Company Logo

Khushi prerna

WEFRU7140112214202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Khushi prerna | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Khushi prerna

ध्यान क्या है

ध्यान एकाग्र होना नहीं है; यह नींद भी नहीं है। ध्यान सजगतापूर्वक विश्राम करना और तनाव मुक्त होना है। ध्यान श्रम साध्य नहीं है। ध्यान हमारे अन्त:कर्ण के गहरे मौन, अत्यंतता और आत्मा को जानने में सहायक है। क्या ध्यान कोई भी कर सकता है आराम सबको चाहिए। किंतु वास्तव में हमें पता नहीं है कि पूर्ण रूप से विश्राम कैसे मिलता है। ध्यान हमारे लिए कोई नई अथवा बाह्य वस्तु नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अपने जन्म स... Read More
ध्यान एकाग्र होना नहीं है; यह नींद भी नहीं है। ध्यान सजगतापूर्वक विश्राम करना और तनाव मुक्त होना है। ध्यान श्रम साध्य नहीं है। ध्यान हमारे अन्त:कर्ण के गहरे मौन, अत्यंतता और आत्मा को जानने में सहायक है। क्या ध्यान कोई भी कर सकता है आराम सबको चाहिए। किंतु वास्तव में हमें पता नहीं है कि पूर्ण रूप से विश्राम कैसे मिलता है। ध्यान हमारे लिए कोई नई अथवा बाह्य वस्तु नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अपने जन्म से कुछ माह पहले हम ध्यान ही कर रहे होते हैं। आप अपनी माँ के गर्भ में होते हो तो कुछ भी नहीं कर रहे होते हो। आप अपना भोजन तक नहीं चबा रहे होते हो। बस मस्त रहते हुए द्रव्य में तैरते रहते हो। यह ध्यान अथवा पूर्ण विश्राम ही है। तब आपको कुछ भी नहीं करना पड़ता था, आपके लिए सब कुछ किया जा रहा था। इसलिए, इस क्रियाशील संसार में आने से पहले प्रत्येक जीवात्मा की नैसर्गिक इच्छा उसी पूर्ण विश्रांति की अवस्था में लौट जाने की होती है। ऐसा इसलिए भी है कि इस ब्रह्मांड में सब कुछ एक चक्रानुसार चल रहा है। हर चीज अपने स्रोत में वापस जाना चाहती है। जब आपको भूख लगती है तो स्वाभाविक रूप से आपका मन कुछ खाने को करता है। ऐसे ही यदि प्यास लगी हो तो पानी पीने की इच्छा होती है। उसी प्रकार आत्मा ध्यान के लिए तरसती है और यह तड़प प्रत्येक व्यक्ति में होती है। आपको ध्यान से क्या लाभ होगा पुराने समय में ऋषि मुनि केवल योग्य शिष्यों और साधकों को ही ध्यान करना सिखाते थे। आधुनिक युग में, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी ने इस ज्ञान को प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपलब्ध करा दिया है ताकि उनके जीवन में गुणात्मक सुधार आ सके। और जब उनको उच्चतम ज्ञान पाने की ललक होगी तो वे इस की गहराई में उतर जाएँगे। इस प्रकार यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए किसी न किसी रूप में लाभदायक है ही। कुछ लोग समुद्र तट पर सैर करने जाते हैं ताकि उनको ताजा हवा और अधिक ऑक्सीजन मिल सके और इसमें उनको प्रसन्नता मिलती है। कुछ लोग ऐसे होंगे जो पानी में अपने पाँव डाल देते हैं और सागर के विशाल स्पर्श को अनुभव करते हैं। कुछ और ऐसे भी होते हैं जो सागर की लहरों में उतर जाते हैं या स्कूबा गोताखोरी करते हैं और उनको मूँगे और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ मिल जाती हैं। अतः यह आप पर निर्भर है कि आप तट पर चलना, सागर में तैरना या गहरे उतर कर गोतखोरी करना चाहते हैं। सागर तो आपके लिए पूर्ण रूप से उपलब्ध है। ध्यान भी कुछ ऐसा ही है। ध्यान की आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति को है क्योंकि हर व्यक्ति कभी कम न होने वाले आनंद और उस प्यार को, जो पूर्णतः दोषरहित और शाश्वत् हो, को पाना चाहता है 1.