'तंतु यार ऐसा वस्त्र की मूल इकाई है तंतुओं के संयोजन से ही वस्त्र बनता है'
वस्त्र भोजन के पश्चात मनुष्य की दूसरी मूल आवश्यकता होती है वस्त्रो का हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू को निकालने में बहुत महत्व होता है शरीर की सुंदरता तथा शारीरिक सुरक्षा के लिए वेस्टन की ही आवश्यकता होती है साफ सुथरे ढंग से सुव्यवस्थित वस्त्र पहनना मनुष्य की रहन-सहन तथा सभ्यता को प्रभावित करते हैं प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार के वस्त्र का प्रयोग करता है यदि वस्त्र के तंतु रेशों का पर्याप्त रूप से ज्ञान हो तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिए वस्त्र चुनने में आसानी होती है कुछ समय पहले तक मनुष्य को केवल प्राकृतिक तंतुओं से बने वस्त्रो का सहारा लेना पड़ता था परंतु अब कृत्रिम तंतुओं का निर्माण किया जाने लगा है
तंतु से कपड़ों का निर्माण
अत्यंत प्राचीन काल में जब मानव असभ्य था और जंगलों में रहता था तो वह पेड़ों की छाल और पशुओं की खाल से ही अपना शरीर ढक लेता था किंतु सभ्यता के विकास के साथ उसने धीरे-धीरे वस्त्र का निर्माण आरंभ कर दिया वेस्टन के निर्माण के लिए मानव ने टैटो की खोज की किसी पदार्थ की वह इकाई जिससे कपड़ों के निर्माण के लिए धागा बनाया जाता है तंतु कहलाता है
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