आइये गंगा नदी के बारे विस्तार पूर्वक समझे।

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गंगा नदी तंत्र -

गंगा नदी की मुख्य धारा भागीरथी कहलाती हैं, जो गंगोत्री हिमनद से निकाल कर दक्षिण की ओर बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा इसमें मिलकर इसे गंगा नदी का नाम दे देती हैं। हरिद्वार निकट गंगा नदी पर्वतीय जन्म भूमि को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गंगा भारत की सबसे लंबी, महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी प्रशंसा इन शब्दों में की है, "अपनी अधिगम स्रोप्रशंसा सागर तक, पुराने समय से आधुनिक काल तक गंगा भारत की सभ्यता की कहानी है।

" गंगा नदी का जल भारत में भौतिक उपयोग के साथ धार्मिक, आर्थिक जीवन और विकास की कहानी है। पश्चिम बंगाल में यह हुगली तथा बांग्लादेश में पदमा बन जाती है। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से एक विशाल डेल्टा बनाती है। यह विश्व का विशालतम तथा तीव्रता के साथ वृद्धि करने वाला डेल्टा है। इसमें सुंदरी वृक्ष तथा टाइगर पाए जाते हैं। इसे सुंदरवन डेल्टा का नाम दिया जाता है।यमुना, घाघरा,गंडक तथाकोशी इसकी सहायक नदियां हैं जो हिमालय पर्वत से निकलती है। जबकि चंबल औरसोन सहायक नदियां प्रायद्वीपीय उच्चभूमि कर आती है। गंगा नदी की द्रोणी 25 किमी लंबी है। अंबाला नगर सिंधु तथा गंगा अपवाह तंत्र के बीच जल विभाजन का कार्य करता है। यमुना नदी जो गंगा नदी की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यमुनोत्री हिमनद से निकलकर इलाहाबाद में गंगा से मिलकर पवित्र संगम का निर्माण करती है।




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