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Blog by Vanshika | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य क्यों थे आएइ जाने

संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य क्यों थे आएइ जाने
 संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य   संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना संसार में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई इसलिए उसके घोषणा पत्र के अनुसार निम्नलिखित उद्देश्य घोषित किए गए  अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखना  रसों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना   आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक समस्याओं को हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को निश्चित करना   सभी लोगों के मौलिक अधिकारों की मान्यत... Read More
 संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य   संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना संसार में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए की गई इसलिए उसके घोषणा पत्र के अनुसार निम्नलिखित उद्देश्य घोषित किए गए  अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखना  रसों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना   आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक समस्याओं को हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को निश्चित करना   सभी लोगों के मौलिक अधिकारों की मान्यता देना  धन्यवाद
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[email protected] 09 Mar 2026 57 Views

संयुक्त राष्ट्र संघ

संयुक्त राष्ट्र संघ
 संयुक्त राष्ट्र संघ  ​​ संसार के अनेक देशों की बर्बादी देखकर यह अनुभव किया गया कि भविष्य में ऐसे युद्ध ना हो संसार में शांति और सुरक्षा बनाए रखना पर के लिए विभिन्न राष्ट्रों ने सेंधवा नहीं सको नामक नगर में आपस में विचार विमर्श किया और एक संगठन का निर्माण करने का निश्चय किया 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की विभीषिका से बचाना शुरू में इस संघ में केवल 51 राष्ट्र सदस्य थे जिसमें भारत भी शामिल था... Read More
 संयुक्त राष्ट्र संघ  ​​ संसार के अनेक देशों की बर्बादी देखकर यह अनुभव किया गया कि भविष्य में ऐसे युद्ध ना हो संसार में शांति और सुरक्षा बनाए रखना पर के लिए विभिन्न राष्ट्रों ने सेंधवा नहीं सको नामक नगर में आपस में विचार विमर्श किया और एक संगठन का निर्माण करने का निश्चय किया 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की विभीषिका से बचाना शुरू में इस संघ में केवल 51 राष्ट्र सदस्य थे जिसमें भारत भी शामिल था वर्तमान में संयुक्त राष्ट्रीय संघ में 193 सदस्य है   धन्यवाद
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[email protected] 09 Mar 2026 48 Views

वैशिवक समुदाय एवं भारत

वैशिवक समुदाय एवं भारत
 वैशि वक समुदाय  संसार में छोटे-बड़े काम शक्तिशाली और अधिक शक्तिशाली सभी तरह के देश है कुछ देशों का आपसी संबंध मित्र पूर्ण रहता है कभी-कभी तो दो या कई देशों के बीच मतभेद हो जाता है यही मतभेद कभी-कभी युद्ध का भी रूप ले लेता है मत भेद के कारण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं कोई देश अपने साम्राज्य की सीमा बढ़ाने की इच्छा से तो कोई अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए युद्ध करते हैं विश्व में प्रिये छोटे स्तर पर युद... Read More
 वैशि वक समुदाय  संसार में छोटे-बड़े काम शक्तिशाली और अधिक शक्तिशाली सभी तरह के देश है कुछ देशों का आपसी संबंध मित्र पूर्ण रहता है कभी-कभी तो दो या कई देशों के बीच मतभेद हो जाता है यही मतभेद कभी-कभी युद्ध का भी रूप ले लेता है मत भेद के कारण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं कोई देश अपने साम्राज्य की सीमा बढ़ाने की इच्छा से तो कोई अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए युद्ध करते हैं विश्व में प्रिये छोटे स्तर पर युद्ध होते रहते हैं किंतु 20वीं शताब्दी में दो विश्व युद्ध हुए हैं जिनमें विश्व केके देशों ने भाग लिया है और उसका विश्व के सांसद देश पर प्रभाव पड़ा  पहले विश्लेषण 1914 में प्रारंभ हुआ था जो सन 1918 तक चला इसमें भाग लेने वाले देश थे एक तरफ ऑस्ट्रेलिया हंगरी जर्मनी तुर्की तथा दूसरी तरफ सर्बिया इंग्लैंड फ्रांस रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका  शिक्षक की सहायता से संसार के मानचित्र के प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने वाले देशों के नाम अंकित कीजिए  इस विश्व युद्ध में धन-धन की अपार हानि होने पर भी केवल 20 वर्ष के बाद ही दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया इस युद्ध में भाग लेने वाले देशों में एक और इंग्लैंड फ्रांस और रूस तथा दूसरी ओर जर्मनी जापान और इटली थे यह विश्व युद्ध पहला विश्व युद्ध से भी अधिक भयंकर था अपर धन की हानि के अतिरिक्त 5 करोड़ से अधिक लोग मारे गए और अनेक देश बुरी तरह बर्बाद हो गए  द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु बम के हमले से दो शहर हिरोशिमा एवं नागासाकी नष्ट हो गए पता कीजिए यह नगर किस देश में है   धन्यवाद
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[email protected] 09 Mar 2026 35 Views

