जनजीवन कवि और प्रसिद्ध समाजवादी और नागार्जुन का वास्तविक नाम वेदनाथ मिश्र था परंतु पहले यह यात्री नाम से लिखा करते थे कालांतर में बौद्ध धर्म में प्रभावित होकर महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर इन्होंने अपना नाम "नागार्जुन" रख लिया
नागार्जुन का सन 1911 ईस्वी में बिहार राज्य के दरभंगा जिले के सतलाखा गांव में हुआ था आरंभिक जीवन अभाव से ग्रस्त रहा घर की दैनिक आर्थिक स्थिति के कारण उनकी शिक्षा दीक्षा का समुचित प्रबंध न हो सका गांव की ही संस्कृत पाठशाला में इनके प्रारंभिक शिक्षा हुई जीवन के इन्हीं अभाव ने इन्हें शोषण के प्रति विरोध की भावनाओं से भर दिया साथ ही जीवन में घटित दुखद घटनाओं ने इन्हें मानव मात्र का दुख समझने की क्षमता प्रदान की यह घूम तो पार्वती के व्यक्ति थे तथा देश विदेश में घूमते हुए यह सन 1936 ईस्वी में श्रीलंका जा पहुंचे और महा संस्कृत के आचार्य बन गए स्वाध्याय से ही इन्होंने अनेक भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया श्रीलंका प्रवास में ही इन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली सन 1941 ईस्वी में भारत लौट आए अपने निर्भर एक और कटु सत्य संभाषण के कारण नागार्जुन जी ने कई बार जेल यात्रा भी की स्वतंत्र भारत में भी इन्हें अपने विद्रोही प्रवृत्ति के कारण जेल जाना पड़ा तत्कालीन सत्संग राजनीतिक दल कि इन्होंने खुलकर आलोचना की अतः इन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा उनकी जय यात्राओं का एकमात्र प्रमुख कारण यही था इनका निधन 87 वर्ष की अवस्था में 5 नवंबर 1998 ई को हुआ
विद्रोही कवि नागार्जुन जी ने जीवन के कठोर यथार्थ एवं कल्पना पर आधारित अनेक कृतियों का सृजन किया स्वयं अभाव में जीवन व्यतीत करने के कारण उनके हृदय में समाज के पीड़ित वर्ग के प्रति सहानुभूति का भाव विज्ञान था अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का शोषण करने वाले व्यक्तियों के प्रति उनके मन में विद्रोह की ज्वाला भरी थी सामाजिक विषमताओं शोषण और वर्ग संघर्ष पर उनकी लेखनी निरंतर आग उगलती रही अपनी कविताओं के माध्यम से इन्होंने दलित पंडित और शोषित वर्ग को अन्य नीति और अत्याचार का विरोध करने की प्रेरणा दी अपने स्वतंत्र एवं निर्भीक विचारों के कारण इन्होंने हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं समसैक राजनीति प्रेम और प्रकृति सौंदर्य पर भी उनकी अनेक रचनाएं बड़ी लोकप्रिय हुई उनकी गणना वर्तमान युग के प्रमुख वैज्ञानिक कारण में की जाती है प्रगतिवादी कवियों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है
नागार्जुन समाजवाद की स्थापना का संपन्न देखने वाले जीवन जनता और श्रम के गतिक आने वाले यथार्थवादी कवि है अपनी सनातनी प्रसन्नता के कारण उनकी रचनाओं को किसी बात को सीमा में नहीं बांधा जा सकता उनके स्वतंत्र व्यक्ति तत्व की तरह उनकी रचनाएं भी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठ है सन 1945 ईस्वी में इनका साहित्य के क्षेत्र में "हुआ अब तक उनकी अनेक कृतियां प्रकाशित हो चुकी है इनके प्रकाशित कृतियों में पहला वर्ग उपन्यास का है और दूसरा वर्ग कविताओं का प्रीति नाथ की चाची बालचांदमा नई पौध बाबा बटेश्वर नाथ दुख मोचन और वरुण के बेटे उनके प्रसिद्ध उपन्यास है युग धारा इनका प्रारंभिक काव्य संकलन हैइनका प्रारंभिक काव्य संकलन है सतरंगी पंखों वाली में प्रकृति का मन अमेरिका चित्रण हुआ है प्यासी पत्री आंखों तथा खून और शोले आदि कविता संग्रह में प्रेम और प्रकृति चित्रण में संबंधित सुकुमार ओजस्वी कविता संकट है इन कविताओं के माध्यम से इन्होंने समाज की व्यवस्था से जुंजते सर्वहारा वर्ग की व्यथा की करुण गाथा को व्यक्त किया है बासमपुर नागार्जुन का प्रसिद्ध पौराणिक खंड काव्य है इसमें भस्मासुर की पुरानी कथा को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है इसमें स्थान स्थान पर प्रेम सौंदर्य वह प्रकृति के क्षेत्र अत्यंत सुंदर रूप में चित्र हुए हैं
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