शारीरिक स्वास्थ्य शरीर के संचार रूप से कार्य करने के लिए आयोडीन नमक खनिज लवण का विशेष महत्व है अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हुए भी आयोडीन की अति अल्प मात्रा ही शरीर के लिए आवश्यक होती है शरीर की एक मुख्य ग्रंथि चुली का ग्रंथि की सुचारू क्रियाशीलता के लिए यह अनिवार्य होती है चूल्हे का ग्रंथि से रट्रावित होने वाला टायरों किशन शरीर की विभिन्न क्रियो का नियमन करता है यदि शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है तो इन किया में विघ्न पड़ जाता है इसकी कमी से चुली का ग्रंथि बढ़ जाती है तथा गला फूल जाता है इस रोग को घाघरा कहा जाता है
प्राप्ति के स्रोत
आयोडीन को विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है समुद्र के जल वनस्पति तथा समुद्र में पाए जाने वाली मछलियों में आयोडीन पाई जाती है समुद्र के तट पर पाली जाने वाली गायों के दूध में भी इसकी कुछ मात्रा पाई जाती है प्याज आदि कुछ सब्जियों में भी अल्प मात्रा में आयोडीन होती है आयोडीन नाइट साल्ट तथा फूल पत्ती में पर्याप्त मात्रा में तथा पानी में अल्प मात्रा में आयोडीन होती है
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