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Aashifa

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Blog by Aashifa | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

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पुराने जमाने के लोग कैसे रहते थे


पुराने जमाने के लोग कैसे रहते थे। शुरुआती लोग (पूर्वज) प्रकृति के साथ मिलकर शिकार और फल कद खाकर  जीवन बिताते थे वह आज का इस्तेमाल करना सीखे सरल कपड़े पहनते थे और परिवार में समुदाय के साथ रहते थे जहां भाईचारा होता था और उनकी ज़रूरतें कम थी जिससे वह शांत जीवन जीते थे जबकि बाद के समय में सिंधु घाटी सभ्यता जैसे सभ्यताओं मैं लोग खेती करते पशुपति और मछली खाते थे और कपड़े घर व सामाजिक जीवन का विकास... Read More

पुराने जमाने के लोग कैसे रहते थे।

शुरुआती लोग (पूर्वज) प्रकृति के साथ मिलकर शिकार और फल कद खाकर  जीवन बिताते थे वह आज का इस्तेमाल करना सीखे सरल कपड़े पहनते थे और परिवार में समुदाय के साथ रहते थे जहां भाईचारा होता था और उनकी ज़रूरतें कम थी जिससे वह शांत जीवन जीते थे जबकि बाद के समय में सिंधु घाटी सभ्यता जैसे सभ्यताओं मैं लोग खेती करते पशुपति और मछली खाते थे और कपड़े घर व सामाजिक जीवन का विकास हुआ।

आदिमानव (शिकार संग्राहक) का जीवन: 

  • भोजन - कच्चा मांस फल कद मल खाते थे आज परिचित होने के बाद में भोजन को भूनकर या शेखर कहते थे जिसे वे गुफाओं में लड़कियों को जलाकर सुरक्षित रखते थे ।

​​​​आवास - वह गुफाओं में रहते थे और प्राकृतिक आपदाओं से जूझते थे ।

  • सामाजिक जीवन - वह समूह में रहते थे शिकार करते थे और परिवार में दोस्तों के साथ समय बिताते थे जहां जानकारी को सांझा किया जाता था ।

  • सिंधु घाटी सभ्यता के  लोग - (लगभग 4500-1900 ईसा पूर्व) ।

  • भोजन - वह विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों से प्राप्त उत्पाद जीव और मछली खाते थे यानी उनका आहार अधिक विविध था ।

  • कपड़े- कपास रेशम लिनन और उन जैसे रेशों से बने वस्त्र पहनते थे जिन्हें अलग-अलग तरीकों से लपेटा जाता था। 

  • सामाजिक ववस्था - परिवार में पिता मुखिया होता था और स्त्रियां भी शिक्षा प्राप्त करती थी जो उन्हें कुशल गृहिणि बनाती थी 

प्राचीन भारत सामान्य तौर पर ।

​​​​​​​संचार । चिट्ठी तार रेडियो और अखबार के जरिए सूचना का आदान-प्रदान करते थे और  फोन बूथ का इस्तेमाल करते थे. 

मनोरंजन। बच्चे बाहर खेलते थे लोग रेडियो सुनते थे और अखबार पढ़ते थे .

जीवन शैली। ज़रूरतें कम थी भाईचारा ज्यादा था और वह अपने परिवार के साथ खुश रहते थे .

कुल मिलाकर शुरुआती दौर में जीवन सरल और पकृति पर निर्भर था लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे सभ्यताएं विकसित हुई जीवन अधिक व्यवस्थित विविध और तकनीकी रूप से समृद्धि होता गया जिससे खेती व्यापार और सामाजिक नियम शामिल होते गए

 

 

 


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  • Author:- 9045793943
  • Date:- 2026:01:10
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응급처치의 주요 원칙


머리말.. 급 처응치 응급 처치응급처치는 부상을 입거나 갑자기 병에 걸린 사람에게 의사가 도착할 때까지 붕대를 감거나 응급처치를 할 수 있도록 해주는 것입니다. (세인트 존스 앰뷸런스 협회)।                                                    모든 사람들은 하루 종일 이런저런 일... Read More

머리말..

