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Khushi prerna

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Blog by Khushi prerna | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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ध्यान (क्रिया)

ध्यान:-एक क्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है। ध्यान का उद्देश्य कोई लाभ प्राप्त करना हो सकता है या ध्यान करना अपने-आप में एक लक्ष्य हो सकता है। 'ध्यान' से अनेकों प्रकार की क्रियाओं का बोध होता है। इसमें मन को विशान्ति देने की सरल तकनीक से लेकर आन्तरिक ऊर्जा या जीवन-शक्ति (की, प्राण आदि) का निर्माण तथा करुणा, प्रेम, धैर्य, उदारता, क्षमा... Read More
ध्यान:-एक क्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है। ध्यान का उद्देश्य कोई लाभ प्राप्त करना हो सकता है या ध्यान करना अपने-आप में एक लक्ष्य हो सकता है। 'ध्यान' से अनेकों प्रकार की क्रियाओं का बोध होता है। इसमें मन को विशान्ति देने की सरल तकनीक से लेकर आन्तरिक ऊर्जा या जीवन-शक्ति (की, प्राण आदि) का निर्माण तथा करुणा, प्रेम, धैर्य, उदारता, क्षमा आदि गुणों का विकास आदि सब समाहित हैं। अलग-अलग सन्दर्भों में 'ध्यान' के अलग-अलग अर्थ हैं। ध्यान का प्रयोग विभिन्न धार्मिक क्रियाओं के रूप में अनादि काल से किया जाता रहा है। चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित में बांधा जाता है उस में इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहाँ से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है। ध्यान से लाभ ऐसा पाया गया है कि ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं। .बेहतर स्वास्थ्य . शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धि . रक्तचाप में कमी . तनाव में कमी. . स्मृति-क्षय में कमी (स्मरण शक्ति में वृद्धि) . वृद्ध होने की गति में कमी उत्पादकता में वृद्धि मन शान्त होने पर उत्पादक शक्ति बढती है; लेखन आदि रचनात्मक कार्यों में यह विशेष रूप से लागू होता है। आत्मज्ञान की प्राप्ति ध्यान से हमे अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है। छोटी-छोटी बातें परेशान नहीं करतीं मन की यही प्रकृति (आदत) है कि वह छोटी-छोटी अर्थहीन बातों को बड़ा करके गंभीर समस्यायों के रूप में बदल देता है। ध्यान से हम अर्थहीन बातों की समझ बढ जाती है; उनकी चिन्ता करना छोड़ देते हैं; सदा बडी तस्वीर देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं। दिव्य दर्शन :- प्राचीन समय में ऋषि मुनि और संत लोग ध्यान लगाकर अपने आराध्य देव के दर्शन प्राप्त करते थे और उनसे अपने समस्या का हल भी पुछा करते थे , यह आज के समय में भी संभव है , उदहारण के तौर पर स्वामी राम कृष्ण परमहंस अपने आराध्य देवी काली से ध्यान के द्वारा साक्षात् बाते करते  चिंता से छुटकारा वैज्ञनिकों के अनुसार ध्यान से व्यग्रता का ३९ प्रतिशत तक नाश होता है और मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है। बौद्ध धर्म में इसका उल्लेख पहले से ही मिलता है।[1] अनंत समाधि को प्राप्त करना / मोक्ष प्राप्त करना - ध्यान एक भट्टी के सामान है जिसमे हमारे जन्म जन्मांतरों की पाप भस्म हो जाती है , और हमें अनंत सुख और आनद प्राप्त होता है |
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[email protected] 07 Jan 2025 206 Views

