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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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आएइ जाने की जलवाष्प और अन्य गैस क्या है

आएइ जाने की जलवाष्प और अन्य गैस क्या है
 जलवाष्प  और अन्य गैस क्या है-  जलवाष्प :-जलवाष्प का प्रतिशत वायुमंडल के तापक्रम पर आधारित होता है जहां जलवाष्प अधिक होती है वहां की वायु में नमी होती है और उसमें जीवाणु अधिक पनपते हैं जलवाष्प का कार्य वायु को नमीयुक्त तथा ठंडा करना होता है सर्दियों की वायु में वाष्प कारण अधिक होते हैं अब वर्षा ऋतु में उससे भी अधिक होती है इसलिए इन ऋतुओं में कपड़े देर से सकते हैं इसके अतिरिक्त वर्ष के दिनों में प्... Read More
 जलवाष्प  और अन्य गैस क्या है-  जलवाष्प :-जलवाष्प का प्रतिशत वायुमंडल के तापक्रम पर आधारित होता है जहां जलवाष्प अधिक होती है वहां की वायु में नमी होती है और उसमें जीवाणु अधिक पनपते हैं जलवाष्प का कार्य वायु को नमीयुक्त तथा ठंडा करना होता है सर्दियों की वायु में वाष्प कारण अधिक होते हैं अब वर्षा ऋतु में उससे भी अधिक होती है इसलिए इन ऋतुओं में कपड़े देर से सकते हैं इसके अतिरिक्त वर्ष के दिनों में प्रत्येक वस्तु सिली सी अनुभव होती है और खुली रखी वस्तुओं पर सीलन के कारण फौजी लग जाती है बंद रखी वस्तु खराब हो जाती है उनमें कीड़े पड़ जाते हैं इस प्रकार वायु में जलवाष्प की अधिक मात्रा मानव जीवन के लिए हानिकारक होती है परंतु इसके विपरीत वनस्पति जगत के लिए लाभदायक होती है वर्षा ऋतु में सभी पेड़ पौधे हरे-भरे हो जाते हैं जहां ना मात्र की मिट्टी होती है वहां भी छोटे-छोटे पौधे अपने आप उग जाते हैं अतः व्यू की नमी व पानी वनस्पति जगत के लिए लाभकारी होती है  अन्य गैस:- तीन मुख्य गैसों ऑक्सीजन नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त वायु में कुछ अन्य गैस भी अति अल्प मात्रा में पाई जाती है इन गैसों में मुख्य है कार्बन मोनोऑक्साइड हाइड्रोजन अंग हीलियम आदि इन गैसों में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस अत्यधिक विषैली गैस है जिसकी अल्प मात्रा भी घातक सिद्ध हो जाती है अन्य गैसों के भी अपने-अपने गुण होते हैं परंतु वायु में इनकी मात्रा अत्यंत अल्प होती है इसलिए इसके कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं देखे जा सकते  धन्यवाद
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[email protected] 15 Feb 2026 47 Views

ऑक्सीजन क्या है

ऑक्सीजन क्या है
 ऑक्सीजन क्या है  ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण रंगीन गांधी में स्वाधीन गैस है जो सांसद प्राणियों के जीवन हेतु परम आवश्यक है शुद्ध वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन की मात्रा पाई जाती है यह अत्यंत सक्रिय गैस है और अन्य अनेक गैसों से सिरका के साथ क्रिया करती है यह सभी वस्तुओं के जलने में सहायक होती है तथा गंदगियों को जलाकर वायुमंडल को शुद्ध करने का कार्य भी करती है इसके अभाव की स्थिति में ज्वलन क्रिया संभव नहीं है... Read More
 ऑक्सीजन क्या है  ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण रंगीन गांधी में स्वाधीन गैस है जो सांसद प्राणियों के जीवन हेतु परम आवश्यक है शुद्ध वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन की मात्रा पाई जाती है यह अत्यंत सक्रिय गैस है और अन्य अनेक गैसों से सिरका के साथ क्रिया करती है यह सभी वस्तुओं के जलने में सहायक होती है तथा गंदगियों को जलाकर वायुमंडल को शुद्ध करने का कार्य भी करती है इसके अभाव की स्थिति में ज्वलन क्रिया संभव नहीं है यह जब अन्य तत्वों से क्रिया करती है तो विभिन्न ऑक्साइड बनते हैं तथा इस क्रिया को ऑक्सीकरण कहा जाता है  प्राणी शरीर की विभिन्न क्रियो में भी ऑक्सीजन का उल्लेख में योगदान रहता है हमारे शरीर को गर्म रखने का कार्य ऑक्सीजन ही करती है इसके अतिरिक्त इसे ही हमारा शरीर शक्ति ग्रहण करता है हम जो भोजन ग्रहण करते हैं शरीर के अंदर उसे भोजन का ज्वलन भी इसके द्वारा ही होता है जोलना के बाद ही हमारा भोजन शरीर को शक्ति प्रदान करता है इसलिए हम निरंतर सांस लेते रहते हैं हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड निकासीट करते हैं यह हमारे रक्त के शोध में भी सहायक होता है स्पष्ट है कि ऑक्सीजन एक उपयोगी एवं महत्वपूर्ण गैस है   धन्यवाद
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[email protected] 15 Feb 2026 57 Views

