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Khushi prerna

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Blog by Khushi prerna | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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घर और दफ्तर के तनाव से मुक्ति: कामकाजी महिलाओं के लिए ध्यान लगाने के सरल और अचूक उपाय

माइक्रो-मेडिटेशन" (Micro-Meditation) से शुरुआत करें लंबे समय तक बैठने की ज़रूरत नहीं है। आप दिन भर में छोटे-छोटे स्लॉट निकाल सकती हैं: 2-मिनट रूल: सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद, बिस्तर पर ही आंखें बंद करके बैठें। केवल 2 मिनट के लिए अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान टिकाएं। 5-मिनट रीसेट: ऑफिस में लंच ब्रेक के बाद या किसी बड़ी मीटिंग से पहले, अपनी कुर्सी पर सीधे बैठें, आंखें बंद करें और 5 गहरी सांसें लें।... Read More
माइक्रो-मेडिटेशन" (Micro-Meditation) से शुरुआत करें लंबे समय तक बैठने की ज़रूरत नहीं है। आप दिन भर में छोटे-छोटे स्लॉट निकाल सकती हैं: 2-मिनट रूल: सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद, बिस्तर पर ही आंखें बंद करके बैठें। केवल 2 मिनट के लिए अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान टिकाएं। 5-मिनट रीसेट: ऑफिस में लंच ब्रेक के बाद या किसी बड़ी मीटिंग से पहले, अपनी कुर्सी पर सीधे बैठें, आंखें बंद करें और 5 गहरी सांसें लें। ट्रैवलिंग के समय का सही इस्तेमाल करें (Commute Meditation) अगर आप कैब, ऑटो, बस या ट्रेन से ऑफिस जाती हैं (और खुद ड्राइव नहीं कर रही हैं): गाइडेड मेडिटेशन (Guided Meditation): कानों में ईयरफोन लगाएं और YouTube या किसी मेडिटेशन ऐप (जैसे Calm या Headspace) पर 5 से 10 मिनट का कोई भी शांत ऑडियो सुन लें। सांसों पर ध्यान: सफर के दौरान बस आंखें बंद करके गहरी सांस लें और छोड़ें। यह आपके दिमाग को ऑफिस के तनाव के लिए तैयार कर देगा।  काम करते हुए ध्यान करें (Mindful Working) मेडिटेशन का मतलब सिर्फ आंख बंद करके बैठना नहीं है, बल्कि पूरी तरह वर्तमान में होना भी है: चाय/कॉफ़ी ब्रेक: जब आप ऑफिस में चाय या कॉफ़ी पिएं, तो फोन न चलाएं। सिर्फ उस पेय के स्वाद, खुशबू और गर्माहट को महसूस करें। यह भी एक तरह का ध्यान है। डेस्क स्ट्रेचिंग: कंप्यूटर पर लगातार काम करने के बीच हर एक घंटे में 1 मिनट का ब्रेक लें। अपनी पीठ सीधी करें और शरीर को रिलैक्स छोड़ें। रात को सोने से पहले (Bedtime Meditation) पूरे दिन की थकान और मानसिक तनाव को मिटाने के लिए यह सबसे बेस्ट है: जब आप बिस्तर पर सोने जाएं, तो लाइट बंद कर दें। सीधे लेट जाएं (शवासन) और अपने पैरों के अंगूठे से लेकर सिर तक, शरीर के हर हिस्से को ढीला छोड़ते जाएं। दिन भर में जो कुछ भी हुआ, उसे भूलकर गहरी नींद में जाने के लिए खुद को तैयार करें। इससे नींद की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है।    
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[email protected] 19 Sep 2026 12 Views

मन को 'कूल' बनाने वाले 6 जादुई ध्यान: मेडिटेशन कैसे करें और शुरू करने के 'गोल्डन रूल्स

मन को 'कूल' बनाने वाले 6 जादुई ध्यान: मेडिटेशन कैसे करें और शुरू करने के 'गोल्डन रूल्स
प्रजायोग' सीरीज़: बॉडी का सर्विसिंग सेंटर इस कमाल की गाइड में योग व्यायाम की एक ऐसी ज़बरदस्त सीरीज़ समझाई गई है, जिसे 'प्रजायोग' कहा जाता है। यह आपकी बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में रुकी हुई हवा या गैस (वायु-विकार) को झटके में बाहर निकाल फेंकता है। साथ ही, मांसपेशियों में गज़ब की फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) यानी लचीलापन लाता है।इसमें अंगसंचालन और पवन मुक्तासन जैसे धमाकेदार व्यायाम शामिल है... Read More
प्रजायोग' सीरीज़: बॉडी का सर्विसिंग सेंटर इस कमाल की गाइड में योग व्यायाम की एक ऐसी ज़बरदस्त सीरीज़ समझाई गई है, जिसे 'प्रजायोग' कहा जाता है। यह आपकी बॉडी के अलग-अलग हिस्सों में रुकी हुई हवा या गैस (वायु-विकार) को झटके में बाहर निकाल फेंकता है। साथ ही, मांसपेशियों में गज़ब की फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) यानी लचीलापन लाता है।इसमें अंगसंचालन और पवन मुक्तासन जैसे धमाकेदार व्यायाम शामिल हैं, जिन्हें किसी भी उम्र के लोग (चाहे बच्चे हों या बड़े) आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए बस लेटने भर की जगह चाहिए! इसे आप अकेले भी कर सकते हैं और पूरे ग्रुप के साथ मिलकर भी एन्जॉय कर सकते हैं। ग्रुप एक्टिविटी (सामूहिक व्यायाम) का असली मज़ा अगर आप इसे अपने दोस्तों या किसी ग्रुप के साथ कर रहे हैं, तो लोगों को उनकी लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से सही दूरी पर लाइनों में खड़ा करना चाहिए। .इससे ड्रिल, मार्च पास्ट, लाइन बनाने या नंबर बोलने जैसी एक्टिविटीज़ बहुत आसानी से हो जाती हैं। .एन.सी.सी. (NCC) या स्काउटिंग के स्टाइल में प्रैक्टिस कराई जा सकती है।  ज़रूरी बात ध्यान रखें: कि व्यायाम करते समय दो लोगों के हाथ-पैर आपस में न टकराएं! इसके लिए आधा दायां या आधा बायां मुड़कर पी.टी. कराने का सिंपल रूल अपनाना सबसे बेस्ट रहता है। व्यायाम के कपड़े भी हमेशा कंफर्टेबल और शरीर के हिसाब से होने चाहिए! डेली वर्कआउट: हेल्थ, जोश और लंबी उम्र की चाबी!  आजकल हमें जीने के लिए हर तरह की सुख-सुविधाएं और अच्छा खाना तो मिल जाता है, लेकिन असली चैलेंज है-शरीर के हर अंग को एक्टिव और ज़िंदा रखना! हमारी बॉडी एक चलती-फिरती फैक्ट्री की तरह है, जिसमें लगातार अच्छे तत्व बनते हैं और बेकार की चीज़ें बाहर निकलती हैं। समय के साथ बॉडी में जो टूट-फूट होती है, उसकी मरम्मत के लिए और नए सेल्स (कोशिकाओं) के बनने के लिए रेगुलर वर्कआउट बेहद ज़रूरी है। व्यायाम के क्रेजी और धमाकेदार तरीके फिट रहने के बाज़ार में बहुत सारे तरीके पॉपुलर हैं! अगर आप फुल जोश में आना चाहते हैं, तो ये ऑप्शंस बेस्ट हैं: तेज़ घूमना और दौड़ना तैराकी (Swimming) अखाड़े या जिम (Gymnasium) की कसरत ये सभी व्यायाम बहुत ही आसान और बेहद फायदेमंद हैं। हालांकि, हर जगह अच्छे जिम या ट्रेनर्स (मार्गदर्शकों) की सुविधा मिलना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन खुद को हेल्दी रखने के लिए अपनी सुविधा के अनुसार रोज़ाना नियम से व्यायाम करना सबसे इंपॉर्टेंट है।    
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[email protected] 16 Sep 2026 47 Views

