सुख रोग या रिकेट्स

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सुख रोग या रिकेट्स

कुपोषण जनित एक रोग सूखा रोग भी है इसे अस्थियां भी करती या रिकेट्स भी कहते हैं 

 अस्थि विकृति अथवा स्टेट्स नामक रोग मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है यह रोग विटामिन डी की कमी के कारण होता है स्थिर विकृति जैसे कि नाम पर ही स्पष्ट है इस रोग में बच्चों की हत्या समान आकार की नहीं रहती इसमें विकार आ जाता है शब्द रूप से 6 बाहर से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चों को यह रोग अधिक होता है

 विटामिन डी की कमी के कारण होने वाले इस रोग में अस्थियां कमजोर पड़ने लगती है इसका मुख्य कारण कैल्शियम तथा फास्फोरस है पर्याप्त अवशोषण होता है जब हत्या कमजोर पड़ने लगती है जब वह शरीर का भर नहीं सहन कर पाती है वह या तो झुक जाती है अथवा टेढ़ी होने लगती है इस रोग के कारण शरीर की सबसे दस्तीय क्रमश विकृत होने लगती है सर्वप्रथम इस रोग में शरीर की हड्डी कुछ लंबी बड़ी तथा चपटी होने लगती है तथा वह था आगे की ओर निकला हुआ सा प्रतीत होने लगता है इसके अतिरिक्त शरीर की लंबी हड्डियों के सीरी कुछ बढ़ जाते हैं तथा मोटे हो जाते हैं पसलियां पर हड्डी और उपस्थिति के जोड़ों के स्थान पर गोल उभर दिखाई देने लगता है इसे क्रिकेट रोसरी कहते हैं इसके अतिरिक्त श्रोणि मेखला की हड्डी कुछ संकुचित हो जाती है तथा रीड की हड्डी कुछ झुकी हुई सी प्रतीत होने लगती है क्रिकेटर्स डबोक रोग में घुटने कलाई तथा एडी की अस्थियां सामान्य रूप से अधिक चौड़ी हो जाती है अस्थियों के अतिरिक्त इस रोग का प्रभाव मांसपेशियां पर भी पड़ता है इस रोग में मांसपेशियों कमजोर हो जाती है तथा उनका समुचित विकास नहीं हो पता बच्चों का पेट बढ़ जाता है तथा आगे निकला हुआ तब प्रतीत होता है

 क्रिकेटर्स नामक रोग जो कि विटामिन डी की कमी से परिणाम स्वरुप होता है में शारीरिक लक्षणों में अतिरिक्त कुछ सब भागवत परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं इस रोग का शिकार हुआ बालक स्वभाव से चिड़चिड़ा सा हो जाता है हर समय थका हुआ परेशान दुखी तथा ऑपरेशन सा रहता है बच्चे को शांत नींद नहीं आती तथा सोते वक्त शरीर बैठा हुआ साफ रहता है कभी-कभी बच्चा सोते-सोते चौक पड़ता है यार होने लगता है रोग अधिक बढ़ जाने पर बच्चों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है यह स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है 

 इस रोग के उपचार के लिए बच्चों के आहार में विटामिन डी युक्त भोज्य पदार्थों का अधिक समावेशन होना चाहिए तथा कैल्सियम वाले भोज्य पदार्थ भी दिए जाने चाहिए चिकित्सक के परावर्ष से विटामिन डी की अतिरिक्त मात्रा दी जाती है बच्चे को कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश में भी रखना आवश्यक होता है सामान्य सुपाच्य एवं संतुलन आहार देना चाहिए

धन्यवाद-




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