आएइ जाने की नाइट्रोजन क्या है

आएइ जाने की नाइट्रोजन क्या है
 नाइट्रोजन क्या है  वायु में मिश्रित दूसरी मुख्य गैस नाइट्रोजन है वायु में यह बहुत अधिक मात्रा में होती है यह ऑक्सीजन के विपरीत गुना से युक्त होती है इसलिए यह गैस वायुमंडल में ऑक्सीजन की तीव्रता तथा क्रियाशीलता को घटती है यह गैस जलने की क्रिया को रोकते हैं वायु में इसकी उपस्थिति ही वायु को स्वास्थ्य लेने के लिए उपयुक्त बनती है यदि वायु में नाइट्रोजन ना हो तो सांस लेने से हमारे फेफड़ों ही जल जाए यह... Read More
 नाइट्रोजन क्या है  वायु में मिश्रित दूसरी मुख्य गैस नाइट्रोजन है वायु में यह बहुत अधिक मात्रा में होती है यह ऑक्सीजन के विपरीत गुना से युक्त होती है इसलिए यह गैस वायुमंडल में ऑक्सीजन की तीव्रता तथा क्रियाशीलता को घटती है यह गैस जलने की क्रिया को रोकते हैं वायु में इसकी उपस्थिति ही वायु को स्वास्थ्य लेने के लिए उपयुक्त बनती है यदि वायु में नाइट्रोजन ना हो तो सांस लेने से हमारे फेफड़ों ही जल जाए यह भी स्वयं में एक गांधी रंगीन और स्वाधीन गैस होती है तथा पानी में अति अल्प मात्रा में घुलनशील होती है हमारे लिए नाइट्रोजन गैस का मुख्य उपयोग यह है कि इससे ऑक्सीजन की तीव्रता कम होती है  धन्यवाद
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[email protected] 15 Feb 2026 56 Views

कार्बन डाइऑक्साइड क्या है

कार्बन डाइऑक्साइड क्या है
 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है  वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक होती है यह ग... Read More
 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है  वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक होती है यह गैस जीवधारी के जीवित रहने में तो सहायक नहीं होती परंतु पेड़ पौधे के लिए बहुत उपयोगी होती है सूर्य के प्रकाश में पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा अपना भोजन तैयार करते हैं यह गैस छूने के पानी को धो दिया तथा नीले लिटमस को लाल कर देती है ऑक्सीजन के विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड जलने की क्रिया में बाधक होती है अतः आज को बुझाने के लिए इस गैस को इस्तेमाल किया जाता है यह डबल रोटी आदि बनाने हेतु आवश्यक खमीर तैयार करने के लिए भी उपयोगी होती है  धन्यवाद
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[email protected] 14 Feb 2026 48 Views

जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव

जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव
 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव  हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है  उपयुक्त विवरण... Read More
 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव  हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है  उपयुक्त विवरण द्वारा स्वास्थ्य की कुछ उन असामान्य प्रतिकूल दशाओं का परिचय प्राप्त होता है जो आहार के पोषक तत्व ऑन की कमी के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होती है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि स्वास्थ्य की इन असामान्य दशाओं रोगों से मुक्ति पानी के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती बल्कि केवल आहार में विद्वान अभाव या कमी को दूर करना ही पर्याप्त होता है  उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि आई हैव स्वास्थ्य का परस्पर घनिष्ठ संबंधी वास्तव में स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों में सर्वाधिक महत्व उचित पोषण का है नवीनतम अनुसंधानों से शुद्ध हो चुका है कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी आयु लिंग एवं कार्य आदि के अनुसार एक निश्चित मात्रा में आहार की आवश्यकता होती है इस आहार में भोजन के सभी अनिवार्य तत्व एक निश्चित अनुपात में होने आवश्यक है यदि किसी व्यक्ति को आहार के माध्यम से भोजन के सभी तत्व समुचित मात्रा एवं अनुपात में प्राप्त होते रहते हैं तो उसे व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा शरीर की वृद्धि विकास साहब रखरखाव की उचित प्रकार से होता है इस प्रकार के आहार प्राप्त होने की स्थिति को उचित पोषण कहते हैं उचित पोषण आहार प्राप्त करने की उसे अवस्था को कहा जाता है जिसमें आहार के सभी कार्य एवं उद्देश्य संचार रूप से पूर्ण होते रहते हैं उचित पोषण के अंतर्गत भोजन की मात्रा एवं प्रकार इस तरह का होता है कि शरीर की संसद आवश्यकताओं एवं क्रियाकलापों के लिए पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं इस अवस्था में शरीर की संसद कोशिकाओं का पोषण होता रहता है शरीर की संसद ग्रंथियां में उचित मात्रा में रसों का निर्माण एवं श्रवण होता रहता है सांसद एंजाइम उचित मात्रा में बनते रहते हैं इसके अतिरिक्त शरीर की क्रियो के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त होती रहती है तथा शरीर में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत भी होती रहती है उचित पोषण की अवस्था में शमशाद शारीरिक क्रियो सुचारू रूप से चलती रहती है तथा शरीर का ढांचा भी स्वस्थ एवं सुविक्षित होता रहता है इस प्रकार स्पष्ट है कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए उचित पोषण अनिवार्य कारक है इस प्रकार की संदेश रूप से कहा जा सकता है कि आर एवं स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है धन्यवाद-
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[email protected] 14 Feb 2026 46 Views

मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी पालन
 मधुमक्खी पालन  मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है  व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड से रहना इंडिका... Read More
 मधुमक्खी पालन  मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है  व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड से रहना इंडिका सामान्य भारतीय मक्खी एपिसोड एक सेल मक्खी तथा एपिसोड फ्लोरी डिलीट मक्खी का उपयोग करते हैं एक इटली मक्खी एपिसोड का उपयोग मधु के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है अतः व्यवसायिक मधु उत्पादन में इस मक्खी का कार्य उपयोग किया जाता है  धन्यवाद-
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[email protected] 13 Feb 2026 68 Views

मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)

मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)
 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)  हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान   मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता है इसलिए मछली पकड़न... Read More
 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)  हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान   मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता है इसलिए मछली पकड़ना तथा मछली संवर्धन समुद्र तथा ताजे जल के पारिस्थितिकी तंत्र में किया जा सकता है  धन्यवाद-  
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[email protected] 13 Feb 2026 55 Views

मुर्गी पालन

मुर्गी पालन
 मुर्गी पालन-  अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है   नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है  चीजों की संख्या तथा गुण... Read More
 मुर्गी पालन-  अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है   नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है  चीजों की संख्या तथा गुणवत्ता:  छोटे कद के रोलर माता पिता द्वारा चीजों के व्यावसायिक उत्पादन हेतु:   गर्मी अनुकूलन क्षमता उच्च तापमान को सहने की क्षमता  देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता
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[email protected] 13 Feb 2026 63 Views

आएइ जाने की पशुपालन क्या है

आएइ जाने की पशुपालन क्या है
 पशुपालन-  पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है   धन्यवाद Read More
 पशुपालन-  पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है   धन्यवाद
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[email protected] 13 Feb 2026 52 Views

आंखों की स्वच्छता

आंखों की स्वच्छता
 आंखों की स्वच्छता  आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है  आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-  आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए  आंखों को तेज धूप प्रकाश में धुएं से ब... Read More
 आंखों की स्वच्छता  आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है  आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-  आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए  आंखों को तेज धूप प्रकाश में धुएं से बचना चाहिए  गंदा ओला या रुमाल आंखों पर नहीं लगना चाहिए और ना ही आंखों को अधिक रगड़ना चाहि  पढ़ने लिखने अथवा महीन कार्य करते समय रोशनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए  आंखों की रोशनी बढ़ाने वह उन्हें स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ए युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए  अध्ययन करते समय पुस्तक को नेत्रों के बहुत निकट नहीं रखना चाहिए  आशिक दृष्टि दोष का पता चलते ही तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए  नेटवर्क को तेज रोशनी में धूप से भी बचना चाहिए धूप में घर से बाहर जाते समय उच्च कोटि का धूप का चश्मा लगाना चाहिए  धन्यवाद
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[email protected] 13 Feb 2026 69 Views