급 처응치 응급 처치응급처치는 부상을 입거나 갑자기 병에 걸린 사람에게 의사가 도착할 때까지 붕대를 감거나 응급처치를 할 수 있도록 해주는 것입니다. (세인트 존스 앰뷸런스 협회)।                                                   

모든 사람들은 하루 종일 이런저런 일을 합니다. 어떤 사람들은 생계를 위해 광산에서 일하고, 어떤 사람들은 농사를 짓고, 어떤 사람들은 사무실에서 일하고, 또 어떤 사람들은 어딘가로 이동하거나, 일을 하거나, 마스크를 목에 걸고 있습니다. 어디를 가든, 일을 하든, 재택근무를 하든, 갑작스러운 사고는 언제 어디서든 누구에게나 일어날 수 있습니다. 

 차량 충돌, 미끄러짐, 동물에게 물리는 등의 사고가 발생할 수 있습니다. 이러한 사고는 때로는 단순하지만, 때로는 그렇지 않을 수도 있습니다. 이러한 경우 즉각적인 도움이 필요합니다.  동물에게 물리는 등의 사고는 발생할 수 있으며, 때로는 단순한 사고로 끝나지만 때로는 심각한 사고로 이어질 수도 있습니다. 심각한 사고의 경우에는 즉각적인 도움이 필요하며, 응급처치는 이러한 경우에만 시행됩니다.수행된다 

 

 

 

 

 

 


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  • Author:- 9045793943
  • Date:- 2025:12:27
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AI क्या है


रोलA i ki kya full form hoti hai?  AI ki full form artificial intelligence hoti hai   ​​​​​AI क्या है  AI artificial intelligence यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी तकनीक है जो कंप्यूटर और मशीनों इंसानों की तरह सोचने समझने और काम करने में सक्षम बनाती है  आसान भाषा में समझे  जिस तरह इंसान अपने दिमाग से सोच कर निर्णय लेता है चीजों को पहचानता हैं और समस्याओं का हल निकलते है... Read More

रोलA i ki kya full form hoti hai? 

AI ki full form artificial intelligence hoti hai 

 ​​​​​AI क्या है 

AI artificial intelligence यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक ऐसी तकनीक है जो कंप्यूटर और मशीनों इंसानों की तरह सोचने समझने और काम करने में सक्षम बनाती है 

आसान भाषा में समझे 

जिस तरह इंसान अपने दिमाग से सोच कर निर्णय लेता है चीजों को पहचानता हैं और समस्याओं का हल निकलते हैं वैसे ही AI कंप्यूटर और मशीनों को यह क्षमता देती है कि वह खुद से सोच समझ कर काम कर सकते हैं 

AI कहां इस्तेमाल होता हैं? 

१. मोबाइल में गूगल असिस्टेंट सिरी

२. सोशल मीडिया फेसबुक और यूट्यूब पर जो वीडियो पोस्ट होते हैं वह AI की वजह से होते हैं 

३. ऑनलाइन शॉपिंग अमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर जो प्रोडक्ट्स होते हैं वह AI के जरिए तय किए जाते है

४. ड्राइवर लाइसेंस बिना ड्राइवर वाली कारे AI से चलती है 

कैसे कामकरता है।

AI मशीनों को बहुत सारे डाटा जनकारी सीखने में मदद करता है ताकि वह खुद से समझ कर सही निर्णय ले सके इस मशीन को लर्निंग और ड्रिप लर्निंग कहा जाता है मतलब AI ऐसा ब्रायन है जो कंप्यूटर को स्मार्ट बनता है

ए आई कैसे काम करता है ?

1. डाटा और एल्गोरिदम 

ए आई विशाल मात्रा में डाटा का विश्लेषण करने और  उसमें पैटर्न सीखने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करता है

2. सीखना ​​​

यह पिछले अनुभव डाटा से सीखता है जैसे कि बिल्ली और कुत्ते के बीच अंतर पहचाना।

3. तर्क और निर्णय 

यह सीखी हुई जानकारी के आधार पर तर्क करता है और निर्णय लेता है जैसे कि शतरंज खेलना या ग्राहक सेवा देना 

