जलवाष्प :-जलवाष्प का प्रतिशत वायुमंडल के तापक्रम पर आधारित होता है जहां जलवाष्प अधिक होती है वहां की वायु में नमी होती है और उसमें जीवाणु अधिक पनपते हैं जलवाष्प का कार्य वायु को नमीयुक्त तथा ठंडा करना होता है सर्दियों की वायु में वाष्प कारण अधिक होते हैं अब वर्षा ऋतु में उससे भी अधिक होती है इसलिए इन ऋतुओं में कपड़े देर से सकते हैं इसके अतिरिक्त वर्ष के दिनों में प्रत्येक वस्तु सिली सी अनुभव होती है और खुली रखी वस्तुओं पर सीलन के कारण फौजी लग जाती है बंद रखी वस्तु खराब हो जाती है उनमें कीड़े पड़ जाते हैं इस प्रकार वायु में जलवाष्प की अधिक मात्रा मानव जीवन के लिए हानिकारक होती है परंतु इसके विपरीत वनस्पति जगत के लिए लाभदायक होती है वर्षा ऋतु में सभी पेड़ पौधे हरे-भरे हो जाते हैं जहां ना मात्र की मिट्टी होती है वहां भी छोटे-छोटे पौधे अपने आप उग जाते हैं अतः व्यू की नमी व पानी वनस्पति जगत के लिए लाभकारी होती है
अन्य गैस:- तीन मुख्य गैसों ऑक्सीजन नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त वायु में कुछ अन्य गैस भी अति अल्प मात्रा में पाई जाती है इन गैसों में मुख्य है कार्बन मोनोऑक्साइड हाइड्रोजन अंग हीलियम आदि इन गैसों में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस अत्यधिक विषैली गैस है जिसकी अल्प मात्रा भी घातक सिद्ध हो जाती है अन्य गैसों के भी अपने-अपने गुण होते हैं परंतु वायु में इनकी मात्रा अत्यंत अल्प होती है इसलिए इसके कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं देखे जा सकते
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