भारत की शिक्षा में नौकर बनाने की साजिश – और उससे बाहर निकलने का रास्ता

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भारत की शिक्षा में  नौकर  बनाने की साजिश – और उससे बाहर निकलने का रास्ता

? परिचय: क्या आधुनिक शिक्षा हमें सच में समृद्ध कर रही है?

आज हम जिस आधुनिक शिक्षा प्रणाली (Modern Education System) का हिस्सा हैं, वह हमें डिग्रियां और नौकरियां तो दे रही है, लेकिन क्या इसने हमें मानसिक रूप से समृद्ध बनाया है? आज देश में बेरोजगारी, मानसिक तनाव और संस्कारों की कमी जैसी कई समस्याएं आम हो चुकी हैं।

क्या आप जानते हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी? आइए आज इतिहास की उस सोची-समझी साजिश के पन्नों को पलटते हैं, जिसने भारत की रीढ़ यानी हमारी 'प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति' को पूरी तरह तबाह कर दिया।

?? भाग 1 : क्या आधुनिक शिक्षा हमें सच में समृद्ध कर रही है?

आज हम जिस आधुनिक शिक्षा प्रणाली (Modern Education System) का हिस्सा हैं, वह हमें डिग्रियाँ और नौकरियाँ तो दे रही है, लेकिन क्या इसने हमें मानसिक रूप से समृद्ध बनाया है?

देश में आज बेरोज़गारी, मानसिक तनाव, अवसाद (Depression) और संस्कारों की कमी जैसी समस्याएँ आम हो चुकी हैं। आँकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • बेरोज़गारी : भारत में हर साल लगभग 1.5 करोड़ युवा नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन सिर्फ 5-10% को ही रोज़गार मिल पाता है।
  • आत्महत्या : NCRB के अनुसार, भारत में हर साल 13,000 से अधिक छात्र परीक्षा के तनाव, असफलता, और करियर के दबाव के कारण आत्महत्या कर लेते हैं।
  • मानसिक तनाव : एक सर्वे के अनुसार, 40% से अधिक भारतीय छात्र किसी न किसी प्रकार के मानसिक तनाव (Anxiety/Depression) से ग्रस्त हैं।
  • संस्कारों की कमी : आज के स्कूल नैतिकता, अनुशासन, और जीवन-मूल्य नहीं सिखाते – सिर्फ़ नंबर और डिग्री देते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंग्रेज़ों के आने से पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी? आइए आज इतिहास की उस सोची-समझी साजिश के पन्नों को पलटते हैं, जिसने भारत की रीढ़ – यानी हमारी 'प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति' – को पूरी तरह तबाह कर दिया।

? भाग 2 : 2 फरवरी 1835 – मैकॉले का वह विवादित बयान

?? लंदन से निकला एक अंग्रेज़, और उसकी नज़र में भारत

साल था 1835। लंदन की ठंडी गलियों से निकलकर लॉर्ड थॉमस बबिंगटन मैकॉले (Lord Macaulay) नाम का एक जवान अंग्रेज़ भारत पहुँचा। उसे भारत की गर्मी तो अखरी नहीं, लेकिन उसे यहाँ की धरती, ज्ञान, और लोग बहुत हैरान करते थे।

भारत का दौरा करने के बाद उसने जो देखा, वो उसकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग था।

? मैकॉले ने देखा – एक ऐसा भारत जो सोने से भी कीमती था

इतिहास के दस्तावेज़ गवाह हैं कि 2 फरवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में लॉर्ड मैकॉले ने भारत की तात्कालीन स्थिति पर एक रिपोर्ट पेश की थी। उसने ब्रिटिश संसद में खड़े होकर कहा था:

"मैंने पूरे भारत की यात्रा की है, लेकिन मुझे पूरे देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जो भिखारी हो या चोर हो। इस देश में मैंने इतनी धन-दौलत, इतने उच्च नैतिक मूल्य और ऐसे प्रतिभावान लोग देखे हैं कि मुझे नहीं लगता कि हम कभी भी इस देश को जीत पाएंगे। "जब तक हम इसकी रीढ़ की हड्डी को नहीं तोड़ देते, जो कि इसकी 'सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत' और 'शिक्षा प्रणाली' है। इसलिए, मेरा प्रस्ताव है कि हमें इसकी पुरानी और प्राचीन शिक्षा प्रणाली को बदलना होगा..."

