजाओं के महल बनाना बहुत मुश्किल था बच्चों ने जब 18वीं साड़ी में वनों पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारंभ किया तब उन्होंने भी कोशिश की की कल... Read More
 जावा के लकड़हारा  जावा में कलंक समुदाय के लोग कुशल लकड़हारा और घुमंतू किसान थे उनका महत्व इस बात से आकर जा सकता है कि 1755 में जब जवा की मातरम रियासत बैठी तो यहां के 6000 कलंक परिवार को भी दोनों राज्यों में बराबर बांट दिया गया उनके कौशल के बगैर सागौन की कटाई कर राजाओं के महल बनाना बहुत मुश्किल था बच्चों ने जब 18वीं साड़ी में वनों पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारंभ किया तब उन्होंने भी कोशिश की की कलंक उनके लिए कम करें 1770 में कलंकों ने एक टच किले पर हमला करके इसका प्रतिरोध किया लेकिन इस विरोध को दबा दिया गया  धन्यवाद
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[email protected] 11 Jun 2026 56 Views