ध्यान से गहरा विश्राम और स्पष्टता आती है:- नदी जब शांत होती है तो उसमें सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। उसी प्रकार जब मन शांत हो तो हमारी अभिव्यक्ति अधिक स्पष्ट होती है। ध्यान के निरंतर अभ्यास से गहरे विश्राम की स्थिति और शांति पाई जा सकती है। और यह शांति प्रायः ध्यान के वास्तविक समय से बहुत आगे तक बनी रहती है। 2.सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं:- हम सब किसी न किसी विशेष प्रकार की तरंगें बिखेरते रहते हैं और जब हम तनाव ग्रस्त, क्रोधित, परेशान या निराश होते हैं तो उसका प्रभाव इन तरंगों पर भी पड़ता है। ध्यान में इन तरंगों को परिवर्तित करके उन्हें सकारात्मक और सृजनात्मक बनाने का सामर्थ्य होता है जिससे हमारे विचारों तथा भावनाओं में स्पष्टता आती है। यह हमारे मन पर पड़ी हुई पुरानी छापों को मिटाता है और हमारे विचारों को सही दिशा में मोड़ कर उन्हें केंद्रित करता है, जिससे हमें मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता की अवस्था पाने में सहायता मिलती है। हमारे अवलोकन बोध, धारणा तथा अभिव्यक्ति की समझ में भी सुधार होता है। 3.नींद से भी अधिक गहरा विश्राम:- ध्यान और नींद, दोनों से ही हमें गहरा विश्राम मिलता है। तथापि, ध्यान द्वारा प्राप्त विश्राम की गुणवत्ता नींद द्वारा पाए जाने वाले विश्राम से श्रेष्ठतर होती है। नींद की अपेक्षा ध्यान हमें कहीं अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। ध्यान से इतना विश्राम मिलता है जो गहरी से गहरी नींद से भी नहीं मिल पाता। ध्यान करने से आप अपने भीतर के ऊर्जा स्रोत को जागृत करके अपने शरीर को ऊर्जा का भंडार बना सकते हैं। 4.ऊर्जा स्तर में वृद्धि:- चिंताएँ, परेशानियाँ और तनाव विकर्षण से भी अधिक हानिकारक हो सकते हैं। दैनिक जीवन में होने वाली समस्याएँ और भविष्य को लेकर भय हमारे मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। यह सर्वमान्य है कि ध्यान से हमारे शरीर की प्राण ऊर्जा में सुधार होता है। जैसे जैसे प्राणिक ऊर्जा में वृद्धि होती है, चिंता अपने आप कम होने लगती है। इस प्रकार ध्यान का नियमित अभ्यास करने से अवसाद, चिंताओं या आघात जनित तनाव जैसी समस्याओं में सुधारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं। 5.सकारात्मक सोच से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार:- विभिन्न अध्ययनों ने प्रमाणित किया है कि ध्यान न केवल मस्तिष्क की सकारात्मक भावनाओं के उत्प्रेरित करने वाले भाग को अधिक क्रियाशील बनाता है अपितु इसका हमारे समग्र मानसिक स्वास्थ्य पर भी घनात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त भी बहुत कुछ............ ध्यान से हमारी सजगता में सुधार होता है और हमारे क्रियाकलाप अधिक उद्देश्यपूर्ण होने लगते हैं। जीवन की विषम परिस्थितियों के प्रति हमारा व्यवहार प्रतिक्रियात्मक न हो कर प्रत्युत्तर देने की दिशा में परिवर्तित होने लगता है। ध्यान हमारी सोचने की क्षमता, एकाग्रता, समस्या समाधान कौशल तथा भावनात्मक परेशानियों का सामना करके उन के प्रति स्वयं को ढालने और उन से पार पाने की शक्ति में भी सुधारात्मक भूमिका निभाता है। अनुसंधान यह भी दर्शाते हैं कि ध्यान करने से आपका मूड ऊपर उठता है, नींद की गुणवत्ता और उसके पैटर्न में सुधार होता है तथा आपके संज्ञानात्मक कौशल का विकास होता है। ध्यान के अभ्यास से बहुत ज्यादा सोचने, क्षीण सतर्कता तथा मन के भटकाव जैसे मस्तिष्क के व्यवहार को भी मोड़ कर सही दिशा में लाया जा सकता है।
Read Full Blog
[email protected] 02 Jan 2025 222 Views