? मैकॉले का 'मास्टरप्लान' – सोच बदलो, भारत बदलो

मैकॉले की रणनीति बहुत साफ़ थी। उसका मानना था:

"यदि भारतीयों को यह विश्वास दिला दिया जाए कि उनकी अपनी भाषा, संस्कृति और शिक्षा प्रणाली विदेशी (अंग्रेज़ी) संस्कृति से कमतर और पिछड़ी है, तो वे अपनी आत्म-प्रतिष्ठा खो देंगे। वे दिखने में तो भारतीय रहेंगे, लेकिन मानसिक और वैचारिक रूप से पूरी तरह ब्रिटिश (गुलाम) बन जाएंगे।"

और फिर उसने अपने "Minute on Indian Education" (शिक्षा ज्ञापन) में लिखा:

"यूरोप की एक अच्छी लाइब्रेरी की एक अलमारी, भारत और अरब के सारे साहित्य के बराबर है।"

⚔️ भाग 3 : गुरुकुलों का सोची-समझी साजिश के तहत विनाश

मैकॉले के 'मिनट ऑन इंडियन एजुकेशन' (Macaulay's Minute) के लागू होने के बाद, अंग्रेज़ों ने भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था पर चौतरफा हमला कर दिया।

?️ 1. लाखों गुरुकुल अवैध घोषित

अंग्रेज़ों से पहले भारत के हर गाँव में एक गुरुकुल या पाठशाला हुआ करती थी। वहाँ साक्षरता दर बहुत ऊँची थी – कई विदेशी यात्रियों ने इसे रिकॉर्ड किया है। लेकिन अंग्रेज़ों ने कानूनों के ज़रिए इन लाखों गुरुकुलों को रातों-रात अवैध घोषित कर दिया!

⛓️ 2. गुरुओं पर अत्याचार

जो गुरु और आचार्य अंग्रेज़ों की इस नीति के खिलाफ गए, उन्हें प्रताड़ित किया गया और जेलों में डाल दिया गया। कुछ को निर्वासित कर दिया गया, तो कुछ को उनके ही गाँव में अपमानित होकर जीना पड़ा।

? 3. कॉन्वेंट स्कूलों की शुरुआत

गुरुकुलों को बंद कर, अंग्रेज़ों ने अपने 'कॉन्वेंट स्कूल' शुरू किए। इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य ज्ञान देना नहीं, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के दफ्तरों के लिए 'सस्ते क्लर्क (बाबू)' तैयार करना था।

? भाग 4 : प्राचीन गुरुकुल प्रणाली की 5 विशेषताएँ – जो आज के स्कूलों में गायब हैं

आइए समझते हैं कि हमारी प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति, आज की कॉर्पोरेट स्कूलिंग से कितनी अलग और श्रेष्ठ थी:

1️⃣ फीस का कोई नियम नहीं (पूरी तरह मुफ़्त शिक्षा)

आज अच्छी शिक्षा पाना आम इंसान के बजट से बाहर होता जा रहा है। लेकिन गुरुकुलों में शिक्षा का कोई बाज़ारीकरण नहीं था। यहाँ शिक्षा पूरी तरह से मुफ़्त थी। अमीर हो या गरीब – शिक्षा पर सबका समान अधिकार था।

शिक्षा पूरी होने के बाद, शिष्य अपनी मर्जी, श्रद्धा और आर्थिक क्षमता के अनुसार अपने गुरु को 'गुरु दक्षिणा' देते थे – जिसके लिए कोई दबाव नहीं होता था।

