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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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दांतों की स्वच्छता

दांतों की स्वच्छता
 दांतों की स्वच्छता   दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाया जा सकता है और... Read More
 दांतों की स्वच्छता   दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाया जा सकता है और दांतों का शेष कार्य आंतों को करना पड़ता है ऐसा होने से पहले पेट संबंधित रोग हो जाते हैं और मुंह से बदबू आने लगती है यदि दांतों की सुरक्षा का स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है तो कैरिज व्यापार या नामक रोग हो जाते हैं   धन्यवाद
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[email protected] 12 Feb 2026 47 Views

आंतों की स्वच्छता

आंतों की स्वच्छता
 आंतों की स्वच्छता  जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह पाचन तंत्र के विभिन्न भागों द्वारा बचाया जाता है और भोजन में विद्वान सभी पौष्टिक तत्व ग्रहण कर लिए जाते हैं शेष बचे हुए व्यर्थ पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना आवश्यक होता है जिसे माल के रूप में बड़ी आंत द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है   जो व्यक्ति ठीक समय पर सो जाते हैं उनकी आंखे तुरंत साफ हो जाती है परंतु जो व्यक्ति सो जाने में अलसी या अनियमित बढ़ा... Read More
 आंतों की स्वच्छता  जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह पाचन तंत्र के विभिन्न भागों द्वारा बचाया जाता है और भोजन में विद्वान सभी पौष्टिक तत्व ग्रहण कर लिए जाते हैं शेष बचे हुए व्यर्थ पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना आवश्यक होता है जिसे माल के रूप में बड़ी आंत द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है   जो व्यक्ति ठीक समय पर सो जाते हैं उनकी आंखे तुरंत साफ हो जाती है परंतु जो व्यक्ति सो जाने में अलसी या अनियमित बढ़ाते हैं उन्हें विभिन्न प्रकार के रोग जैसे कब्ज जीव मिचलाना चक्कर आना अलसी पेट दर्द बवासीर आदि रोग हो जाते हैं  पता प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी आंतों की स्वच्छता आवश्यक करें इसके लिए सदा पानी नींबू का पानी अशुभ गोल की भूसी त्रिफला चूर्ण आदि का नियमित प्रयोग भी किया जा सकता है  धन्यवाद
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[email protected] 12 Feb 2026 51 Views

हाथ व पैरों की स्वच्छता

हाथ व पैरों की स्वच्छता
 हाथ व पैरों की स्वच्छता  भोजन करने से पहले हाथ वह पैरों को भली भांति स्वच्छ कर लेना चाहिए हाथों में जमीन गंदगी भोजन के माध्यम से हमारे पेट में पहुंच जाती है और विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए हाथ धोने के लिए वास बेसिन साबुन तथा तोलिए का एक स्नान पर प्रबंध होना चाहिए  हाथ के साथ-साथ पैरों को भी भली प्रकार साफ करना चाहिए स्नान करते समय पैरों को अच्छी तरह रगड... Read More
 हाथ व पैरों की स्वच्छता  भोजन करने से पहले हाथ वह पैरों को भली भांति स्वच्छ कर लेना चाहिए हाथों में जमीन गंदगी भोजन के माध्यम से हमारे पेट में पहुंच जाती है और विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए हाथ धोने के लिए वास बेसिन साबुन तथा तोलिए का एक स्नान पर प्रबंध होना चाहिए  हाथ के साथ-साथ पैरों को भी भली प्रकार साफ करना चाहिए स्नान करते समय पैरों को अच्छी तरह रगड़कर साफ करना चाहिए हाथों की तरह पैरों के नाखून भी साफ करने चाहिए पैरों में चप्पल पहननी चाहिए साफ पर करके ही रात्रि में सोना चाहिए ऊंची हील की चप्पल नहीं पहननी चाहिए  धन्यवाद
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[email protected] 12 Feb 2026 47 Views