लोहार अधिवेशन और पूर्ण स्वराज की मांग

लोहार अधिवेशन और पूर्ण स्वराज की मांग
 लोहार अधिवेशन और पूर्ण स्वराज की मांग   सन 1929 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लोहार में शुरू हुआ इस अधिवेशन के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू चुने गए ब्रिटिश सरकार को नेहरू रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए 31 दिसंबर 1939 ई की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी इसलिए राष्ट्रीय कांग्रेस ने रवि नदी के तट पर 31 दिसंबर 1929 की रात्रि तिरंगा झंडा फहराया और पूर्ण स्वराज की मांग का प्रस्ताव पारित किया  धन्यवाद Read More
 लोहार अधिवेशन और पूर्ण स्वराज की मांग   सन 1929 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लोहार में शुरू हुआ इस अधिवेशन के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू चुने गए ब्रिटिश सरकार को नेहरू रिपोर्ट स्वीकार करने के लिए 31 दिसंबर 1939 ई की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी इसलिए राष्ट्रीय कांग्रेस ने रवि नदी के तट पर 31 दिसंबर 1929 की रात्रि तिरंगा झंडा फहराया और पूर्ण स्वराज की मांग का प्रस्ताव पारित किया  धन्यवाद
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[email protected] 08 Mar 2026 57 Views

काकोरी कांड

काकोरी कांड
 काकोरी कांड  अक्टूबर 1924 ईस्वी में क्रांतिकारी युवकों का कानपुर में एक सम्मेलन हुआ और हिंदुस्तान पब्लिक संगठन का गठन किया गया इसमें देश से अंग्रेजी सत्ता को जड़ से अखाड़ फेंकना तथा भारत को स्वतंत्र करने का संकल्प लिया गया संघर्ष छोड़ने के लिए धन का अभाव था इन क्रांतिकारियों ने 9 अगस्त 1925 ई को लखनऊ के निकट कटोरी में एक रेलगाड़ी रोककर सरकारी खजाने को अपने अधिकार में ले लिया बाद में वह पकड़े गए इ... Read More
 काकोरी कांड  अक्टूबर 1924 ईस्वी में क्रांतिकारी युवकों का कानपुर में एक सम्मेलन हुआ और हिंदुस्तान पब्लिक संगठन का गठन किया गया इसमें देश से अंग्रेजी सत्ता को जड़ से अखाड़ फेंकना तथा भारत को स्वतंत्र करने का संकल्प लिया गया संघर्ष छोड़ने के लिए धन का अभाव था इन क्रांतिकारियों ने 9 अगस्त 1925 ई को लखनऊ के निकट कटोरी में एक रेलगाड़ी रोककर सरकारी खजाने को अपने अधिकार में ले लिया बाद में वह पकड़े गए इस लूट कांड में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल रोशन सिंह राजेंद्र लाहिड़ी तथा अशफाक अल्लाह खान को फांसी दी गई अन्य व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा देकर अंडमान भेज दिया गया और 17 लोगों को लंबी सजा सुनाई गई चंद्रशेखर आजाद फरार हो गए  धन्यवाद
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[email protected] 08 Mar 2026 77 Views