2️⃣ सिर्फ़ रटंत विद्या नहीं – 360-डिग्री व्यावहारिक ज्ञान

आज के स्कूलों में बच्चों को सिर्फ़ किताबों को रटकर परीक्षा पास करना सिखाया जाता है। लेकिन गुरुकुलों में छात्रों को सिखाया जाता था:

  • ? कृषि (Farming)
  • ? आयुर्वेद (Medicine)
  • ? धातुकर्म (Metallurgy)
  • ? खगोल विज्ञान (Astronomy)
  • ? राजनीति
  • ? अर्थशास्त्र
  • ⚔️ आत्मरक्षा (Self-defense)

यानी, गुरुकुल से निकलने वाला छात्र पूरी तरह आत्मनिर्भर होता था।

3️⃣ अहंकार का अंत और समानता का नियम

आज के स्कूलों में बच्चों की अमीरी-गरीबी उनके पहनावे और गाड़ियों से साफ़ दिखती है। लेकिन गुरुकुल में 'समानता' पहला नियम था।

राजा का राजकुमार हो या किसी गरीब लकड़हारे का बेटा – दोनों को एक जैसे साधारण वस्त्र पहनने होते थे, और एक जैसा भोजन करना पड़ता था।

यहाँ तक कि राजकुमारों को भी जंगल से लकड़ियाँ काटनी पड़ती थीं, और गाँव में जाकर भिक्षा माँगनी पड़ती थी। इसका उद्देश्य: बच्चों के भीतर से अहंकार को खत्म करना, और उनमें कठोर अनुशासन व विनम्रता पैदा करना।

4️⃣ परीक्षा का अनोखा तरीका – बिना तनाव के

आज बच्चों का पूरा भविष्य 3 घंटे के रट्टा मार लिखित पेपर पर टिका होता है, जिससे छात्र भारी मानसिक तनाव और अवसाद (Depression) का शिकार हो रहे हैं।

गुरुकुलों में ऐसी कोई परीक्षा नहीं होती थी। वहाँ परीक्षा 'व्यावहारिक' (Practical) होती थी। आचार्य किसी छात्र को तब तक पास या स्नातक (Graduate) नहीं मानते थे, जब तक वह सीखे गए ज्ञान का उपयोग अपनी वास्तविक ज़िंदगी की किसी समस्या को सुलझाने में न कर ले।

5️⃣ गुरु-शिष्य का जीवन भर का रिश्ता

आज के स्कूलों में एक शिक्षक एक 'कर्मचारी' है। लेकिन गुरुकुल में गुरु और शिष्य का रिश्ता जीवन भर का होता था। गुरु सिर्फ़ किताब नहीं पढ़ाता था – वह जीवन जीने का तरीका, संस्कार, नैतिकता और आत्म-अनुशासन सिखाता था। यानी, गुरुकुल स्कूल नहीं – एक आश्रम था, एक दूसरा घर था।

? भाग 5 : सबसे दर्दनाक सच – और इतिहास के तथ्य

क्या गुरुओं को जिंदा जलाया गया?

नहीं। गुरुओं को जलाया नहीं गया, न ही उनके परिवारों को मारा गया। लेकिन...

उनकी बातों को, उनकी किताबों को, उनके सम्मान को जला दिया गया।

एक सुनहरी परंपरा जो हज़ारों सालों से चली आ रही थी – जहाँ राजा का बेटा और लकड़हारे का बेटा साथ बैठते थे, जहाँ शिक्षा मुफ़्त थी, जहाँ परीक्षा ज़िंदगी के हर पहलू में होती थी – वो धीरे-धीरे मिटती चली गई।

? ऐतिहासिक तथ्य : मैकॉले का वास्तविक 'मिनट ऑन एजुकेशन'

ऐतिहासिक दृष्टि से, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मैकॉले ने कोई 'भाषण' नहीं, बल्कि एक आधिकारिक ज्ञापन (Minute) लिखा था। उन्होंने उसमें स्पष्ट कहा था:

"एक अच्छी यूरोपीय लाइब्रेरी की एक अलमारी भारत और अरब के सारे साहित्य के बराबर है।"

इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को नीचा दिखाना और अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाना था, ताकि एक ऐसा वर्ग तैयार हो सके जो "खून और रंग में भारतीय, लेकिन विचारों में अंग्रेज़" हो।

? भाग 6 : ये सबसे बड़ा दोहरापन – अमीर अपने बच्चों को वही शिक्षा नहीं देते, जो हमें देते हैं

? आधुनिक शिक्षा हमें 'नौकर' कैसे बना रही है?

आज की शिक्षा प्रणाली – जिसे अंग्रेज़ों ने हमें दिया – हमें आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि 'दूसरों पर निर्भर' बना रही है।

? "अच्छे नंबर लाओ, अच्छी नौकरी पाओ" – ये ज़हर है!

बच्चों को बचपन से सिखाया जाता है – "सिर्फ़ पढ़ाई करो, नंबर लाओ, कॉलेज जाओ, नौकरी करो।" इसका मतलब है – तुम्हारी कोई सोच नहीं, तुम सिर्फ़ एक 'कर्मचारी' बनो। जो बच्चा 90% लाता है, वो भी किसी और के लिए काम करेगा। बिज़नेस सोच, कला, रचनात्मकता, जोखिम लेना – ये सब मार दिया जाता है।

? सिर्फ़ रट्टा, असली ज़िंदगी नहीं

गुरुकुल में बच्चा खेती, धातुकर्म, आयुर्वेद, आत्मरक्षा सीखता था – यानी वो खुद का रोज़गार चला सकता था। आज बच्चा सिर्फ़ किताबों की रट्टी हुई बातें जानता है – उसे बैंक बैलेंस नहीं पता, टैक्स नहीं पता, खाना कैसे उगता है नहीं पता, घर की मरम्मत नहीं पता। वो दूसरों पर निर्भर है – एक 'नौकर' जैसा।

? हमें "रोबोट" बनाया जा रहा है

आज की शिक्षा एक जैसी किताबें, एक जैसी परीक्षा, एक जैसी नौकरी – सबको एक साँचे में ढालती है। जो साँचे से बाहर निकलता है, उसे "फेल" या "आवारा" कहा जाता है। असली जीवन में क्रिएटिविटी, फ़ेल होना, नया सोचना – ये तो ज़रूरी हैं, लेकिन स्कूल इन्हें सिखाता नहीं, बल्कि दबाता है।

? अमीर लोग अपने बच्चों को क्या शिक्षा देते हैं? (और हमें क्यों नहीं?)

? एलन मस्क (Elon Musk) के बच्चे

दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क ने अपने बच्चों के लिए खुद का एक स्कूल खोला – "Ad Astra School" (बाद में "Astra Nova")।

इस स्कूल में :ग्रेड (नंबर) नहीं हैं।कोई घंटी (bell) नहीं बजती।रट्टा लगाना नहीं है। ✅ बच्चे समस्या-समाधान (problem-solving) करते हैं।एक साथ मिलकर काम करना (collaboration) सिखाया जाता है। ✅ हर बच्चा अपनी गति से सीखता है।

क्यों? क्योंकि मस्क जानता है – दुनिया नंबरों से नहीं, सोच से बदलती है।

?‍? बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स, सुंदर पिचाई, मुकेश अंबानी – सबका एक ही तरीका

  • बिल गेट्स ने हार्वर्ड छोड़ दी – क्योंकि वहाँ वो वो नहीं सीख रहा था जो उसे चाहिए था। (और उसकी बेटी भी एक अनोखे स्कूल में पढ़ी।)
  • स्टीव जॉब्स ने कॉलेज छोड़ा, और कैलिग्राफी (सुलेख) सीखी – जो बाद में Apple की फ़ॉन्ट्स की दुनिया बन गई।
  • सुंदर पिचाई (Google CEO) – चाहते हैं कि बच्चे समस्या सुलझाना (problem-solving) सीखें, रट्टा नहीं।
  • मुकेश अंबानी के बच्चों ने दुनिया के टॉप कॉलेजों से पढ़ाई की, लेकिन उन्हें सिखाया गया – "काम खोजो मत, काम बनाओ।"