ध्यान के लाभ

ध्यान क्या है?  ध्यान एक विश्राम है यह किसी वस्तु पर अपने विचारों का केन्द्रीकरण या एकाग्रता नहीं है, अपितु यह अपने आप में विश्राम पाने की प्रक्रिया है। ध्यान करने से हम अपने किसी भी कार्य को एकाग्रता पूर्ण सकते हैं। ध्यान के 5 स्वास्थ्य लाभ ध्यान के कारण शरीर की आतंरिक क्रियाओं में विशेष परिवर्तन होते हैं और शरीर की प्रत्येक कोशिका प्राणतत्व (ऊर्जा) से भर जाती है। शरीर में प्राणतत्व के बढ़ने से प्... Read More
ध्यान क्या है?  ध्यान एक विश्राम है यह किसी वस्तु पर अपने विचारों का केन्द्रीकरण या एकाग्रता नहीं है, अपितु यह अपने आप में विश्राम पाने की प्रक्रिया है। ध्यान करने से हम अपने किसी भी कार्य को एकाग्रता पूर्ण सकते हैं। ध्यान के 5 स्वास्थ्य लाभ ध्यान के कारण शरीर की आतंरिक क्रियाओं में विशेष परिवर्तन होते हैं और शरीर की प्रत्येक कोशिका प्राणतत्व (ऊर्जा) से भर जाती है। शरीर में प्राणतत्व के बढ़ने से प्रसन्नता, शांति और उत्साह का संचार भी बढ़ जाता है। ध्यान से शारीरिक स्तर पर होने वाले लाभ 1.उच्च रक्तचाप का कम होना, रक्त में लैक्टेट का कम होना, उद्वेग/व्याकुलता का कम होना। 2.तनाव से सम्बंधित शरीर में कम दर्द होता है। तनाव जनित सिरदर्द, घाव, अनिद्रा, मांशपेशियों एवं जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है। 3.भावदशा व व्यवहार बेहतर करने वाले सेरोटोनिन हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है। 4.प्रतिरक्षा तंत्र में सुधार आता है। 5.ऊर्जा के आतंरिक स्रोत में उन्नति के कारण ऊर्जा-स्तर में वृद्धि होती है। ध्यान के 11 मानसिक लाभ  ध्यान, मस्तिष्क की तरंगों के स्वरुप को अल्फा स्तर पर ले आता है जिससे चिकित्सा की गति बढ़ जाती है। मस्तिष्क पहले से अधिक सुन्दर, नवीन और कोमल हो जाता है। ध्यान मस्तिष्क के आतंरिक रूप को स्वच्छ व पोषण प्रदान करता है। जब भी आप व्यग्र, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान आपको शांत करता है। ध्यान के सतत अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं: 1.व्यग्रता का कम होना 2.भावनात्मक स्थिरता में सुधार 3.रचनात्मकता में वृद्धि 4.प्रसन्नता में संवृद्धि 5.सहज बोध का विकसित होना 6.मानसिक शांति एवं स्पष्टता 7.परेशानियों का छोटा होना 8.ध्यान मस्तिष्क को केन्द्रित करते हुए कुशाग्र बनाता है तथा विश्राम प्रदान करते हुए विस्तारित करता है। 9.बिना विस्तारित हुए एक कुशाग्र बुद्धि क्रोध, तनाव व निराशा का कारण बनती है। 10.एक विस्तारित चेतना बिना कुशाग्रता के अकर्मण्य/ अविकसित अवस्था की ओर बढ़ती है। 11.कुशाग्र बुद्धि व विस्तारित चेतना का समन्वय पूर्णता लाता है। ध्यान आपको जागृत करता है कि आपकी आतंरिक मनोवृत्ति ही प्रसन्नता का निर्धारण करती है। ध्यान के 3 आध्यात्मिक लाभ  ध्यान का कोई धर्म नहीं है और किसी भी विचारधारा को मानने वाले इसका अभ्यास कर सकते हैं। मैं कुछ हूँ इस भाव को अनंत में प्रयास रहित तरीके से समाहित कर देना और स्वयं को अनंत ब्रह्मांड का अविभाज्य पात्र समझना। ध्यान की अवस्था में आप प्रसन्नता, शांति व अनंत के विस्तार में होते हैं और यही गुण पर्यावरण को प्रदान करते हैं, इस प्रकार आप सृष्टी से सामंजस्य में स्थापित हो जाते हैं। ध्यान आप में सत्यतापूर्वक वैयक्तिक परिवर्तन ला सकता है। क्रमशः आप अपने बारे में जितना ज्यादा जानते जायेंगे, प्राकृतिक रूप से आप स्वयं को ज्यादा खोज पाएंगे। ध्यान के लाभ कैसे प्राप्त करें  ध्यान के लाभों को महसूस करने के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है। प्रतिदिन यह कुछ ही समय लेता है। प्रतिदिन की दिनचर्या में एक बार आत्मसात कर लेने पर ध्यान दिन का सर्वश्रेष्ठ अंश बन जाता है। ध्यान एक बीज की तरह है। जब आप बीज को प्यार से विकसित करते हैं तो वह उतना ही खिलता जाता है. प्रतिदिन, सभी क्षेत्रों के व्यस्त व्यक्ति आभार पूर्वक अपने कार्यों को रोकते हैं और ध्यान के ताज़गी भरे क्षणों का आनंद लेते हैं। अपनी अनंत गहराइयों में जाएँ और जीवन को समृद्ध बनाएं।  छात्रों हेतु ध्यान के 5 लाभ  1. आत्मविश्वास में वृद्धि 2. अधिक केन्द्रित व स्पष्ट मन 3. बेहतर स्वास्थ्य 4. बेहतर मानसिक शक्ति व ऊर्जा 5. अधिक गतिशीलता
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[email protected] 07 Jan 2025 198 Views

