यह शरीर में सर एवं अम्ल की मात्रा को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
अंत कोशिका रस के बनने में भी इसका उल्लेखनीय योगदान है
अस्थियों के उत्तम कैलशिफिकेशन में भी यह सहायक होता है
हमारे शरीर में यह विभिन्न नियामक कार्य भी करता है यह हृदय की गति को नियमित बनाए रखना है तथा मांसपेशियों के संकुचन एवं स्नायु उतरे जन के संवहन में सहायक होता है
धन्यवाद
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Vanshika
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