जिस समय अंग्रेज भारत के उत्तर पूर्वी भाग में अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहे थे उसी समय दक्षिण भारत के मैसूर हैदराबाद तथा मराठा राज्य के शासक आपसी युद्ध में व्यस्त थे देश के शासन कार्य अपनी सीमा के विस्तार या उत्तर अधिकार के लिए संघर्षरत थे जो राजा या शासक अपने को कमजोर समझने में अंग्रेजों की शरण में चले जाते जो शासन अंग्रेजों से मदद मांगने के लिए जाते उन्हें अंग्रेज सैनिक मदद देते अंग्रेज बदले में उसे व्यक्ति से जीते हुए राज्य का कुछ भाग व अन्य जयते लेते भारतीय शासक अंग्रेजों के हाथ की कोटपूतली बनकर रह गई अंग्रेज लगभग 90 वर्ष में 1764 ई से 1856 ई भारत के अधिकांश हिस्से पर राज्य करने लगे
अंग्रेज ने विभिन्न नीतियों के अंतर्गत जैसे वेलेजली की सहायक संधि नीति डलहौजी की बिल्ली नीति को शासन का आरोप लगाकर राज्य हड़पने युद्ध में पराजित करके शासको से लाखों रुपए वार्षिक लेने वह फूट डालो और राज करो जैसे कूटनीतियों के जरिए भारत के राज्यों को कंपनी राज्य में मिलाया
धन्यवाद
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