मन को 'शांत' और लाइफ को 'शानदार' बनाने वाले 6 जादुई ध्यान!

मन को 'शांत' और लाइफ को 'शानदार' बनाने वाले 6 जादुई ध्यान!
माइंडफुलनेस मेडिटेशन:  इसमें आपको न तो अतीत की चिंता करनी है और न भविष्य का प्रेशर लेना है। बस अभी, इसी पल में जीना है। आपके दिमाग में जो भी विचार या भावनाएं आ रही है उन्हें बिना किसी जजमेंट के बस एक दर्शक की तरह देखना है। माइंडफुल वॉकिंग (चलते-फिरते ध्यान) अगर आप एक जगह नहीं बैठ सकते, तो जब आप सुबह या शाम को वॉक पर जाते हैं, तब मोबाइल जेब में रख लें। चलते समय अपने पैरों के ज़मीन को छूने के अहसास,... Read More
माइंडफुलनेस मेडिटेशन:  इसमें आपको न तो अतीत की चिंता करनी है और न भविष्य का प्रेशर लेना है। बस अभी, इसी पल में जीना है। आपके दिमाग में जो भी विचार या भावनाएं आ रही है उन्हें बिना किसी जजमेंट के बस एक दर्शक की तरह देखना है। माइंडफुल वॉकिंग (चलते-फिरते ध्यान) अगर आप एक जगह नहीं बैठ सकते, तो जब आप सुबह या शाम को वॉक पर जाते हैं, तब मोबाइल जेब में रख लें। चलते समय अपने पैरों के ज़मीन को छूने के अहसास, हवा के चेहरे से टकराने और चिड़ियों की आवाज़ पर ध्यान दें। यह भी एक सूपर-इफेक्टिव माइंडफुलनेस ध्यान है।   एकाग्रता ध्यान (Concentration):अर्जुन की नज़र क्या आपका मन भी बंदर की तरह यहाँ-वहाँ कूदता रहता है? तो यह आपके लिए है। इसमें आपको अपना पूरा फोकस किसी एक चीज़ पर टिकाना होता है-जैसे आपकी चलती हुई सांसें, कोई मंत्र या सामने रखी कोई चीज़। यह आपके फोकस को लेज़र जैसा तेज़ बना देता है।   आध्यात्मिक ध्यान (Spiritual): "सोल-कनेक्शन अगर आप खुद को उस सर्वशक्तिमान ईश्वर या ब्रह्मांड की जादुई ऊर्जा से जोड़ना चाहते हैं, तो यह ध्यान आपके लिए है। यह मन को एक गहरी शांति और सुरक्षा का अहसास कराता है।   ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन (TM): "तनाव की छुट्टी"  यह एक बेहद खास और आसान तकनीक है। इसमें आपको एक विशेष 'मंत्र' दिया जाता है, जिसे चुपचाप दोहराना होता है। यह आपके दिमाग को इतनी गहराई से शांत करता है कि सारा स्ट्रेस पल भर में गायब हो जाता है।   विजुअलाइजेशन मेडिटेशन: "मन की सैर अपनी आंखें बंद कीजिए और कल्पना कीजिए कि आप किसी खूबसूरत बीच पर हैं या पहाड़ों के बीच ठंडी हवा का मज़ा ले रहे हैं। इस ध्यान में मन के अंदर सकारात्मक और सुंदर दृश्यों की कल्पना करके खुद को रिलैक्स किया जाता है। ध्यान शुरू करने के 3 'गोल्डन रूल्स' (ताकि आप बोर न हों) टाइमिंग का चक्कर छोड़ें: शुरू में 1 घंटे बैठने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। सिर्फ 2 से 5 मिनट से शुरुआत करें। जब आदत बन जाए, तब टाइम बढ़ाएं। विचारों से लड़ें मत: ध्यान करते समय दिमाग में विचार (जैसे- आज खाने में क्या बनेगा या उसने मुझे ऐसा क्यों कहा) आना बिल्कुल नॉर्मल है। विचारों को रोकने की कोशिश न करें, बस उन्हें आने दें और जाने दें। कम्फर्ट सबसे पहले: ज़रूरी नहीं कि आप ज़मीन पर आलथी-पालथी मारकर ही बैठें। आप कुर्सी पर बैठ सकते हैं, सोफे पर टेक लगा सकते हैं, या पीठ सीधी रखकर बेड पर भी बैठ सकते हैं। \ आपके रूटीन के हिसाब से बेस्ट मेडिटेशन: अगर सुबह टाइम कम है : 3 मिनट का माइंडफुलनेस ध्यान करें। बस चाय पीते समय या खिड़की से बाहर देखते समय अपना पूरा ध्यान उसी पल पर रखें। अगर ऑफिस में बहुत स्ट्रेस है : 5 मिनट का मंत्र या सांसों पर एकाग्रता ध्यान करें। यह दिमाग को तुरंत शांत करता है। अगर रात को नींद नहीं आती : बेड पर लेटकर विजुअलाइजेशन (मन की सैर) करें। किसी शांत जगह की कल्पना करने से नींद बहुत गहरी आती है।  
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[email protected] 10 Mar 2025 426 Views

