अपने अपने घर गांव तथा समाज में ऐसे लोगों को देखा होगा चोला टीका सहारा लेकर या दूसरों का हाथ पकड़ कर चलते हैं काम या बिल्कुल नहीं सुनते तथा मुंह से बोल नहीं पाते पैरों से चल नहीं पाते हैं तथा हाथों से काम नहीं कर पाते हैं ऐसे लोगों जिन्हें सुनने बोलने देखने तथा चलने में कठिनाई महसूस होती है उन्हें दिव्यांग कहा जाता है दिव्यांग या क्षमता की सामान्य कर श्रेणी होती है
1.सरवन संबंधी अक्षमता
2.दृष्टि संबंधी अक्षमता
3. अस्थि संबंधी अक्षमता
4.मानसिक अक्षमता
लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि शारीरिक है अक्षमताएं लोगों में कैसे आ जाती है वास्तव में यह शारीरिक स अक्षमताएं चाहे दृष्टि संबंध हो या मानसिक या अस्थि संबंधी हो हमें मुख्य दो तरह से प्राप्त होती है
1.जन्मजात
2.जन्म के अपरांत
जन्मजात दिव्यांगता -
जन्मजात दिव्यंका का आशा ए गर्भावस्था शिशु में शारीरिक दोष आ जाना है आपने सुनाया देखा होगा कि कुछ बच्चे जन्म अंत लगभग मंद बुढ़िया अन्य शारीरिक दोष के साथ जन्म लेते हैं ऐसे बच्चे जन्मजात दिव्यांग किस श्रेणी में आते हैं
कारण है बचाव -
जन्मजात दिव्या गता के मुख्य कई कारण होते हैं
कभी-कभी दिव्यंका अनुवांशिक कर्म से होती है परंतु ऐसा काम ही होता है
अभी इसके कारण है ऐसी स्थिति में संतुलित आहार तथा जरूरी विटामिन युक्त भोजन तथा युक्त खाद पदार्थ द्वारा कम वजन कमजोर दृष्टि तथा लखवायुक्त शिशु के जन्म की संभावना को काम किया जा सकता है गर्भवती माता को ऐसी स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा जरूरी सावधानी रखनी चाहिए
इसे भी जाने-
जिन बच्चों को हम पहले दीवान कहते थे उन्हें अब विशेष आवश्यकता वाले बच्चे कहते हैं यह बच्चे अपनी उम्र के अन्य बच्चों के समान ही है केवल उनकी आवश्यकता है की दूसरे बच्चों से अलग है सभी बच्चों को एक समान शिक्षा का बुनियादी अधिकार है
इन बच्चों को हमारी सहानुभूति या दया की कोई आवश्यकता नहीं है इन बच्चों को केवल हमारे सहयोग और प्रेम की आवश्यकता है
जन्म के बाद दिव्यांगता -
जन्म के बाद दिव्यंगता की चार श्रेणियां है
दृष्टि दोष (आंखों से कम या बिल्कुल ना दिखाई देना)
श्रवण दोष (कानों से सुने ना पढ़ना )
मुख बधिर (ऐसे लोग जो बोल नहीं पाते में कार्य सुन भी नहीं पाते )
शारीरिक रूप से आश्रम (ऐसे लोग जो पावे से चलने तथा हाथ से कार्य करने में असमर्थ है या कठिनाई महसूस करते हैं)
अति आवश्यक-
हमारे बीच कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनका मानसिक विकास उनकी उम्र के हिसाब से कम होता है ऐसे बच्चों में भी सीखने समझने और कुछ करने की लगन होती है हमें इन बच्चों के प्रति कोई पूर्वक रह नहीं रखना चाहिए हमें इसे इसमें और सहयोग करना चाहिए
सगमय भारत अभियान-
दिव्यांग जनों की प्रकृति एवं विकास हेतु भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजना है जिनके द्वारा प्रत्येक से परिवेश को दिव्यांगजनों के अनुकूलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है
धन्यवाद
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