ध्यान

ध्यान हिन्दू धर्म, भारत की प्राचीन शैली और विद्या के सन्दर्भ में महर्षि पतंजलि द्वारा विरचित योगसूत्र में वर्णित अष्टांगयोग का एक अंग है[1]। ये आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि है। ध्यान का अर्थ किसी भी एक विषय की धारण करके उसमें मन को एकाग्र करना होता है। मानसिक शांति, एकाग्रता, दृढ़ मनोबल, ईश्वर का अनुसंधान, मन को निर्विचार करना, मन पर काबू पाना जैसे कई उद्दयेश... Read More
ध्यान हिन्दू धर्म, भारत की प्राचीन शैली और विद्या के सन्दर्भ में महर्षि पतंजलि द्वारा विरचित योगसूत्र में वर्णित अष्टांगयोग का एक अंग है[1]। ये आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि है। ध्यान का अर्थ किसी भी एक विषय की धारण करके उसमें मन को एकाग्र करना होता है। मानसिक शांति, एकाग्रता, दृढ़ मनोबल, ईश्वर का अनुसंधान, मन को निर्विचार करना, मन पर काबू पाना जैसे कई उद्दयेशों के साथ ध्यान किया जाता है। ध्यान का प्रयोग भारत में प्राचीनकाल से किया जाता है। तथा भारत मे प्राचीन काल से ही गुरुकुल मे ध्यान की प्रक्रिया चलाई जाती हैं और ध्यान करना भारत मे खोजा गया है
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[email protected] 06 Jan 2025 218 Views

ध्यान की पद्धति

ध्यान की पद्धति   ध्यान करने के लिए व्यक्ति की रुचि के अनुसार अनेक प्रकार की पद्धति है जिसमें से कुछ पद्धतियाँ निम्न प्रकार की है:-   मुख्य पद्धति   ध्यान करने के लिए स्वच्छ जगह पर स्वच्छ आसन पे बैठकर साधक अपनी आँखे बंध करके अपने मन को दूसरे सभी संकल्प-विकल्पो से हटाकर शांत कर देता है। और ईश्वर, गुरु, मूर्ति, आत्मा, निराकार परब्रह्म या किसी की भी धारणा करके उसमे अपने मन को स्थिर करके उसमें ही लीन... Read More
ध्यान की पद्धति   ध्यान करने के लिए व्यक्ति की रुचि के अनुसार अनेक प्रकार की पद्धति है जिसमें से कुछ पद्धतियाँ निम्न प्रकार की है:-   मुख्य पद्धति   ध्यान करने के लिए स्वच्छ जगह पर स्वच्छ आसन पे बैठकर साधक अपनी आँखे बंध करके अपने मन को दूसरे सभी संकल्प-विकल्पो से हटाकर शांत कर देता है। और ईश्वर, गुरु, मूर्ति, आत्मा, निराकार परब्रह्म या किसी की भी धारणा करके उसमे अपने मन को स्थिर करके उसमें ही लीन हो जाता है। जिसमें ईश्वर या किसीकी धारणा की जाती है उसे साकार ध्यान और किसी की भी धारणा का आधार लिए बिना ही कुशल साधक अपने मन को स्थिर करके लीन होता है उसे योग की भाषा में निराकार ध्यान कहा जाता है। गीता के अध्याय-६ में श्रीकृष्ण द्वारा ध्यान की पद्धति का वर्णन किया गया है।   ध्यान करने के लिए पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठा जा सकता है। शांत और चित्त को प्रसन्न करने वाला स्थल ध्यान के लिए अनुकूल है। रात्रि, प्रात:काल या संध्या का समय भी ध्यान के लिए अनुकूल है। ध्यान के साथ मन को एकाग्र करने के लिए प्राणायाम, नामस्मरण (जप), त्राटक का भी सहारा लिया जा सकता है। ध्यान में ह्रदय पर ध्यान केन्द्रित करना, ललाट के बीच अग्र भाग में ध्यान केन्द्रित करना, स्वास-उच्छवास की क्रिया पे ध्यान केन्द्रित करना, इष्टदेव या गुरु की धारणा करके उसमे ध्यान केन्द्रित करना, मन को निर्विचार करना, आत्मा पे ध्यान केन्द्रित करना जैसी कई पद्धतियाँ है। ध्यान के साथ प्रार्थना भी कर सकते है। साधक अपने गुरु के मार्गदर्शन और अपनी रुचि के अनुसार कोई भी पद्धति अपनाकर ध्यान कर सकता है।   ध्यान के अभ्यास के प्रारंभ में मन की अस्थिरता और एक ही स्थान पर एकांत में लंबे समय तक बैठने की अक्षमता जैसी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। निरंतर अभ्यास के बाद मन को स्थिर किया जा सकता है और एक ही आसन में बैठने के अभ्यास से ये समस्या का समाधान हो जाता है। सदाचार, सद्विचार, यम, नियम का पालन और सात्विक भोजन से भी ध्यान में सरलता प्राप्त होती है।   ध्यान का अभ्यास आगे बढ़ने के साथ मन शांत हो जाता है जिसको योग की भाषा में चित्तशुद्धि कहा जाता है। ध्यान में साधक अपने शरीर, वातावरण को भी भूल जाता है और समय का भान भी नहीं रहता। उसके बाद समाधिदशा की प्राप्ति होती है। योगग्रंथो के अनुसार ध्यान से कुंडलिनी शक्ति को जागृत किया जा सकता है और साधक को कई प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त होती है।
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[email protected] 06 Jan 2025 210 Views

