हम सभी जानते हैं कि सभी जीवधारियों को भोजन की आवश्यकता होती है भोजन से हमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन तथा खनिज लवण प्राप्त होते हैं इन सभी तत्वों की आवश्यकता हमारे विकास वृद्धि तथा स्वास्थ्य के लिए होती है पौधों तथा जंतु दोनों ही हमारे भोजन के मुख्य स्रोत है अधिकांश भोज्य पदार्थ हमें कृषि तथा पशुपालन से प्राप्त होते हैं
हम पार्य समाचार पत्रों में पढ़ते हैं की कृषि उत्पादन तथा पशुपालन को बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं यह आवश्यक क्यों है? हम वर्तमान उत्पादन स्तर पर ही क्यों नहीं निर्वाह कर सकते?
भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है हमारे देश की जनसंख्या 100 करोड़ एक बिलियन से अधिक है तथा इसमें लगातार वृद्धि हो रही है इस बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए अधिक उत्पादन की आवश्यकता होगी यह वृद्धि अधिक भूमि पर कृषि करने से संभव हो सकती है परंतु भारत में पहले से ही अत्यधिक स्थान पर खेती होती है अटैक ऋषि के लिए और अधिक भूमि की उपलब्धता संभव नहीं है इसलिए फसल तथा पशुधन के उत्पादन की क्षमता को बढ़ाना आवश्यक है
अभी तक फसल उत्पादन को बढ़ाने के हमारे प्रयास कुछ सीमा तक सफल रहे हैं हमने हरित क्रांति द्वारा फसल उत्पादन में वृद्धि की है तथा श्वेत क्रांति द्वारा दूध का उत्पादन बढ़ाया है और उसका अच्छा प्रबंध भी किया है
इन क्रांतियां की प्रक्रिया में हमारी प्राकृतिक संपदाओं का बहुत अधिक प्रयोग हुआ है इसके परिणाम स्वरुप हमारे प्राकृतिक संपदा को हानि होने के अवसर बढ़ गए हैं जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है अतः यह महत्वपूर्ण है की फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास पर्यावरण तथा पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने वाले कारकों को श्रुति ना पहुंचाएं इसलिए कृषि तथा पशुपालन के लिए संपूर्ण को अपनाने की आवश्यकता होती है
केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तथा उन्हें गोदाम में संचित करने से ही कुपोषण तथा भू की समस्या का समाधान नहीं हो सकता लोगों को अनाज खरीदने के लिए धन की आवश्यकता भी होती है खाघ सुरक्षा उसके उत्पादन तथा उपलब्धता दोनों पर निर्भर है हमारे देश की अधिकांश जनसंख्या अपने जीवन यापन के लिए कृषि पर ही निर्भर है इसलिए कृषि क्षेत्र में लोगों की आयु बढ़ाने चाहिए जिससे की भूख की समस्या का समाधान हो सके कृषि से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए हमें वैज्ञानिक प्रबंधन प्रणालियों को अपनाना होगा संपूर्ण जीवन यापन के लिए मिश्रित खेती पत्र फसल कारण तथा संगठित कृषि प्रणालियां अपनाना चाहिए उदाहरण के लिए पशुधन को कोर्ट पालन मध्य पालन मधुमक्खी पालन के साथ कृषि अत्यधिक
अब प्रश्न यह है कि हम फसल तथा पशुधन की उत्पादन को कैसे बड़ाए?
फसल उत्पादन में उन्नति?