रात को सोने से पहले मेड‍िटेशन करना कई मायनों में फायदेमंद होता है। जानें इसे करने का तरीका।

रात को सोने से पहले मेड‍िटेशन करना कई मायनों में फायदेमंद होता है। जानें इसे करने का तरीका। Bedtime Meditation: ध्‍यान करने से शरीर और मन से जुड़ी समस्‍याएं दूर होती हैं। मेड‍िटेशन द‍िन के समय भी क‍िया जाता है और रात के समय भी। रात को क‍िए जाने वाले मेड‍िटेशन को बेडटाइम मेड‍िटेशन के नाम से जानते हैं। रात को सोने से पहले मेड‍िटेशन करने से रक्‍तचाप सामान्‍य होता है, हृदय गति का स्‍तर भी सामान्‍य हो... Read More
रात को सोने से पहले मेड‍िटेशन करना कई मायनों में फायदेमंद होता है। जानें इसे करने का तरीका। Bedtime Meditation: ध्‍यान करने से शरीर और मन से जुड़ी समस्‍याएं दूर होती हैं। मेड‍िटेशन द‍िन के समय भी क‍िया जाता है और रात के समय भी। रात को क‍िए जाने वाले मेड‍िटेशन को बेडटाइम मेड‍िटेशन के नाम से जानते हैं। रात को सोने से पहले मेड‍िटेशन करने से रक्‍तचाप सामान्‍य होता है, हृदय गति का स्‍तर भी सामान्‍य होता है, वजन घटाने में मदद म‍िलती है। मानस‍िक तनाव को कम करने के ल‍िए बेडटाइम मेड‍िटेशन फायदेमंद माना जाता है। आगे जानेंगे बेडटाइम मेड‍िटेशन के अन्‍य फायदे और ध्‍यान करने का तरीका रात को मेड‍िटेशन करने का तरीका- Bedtime Meditation  साफ जगह पर बैठ जाएं और कमरे में हल्‍का अंधेरा रखें।  आंखों को बंद करके माहौल को तनाव मुक्‍त बनाएं।  गहरी सांस लें और छोड़ें। शरीर को ढीला छोड़ें।  श्वास पर ध्यान केंद्रित करें और प्रक्रिया को दोहराएं। मन की च‍िंताओं को भूल जाएं।  हर द‍िन 30 म‍िनट तक मेड‍िटेशन का प्रयास कर सकते हैं। हल्‍का संगीत सुनें  रात को ध्‍यान करने के ल‍िए हल्‍के संगीत की मदद ले सकते हैं। म्‍यूज‍िक या संगीत की मदद से तनाव कम होता है। संगीत सुनने से लय बनाने में भी म‍दद म‍िलती है। हल्‍का संगीत सुनकर मेड‍िट‍ेशन करने से गहरी नींद आती है। जो लोग मानसि‍क समस्‍या से गुजर रहे हैं, उन्‍हें ये तरीका ट्राई करना चाह‍िए।          रात को मेड‍िटेशन करने के फायदे- Bedtime Meditation Benefits रात को सोने से पहले मेडि‍टेशन करने से शरीर में मेलाटोन‍िन का स्‍तर बढ़ जाता है।  मेलाटोन‍िन का स्‍तर बढ़ने से तनाव कम होता है।  इस तरह एंग्‍जाइटी कम करने में मदद म‍िलती है।       बेडटाइम मेड‍िटेशन करने से स‍िर दर्द और मसल्‍स टेंशन से भी आराम म‍िलता है।   अगर नींद जल्‍दी टूट जाती है या ठीक से नहीं सो पाते, तो रात को ध्‍यान करके सोना फायदेमंद है।  रात को मेड‍िटेशन करने से बढ़े हुए हृदय गति को कम करने में म‍दद म‍िलती है।  रात को मेड‍िटेशन करेंगे, तो बीपी कंट्रोल करने में मदद म‍िलेगी।  जो लोग ओवर थि‍क‍िंग करते हैं, उन्‍हें रात को मेड‍िटेशन करके सोना चाह‍िए। सुबह ध्‍यान करना चाह‍िए या रात में? डॉ नेहा ने बताया क‍ि ये पूरी तरह से एक व्‍यक्‍ति‍गत मामला है। क‍िसी भी समय ध्‍यान करना फायदेमंद होता है। अगर आप सुबह जल्‍दी उठकर मेड‍िटेशन करते हैं तो शरीर में ताजगी महसूस होती है। साथ ही शरीर को एक नई ऊर्जा म‍िल पाती है ज‍िसके साथ आप अपने द‍िन की शुरुआत कर सकते हैं। लेक‍िन ज‍िन लोगों को सुबह जल्‍दी उठने में परेशानी होती है, वो रात को भी मेड‍िटेशन कर सकते हैं। अगर आपकी नींद पूरी नहीं होगी, तो ध्‍यान करने का मन नहीं लगेगा और हर समय सुस्‍ती बनी रहेगी। इसल‍िए आप ध्‍यान करने का समय अपने रूटीन के मुताब‍िक ही चुनें।   बेडटाइम मेड‍िटेशन करने से अन‍िद्रा, तनाव और कई शारीर‍िक समस्‍याओं को दूर करने में मदद म‍िलती है। लेख पसंद आया हो, तो शेयर करना न भूलें।
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[email protected] 23 Feb 2025 341 Views