ध्यान के नुकसान

ध्यान के नुकसान  हालांकि ध्यान के कई लाभ हैं लेकिन उसकी कुछ कमियां भी हैं जिन्हें जानना महत्वपूर्ण है, जो अभ्यास के दौरान उत्पन्न हो सकती हैं।   यह खासतौर से शुरुआती लोगों के लिए जानना अधिक ज़रूरी है, जो नीचे दी गई चुनौतियों में से एक का सामना ज़रूर कर सकते हैं। मेडिटेशन और योग शिक्षकों को भी इन महत्वपूर्ण कमियों से जागरूक होना चाहिए, क्योंकि उनके छात्रों को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता ह... Read More
ध्यान के नुकसान  हालांकि ध्यान के कई लाभ हैं लेकिन उसकी कुछ कमियां भी हैं जिन्हें जानना महत्वपूर्ण है, जो अभ्यास के दौरान उत्पन्न हो सकती हैं।   यह खासतौर से शुरुआती लोगों के लिए जानना अधिक ज़रूरी है, जो नीचे दी गई चुनौतियों में से एक का सामना ज़रूर कर सकते हैं। मेडिटेशन और योग शिक्षकों को भी इन महत्वपूर्ण कमियों से जागरूक होना चाहिए, क्योंकि उनके छात्रों को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, और समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।   1. अपने लिए ध्यान करने की "सही" तकनीक ढूंढना। कुछ शिक्षकों या पुस्तकों का मानना है कि उनका तरीका ही ध्यान करने का सबसे सही तरीका है। अन्य तरीकों को वे गलत तकनीक बताकर खारिज कर देते हैं। यह बिलकुल गलत है, इस बारे में सतर्क रहिये। मेडिटेशन के बारे में सबसे अच्छी चीज़ यह है कि इसे करने के कई तरीके और तकनीक हैं। ध्यान करने के कई दृष्टिकोण भी हैं, और आपको केवल एक तरीका खोजना है जो आपके लिए सही साबित हो।   2. अपनी दबी हुई भावनाओं का सामना करना। आपके ध्यान में अनुभव करने वाली सबसे गहरी चीज़ ये होती है कि आप खुद को पहचानते हैं। है। उसी प्रक्रिया में, दफन और दबी हुयी भावनाओं से आपका सामना होता है। ध्यान का मुख्य उद्देश्य आपके अंदर गहरायी में मौजूद, क्रोध, डर या ईर्ष्या की भावनाओं को नष्ट करना होता है, जिससे आपको असहज महसूस होता है। यह मेडिटेशन की एक स्वाभाविक और स्वस्थ प्रतिक्रिया है, और ये भावनाएं धीरे धीरे कम होती जाएंगी। अगर ध्यान करने वाला व्यक्ति इस कमी से अज्ञात होता है तो उन दफन भावनाओं से सामना होने पर उसे लगता है कि कुछ गड़बड़ हो रहा है और वो मेडिटेशन करना बंद भी कर सकता है।    3. एक सम्पूर्ण मेडिटेशनकर्ता बनने की कोशिश करना। आपको शायद खुद से उम्मीदें भी हो सकती हैं। यदि आप लंबे समय तक ध्यान के लिए बैठने लगते हैं, ध्यान करने के बाद शांति महसूस करते हैं और गुस्से पर आपका काबू हो गया है आदि स्थितियों में आप खुद से ज्यादा उम्मीदें लगाने लगते हैं। हम इंसान हैं और जैसा आजकल का वातावरण है उसमें कई बार केवल शांति से बैठना और ध्यान केंद्रित करना ही कठिन होता है तो आप इससे संतुष्ट रहिये और सम्पूर्ण मेडिटेशनकर्ता बनने के बारे में न सोचें।   