क्यों हिलती है धरती अपने भूकंप के बारे में अवश्य सुना होगा कई बार विभिन्न कर्म से धरती का कुछ हिस्सा हिलने लगता है इस कारण धरती पर तबाही मर जाती है इस घटना को भूकंप कहते हैं जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि पृथ्वी के भीतर विभिन्न प्रकार की भौतिक वारासायनिक क्रिया लगातार चलती रहती है इस कारण धरती के नीचे हलचल का माहौल रहता है क्योंकि चट्टानों और प्लेट परस्पर आपस में टकराती रहती है धरातल के नीचे प्लेटो की यह टकराहट जब एक सीमा से अधिक बढ़ जाती है तो उसका प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगता है और धरती का एक हिस्सा तेजी से हिन लगता है स्पष्ट है कि जब धरातल के एक हिस्से में कंपन होता है तो इस स्थिति को भूकंप कहा जाता है प्लेटो की टकराहट के अलावा भूकंप का एक कारण और है हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी के भीतर छोटी बड़ी चट्टानें तरल बैठोस पदार्थ गैस और धातु एवं भारी मात्रा में है जब धरातल की तरफ से दबाव पड़ता है तो यह चट्टानें खिसकने लगती है चट्टानों के खिसकने की प्रक्रिया के कारण पृथ्वी की सतह को जोरदार धक्का लगता है इस धक्के को ही भूकंप कहा जाता है प्रशांत महासागर के आसपास दक्षिणी अमेरिका में पश्चिमी किनारे और उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी किनारे पर भूकंप पत्रिका आते हैं भूकंप से जान माल की भारी होने लगती है जान माल की यह हनी भूकंप की तीव्रता पर निर्भर करती है पहले भूकंप की तीव्रता को मापने का कोई साधन नहीं था लेकिन अब सिर्फ ग्राफ नामक यंत्र अस्तित्व में आ चुका है आजकल सीस्मोग्राफ की सहायता से ही भूकंप की तीव्रता मापी जाती है इस रिएक्टर पैमाने से भी मापा जाता है यदि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर चार तक होते हैं तो उससे कोई ज्यादा नुकसान नहीं होता है लेकिन यदि भूकंप की तीव्रता 6 से ज्यादा हो तो जान माल की काफी हानि होती है 7 से अधिक तीव्रता के भूकंप तो भारी भारी भारी तबाही मचाते हैं ऊंची ऊंची इमारत धराशाई हो जाती है फूल गिर जाते हैं और रेलवे सड़क यातायात पूरी तरह से ठप हो जाता है विश्व के अधिकांश भूकंप से 50 से 100 किलोमीटर की गहराई पर पैदा होते हैं जिस स्थान पर भूकंप पैदा होता है उसे उद्गम केंद्र या फॉक्स कहते हैं यह बिंदु धरातल के नीचे गहराई में स्थित होता है इस फॉक्स के ठीक ऊपर पृथ्वी के धरातल पर स्थित स्थान को अधिक केंद्रीय या ऑफिस सेंटर कहा जाता है भूकंप की तरंगे अधिक केंद्र से चारों दिशाओं में चलती है भूकंप की तीव्रता अधिकेंद्र पर सर्वाधिक होती है और जिस जिस हम अधिकेंद्र से दूर होते हैं भूकंप की तीव्रता भी कम होती जाती है भूकंप को मापने वाली सीस्मोग्राफ से हजारों किलोमीटर दूर पैदा होने वाले छोटे से भूकंप को भी रिपोर्ट किया जा सकता है यह इतना अधिक संवेदनशील होता है कि यह उसे कंपन को भी रिकॉर्ड कर लेता है जिसकी अनुभूति मानव नहीं कर सकता हालांकि भूकंप की भविष्यवाणी करना बेहद कठिन कार्य है लेकिन कुछ वैज्ञानिक आधारों पर उसकी लगभग ठीक-ठाक भविष्यवाणी की जा सकती है विश्व में लगभग 68% भूकंप प्रशांत महासागर के तटीय भागों में आते हैं इसके अलावा मैं किसी को भूमध्य सागर हिमालय क्षेत्र लाल सागर और मृत सागर के आसपास भी काफी भूकंप आते हैं धन्यवाद
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