नाखूनों की स्वच्छता

नाखूनों की स्वच्छता
 नाखूनों की स्वच्छता   हाथों से भोजन करने पर नाखूनों में भारी गंदगी भोजन के साथ पेट में पहुंचती है जिसका कुप्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है अतः नाखूनों को समय-समय पर काटते रहना चाहिए तथा स्नान करते समय पतले ब्रश से साबुन लगाकर नाखून की साफ करना चाहिए ऐसा करने से नाखून साफ हो जाते हैं तथा हाथों में पैरों की सुंदरता भी पड़ती है   धन्यवाद Read More
 नाखूनों की स्वच्छता   हाथों से भोजन करने पर नाखूनों में भारी गंदगी भोजन के साथ पेट में पहुंचती है जिसका कुप्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है अतः नाखूनों को समय-समय पर काटते रहना चाहिए तथा स्नान करते समय पतले ब्रश से साबुन लगाकर नाखून की साफ करना चाहिए ऐसा करने से नाखून साफ हो जाते हैं तथा हाथों में पैरों की सुंदरता भी पड़ती है   धन्यवाद
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[email protected] 12 Feb 2026 48 Views

बालों की स्वच्छता कैसे करें

बालों की स्वच्छता कैसे करें
 बालों की स्वच्छता-  बाल चेहरे की शोभा बढ़ाते हैं बालों को स्वच्छ ना रखने से सिर में दाने वह जुड़े आदि हो जाती है फल स्वरुप बाल झड़ने लगते हैं और बालों की वृद्धि भी रुक जाती है अतः बालों को स्वस्थ रखने के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए  लंबे बालों को सत्ता में काम से कम दो बार तथा छोटे बालों को प्रतिदिन आवश्यक धोना चाहिए  बालों को बेसन या मुल्तानी मिट्टी अखबार रीता वाला सिकाई से धोना चाहि... Read More
 बालों की स्वच्छता-  बाल चेहरे की शोभा बढ़ाते हैं बालों को स्वच्छ ना रखने से सिर में दाने वह जुड़े आदि हो जाती है फल स्वरुप बाल झड़ने लगते हैं और बालों की वृद्धि भी रुक जाती है अतः बालों को स्वस्थ रखने के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए  लंबे बालों को सत्ता में काम से कम दो बार तथा छोटे बालों को प्रतिदिन आवश्यक धोना चाहिए  बालों को बेसन या मुल्तानी मिट्टी अखबार रीता वाला सिकाई से धोना चाहिए  यदि शैंपू से धोना हो तो उत्तम प्रकार के शैंपू का प्रयोग करना चाहिए  बालों को धोने के पश्चात सुखाकर तेल डालना चाहिए तथा घर के प्रत्येक सदस्य की कंगी अलग-अलग होनी चाहिए  यदि सर में जो पड़ जाए तो लाइसेंस लगाने से जो नष्ट हो जाती है  बालों को दिन में काम से कम तीन बार कंघी करना चाहिए   धन्यवाद
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[email protected] 12 Feb 2026 41 Views

वसा की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

वसा की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
 वसा की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में वसा की कमी का भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वास की कमी का व्यक्ति के शरीर की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इस दशा में व्यक्ति की त्वचा खुरदरी हो जाती है तथा उसमें कुछ विकार भी आ जाता है वसा की कमी से व्यक्ति के पैरों में सूजन आ जाती है वास की कमी से शरीर में ऊर्जा की कमी आ जाती है तथा उसकी चुस्ती फुर्ती घटने लगती है... Read More
 वसा की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में वसा की कमी का भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वास की कमी का व्यक्ति के शरीर की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है इस दशा में व्यक्ति की त्वचा खुरदरी हो जाती है तथा उसमें कुछ विकार भी आ जाता है वसा की कमी से व्यक्ति के पैरों में सूजन आ जाती है वास की कमी से शरीर में ऊर्जा की कमी आ जाती है तथा उसकी चुस्ती फुर्ती घटने लगती है वह शीघ्र थकान अनुभव करने लगता है आहार में वसा की कमी के कारण व्यक्ति के शरीर में वर्षा गलत विटामिनों का भी कमी होने लगती है तथा व्यक्ति संबंधित अभाव जनित रोगों का शिकार होने लगता है  धन्यवाद
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[email protected] 11 Feb 2026 58 Views