4. मेडिटेशन को चिकित्सा की तरह समझने लगना। मेडिटेशन एक लम्बे समय तक करने वाला अभ्यास है, जो स्वास्थ्यप्रद और भीतरी पोषण देता है। हालांकि, अगर कोई कठिनाइयों का सामना कर रहा है और उसे इलाज की सख्त ज़रूरत है। तो मेडिटेशन उसका इलाज नहीं है। हो सकता है कि उन्हें वास्तव में चिकित्सक की ज़रूरत हो।   5. मोह माया से दूर होने का खतरा। मोह माया से दूर करना ध्यान का एक विशेष गुण है। लेकिन भारत में यह नुकसानदायक हो सकता है। हालाँकि मोह माया से दूर होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आपके जीवन में होने वाले नाटकों का आप पर कोई असर नहीं पड़ता है और मानसिक शांति महसूस करने में मदद मिलती है।   हालांकि, मोह माया से दूर होने का मतलब यह नहीं है कि किसी भी चीज को नज़रअंदाज़ करना, उसपर अधिकार जमाना या उपेक्षा करना। आपको अपने आसपास के लोगों और गतिविधियों से अलग नहीं होना चाहिए। क्योंकि ये सब आपको प्यार करते हैं और आपको निष्क्रिय या बेकार नहीं बनना चाहिए।
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[email protected] 05 Jan 2025 215 Views

गहरे ध्यान होने के लक्ष्ण

गहरे ध्यान होने के लक्ष्ण
ध्यान गहरा होने के लक्षण  जब प्राकृतिक रूप से ध्यान की अवस्था प्राप्त होती हैं। तब डर लगना साधारण हैं ये मन का दर है क्योंकि अहम का अंत हो गया हैं। इस डर पर विजय पाकर ही समाधि में प्रवेश होता हैं।   भौतिक जगत से वैराग्य हो जाता हैं। मन को सत्य के मार्ग का बोध होना । त्यागने योग्य डर लगना । ध्यान में गहरा उतरने से डर लगना। सतर्क हो जाना। शरीर में झटके आना। निष्काम कर्म में आनंद आना। साकम कर्म भावना... Read More
ध्यान गहरा होने के लक्षण  जब प्राकृतिक रूप से ध्यान की अवस्था प्राप्त होती हैं। तब डर लगना साधारण हैं ये मन का दर है क्योंकि अहम का अंत हो गया हैं। इस डर पर विजय पाकर ही समाधि में प्रवेश होता हैं।   भौतिक जगत से वैराग्य हो जाता हैं। मन को सत्य के मार्ग का बोध होना । त्यागने योग्य डर लगना । ध्यान में गहरा उतरने से डर लगना। सतर्क हो जाना। शरीर में झटके आना। निष्काम कर्म में आनंद आना। साकम कर्म भावना से मुक्ति। विचार को नियंत्रित नहीं कर पाना। अनावश्यक त्यागने योग्य विचार आना। ये सभी लक्षण मन के है, ब्रह्म का कोई गुण नहीं वह निर्गुण है। समाधि प्राप्त होने पर यह लक्षण भी समाप्त हो जाते हैं।
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[email protected] 05 Jan 2025 250 Views

