हम में से कोई कला है तो कोई गोरा किसी कारण सांवला है तो किसी का कुछ पिला हमारा रंग तो अलग-अलग हो सकता है लेकिन एक ही व्यक्ति जब चाहे अपना रंग नहीं बदल सकता गोरा व्यक्ति जब चाहे अपना रंग काला नहीं कर सकता इसी प्रकार कल या सावला व्यक्ति अचानक से अपना रंग गोरा नहीं कर सकता है लेकिन प्रकृति में एक जीव ऐसा भी है जो जब चाहे अपना रंग बदल सकता है जी हां हम बात कर रहे हैं गिरगिट की
प्रकृति ने गिरगिट को अपनी त्वचा का रंग बदलने की अद्भुत क्षमता दी है अपनी इस विशेषता का प्रयोग गिरगिट दुश्मनों से अपनी रक्षा करने में करता है जैसे ही गिरगिट को अपने आसपास किसी दुश्मन की उपस्थिति का आभास होता है वह अपना रंग वैसा ही कर लेता है जिस जगह पर वह छिपा होता है गिरगिट यह है कमल कैसे कर पता है दरअसल गिरगिट की त्वचा की ऊपरी परत पारदर्शी होती है और इस पारदर्शी व्रत के नीचे लाल नीले काले वह पीले रंग के दानेदार पदार्थ होते हैं
इन रंगीन दोनों की विशेषता होती है कि यह शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक बहुत आसानी से गति कर लेते हैं जब गिरगिट अपने शरीर को सकोरटा है तो दोनों की अधिकतम संख्या एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाती है जिस कारण हमें गिरगिट की त्वचा का रंग काला दिखाई देने लगता है इसी प्रकार जब गिरगिट अपने शरीर को फैलाता है तो उसकी त्वचा का रंग फिर बदल जाता है इस प्रकार अपनी इच्छा अनुसार और जरूरत के मुताबिक गिरगिट अपने शरीर की त्वचा का रंग बदल लेता है
त्वचा की पारदर्शी परत पर प्रकाश की क्रिया के कारण भी क्रिकेट किट त्वचा का रंग बदल जाता है दुश्मनों से रक्षा में यह बादल देखने योग्य त्वचा गिरगिट की काफी मदद करती है
धन्यवाद
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