बंग भंग का विरोध करने के लिए भारतीयों ने अंग्रेजों से प्रार्थना करने की बजाय अपने बल पर स्वराज्य हासिल करने की भावना से दो तरह के कार्यक्रम बनाएं
बड़ी मात्रा में अंग्रेजी कपड़े शंकर आदि माल का बहिष्कार
दूसरा स्वदेशी यानी अपने देश के लोगों द्वारा बनाई चीजों का ही उपयोग भारतीयों में स्वदेशी का विचार पनपन लगावे कहते हम अपने अवॉगड़ लगाएंगे अपने स्कूल कॉलेज खोलेंगे गांव के लोगों के बीच काम करके उनकी समस्या दूर करेंगे हम अपनी अपनी पंचायत व कचहरी चलाएंगे हम अपने विकास के लिए अंग्रेजों पर निर्भर नहीं रहेंगे और अपनी आत्म शक्ति बढ़ाएंगे
धन्यवाद
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Vanshika
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