विजय पथ

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       विजय पथ

कछुआ और खरगोश में गहरी मित्रता थी दोनों साथ-साथ रहते और खेलते थे एक दिन खरगोश ने छुए से कहा - मित्र क्यों न एक दिन हमारी तम्हारी दौड़ हो जाए मै तैयार हूं कछुआ बोला। दोनों ने अपने साथियों को बुला करदौड़ रास्ता और समाप्त स्थल तय किया,  एक निश्चित दिन पर दौड़ की घोषणा हुई।

दौड़ एक दिन की घोषणा होने पर खरगोश एकदम निश्चित था उसे पूरा विश्वास था कि कछुआ उसे दौड़ जीत ही नहीं पाएगा उधर कछुए ने अपनी तैयारी तेज कर दी । वह दौड़ जितने को लेकर योजना बनानेमें जुट गया।

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