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Blog by ilma | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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लंबाई तेजी से कैसे बढ़ाएं? आई यहां जाने तेजी से लंबाई बढ़ाना के लिए क्या करें?

लंबाई तेजी से कैसे बढ़ाएं? आई  यहां जाने तेजी से लंबाई बढ़ाना के लिए क्या करें?
लंबाई तेजीसे कैसे बढ़ाएं आए यहां जाने कैसे बढ़ा सकते हैं लंबाई को। तेजीसे लंबाई बढ़ाने के लिए ताड़ासन, और  वृक्षासन जैसे योगासन किए जा सकते हैं। धनुराशन भी लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। यह तीनों आसान बहुत ही तेजी से लंबाईको बढ़ा सकत है।   1.ताड़ासन (tadasana) इसे माउंटेन पोज भी कहा जाता है । यह आसन करना बहुत ही आसान है। सबसे पहले मैट पर‌ सावधान की स्थिति में खड़े होजाए । और अपनी बाजू ऊपर की ओर उठा... Read More
लंबाई तेजीसे कैसे बढ़ाएं आए यहां जाने कैसे बढ़ा सकते हैं लंबाई को। तेजीसे लंबाई बढ़ाने के लिए ताड़ासन, और  वृक्षासन जैसे योगासन किए जा सकते हैं। धनुराशन भी लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। यह तीनों आसान बहुत ही तेजी से लंबाईको बढ़ा सकत है।   1.ताड़ासन (tadasana) इसे माउंटेन पोज भी कहा जाता है । यह आसन करना बहुत ही आसान है। सबसे पहले मैट पर‌ सावधान की स्थिति में खड़े होजाए । और अपनी बाजू ऊपर की ओर उठाएं। उसकेबाद अपने दोनों हाथोंको ऊपर की ओर खींचे। और अपने पैरों की एडी ऊपर उठाई तथा अपने पंजों पर आ जए अपने शरीर को भी ऊपरकी ओर खींचे और अपने पूरे शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं कुछ समय के पश्चात धीरे-धीरे सांस को बाहर निकलिए और पहली अवस्था में आ जाए । फिर 10-15 बार यह अभ्यासकीजए। लाभ इसे करने से हाइट तेजी से बढ़ती है।  यह शरीर को फिट रखता है।  यह रीड की हड्डी को मजबूत बनता है।  यह हमारे शरीर की लंबाई को बढ़ाता है।  यह मांसपेशियों को रचला बनता है। यह शरीर के दर्द को आराम देता है। वृक्षासन से भी हाइट तेजी से बढ़ती है। अच्छी हाइट किस नहीं चाहिए होती। यहां तक कि आप जवां होनेके बाद अपनी हाइट बढ़ाने के लिए नियमितरूप से योग ताड़ासन व वृक्षासन आसनों का अभ्यास कर सकते हैं। जी हां योग आपकी हाइट में कुछ इंच जोड़ देता है। वृक्षासन को करने का तरीका।  इस आसन को करना बहुत ही आसान है। सबसे पहले मेट पर सीधे खड़े हो जाए। और उसके बाद दाहिनी घुटने को मोड़कर दाएं पैर को बाय जगह पर रखें। और बाएं पैर को सीधा रखें। तथाहाथों को सर के ऊपर उठाएं और हथेलियां को एकसाथ मिलाकर नमस्ते मुर्दा बनाएं। और कुछ समय इसी अवस्था में खड़े रहे। सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में वापिस आ जाएं। और अब बाएं पैर को दहनी जांघ पर रख कर इस मुर्दा का अभ्यास करें।  वृक्षासन करनेके लाभ: यह शरीर की हाइट को बढ़ाता है।  यह शरीर में लक बढ़ता है। यह संतुलन स्थिरता और एकाग्रता को बढ़ाता है। यह पांव की मांसपेशियां को मजबूत करता है।  यह रेड और पेट को स्वस्थ रखता है। यह मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है।  पानी का अधिक सेवन। हम अपने शरीर की सबसे बड़ी जरूरत पानी को कई बार इग्नोर कर देते हैं। अगर आप पूरा दिन सही मात्रा में पानी नहीं पाते हैं , तो इससे आपकी ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। पानी हमारे शरीर को हाइड्रेट रखना के साथ सेल्स के लिए भी काफी अहम होता है। यह हेल्य के लिए काफी अच्छा होता ह।
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[email protected] 28 Jan 2025 229 Views

योग का पूरा नाम क्या है?

योग का पूरा नाम क्या हैं। वैसे 'योग' शब्द 'युजिर योगे' तथा 'युज संयमने' धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। युज् समाधौ – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । Read More
योग का पूरा नाम क्या हैं। वैसे 'योग' शब्द 'युजिर योगे' तथा 'युज संयमने' धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। युज् समाधौ – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि ।
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[email protected] 27 Jan 2025 314 Views

योग के जन्मदाता कौन थे?

योग के जन्मदाता कौन थे। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है। Read More
योग के जन्मदाता कौन थे। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है।
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[email protected] 26 Jan 2025 254 Views

योग के जन्मदाता कौन थे?

योग के जन्मदाता कौन थ। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है। Read More
योग के जन्मदाता कौन थ। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है।
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[email protected] 23 Jan 2025 211 Views

आसन कितने प्रकार का होता है?

आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है. Read More
आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है.
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[email protected] 20 Jan 2025 497 Views

आसन कितने प्रकार का होता है?

आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है. Read More
आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है.
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[email protected] 20 Jan 2025 295 Views

सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है?

सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है। सूर्य नमस्कार को 'परम आसन' माना जाता है क्योंकि इसमें 12 आसनों को एक ही व्यायाम में शामिल किया जाता है । ये आसन चक्रीय रूप से किए जाते हैं और पूरे शरीर का व्यायाम कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार करते समय आप अपनी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। यह पेट के अंगों को भी फैलाता है और फेफड़ों को हवादार बनाता है Read More
सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है। सूर्य नमस्कार को 'परम आसन' माना जाता है क्योंकि इसमें 12 आसनों को एक ही व्यायाम में शामिल किया जाता है । ये आसन चक्रीय रूप से किए जाते हैं और पूरे शरीर का व्यायाम कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार करते समय आप अपनी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। यह पेट के अंगों को भी फैलाता है और फेफड़ों को हवादार बनाता है
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[email protected] 19 Jan 2025 518 Views

सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए?

सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए। शरीर की अलग-अलग बीमारियों के लिए या रोजाना स्वस्थ रहने के लिए योग शुरू करने से पहले कमलासन या पद्मासन को करना चाहिए। ध्यान के लिए किया जाने वाला ये योग आपको शरीर और मन को एकाग्र करता है और योग के लिए तैयार करता है। तो चलिए जानें पद्मासन या कमलासन । Read More
सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए। शरीर की अलग-अलग बीमारियों के लिए या रोजाना स्वस्थ रहने के लिए योग शुरू करने से पहले कमलासन या पद्मासन को करना चाहिए। ध्यान के लिए किया जाने वाला ये योग आपको शरीर और मन को एकाग्र करता है और योग के लिए तैयार करता है। तो चलिए जानें पद्मासन या कमलासन ।
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[email protected] 18 Jan 2025 291 Views

योग का सबसे पुराना रूप क्या है?

योग का सबसे पुराना रूप क्या है? योग का सबसे पुराना रूप वैदिक योग के नाम से जाना जाता है, जिसकी शुरुआत ऋग्वेद से हुई है, जो दुनिया का सबसे पुराना लिखित संस्कृत ग्रंथ है। इसे संभवतः लगभग 10,000 साल पहले स्वर्ण युग या सत्य युग के दौरान लिखा गया था। Read More
योग का सबसे पुराना रूप क्या है? योग का सबसे पुराना रूप वैदिक योग के नाम से जाना जाता है, जिसकी शुरुआत ऋग्वेद से हुई है, जो दुनिया का सबसे पुराना लिखित संस्कृत ग्रंथ है। इसे संभवतः लगभग 10,000 साल पहले स्वर्ण युग या सत्य युग के दौरान लिखा गया था।
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[email protected] 17 Jan 2025 209 Views

वज्रासन करने का क्या तरीका है? और उसके क्या लाभ है?

वज्रासन करने का सही तरीका क्या है ?और इसके क्या फायदे हैं? वज्रासन( Vajrasana) इसे धनात्मक आसान भी कहते हैं। इस आसन को करने हेतु सर्वप्रथम दोनों टांगों को आगे की ओर फैला कर बैठिए । उसके बाद बाएं व  पैर पर शरीर का भार रखते हुए  दाहिनी टांग के घुटने को मोड कर दाएं हाथ की मदद से नितम के नीचे रखें। इसके पश्चात दाएं हाथ व मुड़े हुए घुटने पर शरीर के भार कै रखते हुए बाएं हाथ की मदद से बाएं पैर को बाय नित... Read More
वज्रासन करने का सही तरीका क्या है ?और इसके क्या फायदे हैं? वज्रासन( Vajrasana) इसे धनात्मक आसान भी कहते हैं। इस आसन को करने हेतु सर्वप्रथम दोनों टांगों को आगे की ओर फैला कर बैठिए । उसके बाद बाएं व  पैर पर शरीर का भार रखते हुए  दाहिनी टांग के घुटने को मोड कर दाएं हाथ की मदद से नितम के नीचे रखें। इसके पश्चात दाएं हाथ व मुड़े हुए घुटने पर शरीर के भार कै रखते हुए बाएं हाथ की मदद से बाएं पैर को बाय नितिन के नीचे रखिए इस अवस्था में घुटने, टाखने, और पैरों की उंगलियां फर्श से स्पर्श होनी चाहिए ।  अब अपने हाथों की हथेलियां अपने घुटनों पर रखिए । ऊपर का शरीर सीधा रहना चाहिए। इस समय श्व़ास गहरी,सम व धीमी होनी चाहिए।  लाभ( Benefits) यह एकाग्रता हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।  यह पेट दर्द व छाती से संबंधित विकारों से बचाव पर सहायक है। यह स्मरन शक्ति को बढ़ाता है। यह राजोधर्म से संबंधित समस्याओं के बचाव में सहायक है। इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है। यह श्रोणी संबंधित मांसपेशियों की शक्ति में वृद्धि करता है। यह आसान संबंधी विकृति ( Postural deformities)  को दूर करने में मदद करता है यह हर्निया से बचाव करता है और बवासीर में आराम देता है।  यह आसान उन लोगों हेतु उचित ध्यानासन  है जोकटिस्नायुशूल ( Sciatical) तथा त्रिक् संक्रमक रोगों से पीड़ित है। यह नितंबों की वसा को कम करने में सहायता करता है। यह आसान पाचन तंत्र को मजबूत करता है। यह आसान मोटापा नहीं अने में मदद करता है।    
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[email protected] 16 Jan 2025 306 Views