ध्यान क़ा उचित आसान ओर ध्यान केसे सुरू करे

ध्यान का उचित आसन ध्यान के लिए उचित आसन में होना सबसे जरूरी है। ध्यान इस विधि से करना चाहिए कि आपका मेरुदंड सीधा हो। जब साधक अपने मन और प्राणशक्ति को मेरुदंड में चक्रों से होते हुए उधर्व चेतना की ओर भेजने के लिए प्रयास करता है, तो उसे अनुचित आसन के कारण मेरुदंड की नाड़ियों में होने वाली सिकुड़न व संकुचन से बचना चाहिए। इन बातों का रखें ध्यान जमीन पर आसन बिछाकर पालथी मारकर सुखासन या पद्मासन में बैठें... Read More
ध्यान का उचित आसन ध्यान के लिए उचित आसन में होना सबसे जरूरी है। ध्यान इस विधि से करना चाहिए कि आपका मेरुदंड सीधा हो। जब साधक अपने मन और प्राणशक्ति को मेरुदंड में चक्रों से होते हुए उधर्व चेतना की ओर भेजने के लिए प्रयास करता है, तो उसे अनुचित आसन के कारण मेरुदंड की नाड़ियों में होने वाली सिकुड़न व संकुचन से बचना चाहिए। इन बातों का रखें ध्यान जमीन पर आसन बिछाकर पालथी मारकर सुखासन या पद्मासन में बैठें। ध्यान का अभ्यास करते समय शुरू में 5 मिनट भी काफी होते हैं। अभ्यास से 20-30 मिनट तक ध्यान लगा सकते हैं। ध्यान करने के लिए ऐसी जगह का चयन करें जो एकदम शांत हो। इस तरह शुरू करें ध्यान ध्यान की शुरुआत में प्राणायाम करना या थोड़ी देर तक लम्बी सांस धीरे-धीरे लेना और धीरे-धीरे छोड़ना चाहिए। इससे मष्तिष्क सक्रिय होता है और विचारों को नियंत्रित करना सम्भव होता है। गुस्से में, जोश में सांस बहुत तेज चलने लगती है और दुःख और निराशा में सांस धीमी हो जाती है। सांस की गति का विचारों पर असर होता है और असामान्य सांस से मानसिक अस्थिरता पैदा होती है। इसलिए प्राणायाम या गहरी और लम्बी सांस मन और विचारों में शांति लाती है, जिससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है।
Read Full Blog
[email protected] 02 Jan 2025 253 Views

ध्यान का आध्यात्मिक महत्व

ध्यान का आध्यात्मिक महत्व
क्या है ध्यान का आध्यात्मिक महत्व ज्ञान को जितना सशक्त बनाया जाता है, वह उतना ही वह किसी भी क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। मनुष्य की इच्छा पूर्ति की सभी दिशाओं में ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उपासना के क्षेत्र में भी ध्यान विशेष महत्व रखता है। भक्ति व अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ध्यान को महत्वपूर्ण साधन माना गया है। आध्यात्मिकता में ध्यान का उद्देश्य है अपने स्वरूप और अपने लक्ष्य... Read More
क्या है ध्यान का आध्यात्मिक महत्व ज्ञान को जितना सशक्त बनाया जाता है, वह उतना ही वह किसी भी क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। मनुष्य की इच्छा पूर्ति की सभी दिशाओं में ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उपासना के क्षेत्र में भी ध्यान विशेष महत्व रखता है। भक्ति व अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ध्यान को महत्वपूर्ण साधन माना गया है। आध्यात्मिकता में ध्यान का उद्देश्य है अपने स्वरूप और अपने लक्ष्य की विस्मृति के कारण उत्पन्न हुई बाधाओं से छुटकारा पाना। ध्यान तन, मन और आत्मा के बीच लयात्मक सम्बन्ध बनाता है और उसे बल प्रदान करता है। ध्यान का नियमित अभ्यास करने से आत्मिक शक्ति बढ़ती और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।
Read Full Blog
[email protected] 02 Jan 2025 227 Views