कार्बोहाइड्रेट की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

कार्बोहाइड्रेट की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
 कार्बोहाइड्रेट की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में कार्बोहाइड्रेट की कमी के कारण व्यक्ति प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट कुपोषण का शिकार हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति के शरीर का वजन घटने लगता है तथा त्वचा में झुर्रियां पढ़ने लगती है त्वचा ढीली पढ़ने के कारण लटकने लगते हैं व्यक्ति दुर्बलता अनुभव करने लगता है तथा उसके चेहरे की सामान्य चमक भी कम होने लगती है स्पष्ट है कि आहार में कार्बोहाइड्... Read More
 कार्बोहाइड्रेट की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में कार्बोहाइड्रेट की कमी के कारण व्यक्ति प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट कुपोषण का शिकार हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति के शरीर का वजन घटने लगता है तथा त्वचा में झुर्रियां पढ़ने लगती है त्वचा ढीली पढ़ने के कारण लटकने लगते हैं व्यक्ति दुर्बलता अनुभव करने लगता है तथा उसके चेहरे की सामान्य चमक भी कम होने लगती है स्पष्ट है कि आहार में कार्बोहाइड्रेट की कमी का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है  धन्यवाद:-
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[email protected] 11 Feb 2026 66 Views

प्रोटीन की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

प्रोटीन की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
 प्रोटीन की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में प्रोटीन की कमी से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है तथा व्यक्ति के विभिन्न रोगों का शिकार हो जाने की आशंका पड़ जाती है प्रत्यक्ष रूप से आहार में प्रोटीन की कमी के कारण व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है यहां नहीं इस दशा में सुधा एडिमा पर लहंगा तथा यंग कृत संबंधी रोग भी हो जाते हैं बच्चों में प्रोटीन की कमी के कारण तथा... Read More
 प्रोटीन की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव-  आहार में प्रोटीन की कमी से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है तथा व्यक्ति के विभिन्न रोगों का शिकार हो जाने की आशंका पड़ जाती है प्रत्यक्ष रूप से आहार में प्रोटीन की कमी के कारण व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है यहां नहीं इस दशा में सुधा एडिमा पर लहंगा तथा यंग कृत संबंधी रोग भी हो जाते हैं बच्चों में प्रोटीन की कमी के कारण तथा मेरे मार्स नामक रोग हो जाते हैं व्यस्त को में भी प्रोटीन की कमी के कारण स्वास्थ्य को दुर्बल बनाने वाले विभिन्न कारक प्रबल हो जाते हैं  धन्यवाद-
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[email protected] 11 Feb 2026 43 Views

