"मैं आज आपको हरिवंश राय बच्चन के बारे में बताने जा रही हूँ -"
हिंदी साहित्य में हलवादी काव्य के प्रवर्तक डॉक्टर हरीश वंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कार्यस्ट परिवार में सन 1960 ईस्वी में हुआ था उनके पिता का नाम प्रताप नारायण था माता-पिता की धार्मिक रुचियां में संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई इन्होंने वाराणसी वह प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की लागत विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मां और कमी ब्रिज विश्वविद्यालय में इन्होंने एचडी की उपाधि प्राप्त किया अनेक वर्षों तक प्रयाग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के पर्याध्यापक रहे कुछ समय तक यह आकाशवाणी के साहित्य कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे सन 1955 ईस्वी में यह विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के पद पर आसीन हुए सन 1966 ईस्वी में इन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया
हरिवंश राय बच्चन तत्कालीन वातावरण से प्रभावित होकर युवा कल में ही पढ़ाई छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े आर्थिक दशा ठीक ना होने के कारण उनकी पत्नी का ऐसा अध्याय रोग से असम में निधन हो गया पत्नी के वियोग ने इन्हें निराशा वह दुख से भर दिया किंतु कुछ समय पश्चात इन्होंने तेजी बच्चन से दूसरा विवाह करके पुणे नए सुख और संपन्नता से परिपूर्ण जीवन का आरंभ किया इलाहाबाद के इस प्रवृतक का 18 जनवरी सन 2003 को निधन हो गया
छायावादोत्तर काल के विख्यात कवियों में हरि वंश राय का महत्वपूर्ण स्थान है इन्होंने श्रृंगार के सहयोग एवं योग दोनों ही पशुओं का सुंदर वर्णन किया है उल्लास एवं वेदना पर आधारित उनकी कविताएं अत्यंत हृदय स्पर्शी है अमर खाग्यं की रूपों पर आधारित उनकी कृति मधुशाला ने इन्हें सर्वाधिक या स्पर्द्धन किया है उनकी यह रचना सामान्य जन्म जीवन में अत्यंत लोकप्रिय हुई एक प्रकार से इसी रचना से हिंदी में इलाहाबाद नाम से एक नए युग का सूत्रपात हुआ इन्होंने हिंदी काव्य को स्वच्छता पूर्ण शैली में जनसाधारण तक पहुंचाने का स्थिति कार्य किया बच्चन जी ने यथा थारपरक विचारधारा के समावेश द्वारा हिंदी गीतों को नवीन दिशा प्रदान की उनकी गणना छायावादी कवि के रूप में भी की जाती है मानवीय श्वेत नाम की स्वाभाविक अभिव्यक्तियों में इन्हें पर्याप्त सफलता प्राप्त हुई सफलता संभावित संगीता आत्मकथा और ममिता उनके काव्य की प्रमुख विशेषता है उनकी रचनाएं पाठ को एक स्रोतों को मंत्र मुकेश कर देने में समक्ष है मूल्य व्यक्तिवादी कवि होते हुए भी इन्होंने अपने काव्य में सामाजिक जनजीवन के मनोभाव को अभिव्यक्ति प्रदान की है
डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन की प्रथम काव्य कृति तेरा हर का प्रकाशन सन् 1932 ईस्वी में हुआ इसके पश्चात इनके मधुशाला मधुबाला मधु कलर्स - यह तीनों संग्रह प्रकाशित हुए हिंदी में इन्हें इलाहाबाद की संख्या से अभिहित किया गया इन कविताओं में मानक प्रेमी और आपसी वैमनस्य से उत्पन्न पीड़ा की कसक है यह कविताएं जीवन के दुखों को बुलाने में सहायक है हिंदी में इन्हें इलाहाबाद की संख्या से अभिहित किया गया इन कविताओं में मानक प्रेमी और आपसी वैमनस्य से उत्पन्न पीड़ा की कसक है यह कविताएं जीवन के दुखों को बुलाने में सहायक है निशा नाम निमंत्रण और एकांत संगीत में कवि के हृदय की पीड़ा साकार हो उठी है यह करती हो इसके सर्वोच्च कष्ट काव्य रचना में सम्मिलित है सतरंगिणी एवं मिलन या मनी इनके उल्लास तथा श्रृंगार रस से परिपूर्ण गीतों के संग्रह
अपनी सभी रचनाओं में बच्चन जी ने अपने व्यक्तिवादी अनुभव को अभिव्यक्ति दी है अतः इन्हें व्यक्तिवादी कवि कहा जा सकता है किंतु बंगाल का कल और इसी प्रकार की अन्य रचनाओं में इन्होंने जनजीवन के क्रियाकलापों एवं अनुभव का भी प्रभावपूर्ण सुंदर चित्रण क्या है अतः इन्हें मानवतावादी खाने में भी कोई दुविधा नहीं है
धन्यवाद-
Leave a comment
We are accepting Guest Posting on our website for all categories.
Vanshika
@DigitalDiaryWefru