ध्यान तनाव काम करने का एक सरल और तेज तारीका है

ध्यान दिन भर के तनाव को दूर कर सकता है, और अपने साथ आंतरिक शांति ला सकता है. देखें कि आप कैसे आसानी से ध्यान का अभ्यास करना सीख सकते हैं जब भी आपको इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो. मायोक्लिनिक स्टाफ द्वार अगर तनाव की वजह से आप चिंतित, तनावग्रस्त और परेशान हैं, तो आप ध्यान लगाने की कोशिश कर सकते हैं. ध्यान में कुछ मिनट बिताने से भी आपकी शांति और आंतरिक शांति बहाल हो सकती है. कोई भी व्यक्ति ध्यान का अभ्... Read More
ध्यान दिन भर के तनाव को दूर कर सकता है, और अपने साथ आंतरिक शांति ला सकता है. देखें कि आप कैसे आसानी से ध्यान का अभ्यास करना सीख सकते हैं जब भी आपको इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो. मायोक्लिनिक स्टाफ द्वार अगर तनाव की वजह से आप चिंतित, तनावग्रस्त और परेशान हैं, तो आप ध्यान लगाने की कोशिश कर सकते हैं. ध्यान में कुछ मिनट बिताने से भी आपकी शांति और आंतरिक शांति बहाल हो सकती है. कोई भी व्यक्ति ध्यान का अभ्यास कर सकता है. यह सरल है और इसमें ज़्यादा खर्च भी नहीं आता.  और आपको किसी विशेष उपकरण की भी ज़रूरत नहीं है. आप जहाँ भी हों, ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं. आप टहलने जाते समय, बस में यात्रा करते समय, डॉक्टर के पास प्रतीक्षा करते समय या फिर किसी व्यावसायिक मीटिंग के बीच में भी ध्यान कर सकते हैं. ध्यान को समझना  ध्यान हजारों सालों से प्रचलित है. प्रारंभिक ध्यान का उद्देश्य जीवन की पवित्र और रहस्यमय शक्तियों की समझ को गहरा करना था. आजकल, ध्यान का उपयोग अक्सर आराम करने और तनाव कम करने के लिए किया जाता है. ध्यान एक प्रकार की मन-शरीर पूरक चिकित्सा है.  ध्यान आपको गहराई से आराम करने और अपने मन को शांत करने में मदद कर सकता है. ध्यान के दौरान आप एक चीज़ पर ध्यान केंद्रित करते हैं.  आप उन विचारों की धारा से छुटकारा पा लेते हैं जो आपके दिमाग में घूम रहे हैं और तनाव पैदा कर रहे हैं.  इस प्रक्रिया से बेहतर शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्राप्त हो सकता है. ध्यान के लाभ ध्यान आपको शांति, सुकून और संतुलन का एहसास दे सकता है जो आपके भावनात्मक स्वास्थ्य और आपके समग्र स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकता है. आप इसका उपयोग आराम करने और तनाव से निपटने के लिए भी कर सकते हैं, इसके लिए आप किसी ऐसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जो आपको शांत करती है. ध्यान आपको केंद्रित रहने और आंतरिक शांति बनाए रखने में मदद कर सकता है. ध्यान सत्र समाप्त होने के बाद भी ये लाभ समाप्त नहीं होते. ध्यान आपको दिन भर अधिक शांति से बिताने में मदद कर सकता है .और ध्यान आपको कुछ चिकित्सा स्थितियों के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है. ध्यान और भावनात्मक और शारीरिक कल्याण जब आप ध्यान करते हैं, तो आप उस सूचना के अतिभार को दूर कर सकते हैं जो हर दिन बढ़ता है और आपके तनाव में योगदान देता है. ध्यान के भावनात्मक और शारीरिक लाभों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: यह आपको तनाव पैदा करने वाली चीजों को देखने का एक नया नजरिया देता है. अपने तनाव को प्रबंधित करने के लिए कौशल का निर्माण करना. आपको अधिक आत्म-जागरूक बनाना. वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करना. नकारात्मक भावनाओं को कम करना. आपको अधिक रचनात्मक बनने में सहायता करना. आपको अधिक धैर्यवान बनने में सहायता करना. विश्रामकालीन हृदय गति को कम करना. विश्रामकालीन रक्तचाप को कम करनाआ. आपको बेहतर नींद में मदद मिलेगी. ध्यान और बीमारी अगर आपको कोई बीमारी है तो भी ध्यान लगाना मददगार हो सकता है. यह अक्सर तब सच होता है जब आपकी स्थिति ऐसी हो जिसे तनाव और भी बदतर बना देता है. बहुत सारे शोध बताते हैं कि ध्यान स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त शोध नहीं है कि ध्यान से मदद मिलती है. इसे ध्यान में रखते हुए, कुछ शोध बताते हैं कि ध्यान लोगों को निम्नलिखित स्थितियों के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है: चिंता. दमा. कैंसर. पुराने दर्द. अवसाद. दिल की बीमारी. उच्च रक्तचाप. संवेदनशील आंत की बीमारी. नींद की समस्याएँ. तनाव से होने वाला सिरदर्द. अगर आपको इनमें से कोई या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो ध्यान लगाने के फ़ायदे और नुकसान के बारे में अपने स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करना न भूलें. कभी-कभी, ध्यान लगाने से कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े लक्षण और भी खराब हो सकते हैं. ध्यान चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है. लेकिन इसे अन्य उपचारों के साथ जोड़ने से मदद मिल सकती है.  
Read Full Blog
[email protected] 31 Dec 2024 253 Views

