गृह व्यवस्था का महत्व

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गृह व्यवस्था का महत्व

 गृह व्यवस्था का महत्व :-

 गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को अधिकतम संतुष्टि मिल सकती है इसके साथ ही साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह गृह व्यवस्था के कुशलता पूर्वक संचालन में गृहणी का पूरा सहयोग करें 

 गृह व्यवस्था के महत्व का वर्णन निम्नलिखित प्रकार से-

 1.रहन-सहन के स्तर को ऊंचा बनने में सहायक- परिवार के रहन-सहन का स्तर ऊंचा बनने में गृह व्यवस्था से पारिवारिक साधनों का उपयोग हो जाता है तथा समय शक्ति व शर्म की बचत होती है परिणाम स्वरुप परिवार के रहन-सहन का स्तर भी ऊंचा उठता है

2. पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति में सहायक - परिवार वह केंद्र है जहां परिवार के सभी सदस्यों की अनेक आवश्यकता है होती है तथा उनकी पूर्ति के लिए नियंत्रित रूप से प्रयास किए जाते हैं परिवार की आवश्यकता है सीमित होती है तथा पूर्ति के साधन सीमित होते हैं ऐसी स्थिति में पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति गृह व्यवस्था के द्वारा ही संभव होती है गृह व्यवस्था के अंतर्गत सर्वप्रथम तीव्रता के आधार पर आवश्यकताओं की वरीयता का निर्धारण किया जाता है उत्तम ग्रह व्यवस्था में परिवार के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखा जाता है इसी प्रकार गृह व्यवस्था सभी पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होती है

3. पारिवारिक आय व्यय के नियोजन में सहायक- पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियंत्रण धन की आवश्यकता होती है प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किए व्यय करना पड़ता है परिवार की आय सीमित होती है तथा पारिवारिक आय को ध्यान में रखकर बजट को तैयार करना चाहिए बजट सदैव बचत का होना चाहिए ऐसा करने से परिवार के सदस्य अपने आप को सुरक्षित अनुभव करते हैं

4. बच्चों वह पति की सफलता में सहायक- घर में उचित व्यवस्था होने से घर का वातावरण शांतिपूर्ण होता है जिसमें रहते हुए बच्चों का पढ़ने में बहुत मन लगता है अर्थात उनकी शिक्षक उन्नति होती है साथ ही उनका शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है 

 इसी प्रकार व्यवस्थित परिवार में पति को सुख शांति मिलती है तो उन्हें और अधिक परिश्रम करके धन अर्जित करने के लिए उत्साह मिलता है 

5. पारिवारिक वातावरण सुखी बनाने में सहायक- जब परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की अधिकतम संतुष्टि हो जाती है तो परिवार का वातावरण सोहर में वह संतोषजनक हो जाता है परिणाम स्वरुप घर में नैतिक सामाजिक आध्यात्मिक तथा धार्मिक मूल्यों का विकास संभव होता है

 गृह व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाए:-

 यह सत्य है कि एक कुशल वह बुद्धिमान ग्रहणी अपने घर को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से चलती है परंतु कभी-कभी ऐसी कठिन परिस्थितियों पैदा हो जाती है कि ग्रहणी गृह व्यवस्था के सफल संचालन में असफल हो जाती है अतः व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाओ की गृहणी को जानकारी होनी चाहिए जिसमें वह इसे यथा संभव निपट सके गृह व्यवस्था के कुशल संचालन में आने वाली बढ़ाएं निम्नलिखित प्रकार की होती है

1. लक्ष का ज्ञान न होना- गृह व्यवस्था में मुख्य बाधा लक्षण की जानकारी ना होना होती है ग्रहणी सही समय पर सही कार्य नहीं कर पाती और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था में समस्या उत्पन्न होती है उदाहरण के लिए धन संचय करके उस मकान बनवाने की अपेक्षा यदि कपड़े अत्यधिक खरीद लिए जाए तो बनाए गए लक्षण की पूर्ति नहीं हो पाएगी

2. नई जानकारी का अभाव - आज विज्ञान का योग है तथा प्रतिदिन नए-नए उपकरण आते रहते हैं जिसे समय वह श्रम की बचत होती है यदि ग्रहणी को नहीं उपकरणों के बारे में जानकारी नहीं होगी तो गृह व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है 

3. समस्याएं व उनके समाधान के ज्ञान का अभाव - यह सत्य है कि गृह व्यवस्था में बहुत सी समस्याएं आती है प्रत्येक परिवार की अपनी समस्या होती है तथा उसका समाधान भी इस परिवार में ही संभव होता है कुछ परिवारों में वही समस्याएं बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाती है और कहीं-कहीं वही समस्या एक विशालकाय समस्या के रूप में प्रस्तुत हो जाती है यदि परिवार में कभी कोई समस्या आ जाए तो उसका किसी तरह शांतिपूर्वक समाधान करना है इसका जी गृहणी या परिवार को ज्ञान नहीं होता उसी परिवार में कोई भी समस्या आने का तूफान आ जाता है

