1861 ई के एक्ट में भारत की शासन व्यवस्था में जो सुधार किए गए थे उसने भारतीय जनता संतुष्ट नहीं थी भारतीय जनता की मांगों को ध्यान में रखकर भारतीय शासन व्यवस्था में परिवर्तन करने के लिए 1892 का अधिनियम पास किया था वायरस राय की परिषद के सदस्यों की संख्या 12 से 16 कर दी गई इसी कारण के केंद्रीय और प्रांतीय दोनों ही परिषदों में मनोनीत सदस्यों की संख्या निर्वाचित सदस्यों से अधिक हो गई इसका मनोरंजन समाज के विशिष्ट वर्गों से किया जाता था परिषद के सदस्यों को शासन संबंधी विषय पर प्रश्न पूछने और बजट पर विचार विमर्श करने का भी अधिकार दिया गया इस प्रकार शासन संबंधी अधिकार भारतीयों को नाम मात्र के लिए प्राप्त हुए
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