4. समझ और प्रतिक्रिया 

यह मानव भाषा जैसे श्री अलेक्सा को समझ सकता है और इस पर प्रतिक्रिया दे सकता है​​

ए आई के उदाहरण 

1. डिजिटल अस्सिटेंट। गूगल असिस्टेंट सिरी अलेक्सा 

2. स्व चालित कारे । सेल्फ ड्राइविंग कार जो खुद निर्णय लेकर चलती है 

3. सामग्री निर्माण। टेक्स्ट इमेज टेक्स्ट इमेज और वीडियो बनाना 

4. सिफारिशे‌ । ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आपको पसंद आने वली चीजे सुझाना जैसे नेटफ्लिक्स अमेजॉन।

ए आई के मुख्य क्षेत्र।

1. मशीन लर्निंग। मशीन लर्निंग डाटा से सीखने पर केंद्रित है

​​2. डीप लर्निंग ।मशीन  लर्निंग का एक उन्नत रूप जो‌ जटिल पैटर्न सीखता है 

3. जैनरेटिव । नई सामग्री टेक्स्ट इमेज बनता है।

​​​​​संक्षेप ए आई । मशीन को इंसानों की तरह स्मार्ट बनने का विज्ञान है जो उन्हें जटिल काम करने और हमारे जीवन को आसान बनाने में मदद करता है ​​​


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  • Author:- 9045793943
  • Date:- 2025:12:23
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आखरी पत्ता


  स्यु और जान्सी दो युवा चित्रकार थी वह एक छोटे से फ्लैट में इकट्ठी रहती थी यह एक पुराने घर की तीसरी मंजिल पर स्थित था जॉन सी नवंबर में सख्त बीमार हो गई उसे न्मोयूमोनिया हो गया था स्यु को चिंता हो गई उसने डॉक्टर को बुलाया परंतु डॉक्टर ने स्यु को बताया की जान्सी ने जीने की इच्छा खोदी है। दवाइयां उसकी सहायता नहीं करेगी स्यु ने जान्सी को उसके चारों तरफ की चीजों में रुचि दिलाने की कोशिश की उसने क... Read More

 

स्यु और जान्सी दो युवा चित्रकार थी वह एक छोटे से फ्लैट में इकट्ठी रहती थी यह एक पुराने घर की तीसरी मंजिल पर स्थित था जॉन सी नवंबर में सख्त बीमार हो गई उसे न्मोयूमोनिया हो गया था स्यु को चिंता हो गई उसने डॉक्टर को बुलाया परंतु डॉक्टर ने स्यु को बताया की जान्सी ने जीने की इच्छा खोदी है।

दवाइयां उसकी सहायता नहीं करेगी स्यु ने जान्सी को उसके चारों तरफ की चीजों में रुचि दिलाने की कोशिश की उसने कपड़ों और फैशन के बारे में बातें की स्यु अपना ड्राइंग बोर्ड झांसी के कमरे में ले आई और चित्रकार आरंभ कर दी चित्रकारी करते समय उसने सिटी भी बजाई जान्सी दीवार पर बाहर आइवी बेल देखी

इसके पत्ते गिर रहे थे क्योंकि पतझड़ का मौसम था जान्सी 12 से लेकर उल्टी गिनती कर रही थी स्यु ने उससे पूछा यह सब किस बारे में था जान्नेसी ने उसे बताया‌ की आखिरी पत्ता गिरने के साथ ही वह मर जाएगी ऐसा तीन दिन में होगा स्यु ने इसे बकवास कहा उसने उसे यह भी बताया कि वह शीघ्र ही ठीक हो जाएगी।

परंतु इसका जान्सी झांसी पर कोई प्रभाव नहीं हुआ बर्मन एक बूढ़ा चित्रकार था वह पहले तल पर रहता था वह 60 वर्ष का था वह स्वप्न देख रहा था की एक दिन वह अपनी सर्वश्रेष्ठ कलाकृति की चित्रकारी करेगा परंतु अब तक उसे सफलता नहीं मिली थी स्यु ने बैरमैन को जान्सी की अद्भुत कल्पना के बारे में बताया वह और स्यु दोनों जान्सी के कमरे में गये झांसी सो रही थी उन्होंने देखा कि आइवी बेल पर सिर्फ एक ही पत्ता बचा था वर्ष हो रही थी लगता था की अंतिम पत्ता किसी भी पल गिर जायेगा‌।

