गुलीवर और लिलिपुट।

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      गुलीवर और लिलिपुट

एक नाविक था जिसका नाम गुलिवर था। वह अपने साथियों के साथ एक लंबी समुद्र यात्रा पर निकाल। एक दिन समुद्र में भायनक तूफान आया। उसका जहाज डूब गया परंतु गुलीवर तहरकर पास ही एक द्वीप पर पहुंच गया। वह लिलिपुट द्वीप था। जब वह वहां पहुंचा, वह बहुत थक गया था। जल्दी ही वह गहरी नींद में सो गया। जब वह सोया हुआ था। तब सैकड़ो छोटे-छोटे लोग वहां आए और उन्होंने उसे रस्सियों से बांध दया।

जब वह उठा तब इतने छोटे-छोटे लोगों को देखकर आश्चर्य चकित हुआ। जल्दी ही वह उनका मित्र बन गया। उन्होंने रस्सियां खोल दी और उसे भोजन दिया। उनकी रोटियां इतनी छोटी थी कि वह एक साथ 10 रोटियां खा गया। दोपहर के भोजन में उसने हजार रोटियां, सो फूलगोभियां और सौ भेड़ें खाईं। छोटे लोग उसे अपने राजा रानी के पास ले गए। राजा का हाथ इतना छोटा था कि गुलीवर ने हाथ मिलाने       के लिए अपनी केवल एक उंगली का प्रयोग    किया।

प्रत्येक वस्तु वह छोटी थी कि वह लिलिपुट के छोटे-छोटे लोगों के बीच एक विशाल रक्षास की भांति प्रतीत होता था। वे छोटे लोग बहुत दयालु और सहायक थे। उन्होंने उसके लिए एक नाव बनाई। गुलीवर के घर जाने का समय आ गया। वह अपने प्रिय मित्रों से दूर जाने से बहुत उदास था। वह अपनी नाव में बैठा और यात्रा पर निकल पड़ा और छोटे-छोटे लोगों के हाथ हिलाकर उसे "अलविदा" कहा।




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