ध्यान कैसे करें: भगवद् गीता के ध्यान योग से अंतर्दृष्टि

ध्यान कैसे करें: भगवद् गीता के ध्यान योग से अंतर्दृष्टि ध्यान, एक ऐसा शाश्वत अभ्यास है जिसे सभी संस्कृतियों में सम्मान दिया जाता है, यह आंतरिक शांति, स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग है। ध्यान के बारे में गहन जानकारी देने वाले प्राचीन ग्रंथों में, भगवद गीता सबसे अलग है, विशेष रूप से इसका छठा अध्याय, ध्यान योग। यह अध्याय ध्यान के सिद्धांतों और तकनीकों पर एक व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करता है, ज... Read More
ध्यान कैसे करें: भगवद् गीता के ध्यान योग से अंतर्दृष्टि ध्यान, एक ऐसा शाश्वत अभ्यास है जिसे सभी संस्कृतियों में सम्मान दिया जाता है, यह आंतरिक शांति, स्पष्टता और आध्यात्मिक विकास का मार्ग है। ध्यान के बारे में गहन जानकारी देने वाले प्राचीन ग्रंथों में, भगवद गीता सबसे अलग है, विशेष रूप से इसका छठा अध्याय, ध्यान योग। यह अध्याय ध्यान के सिद्धांतों और तकनीकों पर एक व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो आज भी प्रासंगिक ज्ञान प्रदान करता है। ध्यान योग को समझना ध्यान योग, ध्यान का योग, मन पर नियंत्रण और आत्म-अनुशासन के महत्व को रेखांकित करता है। यह सिखाता है कि मन, एक अशांत नदी की तरह, स्थिरता और स्पष्टता प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है। भगवद गीता में, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को सच्चे ध्यान को प्राप्त करने के लिए अनुशासित मन की आवश्यकता के बारे में सलाह दी। यह प्राचीन संवाद इस बात पर प्रकाश डालता है कि ध्यान केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि एक ऐसी अवस्था है जहाँ मन केंद्रित, शांत और स्वयं के साथ एकीकृत होता है। ध्यान के लिए तैयारी ध्यान के लिए तैयारी करने में अनुकूल वातावरण बनाना पहला कदम है। भगवद गीता (6.10-6.11) एक साफ, शांत जगह चुनने का सुझाव देती है जहाँ विकर्षण कम से कम हो। यह आपके घर में एक समर्पित कोना या प्रकृति में एक शांत स्थान हो सकता है। आस-पास का वातावरण शांति और पवित्रता की भावना पैदा करना चाहिए, जिससे मन को अंदर की ओर मोड़ने में मदद मिले।   ध्यान में शारीरिक मुद्रा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। श्लोक 6.13-6.14 में शरीर, गर्दन और सिर को एक सीधी रेखा में रखकर बैठने की सलाह दी गई है, तथा धीरे से अपनी दृष्टि को नाक की नोक पर केंद्रित रखने की सलाह दी गई है। यह मुद्रा सतर्कता बनाए रखने में मदद करती है और मन को भटकने से रोकती है। ध्यान के लिए उपयुक्त मुद्रा का उपयोग करके अपनी रीढ़ को यथासंभव सीधा रखने का प्रयास करें। सुखासन या अर्ध पद्मासन सभी कर सकते हैं। यदि आप कुर्सी का उपयोग कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पैर स्थिर तरीके से जमीन को छूते हों। ध्यान का अभ्यास एक बार वातावरण और आसन तय हो जाने के बाद, अगला कदम मन को एकाग्र करना है। श्लोक 6.12 में मन को एक ही बिंदु पर केंद्रित करने के दृढ़ संकल्प के साथ बैठने की सलाह दी गई है। यह सांस, मंत्र या ईश्वर की कोई छवि हो सकती है। इसका उद्देश्य एक स्थिर, अविचल ध्यान विकसित करना है, जिससे मन बाहरी विकर्षणों से हटकर भीतर की ओर मुड़ सके।   हालाँकि, इस फोकस को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मन, अपने स्वभाव से ही बेचैन होता है और ध्यान भटकने की संभावना रखता है। श्लोक 6.26 में, यह स्वीकार किया गया है कि मन अनिवार्य रूप से भटकेगा। जब ऐसा होता है, तो उसे धीरे-धीरे ध्यान के बिंदु पर वापस लाएं। मन को बार-बार पुनर्निर्देशित करने की यह प्रक्रिया समय के साथ मानसिक लचीलापन और एकाग्रता बनाने में मदद करती है। ध्यान में चुनौतियों पर विजय पाना ध्यान में बेचैनी एक आम चुनौती है। अर्जुन ने खुद श्लोक 6.34 में इस कठिनाई को व्यक्त किया है, मन की तुलना हवा से की है - बेचैन और नियंत्रित करना कठिन। भगवान कृष्ण इस चुनौती को स्वीकार करते हैं लेकिन आश्वस्त करते हैं कि अभ्यास (अभ्यास) और वैराग्य से मन को स्थिर किया जा सकता है (6.35)। कुंजी दृढ़ता और धैर्य है। नियमित अभ्यास, भले ही हर दिन केवल कुछ मिनटों के लिए, धीरे-धीरे अधिक केंद्रित और शांत मन विकसित करता है। आध्यात्मिक सफलता का आश्वासन अर्जुन ने एक आम चिंता व्यक्त की: उन लोगों का क्या होता है जो अपने योगिक प्रयासों में सफल नहीं होते? कृष्ण ने अर्जुन के संदेह को दूर करते हुए कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग पर चलता है, वह कभी भी वास्तव में खोया नहीं होता, न तो इस दुनिया में और न ही परलोक में। यह आश्वासन इस बात पर प्रकाश डालता है कि आध्यात्मिक अभ्यास में किए गए प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाते और अभ्यासी को बुरे प्रभावों से बचाते हैं। मृत्यु से परे निरंतरता कृष्ण बताते हैं कि असफल योगी भी मृत्यु के बाद अनुकूल परिणाम प्राप्त करते हैं। वे पुण्यात्माओं के निवास पर चढ़ते हैं, और पृथ्वी पर पुनर्जन्म लेने से पहले कई युगों तक दिव्य लोकों का आनंद लेते हैं। यह चक्र दर्शाता है कि उनके आध्यात्मिक गुण एक जीवनकाल से आगे भी बने रहते हैं, जो उन्हें अपनी यात्रा जारी रखने का एक और अवसर प्रदान करता है। अनुकूल पुनर्जन्म कृष्ण के अनुसार, जो लोग लगन से योग का अभ्यास करते हैं, उनका पुनर्जन्म ऐसे परिवारों में होता है जो पवित्र और समृद्ध होते हैं या ऐसे परिवारों में होता है जो दिव्य ज्ञान से संपन्न होते हैं। ऐसे जन्म उनके आध्यात्मिक प्रयासों को जारी रखने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं। यह अनुकूल पुनर्जन्म योगी के संचित गुणों और ज्ञानोदय की उनकी निरंतर खोज में उन्हें मिलने वाले दिव्य समर्थन का प्रमाण है।   बुद्धि का पुनः जागरण पुनर्जन्म के समय, ये योगी स्वाभाविक रूप से अपने पिछले जन्मों के ज्ञान को पुनः जागृत करते हैं। यह पुनः जागृति उन्हें और भी अधिक जोश के साथ आध्यात्मिक अभ्यास की ओर आकर्षित करती है, क्योंकि उनके पिछले अनुशासन सामने आते हैं। ईश्वर-प्राप्ति के प्रति यह सहज झुकाव जीवन भर निरंतर आध्यात्मिक प्रयासों के संचयी लाभों को रेखांकित करता है।   पूर्णता की प्राप्ति कृष्ण इस बात पर जोर देते हैं कि कई जन्मों के संचित पुण्यों और वर्तमान जीवन में ईमानदारी से किए गए प्रयासों के माध्यम से योगी भौतिक इच्छाओं से खुद को शुद्ध करते हैं और पूर्णता प्राप्त करते हैं। यह शुद्धिकरण प्रक्रिया आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाती है, जो उनके योगिक प्रयासों की अंतिम सफलता को प्रदर्शित करती है योगी की श्रेष्ठ स्थिति कृष्ण यह कहकर निष्कर्ष निकालते हैं कि एक योगी तपस्वियों (तपस्वी), विद्वानों (ज्ञानियों) और कर्मकांडों में लगे लोगों (कर्मियों) से श्रेष्ठ है। सभी योगियों में, जो लगातार अपने मन को कृष्ण पर केंद्रित करते हैं और बड़ी आस्था के साथ भक्ति सेवा में लगे रहते हैं, उन्हें सर्वोच्च माना जाता है। योगियों की यह श्रेष्ठ स्थिति ध्यान और भक्ति के मार्ग के अपार मूल्य और प्रभावकारिता को उजागर करती है।   भगवद गीता में ध्यान योग के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित ध्यान, आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक ज्ञान की ओर एक यात्रा है। एक अनुकूल वातावरण बनाकर, सही मुद्रा अपनाकर, मन को केंद्रित करके और धैर्य के साथ चुनौतियों पर विजय प्राप्त करके, व्यक्ति धीरे-धीरे गहन शांति और एकता प्राप्त कर सकता है जो ध्यान प्रदान करता है। इन अभ्यासों को दैनिक जीवन में शामिल करने से अधिक केंद्रित, दयालु और पूर्ण अस्तित्व प्राप्त हो सकता है। ध्यान योग के ज्ञान को अपनाएँ और आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागृति के अपने मार्ग पर चलें।
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[email protected] 22 Feb 2025 333 Views