? भारत के अमीर भी अपने बच्चों को अलग भेजते हैं

भारत में देश के 80% स्कूल – सरकारी या औसत निजी – वही पुरानी रट्टू-परंपरा वाले हैं। लेकिन टॉप अमीर अपने बच्चों को:

  • IB (International Baccalaureate) स्कूलों में,
  • मॉन्टेसरी (Montessori) स्कूलों में,
  • प्रोजेक्ट-बेस्ड स्कूलों में,
  • या होमस्कूलिंग में भेजते हैं।

वहाँ :कोई रट्टा नहीं,कोई 3-घंटे की मौत-सी परीक्षा नहीं,सिर्फ़ किताबी ज्ञान नहीं, ✅ बल्कि कंप्यूटर, कला, बिज़नेस, और जीवन कौशल पर ज़ोर होता है।

? तो फिर हमें क्यों रटना पड़ता है?

क्योंकि हमारा सिस्टम 'गवर्नमेंट ऑफिस' के लिए अफ़सर (क्लर्क) बनाता है, बिज़नेसमैन या क्रिएटर नहीं।

आज की शिक्षा:

  • सवाल पूछना नहीं, बल्कि जवाब रटना सिखाती है।
  • असफल होना (fail) नहीं, बल्कि हर बार पास होना सिखाती है।
  • नया सोचना नहीं, बल्कि पुराना दोहराना सिखाती है।

और इसीलिए:

  • अमीर अपने बच्चों को व्यावसायिक (vocational) और रचनात्मक (creative) शिक्षा देते हैं – ताकि वो मालिक (owner) बनें।
  • गरीब और मिडिल-क्लास के बच्चों को सरकारी/निजी स्कूल की औसत शिक्षा दी जाती है – ताकि वो मज़दूर / कर्मचारी (employee) बनें।

? भाग 7 : ये कैसे बदला जा सकता है?

गुरुकुल और एलन मस्क के स्कूल में एक बात समान है:

वहाँ जीवन के लिए शिक्षा होती है, नौकरी के लिए नहीं।

अगर हमें आत्मनिर्भर बनना है:

  • ? सवाल करना सीखो – हर बात मत मानो।
  • ?️ कुछ बनाना सीखो – सिर्फ़ किताब मत पढ़ो।
  • ? असफल होने से मत डरो – असफलता ही सबसे बड़ी शिक्षक है।
  • ? इतिहास पढ़ो – ताकि फिर से कोई आकर तुम्हारी सोच न बदल सके।
  • ?‍?‍?‍? बच्चों को खुद सिखाओ – वो सीखें जो स्कूल नहीं सिखाता।

? भाग 8 : निष्कर्ष – अंग्रेज़ों ने हमसे क्या छीना?

अंग्रेज़ों ने भारत से जो छीना, वो सिर्फ़ ज़मीन या सोना नहीं था – उन्होंने हमारी 'सोचने की आज़ादी' छीनी।

आज हम अंग्रेज़ी मीडियम में पढ़ते हैं, लेकिन गुरुकुल के 5+ गुण हम भूल गए:

  • ? मुफ़्त शिक्षा
  • ?️ व्यावहारिक ज्ञान
  • ? समानता
  • ? बिना तनाव की परीक्षा
  • ❤️ गुरु-शिष्य का आजीवन रिश्ता

जीवन के लिए शिक्षा – नौकरी के लिए नहीं।

❓ अंतिम सवाल – क्या आप अपने बच्चे को भी वही देंगे, या कुछ बदलेंगे?

