प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ऐसे अवसर ऑन भी आते हैं जब हर और उदासीनता छाई होती है तथा उल्लास यह उमंग का नियंत्रांत अभाव होता है इस अवसर पर एक दूसरे के द्वारा परस्पर सब देना के भाव तथा स्वहानुभूति प्रकट की जाती है इस प्रकार के वातावरण में कुछ भिन्न प्रकार की वेशभूषाधारण की जानी चाहिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति द्वारा धरण की गई वेशभूषा में किसी प्रकार की चमक धमक या बढ़ कीलापन बिल्कुल ना हो जहां तक हो सके बिल्कुल शादी वेशभूषाही धरण की जानी चाहिए सामाजिक मान्यताओं के अनुसार इन अवसरों पर सफेद अथवा हल्के रंगों के वस्त्र धारण करने का प्रचलन है कुछ समाजों मे शोक के अवसरों पर काले रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं शौक के अवसरों पर व्यक्ति को हर प्रकार से सादगी के भाव को दर्शन चाहिए शादी वेशभूषा के साथ-साथ हर प्रकार के बना श्रृंगार से भी दूर रहना चाहिए अति साधारण आभूषणों को छोड़कर कोई भी विशेष आभूषण धारण नहीं करना चाहिए निष्कर्ष स्वरूप कहा जा सकता है किस रोग के अवसर पर व्यक्ति की वेशभूषा से सादगी का प्रदर्शन होना चाहिए ना कि दिखाए वह आकर्षण का
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