4. कार्य कुशलता में कमी आना- कभी-कभी परिवार में पर्याप्त साधन होते हुए भी उसे परिवार की गृह व्यवस्था अच्छी नहीं होती इसका कारण कार्य कुशलता में कमी का होना होता है साधनों की उपयोग विधि का ज्ञान नहीं होता और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था सफल नहीं हो पाती

5. परिवार के सदस्यों का असहयोग- गृह व्यवस्था कितनी भी ठीक हो यदि परिवार के सभी सदस्य उसमें सहयोग नहीं करते हैं तो गृह व्यवस्था कुशलता पूर्वक संचालित नहीं हो सकती

 एक कुशल ग्रहणी को इन सभी समस्याओं के प्रति संचित रहना चाहिए और कोई भी समस्या आने पर वह बड़ी सूझबूझ के साथ दूर करने गृह व्यवस्था का सफलतापूर्वक संचालन कर सकती है

  गृह व्यवस्था के साधन -

गृह संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बहुत से साधनों की आवश्यकता पड़ती है अध्ययन की दृष्टि से करे व्यवस्था के साधनों को तीन भागों में बनता है

भौतिक साधन- परिवार को भली प्रकार सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए भौतिक साधनों की आवश्यकता पड़ती है भौतिक साधनों में धान का विशेष महत्व भौतिक साधनों के अंतर्गत परिवार की आए घर की स्थिति तथा बनावट रहन-सहन का स्टार परिवार के कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्र तथा उपकरण आते हैं परिवार की आय होने से आवश्यकता अनुसार व्यय किया जाना संभव हो जाता है परिवार के निवास के लिए एक ऐसा मकान होना चाहिए जिसमें परिवार के सभी सदस्य पूर्ण सुविधा के साथ अपना जीवन यापन कर सके परिवार में कार्यों को करने के लिए आधुनिक यंत्र होने के कार्य सरलता से तथा कम समय में पूर्ण हो जाता है अर्थात श्रम शक्ति वह समय की बचत होती है

 भौतिक साधनों में उन सभी वस्तुओं तथा संपत्ति का महत्वपूर्ण स्थान होता है जिन्हें हम प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में उपयोग में लाते हैं जैसे मकान फर्नीचर आधुनिक उपकरण भोज्य पदार्थ आदि में सभी भौतिक साधन उत्तम प्रकार के होने चाहिए जिससे कार्य कुशलता में वृद्धि हो सके

 मानवीय साधन- भौतिक साधनों के अतिरिक्त मानवीय साधनों की भी आवश्यकता होती है मानवीय साधनों के अंतर्गत परिवार के सदस्यों की संख्या नौकर परिवार के सदस्यों का व्यवहार वह मनोवृति ज्ञान व प्रवीणता तथा रुचि आदि आते हैं 

 गृह व्यवस्था के लिए परिवार के सदस्य तथा नौकरों की सहायता भी लेनी पड़ती है मानवीय साधनों का उपयोग करते समय ग्रहण की विशेष भूमिका होती है तब रानी को चाहिए कि वह परिवार के सदस्यों को उनकी रुचि वह क्षमता किया था पर कार्य का विभाजन करें सदस्य तथा नौकरों से इसने युक्त व मृदुलतापूर्ण व्यवहार करें और आवश्यकता पढ़ने पर उनकी सहायता भी करती रहे ऐसा करने से कार्य शीघ्र वह उत्तम होगा

 सार्वजनिक साधन- गृह व्यवस्था के कुशल संचालन हेतु सरकार द्वारा प्रदत सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना आवश्यक हो जाता है सार्वजनिक साधनों के अंतर्गत विद्यालय पुस्तकालय अस्पताल बैंक डाकघर धार्मिक स्थल विद्युत एवं दूरसंचार विभाग कानून व सुरक्षा यातायात संबंधित साधन तथा व्यापार आदि आते हैं 

 हमारे दैनिक जीवन में इन सभी सुविधाओं का विशेष महत्व है यह संस्थाएं यदि अपनी सेवाएं बंद कर दे तो हमारा जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा दूरसंचार बिजली पानी आता इसके उत्तम उदाहरण है सार्वजनिक साधनों का उपयोग ग्रहण की योग्यता पर निर्भर करता है साथ ही साथ सार्वजनिक केदो की पूर्ण जानकारी भी आवश्यक होती है

 




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