✅ तथ्यों की जाँच – क्या सच है और क्या नहीं

बात सच / झूठ
मैकॉले ने संसद में भाषण दिया था? झूठ – उसने एक ज्ञापन (Minute) लिखा था।
उसने कहा "भारत में भिखारी नहीं"? झूठ – ये कहानी इंटरनेट पर फैली है, कोई सबूत नहीं।
उसने कहा "यूरोप की एक अलमारी... सारा भारतीय ज्ञान"? सच – ये उसके Minute में लिखा है।
गुरुकुल बंद हुए? सच – उन्हें पैसे, कानून, भाषा के ज़रिए खत्म किया गया।
गुरुओं को जिंदा जलाया गया? झूठ – इसका कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं।
"खून और रंग में भारतीय, सोच में अंग्रेज़" सच – ये मैकॉले का मुख्य उद्देश्य था।
गुरुकुल में शिक्षा मुफ़्त थी? सच – गुरु दक्षिणा स्वैच्छिक थी।
गुरुकुल में व्यावहारिक शिक्षा थी? सच – कृषि, चिकित्सा, धातुकर्म, खगोल आदि सिखाए जाते थे।
गुरुकुल में समानता थी? सच – राजकुमार और गरीब का बेटा साथ रहता था।
एलन मस्क ने अपने बच्चों के लिए खुद स्कूल खोला? सच – "Ad Astra" / "Astra Nova" स्कूल।

यह लेख ऐतिहासिक स्रोतों, तथ्यों, और जन-जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

"जो इतिहास नहीं जानता, वो उसे दोहराने को मजबूर है।"

FAQ

+ 1. मैकॉले ने क्या किया था?

जवाब: मैकॉले ने 1835 में "Minute on Indian Education" (भारतीय शिक्षा पर ज्ञापन) लिखा। उसमें उन्होंने भारतीय भाषाओं और ज्ञान को "हीन" करार दिया और अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाने की सिफ़ारिश की। इसका उद्देश्य ऐसे भारतीय तैयार करना था जो "खून और रंग में भारतीय, लेकिन सोच में अंग्रेज़" हों।

+ 2. क्या मैकॉले ने संसद में भाषण दिया था?

जवाब: नहीं। यह एक भ्रांति है। मैकॉले ने संसद में भाषण नहीं दिया, बल्कि एक आधिकारिक ज्ञापन (Minute) लिखा था। उनका प्रसिद्ध भाषण इंटरनेट पर फैली एक कहानी मात्र है।

+ 3. क्या मैकॉले ने भारत की तारीफ की थी?

जवाब: नहीं। यह भी एक गलत धारणा है। उन्होंने कभी नहीं कहा कि "मुझे भारत में एक भी भिखारी नहीं मिला" या "हम कभी भी इस देश को नहीं जीत पाएंगे"। ये बातें सोशल मीडिया पर फर्जी तरीके से फैलाई गईं हैं। असल में, उन्होंने भारतीय ज्ञान को नीचा दिखाया था।

+ 4. अंग्रेज़ों ने गुरुकुल कैसे खत्म किए?

जवाब: अंग्रेज़ों ने गुरुकुलों को तीन तरीकों से खत्म किया: पैसे से: सरकारी मदद सिर्फ़ अंग्रेज़ी स्कूलों को दी गई। कानून से: लाखों गुरुकुलों को "अवैध" घोषित कर दिया गया। भाषा से: अंग्रेज़ी को प्रशासन और कोर्ट की भाषा बना दिया, जिससे पारंपरिक शिक्षा का कोई रोज़गार मूल्य नहीं रहा।

+ 5. क्या गुरुओं को जिंदा जलाया गया था?

जवाब: नहीं। इसका कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है। यह एक भ्रांति है, जिसे अक्सर मुगलकालीन घटनाओं (जैसे सिख गुरुओं की शहादत) के साथ भ्रमित कर दिया जाता है। असल में, अंग्रेज़ों ने गुरुओं को जलाया नहीं, बल्कि उनके सम्मान, किताबों, और परंपरा को नष्ट किया।
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