भारत में गृह विज्ञान का विकास

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भारत में गृह विज्ञान का विकास

मैं आज आपको भारत में गृह विज्ञान के विकास के बारे में बताऊंगी

 प्राचीन काल में गृह विज्ञान का विकास-

 भारत में प्राचीन काल में गृह विज्ञान की सीबीएसई के रूप में नहीं पढ़ा जाता था किंतु गुरु कुलो मैं अन्य विश्व के साथ ग्रस्त  धर्म की बेसिक साड़ी जाती थी गणेश चतुर्थी में गृह विज्ञान का एक रूप था इसमें बालिकाओं को पारिवारिक जीवन यापन संबंधित ज्ञान सिलाई बुनाई कढ़ाई पाक कला हाथी का ज्ञान दिया जाता था

 मध्यकाल में गृह विज्ञान -

 मध्यकाल मुगल शासको का योगदान इस समय बालिकाओं को बाहर शिक्षा नहीं दी जाती थी उन पर बाहर निकलने पर रोक थी पर्दा प्रथा का प्रचलन अधिक था तब वाले गांव को गृह विज्ञान की शिक्षा घरों पर ही बड़ी बुजुर्ग महिला देती थी उन्हें सिलाई कढ़ाई पकला अच्छी शिक्षा घर पर ही दी जाती थी 

 आधुनिक युग में गृह विज्ञान-

 आधुनिक काल में अंग्रेजी ने भारत में प्रदापान किया इस समय महिलाओं वह वाले गांव की शिक्षा पर ध्यान दिया जाने लगा बहुत से समाज सुधारकों जैसे स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया राजा राम राय ने सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया इस युग में वाले गांव के लिए अलग से पाठशालाओं की व्यवस्था का प्रारंभ हुआ और उन्हें गृह विज्ञान एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगा

 स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात गृह विज्ञान का स्वरूप-

 स्वतंत्रता प्राप्ति की पश्चात गृह विज्ञान का बहुत विकास हुआ इसे एक प्रथा क्या संपूर्ण विषय के रूप में मान्यता मिली गृह विज्ञान के अनेक कॉलेज खोले गए जहां पर गृह विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र का प्रस्तुत अध्ययन किया जाता है

 धन्यवाद-

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