एक बार एक जंगल में आग लग गई। सभी जानवर आग बुझाने में जुट गए। जिसके हाथ में जो भी पात्र आया वह उसमें पानी भरकर आग में डालने लगे। सभी को आग बझाने में जुटा देख, एक नन्ही गौरैया भी अपनी सोच में पानी भर भर कर आग में डालने लगी।
एक कौवा दूर सुरक्षित डाल पर बैठा तमाशादेख रहा था वह गौरैया के पास आकर बोला_ नन्ही गौरैया! क्यों बेकार मेहनत कर रही हो? तुम्हारी नन्हीं चोंच का बूंद पर पानी भयंकर आग को बुझाने में क्या सहायता कर पाएगा? "
गौरैया बोली - यह तो मैं भी जानती हूं परंतु यदि कभी इस आज के बारे में बातें होगी तो मेरा नाम आग लगाने वालों अथवा तमाशा देखने में नहीं बल्कि आग बुझाने वालों में लिया जाएगा।
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जंगल की आग
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