दिन मे कितनी बार ध्यान करना चाहिए

आपको दिन में कितनी बार ध्यान करना चाहिए    अगर आप ध्यान के लिए नए हैं, तो दिन में 5 मिनट से शुरू करें.  आप दिन में 20 से 30 मिनट ध्यान कर सकते हैं.  आप दिनभर में 3 बार 10-10 मिनट के अलग-अलग सेशन में भी ध्यान कर सकते हैं.  आप अपनी दिनचर्या में छोटे और लंबे सत्रों का मिश्रण आज़मा सकते हैं.  अगर आपको लगता है कि छोटे सेशन में आपको और ज़्यादा करने की इच्छा होती है, तो धीरे-धीरे समय बढ़ाने की कोशिश करें... Read More
आपको दिन में कितनी बार ध्यान करना चाहिए    अगर आप ध्यान के लिए नए हैं, तो दिन में 5 मिनट से शुरू करें.  आप दिन में 20 से 30 मिनट ध्यान कर सकते हैं.  आप दिनभर में 3 बार 10-10 मिनट के अलग-अलग सेशन में भी ध्यान कर सकते हैं.  आप अपनी दिनचर्या में छोटे और लंबे सत्रों का मिश्रण आज़मा सकते हैं.  अगर आपको लगता है कि छोटे सेशन में आपको और ज़्यादा करने की इच्छा होती है, तो धीरे-धीरे समय बढ़ाने की कोशिश करें.  अगर लंबे सेशन में आपको डर लगता है, तो तब तक समय कम करें जब तक आपको सही संतुलन न मिल जाए.  ध्यान करने से जुड़ी कुछ और बातें:  ध्यान करने से मस्तिष्क पर मापनीय प्रभाव पड़ सकता है. ध्यान करने से बेहतर फ़ोकस, ज़्यादा उत्पादकता, और कम चिंता आ सकती है. ध्यान करने से शांत होने में मदद मिलती है. ध्यान करने से आपकी एकाग्रता बढ़ती है. ध्यान करने से आपकी भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशीलता आ सकती है. ध्यान और व्यायाम में संतुलन होना ज़रूरी है    
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[email protected] 04 Jan 2025 216 Views

एक दिन मे कितनी बार मेडिटेशन कर सकते है

एक दिन में कितनी बार मैडिटेशन कर सकते हैं? 1 दिन में आप कितनी भी बार मेडिटेशन कर सकते हैं ।भगवान का नाम लेने पर कोई रोक-टोक नहीं है सिर्फ आपकी इच्छा शक्ति बहुत जरूरी है। जब भी बैठे 10 मिनट से शुरू करें इसको 40 मिनट एक घंटा अपने समय के हिसाब से आप प्रयोग मिल सकते हैं । जब आप अपने ऑफिस या बिजनेस में जाते हैं और करीब 1 घंटे की कर चलने का समय होता है तो उसमें भजन लगाकर आप साथ-साथ गुरु मंत्र जाप सकते ह... Read More
एक दिन में कितनी बार मैडिटेशन कर सकते हैं? 1 दिन में आप कितनी भी बार मेडिटेशन कर सकते हैं ।भगवान का नाम लेने पर कोई रोक-टोक नहीं है सिर्फ आपकी इच्छा शक्ति बहुत जरूरी है। जब भी बैठे 10 मिनट से शुरू करें इसको 40 मिनट एक घंटा अपने समय के हिसाब से आप प्रयोग मिल सकते हैं । जब आप अपने ऑफिस या बिजनेस में जाते हैं और करीब 1 घंटे की कर चलने का समय होता है तो उसमें भजन लगाकर आप साथ-साथ गुरु मंत्र जाप सकते हैं ।भजन साथ-साथ गा सकते हैं आपका रास्ता भी खबर हो जाएगा और आपका समय का सदुपयोग भी जबरदस्त तरीके से हो जाएगा। अगर आप बस में सफर कर रहे हैं तो आप अपनी आंखों को बंद करके अपने अंतर मन में झांकना शुरू करें और भगवान का पूजा करना शुरू कर सकते हैं या खास तौर पर बहुत ही फायदेमंद होता है जब आदमी 10-10 घंटे की बस की यात्रा करके अपने गंतव्य स्थान पर जाता है। मेडिटेशन करना एक अच्छी आदतों में होता है और आप इसका आनंद मात्र 3 महीने करके देखें तो आप कभी मेडिटेशन करना छोड़ेंगे भी नहीं। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे मन में करीब 70000 विचार एक दिन में आते हैं इसमें नकारात्मक और सकारात्मक दोनों होते हैं जितना आप मेडिटेशन ज्यादा करोगे तो सकारात्मक विचारों की तरफ आपका मन मुड़ जाएगा फिर जिंदगी में खुशी ही खुशी होगी।
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[email protected] 04 Jan 2025 202 Views

