रविंद्र नाथ टैगोर

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साहित्य में नोबेल पुरस्कार से सम्मान आईटी टैगोर जी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था उनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण राजश्री दत्त भारत के साथ जीवन व्यतीत करते थे उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था इस सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर का कर बुलाते थे यही ठाकुर शब्द अंग्रेजी के प्रभाव से टैगोर बन गया घर में नौकरों की अधिकता और विलासिता के अत्यधिक साधनों के कारण इनका स्वतंत्रता पूर्वक घूमने तथा खेलने के अवसर प्राप्त न हो सके यह स्वयं को बंदी जैसा अनुभव करते हुए अत्याधिकाइन रहते थे

 टैगोर जी की प्रारंभिक शिक्षा बांग्ला भाषा में घर पर ही आरंभ हुई प्रारंभिक शिक्षा समाप्त होने के पश्चात इनका प्रवेश पहले कोलकाता के और रेडिएटर सेमिनार विद्यालय और फिर नॉर्मल विद्यालय में कराया गया विद्यालय के वातावरण में इनका मन नहीं लगता था अत इनका एकांत बहुत प्रिय था विद्यालय शिक्षा समाप्त करने के पश्चात उनके पिता ने बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए इन इंग्लैंड भेजा किंतु यह बैरिस्टर की डिग्री पूरी किए बिना कोलकाता लौट आए

 रविंद्र नाथ टैगोर साहित्यकार विचारक देशभक्त और उच्च कोटि के दार्शनिक थे सरस्वती के इस महान आराध्यक का 7 अगस्त 1941 ई को निधन हो गया

 रविंद्र नाथ टैगोर विलक्षण प्रतिभा के धनी थे विद्यालय में रुचि न होने के बाद भी साहित्य के साथ इनका अत्यधिक लगाव था 8 वर्ष की अल्प आयु में इन्होंने पहली कविता लिखी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा गीतांजलि की रचना करेंगे विश्व कवि बन गए इसी कीर्ति के लिए इन्हें सन 1913 ईस्वी में साहित्य का सर्वाधिक प्रतिष्ठ नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ इन्होंने साहित्य की निबंध काव्य कहानी उपन्यास नाटक आदि सभी मुख्य विधाओं में साहित्य रचना की साहित्य के साथ-साथ इन्होंने नृत्य संगीत चित्रकला एवं अभिनय में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया साहित्य संगीत की कितनी ही नई शैलियां इन्होंने विकसित की आज कला एवं नृत्य संगीत में उनके द्वारा विकसित नहीं से लिया इन्हीं के नाम से जानी जाती है बांग्ला भाषा में उनके द्वारा लिखे गए 2000 से अधिक गीत रविंद्र संगीत के नाम से जाने जाते हैं और बांग्ला भाषाओं के द्वारा अत्यधिक रुचि के साथ सुने जाते हैं यह जितनी उच्च कोटि के साहित्यकार थे उतनी ही उच्च कोटि के अभिनेता नाटककार गीतकार संगीतकार चित्रकार और नृत्य कलाकार थे बंगाल में मौलिक लेखन के अतिरिक्त इन्होंने कितनी ही कृतियों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन और बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान अमार सोनार बांग्ला भी इन्हीं की विश्व प्रसिद्ध रचनाएं हैं विश्व में केवल इन्ही को दो रसों के राष्ट्रगान का लेखक होने का गौरव प्राप्त है टैगोर जी क्योंकि बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे अतः इन्होंने साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं में साहित्य रचना की

 रविंद्र नाथ की  प्रमुख रचनाएं-

 काबुलीवाला, अनाथ,विद्या आदि (कहानी): गोरा, घरे,बैरे (उपन्यास): चित्रांगदा, राजा,डाकघर( नाटक ):संपत्ति,संस्कार,त्याग, अध्यापक (लघु कथा): गीतांजलि,निरुपमा,पूर्व भी बालक का आदि (काव्य )

 भाषा शैली: भाषा बंगाल तथा संस्कृत परी निष्ठाता शैली  चित्रात्मक वर्णनात्मक विवेचनात्मक और वैज्ञानिक 

 लेखन विद्या :-

 काव्य, कहानी, उपन्यास,पत्र, नाटक,लघु कथा

 धन्यवाद:-

 




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