"प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल ने मनुष्य के चरित्र गुना का मम्मिक चित्रण किया है"
" यह कविता केदारनाथ जी ने लिखी है "
अच्छा होता
अगर आदमी
आदमी के लिए
प्रार्थी -
पक्का -
और नियति का सच्चा होता
न स्वार्थ का चहबच्चा -
न देगल–दागी -
नए चरित्र का कच्चा होता
अच्छा होता
अगरआदमी
आदमी के लिए
दिलदार-
दिलेर -
और हृदय की थाती होता,
ना ईमान का घाती-
ठगेत ठाकुर
न मौत का बरसाती होता
धन्यवाद:-
Vanshika
@DigitalDiaryWefru