जब कोई चित्रकार विभिन्न प्रकार के फूल पत्ती काली तथा ने अलंकारों को वृताकार घुमावदार आड़ी तिरछी रेखाओं की सहायता से लक्ष्य अनुपात और संतुलन के आधार पर समुद्र तथा कलात्मक ढंग से सजाता है तो उसे आलेखन कला कहते किंतु आलेखन बनाते समय यह आवश्यक ध्यान रखें कि आलेखन लिए पूर्ण और गति पूर्ण हो अन्यथा लेखन यह स्पष्ट एवं खराब बनेगा आलेखन में कलियों और विभिन्न अलंकारों द्वारा लिए पूर्ण डेलियों को जोड़कर आलेखन को सुंदर बनाया जाता है जिस कारण आलेखन भरा-भरा सा हो जाता है इस सुंदर तथा आकर्षक आलेखन की रचना तभी संभव है जब उसे लैपटॉप प्रवाह हमें टूट रेखाओं से बने मोहन अलंकारों एवं अनुकूल रंगों का प्रभावी प्रयोग हो आलेखन के प्रकार हम आपको अगले ब्लॉग में बताएंगे
धन्यवाद
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Vanshika
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