मेडिटेशन कह काई नुक्सान भी सही तरीके से करने से मिलेंगे फायदे

आमतौर पर हम मेडिटेशन मन की शांति के लिए करते हैं. इससे तनाव कम होता है और व्यक्ति को सुकून का एहसास होता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि इसके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. कहते हैं रोजाना ध्यान करने से मानसिक स्थिति बेहतर होती है और व्यक्ति खुश रहने लगता है.मेडिटेशन से एकाग्रता की कमी भी दूर होती है, लेकिन मेडिटेशन पर ज्यादा निर्भर रहने वाले लोगों को इसके नुकसान भी झेलने पड़ सकते हैं. माइंडफ... Read More
आमतौर पर हम मेडिटेशन मन की शांति के लिए करते हैं. इससे तनाव कम होता है और व्यक्ति को सुकून का एहसास होता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सुना है कि इसके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. कहते हैं रोजाना ध्यान करने से मानसिक स्थिति बेहतर होती है और व्यक्ति खुश रहने लगता है.मेडिटेशन से एकाग्रता की कमी भी दूर होती है, लेकिन मेडिटेशन पर ज्यादा निर्भर रहने वाले लोगों को इसके नुकसान भी झेलने पड़ सकते हैं. माइंडफुलनेस भी एक तरह का ध्यान है. यह एक बौद्ध आधारितथेरेपी है जिससे हम अपने अंदर और आस पास हो रही गतिविधियों या स्थितियों के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं. सुनने में यह स्ट्रेस और एंग्जायटी से बचने का बहुत ही सरल तरीका लग रहा होगा, लेकिन बौद्धों के एक समुदाय द्वारा लिखित धर्मत्रात ध्यान शास्त्र में ध्यान के बाद होने वाले अवसाद और चिंता के बारे में बताया गया है। यदि आप भी मेडिटेशन करते हैं और आपकोअपने अंदर कुछ बदलाव दिखने लगे तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए. डिटेशन करने वाले लोग एक समय के बाद ज्यादा अकेला रहना पसंद करते हैं. वे खुद में ही इतने संतुष्ट रहने लगते हैं कि उन्हें दूसरों की जरूरत ही नहीं पड़ती है. ऐसे मेंधीरे धीरे वे परिवार और समाज दोनों से कटने लगते हैं. कई बार ऐसा करना यह उन्हें डिप्रेशन की तरफ भी धकेल सकता है. मेडिटेशन को हर कोई पॉजिटिव तरीके से ही लेता है लेकिन जब इसका सही परिणाम नहीं मिलता तो व्यक्ति निराश हो जाता है. उदाहरण के रूप में जब हम बिना मन के कोई काम करते हैं तो उसे हम सही तरीके से नहीं कर पाते हैं. ठीक इसी तरह जब हमचाहते हैं कि अपनी मानसिक शांति को बनाए रखने के लिए हम मेडिटेशन करें लेकिन चाहकर भी फोकस नहीं कर पाते और हमें मनचाहा परिणाम नहीं मिलता तो ऐसे में हमारा कॉन्फिडेंस गिरने लगता है. इससे मोटिवेशन की भी कमी होने लगती है. इसका गलत असर व्यक्ति की पर्सनल ही नहीं बल्कि प्रोफेशनललाइफ पर भी पड़ता है. अगर आपका नेचर सेंसेटिव है और आप छोटी छोटी बातों को भी दिल पर लगा बैठते हैं तो ज्यादा मेडिटेशन करना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. मेडिटेट करते समय मन में बुरे विचारआ सकते हैं. आपको पुरानी बातें याद आने लगती है. ऐसे में जब आप ज्यादा समय के लिए बाकी लोगों से खुद को दूर रखते हैं तो इसका नतीजा गलत भी हो सकता है. आप ओवरथिंकिंग भी करने लग सकते हैं. अधिक मेडिटेशन करने से आपके स्लीप पैटर्न में भी बदलाव आ सकता है. चूंकि मेडिटेशन से ध्यान लगाने और और जगे रहने की क्षमता बढ़ जाती है इसलिए आपको ठीक से नींद ना आने की भी समस्या हो सकती है. जरूरी नहीं है कि ज्यादा मेडिटेशन करने से आपकी मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ेगा बल्कि इससे आपको शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है जिसमें थकान, कमजोरी, पेट से जुड़ी शिकायतें, सिर दर्द आदि शामिल है. कुछ लोगों को मेडिटेशन के बाद घबराहट महसूस होती है. ऐसा होने पर आपफौरन मेडिटेशन करना रोक दें और अपने डॉक्टर से संपर्क करें. मेडिटेशन करने का भी सही तरीका होता है. यदि आप गलत तरीके से भी इसेइसे कर रहे हैं तो भी आप पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.      
Read Full Blog
[email protected] 31 Dec 2024 209 Views