ध्यान लगाने से दूर होता है स्ट्रेस जानें मेडिटेशन करने से कैसे बेहतर होती है मेंटल हेल्थ?

ध्यान लगाने से दूर होता है स्ट्रेस, जानें मेडिटेशन करने से कैसे बेहतर होती है मेंटल हेल्थ? मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए ध्यान का अभ्यास लाभकारी होता है। यहां जानिए, ध्यान कैसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है? आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में, तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है। काम का प्रेशर, पर्सनल लाइफ की चुनौतियां और भविष्य को लेकर होने वाली चिंता का हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर अस... Read More
ध्यान लगाने से दूर होता है स्ट्रेस, जानें मेडिटेशन करने से कैसे बेहतर होती है मेंटल हेल्थ? मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए ध्यान का अभ्यास लाभकारी होता है। यहां जानिए, ध्यान कैसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है? आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में, तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है। काम का प्रेशर, पर्सनल लाइफ की चुनौतियां और भविष्य को लेकर होने वाली चिंता का हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर होता हैं। तनाव को कम करने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए ध्यान का अभ्यास लाभकारी होता है। डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए ध्यान यानी मेडिटेशन करने की सलाह देते हैं। मेडिटेशन करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह एकाग्रता और मेमोरी को भी बढ़ाता है। योग थेरिपिस्ट प्रवीण गौतम ने बताया कि ध्यान एक प्राचीन तकनीक है जो वर्तमान में जीने और मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक है। वर्तमान समय में, जब तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, ध्यान एक प्रभावी उपाय के रूप में कारगर साबित हो रहा है। इस लेख में योग थेरिपिस्ट प्रवीण गौतम, मेडिटेशन करने से मेंटल हेल्थ कैसे बेहतर होती है इस बारे बता रहे हैं। ध्यान कैसे काम करता है? मेडिशन मन को वर्तमान में केंद्रित करता है और विचारों को शांत करता है। यह प्रक्रिया कई तरीकों से मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव यानी पॉजिटिव असर डालती है। मेडिटेशन के अनेक प्रकार होते हैं, जिसके अभ्यास से मानसिक तनाव और चिंता को कम किया जा सकता है। ध्यान की स्थिति में हमारा दिमाग आराम की अवस्था में चला जाता है, जिससे तनाव हार्मोन यानी कोर्टिसोल का लेवल कम हो जाता है।  मेडिटेशन का अभ्यास आत्म-जागरूकता को बढ़ाता है, जिससे आप अपने विचारों और भावनाओं को बेहतर ढंग से कंट्रोल कर सकते हैं। नियमित ध्यान यानी मेडिटेशन का अभ्यास करने से नींद की क्वालिटी में सुधार होता है, जिससे हमारे शरीर को आराम और एनर्जी मिलती है। ध्यान कैसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है?   1. नियमित ध्यान का अभ्यास करने से मन को शांति मिलती है। ध्यान के दौरान, व्यक्ति अपने मन को बाहरी डिस्ट्रेक्शन से हटाकर एक बिंदु पर केंद्रित करता है, जिससे तनाव के स्तर में कमी आती है। 2. ध्यान मन को शांत करने और सेल्फ कंट्रोल को बढ़ाने में मदद करता है। इससे आप अपने विचारों और भावनाओं पर कंट्रोल पा सकते हैं, जिससे चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं में कमी आती है। 3. ध्यान के दौरान, व्यक्ति की सांस और हार्ट की गति धीमी हो जाती है, जिससे शरीर में आराम की भावना शुरू होती है। ध्यान से मिलने वाला आराम मानसिक और शारीरिक तनाव को कम करता है। 4. ध्यान से नींद की क्वालिटी में सुधार होता है। अच्छी नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। ऐसे में नियमित ध्यान से अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है। 5. ध्यान करने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है, इससे तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
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[email protected] 15 Feb 2025 326 Views