खनिज लवणों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

खनिज लवणों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव
 खनिज लवणों की कमी का स्वास्थ्य का प्रतिकूल :-  आहार के माध्यम से ग्रहण किए गए खनिज लवण हमारे शरीर में विभिन्न निर्माण संबंधित तथा नियामक कार्य संपन्न करते हैं इस स्थिति में खनिज लवणों की कमी का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निश्चित रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है मुख्य खनिज लवणों की कमी के परिणाम का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है  कैल्शियम- बच्चों के आहार में का कैल्शियम की कमी के कारण उनकी हड्डियां एवं... Read More
 खनिज लवणों की कमी का स्वास्थ्य का प्रतिकूल :-  आहार के माध्यम से ग्रहण किए गए खनिज लवण हमारे शरीर में विभिन्न निर्माण संबंधित तथा नियामक कार्य संपन्न करते हैं इस स्थिति में खनिज लवणों की कमी का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निश्चित रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है मुख्य खनिज लवणों की कमी के परिणाम का संक्षिप्त परिचय निम्नलिखित है  कैल्शियम- बच्चों के आहार में का कैल्शियम की कमी के कारण उनकी हड्डियां एवं दांत मजबूत नहीं हो पाए तथा में अस्थियां विकृति नामक रोग के शिकार हो सकते हैं महिलाएं यदि गर्भावस्था में कैल्शियम की कमी का सामना करती है तो वह एस्टन मलेशिया या एस्ट्रो प्रक्रिया नामक रोग की शिकार हो सकती है वृद्धावस्था में भी आहार में कैल्शियम की कमी का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव   फास्फोरस - आहार में फास्फोरस की कमी से शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है तथा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है  लोह - ए आहार में लोग खनिज की कमी के कारण व्यक्ति रक्त अल्पता या एनीमिया नामक रोग का शिकार हो जाता है इस अभाव जनित स्थिति का व्यक्ति के स्वास्थ्य पर व्यापक तथा गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है  आयोडीन- आहार में आयोडीन की कमी परिणाम स्वरूप थायराइड ग्रंथि की क्रियाशीलता प्रभावित होती है तथा व्यक्ति ग्रह का नामक रोग का शिकार हो जाता है आयोडीन की कमी का व्यक्ति के शरीर पर एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है  सोडियम- आहार में सोडियम की कमी तथा अधिकता दोनों ही व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं सोडियम की कमी का व्यक्ति की शरीर वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है आहार में यदि सोडियम की मात्रा अधिक हो तो वह व्यक्ति अदीमा तथा उच्च रक्तचाप का शिकार हो जाता है  क्लोरीन- आहार में क्लोरीन की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति के शरीर में अम्ल और शहर का संतुलन बिगड़ जाता है तथा इसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है  पोटैशियम- आहार में पोटेशियम की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है तथा शरीर की चुस्ती घटने लगती है  धन्यवाद-
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[email protected] 11 Feb 2026 46 Views