Meditation ka aanubhav kasa hota ha

Meditation ka aanubhav kasa hota ha.  Kya Aap janta ha ki niyamit rup ka meditation aanubhav karta ha.  Jis taji sa log dhiyan lgana sikhta ha unko hona wali anubhuti ma utni hi smanta hona thoda muskil hota ha kuki har vyakti par unka dimag ka anusar alag alag aasar hota ha purana samay ma dhiyan karna wala na is bara ma Janna suru kiya or uska baad sakdo ya hajaro meditation karna wala Isa sabit... Read More
Meditation ka aanubhav kasa hota ha.  Kya Aap janta ha ki niyamit rup ka meditation aanubhav karta ha.  Jis taji sa log dhiyan lgana sikhta ha unko hona wali anubhuti ma utni hi smanta hona thoda muskil hota ha kuki har vyakti par unka dimag ka anusar alag alag aasar hota ha purana samay ma dhiyan karna wala na is bara ma Janna suru kiya or uska baad sakdo ya hajaro meditation karna wala Isa sabit bhi kar chuka hai .  Dhiyan ka 9 charan ma ek meditation karna wala vyakti duvara mahsus ki gae chizo ka bada hi sunder vivran hai. Meditation ka 9 charan hai jo is parkar hai. 1.Jasa ki aap dhiyan karna suru karanga or charo or ki duniya ka apna sara dhiyan hata kar vicharo ma lgaeya aap ma dar or bhot sara atit ,kuch acha pal aadi ek sath dhiyan aata hai  2.yah itna lamba samay nahi hota ha jitna lag raha ha bich bich ma thoda samay ka liya sant ho jaya arthat meditation ma thoda brake la , Jha sirf ek pal ka liya apna maan sant ho or fir dobara kandr vastu par dhiyan lagayanga. Apka mann samay samay par bhatak sakta ha Lakin apko isa vapas kandrit bhot par dhiyan lgaeya Yah parkirya meditation karna ka liya sikhni jruri ha sath hi yah bhi ki maan ko vapas kandrit vastu par dhiyan kasa lagana ha aadi. 3. Yadi aap kuch hafto ya mahina ka liya dhiyan karna abhyas karta rhanga to ek samay ma app asi avastha ma phoch jayanga. Jha aap dhiyan kandrit vastu par karib ya chizo sa apka dhiyan nahi bhatkaga kuki aap tab tak yah samaj chuka honga ki vastav ma Ander sa bhatakta bhar sa nahi. Vastav ma is charan ma sabsa bada badlav yah ha ki aap is baat ko dil sa manna lgangaYah sant hona ka ek anivarya hissa ha vastav ma Santi kya ha agar apko nkaratmak chizo ko dekhna , sunna ya mahsus karna par bhi koi fark nhi padta ha to aap aantrik rup ka sant rahna sikh gya ha. 4. Chotha charan tak aap chizo ko Naya star sa mahsus karna suru kar danga apka maan jin chizo sa bhatakta tha. Unka utpan hona sa pahla hi aap unko pahchanna ma saksam ho jayanga. Isliya nakaratmak bhavnao or vicharo ka prati apki partikiryae kaam samay ma , tirv or sakratmak ho jayagi iska baad apna aap ko sant karna ki kosis kara. Aab aap thodi susti or thoda utsha ka anubhav kranga yah utsha avsad ka viprit ha Lakin yah abhi bhi uch sthar ka dhiyan ka liya kam ha. 5. 5 va charan ma aata aap apna mastik par niyantran karna lagbhag sikh jata ha aab aap kabhi kabhi bina kandrit vastu ka bhi dhiyan laga sakta ha jab apko sirf apna maan ko niyantrit karna sikhna ha. Jiski vjah sa trah trah ka bhatkana wala vichar dhimag ma aata hai apko dhiyan ka dvara apna Ander mojud sthirta ko pahchanna hoga apko dhira dhira is baat ka anubhav hona lga ga ki jo kuch bhi hota hai vo apko bhirti anubhav ka Karan hota ha agar aap Acha sochanga to har jgah samasya utpan hogi yah sb apka dimag ka khal ha Lakin is dimagi khal ma aab aapko maja aana laga ga  7 va charan tak apka meditation itna majbut ho jayaga ki aap Kaval dhiyan karna ka samay ka mukabla 24 ganta ma meditation ka adhik aasar dekhna ko milaga. Charan 8 or 9 Yah dhiyan ka antim charan hai jinma apko samudra ma lahro ki trah apna dhiyan ka ek or kandrit karna sikhna hoga log aam tor par apna dhiyan abhyas ka Doran en bhavnao ko batata hai   1. Gahri Santi. 2. Sarir or maan ka purnjanm. 3. Santosh, Acha or sararik sukh mahsus karna. 4. Apna aap ko sampurn or akargr masus karna.
Read Full Blog
[email protected] 30 Dec 2024 244 Views