जान्सी अपनी नींद से जगी उसने खिड़की से बाहर देखा उसने अंतिम पत्ते  को देखा उसने स्यु को इसे देखने के लिए कहा यह हार और स्वस्थ्यपूर्ण था। जान्सी इस पत्ते पर हर एक घंटे देखती रही परंतु यह तूफानी शाम को भी नहीं गिरा इसने जान्सी के अंदर जीने की इच्छा पुनर्जीवित कर दी जान्सी नए सवैया को कोसा उसने स्यु को बुलाया उसने उसके सामने स्वीकार किया कि वह एक बुरी लड़की है

उसने स्यु को बताया कि वह बहुत दुष्ट है अंतिम पत्ते ने उसे यह दिखा दिया था अब उसे अनुभव हो रहा था कि करने की इच्छा करना पाप है तब उसने एक शीशे के लिए कहा उसने काफी गर्म शॉप भी लिया अगली सुबह स्यु ने जान्सी को बर्मन के बारे में बताया बर्मन सिर्फ दो दिन से बीमार था दरबार ने उसे उसके बिस्तर पर पाया उसके कपड़े और जूते गले थे वह तूफानी रात में ठंड से कम रहा था उसने उस रात में दीवार पर आखिरी पेट के चित्रकारी की थी उसे न्युमोनिया हो गया था 

और वह मर गया स्यु ने उससे पूछा कि क्या उसे आश्चर्य नहीं था की। पत्ता फडफडाया देना था उसने उसे बताया कि वह आखिरी पत्ता बैनरमैन की सर्वश्रेष्ठ कलाकृति थी बैनरमैन ने उसे उसे रात चित्रत क्या जिस रात अंतिम पत्ता गिर गया ।

इसे पढ़ें

आखिरी पत्ता" कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

​​​​​इससे हमें शिक्षा मिलती है यह कहानी हमें विश्वास रखना दयालुता दिखाने और कभी-भी उम्मीद ना छोड़ने की सीख देती है।


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  • Author:- 9045793943
  • Date:- 2025:12:21
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भिखारी


  लशकाफ नामक‌ भिखार की कहानी ह। भीख मांगते हुए उसकी मुलाकात सरजई नामक वकील से हुई जिन्होंने उसे कमद दिया सरजई ने उसे अपने घर पर लकड़ी फाड़ने का काम दया। उन्होंने अपनी रसोईया को उसे शेड दिखाने के लए कहां जहां लकड़िया राखी थी भिखारी बहुत कमजोर था और शराब के नशे में था वह मुश्किल से अपनी टांगों पर खड़ा था फिर भी रसोईया ओल्गा ने सरजई को बताया कि लड़कियां फाड़ दी गई थीं। सरजई खुश था कि आदमी न... Read More

 

लशकाफ नामक‌ भिखार की कहानी ह।

भीख मांगते हुए उसकी मुलाकात सरजई नामक वकील से हुई जिन्होंने उसे कमद दिया सरजई ने उसे अपने घर पर लकड़ी फाड़ने का काम दया। उन्होंने अपनी रसोईया को उसे शेड दिखाने के लए कहां जहां लकड़िया राखी थी भिखारी बहुत कमजोर था और शराब के नशे में था वह मुश्किल से अपनी टांगों पर खड़ा था फिर भी रसोईया ओल्गा ने सरजई को बताया कि लड़कियां फाड़ दी गई थीं।

सरजई खुश था कि आदमी ने काम किया और उन्होंने लड़कियां पढ़ने के लिए उसे 50 कोपेक दिए उन्होंने उसे इसके लिए प्रत्येक महीने के पहले दिन आने को कहा कभी-कभी वह उसे बेलचे से बर्फ उठाकर फेंकने या लकड़िया को शेड में ठीक ढंग से लगाने या चटाइयों में गधों से धूल झाड़ने के लिए कहते थे हर बार उसे 20 से 40 को पैक दिए जाते थे और एक बार उन्होंने उसे अपने पजामो का पुराना जोड़ा भी दिया।

