Computer Network Protocol और इसके प्रकार

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परिभाषा (Definition):

"कंप्यूटर नेटवर्क प्रोटोकॉल नियमों और डिजिटल संकेतों का वह मानक समूह (Set of Rules) है, जो यह निर्धारित करता है कि एक नेटवर्क से जुड़े दो या दो से अधिक कंप्यूटर आपस में डेटा कैसे भेजेंगे, प्राप्त करेंगे और उसे कैसे समझेंगे।"

इसे और आसान भाषा में ऐसे समझें: जैसे सड़क पर चलने के लिए Traffic Rules होते हैं ताकि गाड़ियाँ आपस में न टकराएं, वैसे ही इंटरनेट पर डेटा सही पते पर पहुँचने के लिए Network Protocols होते हैं।

इसके मुख्य 3 काम (Core Functions):

  • Data Formatting: डेटा को छोटे-छोटे 'पैकेट' में कैसे तोड़ा जाए।
  • Addressing: यह तय करना कि डेटा किस कंप्यूटर (IP Address) तक जाना है।
  • Error Recovery: अगर डेटा रास्ते में खो जाए या खराब हो जाए, तो उसे दोबारा कैसे भेजना है।

उदाहरण (Example):

अगर आप अपने दोस्त को WhatsApp मैसेज भेजते हैं, तो पीछे TCP/IP प्रोटोकॉल काम करता है जो यह पक्का करता है कि मैसेज आपके दोस्त के ही फोन पर जाए और सही क्रम में पहुँचे।

 

1. सबसे महत्वपूर्ण (Foundation Protocols)

  • TCP (Transmission Control Protocol): यह सुनिश्चित करता है कि डेटा सही सलामत और सही क्रम (Order) में पहुँचे। यह भेजने से पहले कनेक्शन चेक करता है।
  • IP (Internet Protocol): यह डेटा के पैकेट पर "पता" (Address) लिखता है ताकि वह सही डिवाइस तक पहुँच सके।
  • TCP/IP Suite: इन दोनों को मिलाकर ही पूरा इंटरनेट चलता है।

2. वेब और इंटरनेट ब्राउज़िंग (Web Protocols)

  • HTTP (Hypertext Transfer Protocol): ब्राउज़र और सर्वर के बीच डेटा ट्रांसफर करने का नियम।
  • HTTPS (Hypertext Transfer Protocol Secure): यह HTTP का सुरक्षित रूप है, जिसमें डेटा Encryption (कोड) के साथ भेजा जाता है।
  • DNS (Domain Name System): यह इंटरनेट की "फ़ोन बुक" है। यह google.com जैसे नामों को IP Address (जैसे 142.250...) में बदलता है।

3. फाइल और ईमेल (File & Email Protocols)

  • FTP (File Transfer Protocol): इंटरनेट पर एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में बड़ी फाइलें भेजने के लिए।
  • SMTP (Simple Mail Transfer Protocol): ईमेल भेजने के लिए इस्तेमाल होता है।
  • POP3 (Post Office Protocol version 3): ईमेल प्राप्त करने और उसे डाउनलोड करने के लिए।

4. कनेक्टिविटी और एड्रेसिंग (Connectivity Protocols)

  • UDP (User Datagram Protocol): यह TCP जैसा ही है पर तेज़ है। यह डेटा पहुँचने की गारंटी नहीं देता, इसलिए Video Calling और Gaming में काम आता है।
  • DHCP (Dynamic Host Configuration Protocol): यह नेटवर्क से जुड़ने वाले हर डिवाइस को अपने आप एक IP Address दे देता है।
  • ICMP (Internet Control Message Protocol): नेटवर्क में गलतियों (Errors) को चेक करने के लिए, जैसे "Ping" कमांड।

5. सुरक्षा (Security Protocols)

  • SSL/TLS (Secure Sockets Layer / Transport Layer Security): वेबसाइट्स को सुरक्षित और डेटा को प्राइवेट रखने के लिए।
  • SSH (Secure Shell): किसी दूसरे कंप्यूटर या सर्वर को सुरक्षित तरीके से दूर (Remotely) बैठकर चलाने के लिए।
  • VPN (Virtual Private Network): आपके इंटरनेट कनेक्शन को प्राइवेट और सुरक्षित बनाने के लिए।

 

1. Routing Protocols (रास्ता तय करने वाले - Deep Detail)

जब डेटा एक शहर से दूसरे शहर जाता है, तो ये प्रोटोकॉल तय करते हैं कि कौन सा 'मोड़' लेना है:

  • Interior Gateway Protocols (IGP): एक ही कंपनी/नेटवर्क के अंदर काम करते हैं।
    • RIP (Routing Information Protocol): (Port 520) - 'Hop Count' (रास्ते के राउटर की संख्या) पर आधारित।
    • OSPF (Open Shortest Path First): (Protocol 89) - 'Link State' और बैंडविड्थ पर आधारित।
    • IS-IS (Intermediate System to Intermediate System): बड़े सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क्स में इस्तेमाल होता है।
    • EIGRP (Enhanced Interior Gateway Routing Protocol): (Protocol 88) - सिस्को का एडवांस प्रोटोकॉल (Speed + Distance दोनों देखता है)।
  • Exterior Gateway Protocols (EGP): इंटरनेट के बड़े नेटवर्क्स को जोड़ते हैं।
    • BGP (Border Gateway Protocol): (Port 179) - इसे "इंटरनेट की रीढ़" कहते हैं। इसके बिना Google और Facebook आपस में बात नहीं कर पाएंगे।

2. IP एड्रेसिंग और उसके "साथी" (Internet Layer)

  • IPv4 (Internet Protocol v4): 32-bit (4 Octets)। इसमें Subnetting (VLSM) के जरिए नेटवर्क को टुकड़ों में बाँटा जाता है।
  • IPv6 (Internet Protocol v6): 128-bit। इसमें 'Broadcast' नहीं होता, सिर्फ Unicast, Multicast, और Anycast होता है।
  • ICMP (Internet Control Message Protocol): (Protocol 1) - एरर रिपोर्टिंग के लिए (Ping और Traceroute इसी पर चलते हैं)।
  • ARP (Address Resolution Protocol): IP (Logical) को MAC (Physical) में बदलता है।
  • RARP (Reverse ARP): MAC से IP पता करने के लिए।
  • IGMP (Internet Group Management Protocol): मल्टीकास्टिंग (जैसे लाइव स्ट्रीम) को मैनेज करने के लिए।

3. डेटा डिलीवरी के "मैनेजर" (Transport Layer)

  • TCP (Transmission Control Protocol): (Protocol 6) - Connection-oriented। यह डेटा पहुँचने की रसीद (Acknowledgement) देता है।
  • UDP (User Datagram Protocol): (Protocol 17) - Connectionless। तेज़ लेकिन असुरक्षित (Video/Voice के लिए)।
  • SCTP (Stream Control Transmission Protocol): TCP और UDP दोनों की खूबियों वाला (ज्यादातर टेलीकॉम में यूज़ होता है)।

4. एप्लीकेशन और मैनेजमेंट (The Big List)

  • DHCP (Dynamic Host Configuration Protocol): (Port 67, 68) - यह DORA (Discover, Offer, Request, Ack) प्रोसेस से IP देता है।
  • DNS (Domain Name System): (Port 53) - नाम को IP में बदलना।
  • SNMP (Simple Network Management Protocol): (Port 161/162) - नेटवर्क डिवाइसेस की निगरानी।
  • NTP (Network Time Protocol): (Port 123) - घड़ी सिंक करना।
  • LDAP (Lightweight Directory Access Protocol): (Port 389) - यूज़र डायरेक्टरी एक्सेस।
  • FTP/SFTP/TFTP: फाइल ट्रांसफर के लिए। (TFTP Port 69 पर काम करता है)।
  • SSH (Port 22) / Telnet (Port 23): रिमोट लॉगिन।
  • SMTP (25) / POP3 (110) / IMAP (143): ईमेल के लिए।

5. एडवांस्ड और सुरक्षा प्रोटोकॉल्स (The Missing Bits)

  • NAT (Network Address Translation): प्राइवेट IP को पब्लिक IP में बदलना ताकि इंटरनेट चले।
  • IPsec (IP Security): VPN के लिए डेटा को एन्क्रिप्ट करना।
  • STP (Spanning Tree Protocol): (802.1D) - स्विचिंग में 'लूप' बनने से रोकना।
  • VTP (VLAN Trunking Protocol): कई स्विचेस पर VLAN कॉन्फ़िगरेशन सिंक करना।
  • HSRP/VRRP: (Redundancy) - अगर एक राउटर खराब हो जाए, तो दूसरा अपने आप काम संभाल ले।
  • SIP (Session Initiation Protocol): (Port 5060/5061) - इंटरनेट कॉलिंग (VoIP) के लिए।

6. IoT और वायरलेस (Modern Protocols)

  • MQTT: मशीन-टू-मशीन बात करने के लिए बहुत हल्का प्रोटोकॉल।
  • CoAP: कम पावर वाले डिवाइसेस के लिए।
  • 802.11 (Wi-Fi): वायरलेस कम्युनिकेशन के नियम।

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