स्वस्थ रहने के लिए जरूर करें नादब्रह्म ध्यान शारीरिक और मानसिक सेहत रहेगी बेहतर

स्वस्थ रहने के लिए जरूर करें नादब्रह्म ध्यान, शारीरिक और मानसिक सेहत रहेगी बेहतर मन को शांत करने, तनाव को दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए आप नादब्रह्म ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं, आइए जानते हैं इसके फायदे और करने का तरीका-  आजकल की खराब और बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग अपनी सेहत पर खास ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जिसका असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कम उम्र में ही... Read More
स्वस्थ रहने के लिए जरूर करें नादब्रह्म ध्यान, शारीरिक और मानसिक सेहत रहेगी बेहतर मन को शांत करने, तनाव को दूर करने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए आप नादब्रह्म ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं, आइए जानते हैं इसके फायदे और करने का तरीका-  आजकल की खराब और बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग अपनी सेहत पर खास ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जिसका असर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कम उम्र में ही लोग बड़ी-बड़ी बीमारियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसकी वजह से करियर और परिवार दोनों को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए, जरूरी है कि आप अपने मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने के लिए कुछ ऐसे मेडिटेशन करें, जो आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने और तनाव को कम करने में मदद कर सके। आप नादब्रह्म ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं। यह प्राचीन तिब्बती प्रथाओं सेजुड़ा और ओशो द्वारा लोकप्रिय, एक ऐसी तकनीक है जो शरीर और मन को संतुलन में लाने के लिए गुनगुनाहट और हाथ की हरकतों की मदद लेती है। नादब्रह्म ध्यान करने का तरीका  1 - गुनगुनाहट सबसे पहले आराम की स्थिति में बैठ जाएं और अपनी आंखों को बंद कर लें। इसके बाद धीरे-धीरे ध्यान की शुरुआत गुनगुनाहट से करें। गुनगुनाहट इतनी तेज होनी चाहिए कि दूसरों को सुनाई दे और आपके पूरे शरीर में कंपन पैदा हो। 2 - हथेली की गोलाकार हरकत इस ध्यान की मुद्रा को साढ़े सात मिनट के दो चरणों में बांटे। पहला भाग- अपने हाथों को ऊपर उठाएं और अपनी हथेलियों को अपने नाभि क्षेत्र के करीब ऊपर की ओर रखें। हथेली को जितना हो सके उतनी धीमी गति से बाहर की ओर गोलाकार गति में घुमाएं। यह महसूस करने की कोशिश करें कि आप ब्रह्मांड को एनर्जी दे रहे हैं। दूसरा भाग- 7 ½ मिनट के बाद, हथेली को नीचे की ओर मोड़ें और उन्हें उल्टी दिशा में घुमाना शुरू करें। हथेलियों को नाभि क्षेत्र की ओर एक साथ आने दें। इस दौरान महसूस करें कि आप एनर्जी को अपने अंदर ले रहे हैं।  3- मेडिटेशन लगभग 15 मिनट तक बिल्कुल शांत और स्थिर बैठें रहे। लेकिन, खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करें, नहीं तो आप सो भी सकते हैं, जिससे आपकी ये पूरी प्रक्रिया गलत हो सकती है। नादब्रह्म ध्यान करने के फायदे   इस ध्यान को करने के दौरान होने वाली गुनगुनाहट का अभ्यास शरीर के अंदर कंपन पैदा करता है, जो मन को शांत करता है और शरीर को आराम देता है, जिससे विश्राम और शांति की भावना बढ़ती है।   इस अभ्यास के दौरान ध्वनि और हाथ की हरकतों का संयोजन तनाव को कम करने और मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देने में मदद करता है।   गुनगुनाहट और सिंक्रनाइज के कारण ये ध्यान की मुद्रा आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ एकाग्रता को बढ़ाने में मदद करता है।   मन को शांत करके, नादब्रह्म ध्यान नकारात्मक भावनाओं को कम करने और छोड़ने में मदद कर सकता है, जिससे मूड बेहतर होता है।   यह ध्यान आपकी नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है, जिससे अच्छी नींद आती है और आप अच्छा महसूस करते हैं।   यह अभ्यास मन की शांति को बढ़ावा देता है, जिससे आप अपने विचारों और भावनाओं को गहराई से समझ सकते हैं।   तनाव को कम करने और विश्राम को बढ़ावा देने के साथ ये अभ्यास आपके इम्यून सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।   दिमाग को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने के लिए आप नियमित रूप से इस नादब्रह्म ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं।
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[email protected] 15 Feb 2025 349 Views

बच्चों से जरूर करवाएं योग और मेडिटेशन मेंटल हेल्थ रहेगी बेहतर

बच्चों से जरूर करवाएं योग और मेडिटेशन, मेंटल हेल्थ रहेगी बेहतर डिजिटल वर्ल्ड का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहर असर हो रहा है। ऐसे में बच्चों के लिए योग और मेडिटेशन का अभ्यास लाभदायक हो सकता है। आजकल की तेज-तर्रार  लाइफस्टाइल और डिजिटल दुनिया का बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर हो रहा है। बच्चों पर पढ़ाई के साथ-साथ तरह-तरह की कॉम्पिटिशन और टेक्नोलॉजी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके क... Read More
बच्चों से जरूर करवाएं योग और मेडिटेशन, मेंटल हेल्थ रहेगी बेहतर डिजिटल वर्ल्ड का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहर असर हो रहा है। ऐसे में बच्चों के लिए योग और मेडिटेशन का अभ्यास लाभदायक हो सकता है। आजकल की तेज-तर्रार  लाइफस्टाइल और डिजिटल दुनिया का बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर हो रहा है। बच्चों पर पढ़ाई के साथ-साथ तरह-तरह की कॉम्पिटिशन और टेक्नोलॉजी का दबाव बढ़ रहा है, जिसके कारण बच्चों में तनाव, चिंता और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जो उनके समग्र विकास को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में योग और ध्यान का अभ्यास बच्चों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। ध्यान और योग न केवल बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि उनकी मानसिक स्थिरता को भी बनाए रखने में मदद करता है। नियमित योग अभ्यास से बच्चों में मानसिक शांति, एकाग्रता और आत्म-विश्वास बढ़ता है। इस लेख में दिल्ली के उत्तम नगर में स्थित योग जंक्शन के योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए योग और मेडिटेशन के फायदों के बारे में बता रहे हैं। बच्चों के लिए योग के फायदे योग और ध्यान शारीरिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। बच्चों के लिए यह खास तौर पर फायदेमंद होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह न केवल उनके शरीर को हेल्दी बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी संवारता है। नियमित योगाभ्यास से बच्चों में मानसिक शांति आती है, जिससे वे तनाव से दूर रहते हैं। योग के आसन बच्चों को ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और अन्य एक्टिविटीज में भी सुधार होता है। योग अभ्यास से बच्चे अधिक सकारात्मक सोच विकसित करते हैं, जो उनके मानसिक विकास के लिए जरूरी है। बच्चों के लिए ध्यान के फायदे ध्यान या मेडिटेशन का अभ्यास बच्चों की मानसिक स्थिति को शांत और केंद्रित करता है। नियमित ध्यान का अभ्यास बच्चों की एकाग्रता को बढ़ाता है। ध्यान से बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा यानी पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है, जिससे वे अपने आस-पास के माहौल में शांति और सुकून महसूस करते हैं।   आजकल बच्चों में भी तनाव की समस्या बढ़ती जा रही है। ध्यान का अभ्यास उन्हें तनाव से निपटने में मदद करता है। ध्यान करने से बच्चों की नींद की क्वालिटी बेहतर होती है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है। ध्यान से बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा यानी पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है, जिससे वे अपने आस-पास के माहौल में शांति और सुकून महसूस करते हैं।   आजकल बच्चों में भी तनाव की समस्या बढ़ती जा रही है। ध्यान का अभ्यास उन्हें तनाव से निपटने में मदद करता है।   ध्यान करने से बच्चों की नींद की क्वालिटी बेहतर होती है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है   बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान   योग और ध्यान बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए एक बेहतरीन तरीका है। दोनों ही क्रियाएं बच्चों के दिमाग को शांत और एक्टिव करती हैं। नियमित रूप से योग और ध्यान का अभ्यास करने से बच्चों की मानसिक क्षमता  (mental capacity) और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। बच्चों को योग और ध्यान कैसे सिखाएं? 1. आप बच्चों को योग और ध्यान का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। छोटे बच्चों को योग खेल-खेल में सिखाएं और इसके महत्व को समझाएं।  2. बच्चों को ध्यान के लिए प्रेरित करने के लिए ध्यान के समय पर उन्हें उनकी मनपसंद कहानियां सुनाएं। इससे उनकी कल्पना शक्ति को बढ़ावा मिलेगा। 3. बच्चों को योग और ध्यान का महत्व समझाने के लिए यह जरूरी है कि परिवार भी इसका अभ्यास करे। एक साथ योग करने से बच्चों में इसे नियमित करने की इच्छा जागेगी। बच्चों के मानसिक  स्वास्थ्य को बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए योग और ध्यान एक बेहतरीन उपाय है। इससे न केवल बच्चों में मानसिक शांति आती है, बल्कि उनमें एकाग्रता भी बढ़ती है। 
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[email protected] 15 Feb 2025 386 Views

