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कोलेस्ट्रॉल लेवल शरीर में कितना होना चाहिए
कोलेस्ट्रॉल क्या है :  कोलेस्ट्रॉल हार्मोंस के निर्माण शरीर में कोशिकाओं को स्वस्थ और ठीक रखने का काम करता है लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा होने पर आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा  कोलेस्ट्रॉल की मात्रा  बढ़ने पर खून का गाढ़ा होना आर्टरी ब्लॉकेज स्टोक्स हार्ट अटैक और दिल की अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में इन बीमारियों से बचने के लिए कोलेस्ट्रॉल का सामान्य होना बहुत जरूरी है। इसके बढ़ने पर आप कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की कितनी मात्रा होनी चाहिए और इसे कंट्रोल करने के लिए आपको क्या करना चाहिए
 
 
शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने पर स्& zwj ट्रोक और  हार्ट अटैक  का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं हाई कोलेस्& zwj ट्रॉल से खून का गाढ़ा होना आर्टरी ब्लॉकेज और हार्ट डिजीज की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में  कोलेस्ट्रॉल लेवल  (cholesterol levels ) को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है।   जानतेहैं शरीर में कितनी होनी कोलेस्ट्रॉल की मात्रा और कैसे करें इसे कंट्रोल?
शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं गुड़ कोलेस्ट्रॉल (hdl) और बैड कोलेस्ट्रॉल (ldl)। यह दोनों ही प्रकार के कोलेस्ट्रॉल हाई  और लो डेनसिटी प्रोटीन से बनते हैं और इनकी निश्चित मात्रा ही शरीर के लिए अच्छी है। शरीर में नार्मल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा (200 mg/dl या इससे कम) होनी चाहिए। बॉर्डर लाइन कोलेस्ट्रॉल (200 से 239 mg/dl) के बीच और हाई कोलेस्ट्रॉल (240mg/dl) होना चाहिए।
 
शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 20 साल की उम्र के बाद बढ़नी शुरू हो जाती है। 60-65 की उम्र तक महिलाओं और पुरुषों में इसकी मात्रा सामान रूप से बढ़ती है। मासिक धर्म शुरू होने से पहले महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रहता है। मगर इसके बाद पुरूषों की तुलना में महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल अधिक बढ़ता है इसलिए पुरूषों के मुकाबले महिलाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इसके अलावा  डायबिटीज हाइपरटेंशन किडनी डिजीज लीवर डिजीज और हाइपर थाइरॉयडिज्म से पीड़ित लोगों में भी इसका स्तर अधिक पाया जाता है।
हाई ब्लड प्रैशर थकान मोटापा सीढियां चढने पर सांस और दिल की धड़कन ज्यादा बढ़ना पैदल चलने पर सांस फूलना पैरों में दर्द कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण होते हैं। इसके लक्षण दिखने पर आपको तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
 
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