शुरुआती लोग (पूर्वज) प्रकृति के साथ मिलकर शिकार और फल कद खाकर जीवन बिताते थे वह आज का इस्तेमाल करना सीखे सरल कपड़े पहनते थे और परिवार में समुदाय के साथ रहते थे जहां भाईचारा होता था और उनकी ज़रूरतें कम थी जिससे वह शांत जीवन जीते थे जबकि बाद के समय में सिंधु घाटी सभ्यता जैसे सभ्यताओं मैं लोग खेती करते पशुपति और मछली खाते थे और कपड़े घर व सामाजिक जीवन का विकास हुआ।
आदिमानव (शिकार संग्राहक) का जीवन:
भोजन - कच्चा मांस फल कद मल खाते थे आज परिचित होने के बाद में भोजन को भूनकर या शेखर कहते थे जिसे वे गुफाओं में लड़कियों को जलाकर सुरक्षित रखते थे ।
आवास - वह गुफाओं में रहते थे और प्राकृतिक आपदाओं से जूझते थे ।
सामाजिक जीवन - वह समूह में रहते थे शिकार करते थे और परिवार में दोस्तों के साथ समय बिताते थे जहां जानकारी को सांझा किया जाता था ।
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग - (लगभग 4500-1900 ईसा पूर्व) ।
भोजन - वह विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों से प्राप्त उत्पाद जीव और मछली खाते थे यानी उनका आहार अधिक विविध था ।
कपड़े- कपास रेशम लिनन और उन जैसे रेशों से बने वस्त्र पहनते थे जिन्हें अलग-अलग तरीकों से लपेटा जाता था।
सामाजिक ववस्था - परिवार में पिता मुखिया होता था और स्त्रियां भी शिक्षा प्राप्त करती थी जो उन्हें कुशल गृहिणि बनाती थी
प्राचीन भारत सामान्य तौर पर ।
संचार । चिट्ठी तार रेडियो और अखबार के जरिए सूचना का आदान-प्रदान करते थे और फोन बूथ का इस्तेमाल करते थे
मनोरंजन। बच्चे बाहर खेलते थे लोग रेडियो सुनते थे और अखबार पढ़ते थे
जीवन शैली। ज़रूरतें कम थी भाईचारा ज्यादा था और वह अपने परिवार के साथ खुश रहते थे
कुल मिलाकर शुरुआती दौर में जीवन सरल और पकृति पर निर्भर था लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे सभ्यताएं विकसित हुई जीवन अधिक व्यवस्थित विविध और तकनीकी रूप से समृद्धि होता गया जिससे खेती व्यापार और सामाजिक नियम शामिल होते गए
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