कैसा करें ध्यान जानिये सही और आसान तरीका

ध्यान गाइड: स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल के चलते हर कोई तनाव में रहता है. दिनभर घर और ऑफिस की जिम्मेदारियां और काम की चिंता हर समय तनाव का कारण बनी रहती है. स्ट्रेस का कारण चाहे जो भी हो, ये आपके मेंटल हेल्थ पर बहुत बुरा असर डालता है. एक अच्छी लाइफ जीने के लिए आपको फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से स्वस्थ रहना जरूरी है. तनाव और स्ट्रेस से छुटकारा पाने के लिए मेडिटेशन सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. मेडिटेशन... Read More
ध्यान गाइड: स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल के चलते हर कोई तनाव में रहता है. दिनभर घर और ऑफिस की जिम्मेदारियां और काम की चिंता हर समय तनाव का कारण बनी रहती है. स्ट्रेस का कारण चाहे जो भी हो, ये आपके मेंटल हेल्थ पर बहुत बुरा असर डालता है. एक अच्छी लाइफ जीने के लिए आपको फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से स्वस्थ रहना जरूरी है. तनाव और स्ट्रेस से छुटकारा पाने के लिए मेडिटेशन सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. मेडिटेशन यानी ध्यान करने से तनाव दूर होता है और मन को शांति मिलती है. मेडिटेशन हर कोई कर सकता है और इसे करने के लिए किसी और चीज की जरूरत भी नहीं है. मेडिटेशन करने के लिए आपको केवल कुछ चीजों का ध्यान रखना है. आइए जानते हैं क्या है मेडिटेशन का सही तरीका और मेडिटेशन के लाभ. सबसे पहले ध्यान रखें की मेडिटेशन का सही तरीका खोजने का स्ट्रेस नहीं लेना है. आप मेडिटेशन को अपनी लाइफ का पार्ट बना सकते हैं. लंबी गहरी सांसे मायो क्लिनिक :-के अनुसार मेडिटेशन के लिए सबसे पहले अपनी सांसों पर ध्यान देने की कोशिश करें. लंबी गहरी सांसे लेने से स्ट्रेस नेचुरली ही दूर होता है. इसके लिए शांत बैठ कर लंबी गहरी सांस लें और ध्यान लगाये. शांत वातावरण:- मेडिटेशन करते समय कोशिश करें कि आसपास कोई शोर-शराबा ना हो ताकि मेडिटेट करते हुए मन और दिमाग ना भटके.   कंफर्ट का ध्यान रखें:- मेडिटेशन करते समय अपने आप को पूरी तरह कंफर्टेबल रखने की कोशिश करें. मेडिटेशन करते हुए कंफर्टेबल पोजीशन में बैठें और केवल आरामदायक कपड़े पहनें. अपने बॉडी पार्ट्स पर ध्यान लगाएं:- मेडिटेशन के दौरान अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर ध्यान लगाकर उस हिस्से के दर्द, तनाव या स्ट्रेस को जानने की कोशिश करें. मंत्र दोहराएं:- मंत्र दोहराने से मतलब है, कोई भी प्रार्थना, अपना कोई मोटिवेशनल वाक्य या कोई धार्मिक मंत्र जिसे आप हर रोज मेडिटेशन करते हुए दोहरा सकें. ऐसा करने से मेडिटेशन करते समय ध्यान एक जगह केंद्रित रहता है.
Read Full Blog
[email protected] 30 Dec 2024 220 Views