जब सरजई ने अपना घर शिफ्ट किया तो उन्होंने भिखारी को सामान पहुंचाने में सहायता करने के लिए कहा भिखारी बदल गया था क्योंकि वह उस दिन सौम्य था और सरजई सन्तुष्ट था कि उसके प्रयास ने एक शराबी को सुधार क्योंकि वह पढ़ लिख सकता था सरजई ने उसका नाम पूछा उसे बेहतर काम दिया और उसके साथ हाथ मिलाया उस दिन के बाद लशकाफ भिखारी कभी दिखाई नहीं दिया 2 साल बाद  सरजई एक थिएटर के बाहर एक टिकट खरीद रहा था और उसने लश्कर को देखा लश्कर अपने सुंदर ड्रेस पहन रखी थी और वह गैलरी एरिया का टिकट खरीद रहा था सर जी उसे देखकर प्रसन्न हुआ और उसे बुलाया लश्कर अब एक नौकरी के रूप में कार्यरत था और प्रतिमा 35 रूबल कमाता था उसने सरजई को उसे गड्ढे से बाहर निकलने मे सहायता करने और उसकी दयालुता के लिए धन्यवाद दिया लश्कर ने सरजई को बताया कि वह उसकी वजह से नहीं बल्कि उसकी रसोईया ओल्गा की वजह से एक बदला हुआ इंसान है वह उसे डांटती उसके लिए रोटी और उसके लिए लड़कियां फटती थी उसके व्यवहार ने लश्कर को परिवर्तित कर दिया उसके साथ ही वह थिएटर में चला गया।

 

 

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  • Date:- 2025:12:18
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एक पेड़ को काटने पर


कवि कहता है कि यदि हम एक पेड़ को मारना चाहते हैं तो इसमें बहुत अधिक समय लग जाता है। साधारण चाकू द्वारा किए गए केवल एक काटो से पेड़ मर नहीं सकता है पेड़ धरती से भोजन और अन्य पोशाक तत्व प्राप्त करके बड़ा होता है वह सूर्य के प्रकाश हवा और जल को वर्षों तक चुसता रहता है और बहुत ही शक्तिशाली बन जाता है  यदि हम इसे कटने या फाड़ने का प्रयास करते हैं तो इससे इसको अधिक पीड़ा नहीं होती है इसकी रक्त बहती... Read More

कवि कहता है कि यदि हम एक पेड़ को मारना चाहते हैं तो इसमें बहुत अधिक समय लग जाता है। साधारण चाकू द्वारा किए गए केवल एक काटो से पेड़ मर नहीं सकता है पेड़ धरती से भोजन और अन्य पोशाक तत्व प्राप्त करके बड़ा होता है वह सूर्य के प्रकाश हवा और जल को वर्षों तक चुसता रहता है और बहुत ही शक्तिशाली बन जाता है 

यदि हम इसे कटने या फाड़ने का प्रयास करते हैं तो इससे इसको अधिक पीड़ा नहीं होती है इसकी रक्त बहती हुई त्वचा जल्दी ही ठीक हो जाती है उससे छटी-छोटी टहनियां टूट पड़ती है और शीघ्र ही में बहुत बड़ी और शक्तिशाली हो जाती है कवि कहता है कि पेड़ की असली ताकत उसकी जड़ों में होती है यदि हम पेड़ को हमेशा के लिए मारना चाहते हैं तो उसकी जड़ों को पूर्ण रूप से बाहर निकाल लिया जाना चाहिए उन्हें खुले में छोड़ दिया जाना चाहिए ताकि वे धप में मुरझा  जाए और हवा के कारण उनका दम घुट जाए इस प्रकार से आकर और रंग बदलने की एक लम्बी भीम के पश्चात हम कह सकते हैं कि पेड़ मर गया है


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  • Date:- 2025:12:16
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शीर्ष तक पहुंचे


संतोष यादव का जन्म परम्पपरागत परिवार में हुआ। उनके पांचभई थे। उनका जन्म हरयाणा के जौनियावास नमक छोटे से गांव में हुआ। लड़की का नाम संतोष रखा गया जिसका अर्थ है सन्तुष्टि। लेकिन जीवन के  परम्परागत ढंग से संतोष हमेशा संतुष्ट नहीं थ। उन्होंने शुरू से ही अपनी इच्छा से जीवन जीने की ठान ली थी। जहां अन्य लड़कियां परंपरागत भारतीय पोशाक पहनती थी वही संतोष निक्कर पसंद करती थी। संतोष के माता-पिता सम्पन्न... Read More