ऊर्जा की आवश्यकता के लिए अनाज जैसे गेहूं चावल मक्का बाजार तथा ज्वर से कार्बोहाइड्रेट प्राप्त होता है डाले जैसे चना मटर उड़द मूंग हर हर मसूर से प्रोटीन प्राप्त होती है और तेल वाले बीजों जैसे सोयाबीन मूंगफली तिल और और सरसों अलसी तथा सूरजमुखी से हमें आवश्यक वर्षा प्राप्त होती है सब्जियां मसाले तथा फलों से हमें विटामिन तथा खनिज लवणों कुछ मात्रा में प्रोटीन वसा तथा कार्बोहाइड्रेट भी प्राप्त होते हैं चार फैसले जैसे अथवा सुदन घास का उत्पादन पशुधन के चारे के रूप में किया जाता है
विभिन्न फसलों के लिए विभिन्न जलवायु संबंधित परिस्थितियों तापमान तथा दीप्त कल की आवश्यकता होती है जिससे कि उनकी समुचित वृद्धि हो सके और मैं अपना जीवन चक्र पूरा कर सके गुप्त काल सूर्य प्रकाश के कल से संबंधित होता है पौधों में पशुपालन तथा वृद्धि सूर्य प्रकाश पर निर्भर करती है जैसे कि हम सभी जानते हैं कि फोटो सूर्य के प्रकाश में प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं कुछ ऐसी फैसले जिन्हें हम वर्षा ऋतु में उगते हैं खरीफ फसल कहलाती है जो जून से आरंभ होकर अक्टूबर मार्च तक होती है कुछ फैसला सेट ऋतु में उगाई जाती है जो नवंबर से अप्रैल मार्च तक होती है इन फसलों को रवि फसल कहते हैं धन सोयाबीन अरहर मक्का मूंग तथा उड़द खरीफ फैसले हैं गेहूं चना मटर सरसों तथा अलसी रबी फसल है
भारत में सन 1992 से सन 2010 तक कृषि भूमि में 25% की वृद्धि हुई है जबकि अन्य की पैदावार में चार गुनी वृद्धि हुई है पैदावार में यह उन्नति कैसे हुई यदि हम कृषि में शामिल प्रणालियों के विषय में सोच तो हम हमको तीन चरणों में बांट सकते हैं सबसे पहले है बी का चुना दूसरा फसल की उचित देखभाल तथा तीसरा खेतों में होगी फसल की सुरक्षा तथा कटी हुई फसल को हानि से बचाना इस प्रकार फसल उत्पादन में सुधार की प्रक्रिया में प्रयुक्त गतिविधियों को निम्न प्रमुख वर्गों में बांटा गया है
फसल की किस्म में सुधार
फसल उत्पादन प्रबंधन
फसल सुरक्षा प्रबंध
फसल की किस्म में सुधार?
फसलों का उत्पादन अच्छा हो यह प्रयास फसलों की किस्म के चयन पर निर्भर करता है फसल की किस्म या पर बीडीओ के लिए विभिन्न उपयोग को गुना जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता अभ्रक के प्रति अनुरूपता उत्पादन की गुणवत्ता तथा उच्च उत्पादन का चयन प्रचंड द्वारा कर सकते हैं फसल की किस्म में अच्छी गुना को संकरण द्वारा डाला जा सकता है संकरण विधि में विभिन्न अनुवांशिक गुना वाले पौधों में संकरण करवाते हैं यह संकरण पत्र किस लिए विभिन्न किस्म में अठरा स्पीशीज एक ही जीनस की दो विभिन्न स्पीशीज में अथवा अंतर वंशीय विभिन्न जनर में हो सकता है फसल सुधार की दूसरी विधि है अच्छे गुना वाले जीव का डालना इनके परिणाम स्वरुप अनुवांशिक के रूपांतरित फसल प्राप्त होती है
फसल उत्पादन प्रबंधन?
अनेक कृषि प्रधान देश के समान भारत में भी कृषि छोटे-छोटे खेतों से लेकर बहुत बड़े फार्मा तक में होते हैं इसलिए विभिन्न किसानों के पास भूमि धन सूचना तथा तकनीकी की उपलब्धता कम अत्यधिक होती है संक्षिप्त में धन अथवा आर्थिक परिस्थितियों किस को विभिन्न कृषि प्रणालियां तथा कृषि तकनीक को अपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है योगदान उच्च निर्देश तथा फसल उत्पादन में सहसंबंध है इस प्रकार किसान की लागत क्षमता फसल तंत्र तथा उत्पादन प्रणालियों का निर्धारण करती है इसलिए उत्पादन प्रैंक लिया भी विभिन्न स्तर की हो सकती है बिना लागत उत्पादन अल्प लागत उत्पादन तथा अधिक लागत उत्पादन प्रणालियों इसमें सम्मिलित है
पोशक प्रबंधन-
जैसे हमें विकास वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है वैसे ही पौधों को भी वृद्धि के लिए पोषक पदार्थ की आवश्यकता होती है पौधों को पोषक पदार्थ हवा पानी तथा मिट्टी से प्राप्त होते हैं पौधों के लिए अनेक पोषक पदार्थ आवश्यक है हवा से कार्बन तथा ऑक्सीजन पानी से हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन पोषक पदार्थ मिट्टी से प्राप्त होते हैं इन पोशाक में से कुछ की अधिक मात्रा चाहिए इसलिए इन्हें वृहद पोशाक कहते हैं शेष पोजीसन की आवश्यकता कम मात्रा में होती है इसलिए इन्हें सुषमा पोशाक कहते हैं