गांधी जी की डाडी यात्रा

गांधी जी की डाडी यात्रा
गांधी जी की  डाडी यात्रा:-  सन 1930 के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में कांग्रेस को सविनय अवज्ञा आंदोलन करने का अधिकार दे दिया गया था अतः गांधीजी के नेतृत्व में स्वराज की प्राप्ति के लिए सामान्य अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया गया गांधी जी ने 1930 ईस्वी में नमक कानून को तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया 12 मार्च 1930 ई को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 सहयोगियों के साथ डंडी की और यात्रा प्र... Read More
गांधी जी की  डाडी यात्रा:-  सन 1930 के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में कांग्रेस को सविनय अवज्ञा आंदोलन करने का अधिकार दे दिया गया था अतः गांधीजी के नेतृत्व में स्वराज की प्राप्ति के लिए सामान्य अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया गया गांधी जी ने 1930 ईस्वी में नमक कानून को तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया 12 मार्च 1930 ई को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 सहयोगियों के साथ डंडी की और यात्रा प्रारंभ की तथा 6 अप्रैल 1930 ईस्वी में दांडी पहुंचकर गांधी जी ने समुद्र के किनारे नमक बनाकर अंग्रेजों का कानून तोड़ दिया  इस सविनय अवज्ञा आंदोलन में सर ही बहुत बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष स्वयं सबको ने भाग लिया विदेशी माल का बहिष्कार किया गया कहीं-कहीं किसानों ने लग्न देना बंद कर दिया सरकार ने निर्मम दमन हत्या स्त्री पुरुषों पर लाठी और गोली की बौछार के द्वारा इस आंदोलन को को दबाने का प्रयास किया 5 में 1930 ई को सरकार ने गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया इसके विरोध में मद्रास चेन्नई कोलकाता और कराची आदि नगरों में प्रदर्शन हुए और प्रदर्शन कार्यों की विशाल भीड और पुलिस के बीच टकराव हुई  धन्यवाद
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[email protected] 08 Mar 2026 54 Views

चोरी चोरी कांड

चोरी चोरी कांड
 चोरी चोरी कांड   4 फरवरी 1922 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चोरी चोरी नामक स्थान के किस थाने पर अपने विरोध प्रदर्शन के लिए आए थे क्योंकि पुलिस ने उनके एक साथी को बहुत मारा था जब वह थाने पर आए तो पुलिस ने उन पर भी गोली चलाने शुरू कर दी गुस्से में आकर किसानों ने थाने में आग लगा दी इस घटना से गांधी जी को काफी दुख हुआ था 12 फरवरी 1922 ई को उन्होंने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया उनका म... Read More
 चोरी चोरी कांड   4 फरवरी 1922 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चोरी चोरी नामक स्थान के किस थाने पर अपने विरोध प्रदर्शन के लिए आए थे क्योंकि पुलिस ने उनके एक साथी को बहुत मारा था जब वह थाने पर आए तो पुलिस ने उन पर भी गोली चलाने शुरू कर दी गुस्से में आकर किसानों ने थाने में आग लगा दी इस घटना से गांधी जी को काफी दुख हुआ था 12 फरवरी 1922 ई को उन्होंने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया उनका मन था कि हिंसा से स्वाधीनता प्राप्त नहीं की जा सकती उनके अनुसार किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अप्लाई गए तरीका भी महत्वपूर्ण है अब गांधी जी ने रचनात्मक कार्य करने का निश्चय किया इसमें हाथ से कटाई बुनाई छुआछूत का निवारण एवं संपादक एकता की स्थापना आदि थे   
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[email protected] 07 Mar 2026 61 Views