संतोष यादव का जन्म परम्पपरागत परिवार में हुआ। उनके पांचभई थे। उनका जन्म हरयाणा के जौनियावास नमक छोटे से गांव में हुआ। लड़की का नाम संतोष रखा गया जिसका अर्थ है सन्तुष्टि। लेकिन जीवन के  परम्परागत ढंग से संतोष हमेशा संतुष्ट नहीं थ। उन्होंने शुरू से ही अपनी इच्छा से जीवन जीने की ठान ली थी। जहां अन्य लड़कियां परंपरागत भारतीय पोशाक पहनती थी वही संतोष निक्कर पसंद करती थी।

संतोष के माता-पिता सम्पन्न भूमिपति थे जो अपने बच्चों को बढ़िया स्कूल मे भेजने का भार सहन कर सकते थे वह अपने बच्चों को देश की राजधानी दिल्ली भी भेज सकते थे क्योंकि यह उनके गांव के बहुत पास है । लेकिन परम्परागत का निर्वहन करते हुए जो रिवाज परिवार में  प्रचलित था उस रिवाज के अनुसार संतोष  को अपने गांव के स्थानीय स्कूल में ही पढ़ाई करनी पड़ी 

16 वर्ष की आयु में उनके माता-पिता उनका विवाह करना चाहते थे उन्होंने अपने माता-पिता को धमकीद दे दी कि यदि  उन्होंने उचित पढ़ाई नहीं की तो वह कभी भी शादी नहीं करवाएगी । उन्होंने घर छोड़ दिया और दिल्ली के एक स्कूल में अपना दाखिला करा लिया 

जब उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई का खर्चा देने से मना कर दिया तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक उन्हें बता दिया कि वह स्कूल समय के पश्चात नौकरी करके अपना खर्चा चला लेगी। तब उनके माता-पिता  उनकी पढ़ाई का खर्चा उठाने पर सहमत हो गए।

संतोष ने हाई स्कूल की परीक्षा पास कर ली और वह जयपुर चली गई। उन्होंने महारानी कॉलेज में दाखिला ले लिया तथा कस्तूरबा हॉस्टल में कमरा ले लिया अरावली पर्वतों को निहारत हुए पर बात रोहन के प्रति उनका प्यार उमर पाड़ा उन्होंने धान की बचत की और उत्तरकाशी में स्थित नहरू​  पर्वतारोही संस्थान में प्रवेश ले लिया।

इसके पश्चात संतोष हर वर्ष पर्वतारोहण पर जाने लग गई उनकी पर्वतों पर चढ़ने की निपुणताएं तेजी से परिपक्व हो गई इसके साथ ही उनमें ठंड और ऊंचाई के प्रति कठोर प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति का विकास हो गया एक फौलादी इच्छा शक्ति शारीरिक सहनशीलता और एक हैरान कर देने वाली मानसिक मजबूती उन्होंने इस सब का बार-बार प्रदर्शन किया उनके द्वारा किए गए कठोर परिश्रम तथा लगन उनको 1992 में प्रसिद्ध के शिखर पर ले गए जब उन्होंने शरमाते हुए अरावली के पर्वतारोहियों से पूछा था कि क्या वह उसे अपने साथ शामिल कर सकते हैं मुश्किल से 20 वर्ष की आयु में संतोष यादव ने माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त कर ली और वह पूरी दुनिया की वह पर्वतारोही बन गई जिसने इतनी कम आयु में यह सफलता प्राप्त की न केवल उनकी पर्वतों पर चढ़ने की प्रवीणता शारीरिक योग्यता और मानसिक शक्ति ने उनके वरिष्ठ ए फसलों को प्रसन्न किया बल्कि दूसरों के प्रति उनकी और उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा ना उनके साथ पर्वतारोहण कर रहे पर्वतारोहियों के मन में विशेष स्थान बना दिया।

 

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  • Date:- 2025:12:12
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A truly beautiful mind


Ibert Einstein was born on 14th  March 1879 in the German city of ulm without any indication that he was dastined for greatness on the country his mother thought Albert was a break to her his head see made much to large.  At the age of 2 and a half Einstein Steel was not talking. When he finally did learn to speak he uttered everything twice Einstein did not know what to do with other ch... Read More

Ibert Einstein was born on 14th  March 1879 in the German city of ulm without any indication that he was dastined for greatness on the country his mother thought Albert was a break to her his head see made much to large. 