स्थानीय स्वास्थ्य संस्थाएं एवं उनकी सेवाएं

 स्थानीय स्वास्थ्य से संस्थाएं एवं उनकी सेवाएं -  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-  ग्रामीण जनता की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और यूपी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं लगभग 48000 ऐसे केदो की स्थापना हो चुकी है ग्रामीण जनता को स्वच्छता का महत्व समझाना उन्हें रोगों से बचाना और गर्भवती स्त्रियों की पूर्व कालीन और प्रसव के पश्चात भी देखभाल करना इन केदो का... Read More
 स्थानीय स्वास्थ्य से संस्थाएं एवं उनकी सेवाएं -  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र-  ग्रामीण जनता की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और यूपी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं लगभग 48000 ऐसे केदो की स्थापना हो चुकी है ग्रामीण जनता को स्वच्छता का महत्व समझाना उन्हें रोगों से बचाना और गर्भवती स्त्रियों की पूर्व कालीन और प्रसव के पश्चात भी देखभाल करना इन केदो का मुख्य कार्य है वास्तव में प्राथमिक स्वास्थ्य थे केंद्र में ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य संबंधी सभी सेवाएं जहां तक संभव हो प्रदान किए जाने का पूर्ण प्रियतन किया जाता है केवल आपातकालीन स्थिति में ही ग्रामीण जनता को जिला स्तर के चिकित्सालय में भेजने के लिए प्रबंध किया जाता है अतः यह कहा जा सकता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ब्लॉक में स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं का केंद्र बिंदु होता है  चिकित्सालय -  बड़े शहरों में तथा तहसीलों में विभिन्न सरकारी चिकित्सालय होते हैं जहां पर विशेषज्ञों योग्य तथा प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जाता है यहां पर उत्तम उपचार होता है  परोड शिक्षा केंद्र-  इन केदो में फ्रॉड व्यक्तियों की शिक्षा दी जाती है तथा साथ ही साथ उन्हें व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्वच्छता के गुण अंधविश्वासों से दूर रहना आदि की शिक्षा भी दी जाती है   मातृ शिशु कल्याण संस्थाएं -  इन संस्थाओं का मुख्य कार्यकारी ग्रामीण क्षेत्रों में होता है गर्भवती ग्रामीण महिलाओं को नवजात शिशु की देखभाल संबंधित जानकारी दी जाती है इसमें निशुल्क दवाइयां भी बांटी जाती है   परिवार नियोजन केंद्र-  भारतीय परिवार नियोजन संस्था का गठन 1951 में हुआ था बढ़ती हुई जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करती है बहुत से परिवार नियोजन केंद्र खोले गए हैं जहां पर परिवार को सीमित करने के उपाय बताए जाते हैं  क्षय रोग निवारण केंद्र -  ट्यूबरक्लोसिस सोच एक्शन ऑफ़ इंडिया शेरों की रोकथाम हेतु पर्यावरण है यहां पर यह रोग रोगियों को मुफ्त दवाइयां पौष्टिक भोजन आदि बांटा जाता है   विकलांग केंद्र-  इन केदो में विकलांग बच्चों की देखभाल तथा कृत्रिम अंग देने की व्यवस्था भी होती है यहां पर विकलांग बच्चों के अंदर हीन भावना को दूर करने का प्रयास भी किया जाता है  चलते फिरते डिक्शनरी -  इस प्रकार की डिक्शनरी में योगी डॉक्टरों की टीम होती है जो गांव गांव जाकर उसे क्षेत्र में फैल रही बीमारियों के बारे में जनसाधारण को अज्ञात करती है तथा संबंधित बीमारियों की रोकथाम हेतु दवाइयां भी दी जाती है  भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी -  इसकी स्थापना 1920 में हुई थी इसका मुख्य केंद्र दिल्ली में है इसकी शाखाएं पूरे संसार में फैली हुई है यह किसी भी आपदा जैसे बाढ़ सूखा भूकंप आदि के समय इसे पीड़ित व्यक्तियों की सहायता का कार्य करती है यह संस्थान नाथन महिलाओं और बच्चों को निशुल्क  विश्व स्वास्थ्य संगठन -  इस संगठन की स्थापना 1946 में जिनेवा में हुई थी 7 अप्रैल को प्रतिवर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है प्लेन मलेरिया हैजा पोलियो तपेदिक आदि रोग की रोकथाम के लिए यह संगठन सदैव प्रयासरत रहता है यह संगठन माता और शिशु के पोषण एवं निरोग रखने के सुझाव देता है तथा समस्याओं को दूर करने का प्रयास करता है  ऑल इंडिया वूमेन कांफ्रेंस -  किसका गठन परिवार नियोजन केदो व स्वास्थ्य केदो की स्थापना पूर्ण स्त्री शिक्षा की व्यवस्था शिशु के लिए निशुल्क दुग्ध के वितरण का प्रबंध मातृ शिशु कल्याण सेवाओं की देखभाल के लिए किया जाता है  बल रक्षा केंद्र-  यह केंद्र सरकार व नगर पालिका द्वारा संचालित होते हैं इन केदो में किशोर बालकों का मुफ्त स्वास्थ्य परिश्रम किया जाता है तथा रोगों का उपचार किया जाता है   भारत सेवक समाज-  सन 1952 में व्यक्तियों के स्वास्थ्य को ऊंचा उठने के उद्देश्य से इस संगठन का निर्माण किया गया स्वच्छ एवं स्वास्थ्य कर बनाना है सभी प्रति व जिलों में इसकी शाखाएं फैली हुई है  धन्यवाद ​​​​​
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