क्या मेडिटेशन करने से स्किन हेल्थ इंप्रूव होती है? जानें एक्सपर्ट से

क्या मेडिटेशन करने से स्किन हेल्थ इंप्रूव होती है? जानें एक्सपर्ट से मेडिटेशन का प्रभाव पूरे  स्वास्थ्य पर पड़ता है। लेकिन क्या यह हमारी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है? Does Meditation Improve Skin: प्राचीन समय से भारत में ध्यान करने का बहुत महत्व रहा है। यह ऋषि-मुनियों के समय से चलकर आज भी कई लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बना हुआ है। आजकल की भागदौड़ बड़ी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य के लिए मेडिटेशन... Read More
क्या मेडिटेशन करने से स्किन हेल्थ इंप्रूव होती है? जानें एक्सपर्ट से मेडिटेशन का प्रभाव पूरे  स्वास्थ्य पर पड़ता है। लेकिन क्या यह हमारी त्वचा के लिए फायदेमंद होता है? Does Meditation Improve Skin: प्राचीन समय से भारत में ध्यान करने का बहुत महत्व रहा है। यह ऋषि-मुनियों के समय से चलकर आज भी कई लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बना हुआ है। आजकल की भागदौड़ बड़ी जिंदगी में मानसिक स्वास्थ्य के लिए मेडिटेशन करना हर किसी के लिए जरूरी भी हो गया है। इससे स्ट्रेस, एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग जैसी कई समस्याओं से राहत मिलती है। मेडिटेशन के फायदों को फिजिकल और मेंटल हेल्थ ही नहीं, बल्कि स्किन हेल्थ से जोड़कर भी देखा जाने लगा है। लेकिन क्या यह वाकई त्वचा के लिए फायदेमंद होता है? इस बारे में जानने के लिए हमने बात कि लखनऊ के योगवशी (Yogvashi) योगा इंस्टीट्यूट की योगा एक्सपर्ट वैशाली सिंह से। आइये लेख में एक्सपर्ट से जानें इसका जवाब। क्या मेडिटेशन त्वचा के लिए फायदेमंद है? Does Meditation Beneficial For Skin Health एक्सपर्ट के मुताबिक मेडिटेशन हमारी मेंटल और फिजिकल हेल्थ के साथ स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है। मेडिटेशन करने से ब्रेन में न्यूरोलॉजिकल चेंजेस होते हैं। इससे स्ट्रेस और एंग्जायटी कम होते हैं और स्किन हेल्थ इंप्रूव होती है। रोज मेडिटेशन करने से स्किन से जुड़ी कई समस्याओं में फायदा मिलता है। मेडिटेशन करने से त्वचा को क्या फायदे मिलते हैं? How Meditation Is Beneficial For Skin Health एक्ने और रिंकल्स कम होते हैं- Reduce Acne and Wrinkles स्ट्रेस और एंग्जायटी के कारण त्वचा बेजान और रूखी नजर आने लगती है। लेकिन मेडिटेशन करने से स्ट्रेस और एंग्जायटी को कंट्रोल किया जा सकता है। इससे रिंकल्स और हार्मोनल एक्ने की समस्या कम होती है। इससे अंडर आई बेग्स और स्किन पर रेडनेस रहने जैसी समस्याएं कम होती हैं। डार्क सर्कल्स कम होते हैं- Reduce Dark Circles मेडिटेशन करने से डार्क सर्कल्स भी कम होने लगते हैं। इससे बॉडी में ऑक्सीजन फ्लो बढ़ जाता है और स्किन हेल्दी रहती है। मेडिटेशन के दौरान हम लंबी सांस लेते हैं। इससे बॉडी में ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स का फ्लो बढ़ता है। इससे ब्लड फ्लो बढ़ता है और सेल्यूलर हेल्थ भी इंप्रूव होती है। यह डल स्किन, आंखों की सूजन और डार्क सर्कल्स जैसी समस्याओं को खत्म करता है। स्किन टोन इंप्रूव होता है- Improve Skin Health   स्किन टोन को इंप्रूव करने के लिए भी मेडिटेशन फायदेमंद है। स्ट्रेस के कारण स्किन बेरियर को नुकसान होता है। इससे स्किन की मॉइस्चर और रिपेयर करने की क्षमता कम होती है। इससे मुंहासे, सोराइसिस और एक्जिमा जैसी समस्याएं ठीक होती हैं। मेडिटेशन करने से त्वचा में खुजली और रेडनेस भी कम होती है। ये सभी चीजें स्किन हेल्थ इंप्रूव करने में मदद करती हैं। नेचुरल ग्लो बना रहता है- Natural Glow मेडिटेशन करने से त्वचा में प्राकृतिक निखार भी आता है। इससे ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो बढ़ता है, जो स्किन हेल्थ इंप्रूव करता है। मेडिटेशन करने से स्ट्रेस और एंग्जायटी भी कंट्रोल होती है। त्वचा में होने वाले इन सभी बदलावों से चेहरे पर निखार बना रहता है।
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[email protected] 14 Feb 2025 366 Views