At the age of 2 and a half Einstein Steel was not talking. When he finally did learn to speak he uttered everything twice Einstein did not know what to do with other children, and his playmats called him brother boring saw the youngster blade by himself much of the time. He specially loved mechanical toys. Looking it is newborn sister maja he is said to have said fine but where are her wheels?"

A headmaster once told his father that what Einstein chose essay profession would not matter because he I never make a success at anything Einstein began learning to play the violin at the age of 6 because his mother when did him to he letter become a gifted amateur violinist maintaining this skill though hout his life.

But Albert Einstein was not a bad pupil. He went to High School in Manik wear I stand family had moved when he was 15 month old is gold marks in almost every subject I stand hated the school regimentation and often kalashed with his teachers. At the age of 15 Einstein felt so stifled there that he left the school for good.

The previous year Albert parent head moved to Milan and left their son with relatives relatives after Pro launched discussion I stand got his wish to continue his education in German speaking Switzerland in a city which was more liberal than munich.

Einstein  was highly gifted in mathematics and interested in physics and after finishing school he decided to study at a university in Zurich. But science was not the only thing that appealed to the dashing young man with the walrus moustache. 

In 1900,at the age of 21 , Albert Einstein was a university graduate and unemployed. He worked as a teaching assistant gave private lessons and finally secured a job in 1902 as a technical expert in the patent office in bern.

 


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  • Date:- 2025:12:10
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If I were you


SCENE  A Small cottage interior. There is an entrance back right (which might be curtened). Another door to the left must be a practical door. The furniture is simple consisting of small table towards the left a chair or two and a Divan rather upstage on the right on the table is a telephone (when the curtain rises Gerrard is standing by the table making a phone call he is a medium height and... Read More

SCENE 

A Small cottage interior. There is an entrance back right (which might be curtened). Another door to the left must be a practical door. The furniture is simple consisting of small table towards the left a chair or two and a Divan rather upstage on the right on the table is a telephone (when the curtain rises Gerrard is standing by the table making a phone call he is a medium height and wearing horn removed glass he is dressed in a lounge suit and a great coat his voice is cultured 

GERRARD: well tell him to phone up directly I must know yes I aspect b hair but you must not count't on that ... In about 10 minutes time. Right - ho. Good bye (he puts down  the phone and voice to the Diwan on the left where there is a travelling bag and stars packing whilst he is 10 in gadget another mail similar in build to girrard inter from the right silently -revolper in hand. He is fleshily dressed in an our court and a soft hat he burns accidently against the table and at the sound Gerrard turnce quickly.)

Intruder. How do I know that you are telling that truth? 

GERRARD. Oh don't not be a fool look for yourself Gerald open door and step away intruder leans forward to inspect it with his side towards gerrard but with the revolver ready As he  turns his head gerrard  give him a push in to the cupboard knocking the  revolver out of his hand ki Slams the door and locks it picks of the revolver and goes to the phone where he stands with the gun pointed at the cupboard door.) 

 


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  • Date:- 2025:12:09
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It Ites


कंप्यूटर- मैं कंप्यूटर हूं। आपने मुझे कहीं न कहीं पढ़ा या देखा होगा। मैं दिखने में तो आपके घर के टेलीविजन या टवी जैसा हूं लेकिन मुझमें में और टीवी में बहुत अंतर है। टीवी पर आप कवल कार्य कर्मों देखते ह किंतु मेरे साथ कार्टून फिल्म देखने खेल खेलने के अलावा आप और भी कार्य कर सकते हैं जैसे पत्र लिखना एवं इसे भेजना कार्ड बनना संख्या जोड़ना घटाना आदि। मैं बिजली से चलने वाली मशीन हू। मनुष्य ने अपने... Read More

