बचपन में आपने जरूर सुना होगा की मछली को जल से बाहर निकलने पर वह मर जाती है यह बात बिल्कुल सत्य है की मछली को अगर जल से बाहर निकाल ले तो उसकी मौत हो जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है
कितने आश्चर्य की बात है कि यदि हम सास ना रोके तो क्षण भर के लिए भी हम पानी के भीतर नहीं रह सकते हैं जबकि मछली घंटे पानी के भीतर मजे से तैरती रहती है यदि हम बिना सांस रुक जल के भीतर चले जाए तो सांस के साथ अपनी शरीर के भीतर चला जाएगा और हमारी मौत हो जाएगी मछली के मामले में इसका बिल्कुल उल्टा होता है यदि हम मछली को जल के बाहर निकाल ले तो दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है
इसका कारण मछली का श्वसन तंत्र होता है हमारी तरह मछलियां ना तो नाक से सांस लेती है और ना ही उसके पास फेफड़े होते हैं सांस लेने के लिए मछलियां गर्ल फेफड़े का प्रयोग करती है इन गर्ल फेफड़ों की उपस्थिति के कारण मछली के साथ लेने की प्रक्रिया कुछ अलग प्रकार की होती है सांस लेने के लिए मछली में पानी भर लेती है इस पानी में जो ऑक्सीजन होती है उसे गर्ल फेफड़े सक लेते हैं ऑक्सीजन रहित पानी गाल फेफड़ों के द्वारा ही मुंह से बाहर निकल जाता है गर्ल फेफड़ों में रक्त भी बेहतर रहता है इस प्रकार गर्ल फेफड़ों में रक्त और ऑक्सीजन का मिश्रण हो जाता है गर्ल फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त पूरे शरीर में फैल जाता है
शरीर के अंगों में उत्तकों में कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से मिल जाती है यहां से यह रक्तगल फेफड़ों तक पहुंच जाता है जहां शिकार बनता है ऑक्साइड शरीर के बाहर निकल जाते हैं स्पष्ट है की मछली के सांस लेने की प्रक्रिया में पानी का बहुत अधिक महत्व होता है यही कारण है कि जब हम मछली को जल से बाहर निकलते हैं तो वह सांस नहीं ले पाती है और तड़प तड़प कर मर जाती है
धन्यवाद
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