ध्यान क्या है और यह आपके लिए क्यों सबसे अच्छा है

तनावपूर्ण जीवन शैली में मेडिटेशन आपको रिलैक्स करने में मदद करता है. जब अक्सर हमारी इंद्रियां सुस्त हो जाती हैं तो मेडिटेशन हमें जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है. शोध बताते हैं कि मेडिटेशन हमें अस्थायी रूप से तनाव से राहत दे सकता है. इसके आराम और सुखदायक लाभों के कारण, हेल्दी और एक्टिव लाइफ के लिए एक्सपर्ट मेडिटेशन करने की सिफारिश करते हैं. क्या आप जानते हैं कि ध्यान कई प्रकार के होते हैं और इसका प्... Read More
तनावपूर्ण जीवन शैली में मेडिटेशन आपको रिलैक्स करने में मदद करता है. जब अक्सर हमारी इंद्रियां सुस्त हो जाती हैं तो मेडिटेशन हमें जागरूकता बढ़ाने का अवसर देता है. शोध बताते हैं कि मेडिटेशन हमें अस्थायी रूप से तनाव से राहत दे सकता है. इसके आराम और सुखदायक लाभों के कारण, हेल्दी और एक्टिव लाइफ के लिए एक्सपर्ट मेडिटेशन करने की सिफारिश करते हैं. क्या आप जानते हैं कि ध्यान कई प्रकार के होते हैं और इसका प्रत्येक प्रकार शरीर के विभिन्न हिस्सों को टारगेट करने के लिए होता है. आध्यात्मिक गुरुओं और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मेडिटेशन के कई प्रकार विकसित किए हैं. जिससे पता चलता है कि मेडिटेशन हर व्यक्तित्व और लाइफस्टाइल के लोगों के लिए अनुकूल है और इसका अभ्यास हर कोई कर सकता है. जो लोग मेडिटेशन करते हैं .उन्हे इसके अभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार करने का मौका मिलता है.यहां हम मेडिटेशन   कैसा करें ध्यान जानिये सही और आसान तरीका  
Read Full Blog
[email protected] 30 Dec 2024 209 Views

Dhyan ke nuksan

Halanki Dhyan ke Kai labh hai lekin uski kahin kamiyan bhi hai jise Janna bahut mahatvpurn hai Jo Dhyan ke dauran utpann ho sakti hai. Yah khas taur se shuruaati logon ke liye Janna adhik hai Jo niche diye Gaye chunautiyon mein se ek ka samna jarur kar sakte hain. Meditation aur yog shikshakon ko bhi in mahatvpurn kamiyon se jaag utha hona chahie. Kyunki unke chhatron ko aise hi chunautiyon ka sam... Read More
Halanki Dhyan ke Kai labh hai lekin uski kahin kamiyan bhi hai jise Janna bahut mahatvpurn hai Jo Dhyan ke dauran utpann ho sakti hai. Yah khas taur se shuruaati logon ke liye Janna adhik hai Jo niche diye Gaye chunautiyon mein se ek ka samna jarur kar sakte hain. Meditation aur yog shikshakon ko bhi in mahatvpurn kamiyon se jaag utha hona chahie. Kyunki unke chhatron ko aise hi chunautiyon ka samna karna pad sakta hai. Aur some sarthan kiya avashyakta ho sakti hai
Read Full Blog
[email protected] 29 Dec 2024 275 Views

Meditation kya hai

Meditation kya hai  Aajkal Meditation [dhiyan] ka naam sa har koi vakif hai tv ,internet , phone , computer . Kahi na kahi iska bara ma sunna ko mil hi jata hai Lakin iski itna lockpriya hona ka bavjut kuch logo ko ya bhi nahi pata ki vastav ma dhiyan ha kya kuch logo ka aanusar dhiyan ek mansik akargrta ha . Arthat apna maan or dhimag ko akargr karna hi meditation hota hai kuch logo ko lagta ha k... Read More
Meditation kya hai  Aajkal Meditation [dhiyan] ka naam sa har koi vakif hai tv ,internet , phone , computer . Kahi na kahi iska bara ma sunna ko mil hi jata hai Lakin iski itna lockpriya hona ka bavjut kuch logo ko ya bhi nahi pata ki vastav ma dhiyan ha kya kuch logo ka aanusar dhiyan ek mansik akargrta ha . Arthat apna maan or dhimag ko akargr karna hi meditation hota hai kuch logo ko lagta ha ki dhiyan vo log karta hai . Jinha Santi or Santosh cheya hota ha matlab jo logo ko duniya ka sor-saraba, aasanti sa dur rahna chata ha kintu ya abhyas vastav ma dhiyan nahi ha ya sab meditation ka niyam ha kuki aam tor par dimag ko aachanak sa sant karna ya unka vicharo ko dimag ma aana sa rokna kisi aam aadmi ka liya bhaut kathin ha vastav ma dhiyan pahla sa socha bina koi yojna bnaya dimag ka apna aap sant rahna ki aavasta ha arthat iska liya apko kuch alag sa karna ki jarurat nahi ha. Khush rahna aaspass ka logo ka pyar milna sa iska aanubhav apna aap hota hai.
Read Full Blog
[email protected] 29 Dec 2024 295 Views

Blog Catgories