ध्यान करना क्यो जरूरी है

ध्यान करना बहुत ज़रूरी है. ध्यान करने से कई फ़ायदे होते हैं, जैसे कि:  ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है.  इससे दिमाग में ऊर्जा और पॉज़िटिविटी आती है.  ध्यान करने से एकाग्रता और ध्यान क्षमता बढ़ती है.  इससे आत्म-जागरूकता और आत्म-स्वीकृति बढ़ती है.  ध्यान करने से चिंता, डिप्रेशन, और अन्य मानसिक समस्याओं से राहत मिलती है.  ध्यान करने से मूड बेहतर होता है और हमेशा पॉज़िटिव एनर्जी... Read More
ध्यान करना बहुत ज़रूरी है. ध्यान करने से कई फ़ायदे होते हैं, जैसे कि:  ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है.  इससे दिमाग में ऊर्जा और पॉज़िटिविटी आती है.  ध्यान करने से एकाग्रता और ध्यान क्षमता बढ़ती है.  इससे आत्म-जागरूकता और आत्म-स्वीकृति बढ़ती है.  ध्यान करने से चिंता, डिप्रेशन, और अन्य मानसिक समस्याओं से राहत मिलती है.  ध्यान करने से मूड बेहतर होता है और हमेशा पॉज़िटिव एनर्जी महसूस होती है.  ध्यान करने से शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है.  ध्यान करने से याददाश्त बढ़ती है.  ध्यान करने के लिए, सबसे पहले एक कंफ़र्टेबल जगह चुनें. योगियों के मुताबिक, ध्यान करने का सही समय सूर्योदय से डेढ़ से दो घंटे पहले यानी 3.30-5.30 बजे का होता है. अगर सुबह उठने में परेशानी है, तो 6-7 बजे के बीच भी ध्यान किया जा सकता है.
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[email protected] 03 Jan 2025 245 Views

मेडिटेशन करने के कुछ नुकसान

ध्यान (मेडिटेशन) करने के कुछ नुकसान ये हो सकते हैं:  अगर ध्यान गलत तरीके से किया जाए, तो इससे मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं.  ध्यान करने से बुरी यादें ताज़ा हो सकती हैं, जिससे डर, डिप्रेशन, या एंग्ज़ायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.  ध्यान करने से चिंता की भावना बढ़ सकती है और एंग्ज़ायटी अटैक भी पड़ सकते हैं.  ज़्यादा ध्यान करने से नींद कम आने लगती है.  ध्यान करने से मोटिवेशन और प्रेरणा की कमी आ... Read More
ध्यान (मेडिटेशन) करने के कुछ नुकसान ये हो सकते हैं:  अगर ध्यान गलत तरीके से किया जाए, तो इससे मन में नकारात्मक विचार आ सकते हैं.  ध्यान करने से बुरी यादें ताज़ा हो सकती हैं, जिससे डर, डिप्रेशन, या एंग्ज़ायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.  ध्यान करने से चिंता की भावना बढ़ सकती है और एंग्ज़ायटी अटैक भी पड़ सकते हैं.  ज़्यादा ध्यान करने से नींद कम आने लगती है.  ध्यान करने से मोटिवेशन और प्रेरणा की कमी आ सकती है.  ध्यान करने से सामाजिक कनेक्शन टूट सकता है.  ध्यान करने से शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि थकान, कमज़ोरी, सिर दर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं.  ध्यान करने से घबराहट महसूस हो सकती है.  ध्यान करने से होने वाले नुकसानों से बचने के लिए, सही तरीके से ध्यान करना चाहिए. ध्यान हमेशा किसी प्रशिक्षित गुरु या विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए. साथ ही, अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्यान करना चाहिए.
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[email protected] 03 Jan 2025 280 Views

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