कंप्यूटर-

मैं कंप्यूटर हूं। आपने मुझे कहीं न कहीं पढ़ा या देखा होगा। मैं दिखने में तो आपके घर के टेलीविजन या टवी जैसा हूं लेकिन मुझमें में और टीवी में बहुत अंतर है। टीवी पर आप कवल कार्य कर्मों देखते ह किंतु मेरे साथ कार्टून फिल्म देखने खेल खेलने के अलावा आप और भी कार्य कर सकते हैं जैसे पत्र लिखना एवं इसे भेजना कार्ड बनना संख्या जोड़ना घटाना आदि।

मैं बिजली से चलने वाली मशीन हू। मनुष्य ने अपने कार्यों को आसानी से करने एवं समय की बचत के लिए मुझे बनाया है। जैसे आपके शरीर में हाथ पैर नाक आंख मुंह आदि अंग है वैसे ही मॉनिटर  कीबोर्ड माउस मेरे अंग है। मैं बहुत तेजी से कार्य करता हूं। कठिन से कठिन कार्य को भी बड़ी आसानी से कुछ ही क्षणों में करलेट हूं। मैं आपके या आपके जैसे लोगों के दिए गए आदेश या निर्देश के अनुसार ही कार्य करता हू।

कंप्यूटर का इतिहास 

आप जिस कंप्यूटर को आजकल प्रयोग होते देखते हैं वह प्रारंभ में वैसा नहीं था। आजकल के कंप्यूटर का विकास पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिकों की खोज और उनके चिंतन के फल स्वरुप हुआ है पुराने समयम मनुष्य अपने पशुओं की गिनती अपने आसपास की वस्तुओं जैसे पत्थर, हल्दिया उंगलियां आदि की सहायता से करता था धीरे-धीरे मनुष्य ने जोड़ना घटाना गुणा करना आदि सीखा कई चीजों को एक साथ गिनने मैं जब उसे कठिनाई हुई तब उसने गिनने वाले सहायक उपकरणों का निर्माण किया 

 आइए जान गिनतारा अबाकस के बारे में।

गिनतारा किसी वस्तु को गिनने में सहायता करने वाला यह सबसे पहले और सरल उपकरण है। 

नेपियर बोन्स 

इसकी सहायता से गुना आसानी से किया जाता है 

बेब्स का एनालिटिकल इजन

यह एक ऐसी मशीन थी जो आजकल के कंप्यूटर की तरह थी यह सभी गणितीय क्रियाएं कर सकती थी इसमें सूचनाए सुरक्षित भी रह सकती थी किंतु दुर्भाग्य वंश यह मशीन नहीं बन पाई इस मशीन को बनाने वाले प्रोफेसर चार्ल्स बनाया को आधुनिक कप्यूटर का पिता माना जाता है कंप्यूटर को अधिक से अधिक उपयोगी बनाने हेतु उसमें नई-नई क्षमता निरंतर विकसित की जाती रही है सन 1990 के बाद से ऐसे कंप्यूटर का विकास किया जा रहा है। जो सोचने एवं निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। कंप्यूटर हर जगह उपयोग हो सके इसलिए उसे विभिन्न आकर म भी बनाया गया है

कंप्यूटर की उपयोगिता 

कंप्यूटर द्वारा आजकल अधिकांश बैंको रेलवे स्टेशनों कार्यालयों आदि में कार्य किया जाता है क्योंकि यह अत्यंत उपयोगी है कंप्यूटरम  में विशेष गुण है जिसके कारण इसका उपयोग हर क्षेत्र में दिन प्रतिदिन बढ़ताही जा रहा है कंप्यूटर में कौन-कौन सी विशेषताएं होती हैं आइए जाने कंप्यूटर आज मनुष्य की एक आवशकता बन गया है सभी चाहते हैं कि काम शत -प्रतिशत सही हो जल्दी हो तथा सूचनाओं सुरक्षित भी रहे। कंप्यूटर कहां और कैसे उपयोग है आइए जानें 

1.  विद्यालयम में उपयोग 

2 . रेलवे स्टेशन में उपयोग 

3 . अस्पताल में उपयोग 

4. मनोरंजन में उपयोग

5. कार्यालय में उपयोग 


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  • Author:- 9045793943
  • Date:- 2025:12:03
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