डॉ० राजेंदर प्रसाद का पूरा जीवन परिचय।

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डॉ० राजेंदर प्रसाद का पूरा जीवन परिचय।

"डॉ० राजेंदर प्रसाद का पूरा जीवन परिचय।"

        भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद स्वाधीनता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में से एक थे। उनका जन्मदिन सन 1884 ई० में बिहार के सारण जिले के जीरादेई (वर्तमान एवंन जनपद) में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री महादेव सहाय व माता का नाम श्रीमती कमलेश्वरी देवी था। पिता संस्कृत-फ़ारसी के विद्वान थे।

         वे पांच भाई-बहेनो में सबसे छोटे थे। 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह राजवंशी देवी से हुआ। राजेन्द्र बाबू बचपन से ही कुशाग्र वृद्धि के थे। प्ररंभिक शिक्षा फ़ारसी में मौलवी साहब से लेने के बाद आगे की शिक्षा के लिए पटना के टी० के० घोष अकादमी में प्रवेश लिया।  

         इसके बाद उन्होंने 1902 ई० में 18 वर्ष की अवस्था में कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया और सन 1911 ई० में एल० एल० एम० में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

          सन 1911 ई० से 1920 ई० तक राजेंद्र बाबू ने कोलकाता और पटना में वकालत की। जब महात्मा गाँधी ने 1917 ई० में चम्पारण सत्याग्रह शुरू किया, जिससे प्रभुवित होकर वह राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े। राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के कारण पहली बार 1933 ई० में उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल प्रवास के दौरान ही उन्होंने आत्मकथा लेखन की शुरुआत की।

      डॉ० राजेंद्र प्रसाद हिंदी, उर्दू, बांग्ला, अंग्रेजी भाषा में पारंगत थे। वह 1934 ई० में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। उन्हें भारत सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।

      डॉ राजेंद्र प्रसाद का सन 1963 ईस्वी में पटना के सदाकत आश्रम में निधन हो गया।

      

 

 

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