असहयोग आंदोलन 1920 से 1922 ई

असहयोग आंदोलन 1920 से 1922 ई
 असहयोग आंदोलन  ऐसी विकट स्थिति में गांधीजी ने देश भर में असहयोग आंदोलन शुरू किया 1857 ई के विरुद्ध के बाद पूरे देश में एक साथ अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में होने वाला यह पहला बड़ा आंदोलन था इसका उद्देश्य था अन्य अंग्रेज शासन का सहयोग न करना   धन्यवाद Read More
 असहयोग आंदोलन  ऐसी विकट स्थिति में गांधीजी ने देश भर में असहयोग आंदोलन शुरू किया 1857 ई के विरुद्ध के बाद पूरे देश में एक साथ अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में होने वाला यह पहला बड़ा आंदोलन था इसका उद्देश्य था अन्य अंग्रेज शासन का सहयोग न करना   धन्यवाद
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[email protected] 07 Mar 2026 43 Views

आएइ जाने जलियां वाले कांड के बारे में जो की 1919 ईस्वी में हुआ था

आएइ जाने जलियां वाले कांड के बारे में जो की 1919 ईस्वी में हुआ था
 जलियांवाला कांड  इसी समय अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 ई को एक भयानक हत्याकांड हुआ पंजाब के नेता डॉक्टर सत्यपाल और डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में अमित सर के जलियांवाला बाग में एक विशाल सभा का आयोजन हुआ सभा के मध्य में ही पंजाब के सैनिक कमांडर जनरल डायर ने सैनिकों को लेकर बाघ को घेर लिया बिना चेतावनी दिए हुए उसने निहती भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया इससे कहीं तो निर्दोष लोगों की... Read More
 जलियांवाला कांड  इसी समय अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 ई को एक भयानक हत्याकांड हुआ पंजाब के नेता डॉक्टर सत्यपाल और डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में अमित सर के जलियांवाला बाग में एक विशाल सभा का आयोजन हुआ सभा के मध्य में ही पंजाब के सैनिक कमांडर जनरल डायर ने सैनिकों को लेकर बाघ को घेर लिया बिना चेतावनी दिए हुए उसने निहती भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया इससे कहीं तो निर्दोष लोगों की मृत्यु हो गई और हजारों लोग घायल हुए  जलियांवाला बाग हत्याकांड से सांसद देश में हाहाकार मच गया इसके विरोध में रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी सर की उपाधि वापस कर दी इसने मध्यवर्गीय के राष्ट्रवाद को जान राष्ट्रवाद के रूप में परिवर्तित कर दिया जिसमें किसान मजदूर छात्र दस्तकार कारीगर आदि सम्मिलित हुए अब राष्ट्रीय आंदोलन पहले की अपेक्षा अधिक दंड हो गया इसमें हिंदू मुस्लिम एकता का अभूतपूर्व प्रदर्शन हुआ जिससे भारतीय राष्ट्रवाद को काफी बल मिला धन्यवाद
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[email protected] 07 Mar 2026 41 Views

गांधी जी का नेतृत्व(1919 1935)

गांधी जी का नेतृत्व(1919 1935)
 गांधी जी का नेतृत्व(1919-1935)  प्रथम विश्व युद्ध के समय महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीयों ने अंग्रेजों की बहुत सहायता की गांधी जी ने सोचा कि इस युद्ध की समाप्ति पर अंग्रेज देश को आजाद कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को क्रांतिकारी की बढ़ती हुई शक्ति का दमन करने के लिए मार्च 1919 ईस्वी में रोलेट एक्ट पास कर दिया जिसके अंतर्गत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के कैद क... Read More
 गांधी जी का नेतृत्व(1919-1935)  प्रथम विश्व युद्ध के समय महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीयों ने अंग्रेजों की बहुत सहायता की गांधी जी ने सोचा कि इस युद्ध की समाप्ति पर अंग्रेज देश को आजाद कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस को क्रांतिकारी की बढ़ती हुई शक्ति का दमन करने के लिए मार्च 1919 ईस्वी में रोलेट एक्ट पास कर दिया जिसके अंतर्गत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के कैद कर सकती थी गांधी जी ने फरवरी 1919 ईस्वी में इसके विरोध में सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ कर दिया धन्यवाद
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[email protected] 07 Mar 2026 63 Views