इन पोजीसन की कमी के कारण पौधों की शारीरिक भीम सहित जनन वृद्धि तथा रोगों के प्रति प्रवृत्ति पर प्रभाव पड़ता है अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मिट्टी में खाद तथा उर्वरक के रूप में इन पोजीसन को मिलना आवश्यक है
खाघ -
खाद में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा अधिक होती है तथा यह मिट्टी को अल्प मात्रा में पोषक प्रदान करते हैं खाद को जंतुओं के अपशिष्ट तथा पौधों के कचरे के अपघटन से तैयार किया जाता है खाद मिट्टी को पोजीसन तथा कार्बनिक पदार्थ से पूरी पूर्ण करती है और मिट्टी की आवश्यकता को बढ़ाती है खाद में कार्बनिक पदार्थ की अधिक मात्रा मिट्टी की संरचना में सुधार करती है इसके कारण रेतीली मिट्टी में पानी को रखने की क्षमता बढ़ जाती है चिकनी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की अधिक मात्रा पानी को निकालने में सहायता करती है जिससे पानी एकत्रित नहीं होता
खाद के बनाने में हम जैविक कचरे का उपयोग करते हैं इससे उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग की आवश्यकता नहीं होगी तथा इस प्रकार से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग मिलेगा खाद बनाने की प्रक्रिया में विभिन्न जैव पदार्थ के उपयोग किया जाता है
उर्वरक-
उर्वरक व्यावसायिक रूप में तैयार पादप पोशाक है उर्वरक नाइट्रोजन फास्फोरस तथा पोटेशियम प्रदान करते हैं उनके उपयोग से अच्छी कैक वृद्धि प्रत्यय सखे तथा फूल होते हैं और स्वस्थ पौधों की प्राप्ति होती है अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक का भी उपयोग होता है परंतु यह आर्थिक दृष्टि से महंगे पड़ते हैं
उर्वरक का उपयोग बड़े ध्यान से करना चाहिए और उसके सदुपयोग के लिए इसकी खुराक की उचित मात्रा उचित समय तथा वर्ग देने से पहले तथा उसके बाद की सावधानियां को अपनाना चाहिए उदाहरण के लिए कभी-कभी अर्क अधिक सिंचाई के कारण पानी में बह जाते हैं और पौधे उसका पूरा अवशोषण नहीं कर पाते उर्वरक की यह अधिक मात्रा जल प्रदूषण का कारण होता है
सिंचाई-
प्रकाश में अधिकांश खेती वर्ष पर आधारित है अर्थात अधिकांश क्षेत्रों में फसल की उपज समय पर मानसून आने तथा वृद्धि काल में उचित वर्षा होने पर निर्भर करती है इसलिए कम वर्षा होने पर फसल उत्पादन कम हो जाता है फसल की वृद्धि काल में उचित समय पर सिंचाई करने से संभावित फसल उत्पादन में वृद्धि हो सकती है इसलिए अधिकार अधिक कृषि भूमि को संचित करने के लिए बहुत से उपाय किए जाते हैं
फसल पैटर्न -
अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए फसल उगाने की विभिन्न विधियां का उपयोग कर सकते हैं
मिश्रित फसल में दो अथवा दो से अधिक फसलों को एक साथ ही एक खेत में उगते हैं जिससे की गेहूं चना अथवा गेहूं सरसों अथवा मूंगफली सूर्यमुखी इससे हानि होने की संभावना कम हो जाती है क्योंकि फसल के नष्ट हो जाने पर भी फसल उत्पादन की आशा बनी रहती है
अंतर फसलीकरण में दो अथवा दो से अधिक फसल को एक साथ एक ही खेत में निर्धारित पैटर्न पर लगाते हैं कुछ पंक्तियों में एक प्रकार की फसल तथा अनेक अंक कतार में स्थित दूसरी पंक्तियों में दूसरी प्रकार की फसल उगाते हैं इसके उदाहरण है सोयाबीन मक्का अथवा बाजार लोबिया फसल का चुनाव इस प्रकार करते हैं कि उनके पोषक तत्व की आवश्यकता भिन्न हो जिससे पोशाक का अधिकतम उपयोग हो सके इस विधि द्वारा पीड़क व रोगों को एक प्रकार की फसल के सभी पौधों में फैलने से रोका जा सकता है इस प्रकार दोनों फसलों से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है
धन्यवाद-
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