टेक्नोलॉजी हमारे जियो काम, करने और अपने आस-पास की दुनिया से जुड़ने के लिए आपको बदल रही है। एक से मशीनरी और कंप्यूटर प्रयोगशाला में काम करने की क्षमता से है। आमतौर पर मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है, जैसे भाषा को बढ़ावा देना, पार्टर को आलोचना करना, प्रश्न को हल करना और नहीं लेना। यह कंप्यूटर को डेटा सीखना, हल करना और क्षेत्र में इंसानों की तुलना में अधिक तेजी और युवाओं से काम करने के लिए काम करना बनता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इतिहास क्या है?
कीर्तन बुद्धिमता की अवधारणा सदियों से मौजूद हैं, जिसके प्रारंभिक विचार पौराणिक कथाओं और काल्पनिक कहानियों में मिलते हैं। हालांकि, उनके वैज्ञानिक ने 20 वीं सदी गेम मध्य में रखी गई है।
• 1950 के दशक में:
कंप्यूटर विज्ञान के अगृणी एलन ट्यूरिंग ने यह आकलन करने की ट्यूरिंग परीक्षण की शुरुआत की कि क्या कोई मशीनी मानव के समान बुद्धिमान व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं।
•1960-1970 के दशक में:
शोधकर्ताओं के प्रतीकात्मक तार का उपयोग करते हुए प्रारंभिक प्रीतम बुद्धिमत्ता प्रणालियों विकसित की जो अक्षर ऐतिहासिक डेटा पर निर्भर करती थी, और समस्याओं को हल करने के लिए नियमों और तर्क पर केंद्रीय थी।
FAQ
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pratiksha
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मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं।
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