दिखने लगे अगर ये 4 बदलाव तो समझ लें कि मेडिटेशन आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रहा है

दिखने लगे अगर ये 4 बदलाव, तो समझ लें कि मेडिटेशन आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रहा है मेडिटेशन यानि ध्यान करना हमेशा से अच्छा माना जाता है और इसके अनगिनत फायदे होने के कारण सबको इसे करने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मेडिटेशन करना आपको फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। शायद ही किसी ने आपको इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताया होगा। तो, मेडिटेशन से क्या नुकसान होते है... Read More
दिखने लगे अगर ये 4 बदलाव, तो समझ लें कि मेडिटेशन आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रहा है मेडिटेशन यानि ध्यान करना हमेशा से अच्छा माना जाता है और इसके अनगिनत फायदे होने के कारण सबको इसे करने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मेडिटेशन करना आपको फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है। शायद ही किसी ने आपको इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताया होगा। तो, मेडिटेशन से क्या नुकसान होते हैं, जानते हैं... मेडिटेशन, जिसे ध्यान भी कहा जाता है, मानसिक शांति और आत्मा-विश्लेषण के लिए एक सुरक्षित तरीका है। गहरे ध्यान के दौरान कई लोगों के अवचेतन मन में दबी पुरानी भावनाएं उभर सकती हैं, जिससे मानसिक असंतुलन और चिंता हो सकती है। दीर्घकालिक मेडिटेशन कुछ व्यक्तियों में भावनात्मक अस्थिरता या शून्यता की भावना उत्पन्न कर सकता है। मेडिटेशन करते समय प्रशिक्षित गुरु या विशेषज्ञ की सलाह लेना महत्वपूर्ण है ताकि संभावित नुकसानों से बचा जा सके। मेडिटेशन, जिसे ध्यान भी कहा जाता है, मानसिक शांति पाने और आत्मा-विश्लेषण करने का एक सुरक्षित तरीका माना जाता है। ध्यान इतना फायदेमंद है कि कभी किसी ने इसके नुकसान के बारे में सोचा ही नहीं। परन्तु कुछ मामलों में मेडिटेशन के कुछ नकारात्मक प्रभाव या नुकसान भी हो सकते हैं। वो नुकसान किस प्रकार आपको नजर आ सकते हैं, 1 मानसिक असंतुलन और चिंता कुछ व्यक्तियों के लिए, मेडिटेशन मानसिक शान्ति या स्थिरता की जगह मानसिक असंतुलन या चिंता का कारण बन सकती है। असल में गहरे ध्यान के दौरान कई लोगों के दिमाग में अवचेतन मन में दबी पुरानी बातें और दबी हुई भावनाएं उभर जाती हैं, जो उन्हें तनावपूर्ण या असुविधाजनक बना देती हैं। ऐसे में ध्यान करना उन्हें नुकसान पहुंचाने लगता है। 2. शारीरिक असुविधा मेडिटेशन के दौरान गलत तरीके से आसन लगाकर बैठना या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से शारीरिक असुविधा, जैसे पीठ दर्द, गर्दन दर्द या अन्य शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए कुछ लोगों को कुछ आसन करने से या तो मना कर दिया जाता है या फिर उन्हें किसी एक्सपर्ट से सलाह लेने को कहा जाता है। मेडिटेशन करते समय अधूरी जानकारी के आधार पर अभ्यास करना हानिकारक हो सकता है। किसी प्रशिक्षित गुरु या विशेषज्ञ की सहायता के बिना गलत तरीके से मेडिटेशन करने से मन और शरीर दोनों के लिए खतरे की संभावना बढ़ जाती है। 3. भावनात्मक अस्थिरता दीर्घकालिक मेडिटेशन कुछ लोगों में भावनात्मक अस्थिरता या शून्यता की भावना उत्पन्न कर सकता है। यह समस्या उन लोगों में अधिक होती है जो अत्यधिक संवेदनशील होते हैं या जो मेडिटेशन में गहराई से जुड़ जाते हैं। कुछ लोग मेडिटेशन के दौरान कई असहज अनुभव को महसूस कर डर भी जाते हैं। कुछ लोग मेडिटेशन में इतना एकाग्र हो जाते हैं कि उनका दुनिया से कटाव शुरू हो जाता है। हालांकि, कई बार वो भ्रम का भी शिकार हो जाते हैं। 4. अनियंत्रित विचार या नींद की कमी कुछ व्यक्तियों के लिए, मेडिटेशन के दौरान मन में आने वाले अनियंत्रित विचार और मानसिक अशांति एक समस्या बन सकती है। यह मानसिक स्थिति को और अधिक जटिल बना सकता है और ध्यान को केंद्रित करना कठिन हो सकता है। कई लोगों को मेडिटेशन करने के दौरान रात में नींद आनी बंद हो जाती है। उन्हें ऊर्जा बहुत महसूस होती है लेकिन नींद 3-4 घंटों में ही पूरी होने लगती है। जब ऐसा हो, तो समझ जाइये कि आपके दिमाग के अंदर हलचल शुरू हो गई है अगर आपने ध्यान करना नहीं छोड़ा, तो थोड़े दिन के लिए तो आप नींद न लेने के कारण गंभीर रूप से मानसिक बीमारी का शिकार भी हो सकते हैं। मेडिटेशन हमेशा किसी प्रशिक्षित गुरु या विशेषज्ञ की सलाह से करें और अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इसे अपनाएं। सही मार्गदर्शन के साथ ही आप मेडिटेशन के लाभों का पूरा अनुभव कर सकते हैं और संभावित नुकसानों से बच सकते हैं।
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[email protected] 08 Feb 2025 320 Views

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